तीन मर्द दो औरतों की चुत चुदाई की कहानी-1
ग्रुप सेक्स और बीवी की अदला बदली की इस चुत चुदाई कहानी में अभी तक आपने पढ़ा कि मैं, मेरे पति, उनके ऑफिस से एक सहकर्मी और उसकी बीवी… हम चारों जब वासना की नदी में गोते लगा रहे थे… तभी दरवाजा खुला और…वहाँ से तुषार बिल्कुल नंगा हमारे कमरे में दाखिल हुआ।‘ये क्या हो रहा है?’ वो ज़ोर से चिल्लाया।
हम सब तो हैरान ही रह गए कि ये कहाँ से आ गया। उसका मोटा खड़ा लंड हवा में झूल रहा था। कपड़े भी हम सबने दूर दूर फेंके थे, इसलिए एकदम से हम खुद को ढाँप भी नहीं सकते थे.इतने में ही वो बिल्कुल मेरे पास आ गया- अगर मुझे भी इस खेल में शामिल नहीं किया, तो मैं सबका भंडा फोड़ दूँगा।
मेरे पति बोले- तुषार, ये सब क्या है?मगर तुषार फिर गरजा- मुझे भी इन दोनों की लेनी है, अगर मुझे नहीं मिली तो सबको जलील कर दूँगा।
अब हम सब ऐसे हालात में फंस चुके थे कि और कोई चारा ही नहीं था, मैंने अपने पति को इशारा कर दिया, वो बोले- अरे यार, तू मेरा छोटा भाई है, गुस्सा क्यों होता है, तेरी भाभी है न, वो तुझे खुश कर देगी, मगर पहले तू हमें तो हमारा काम निपटा लेने दे!मगर तुषार बोला- नहीं, मैं भी आपके साथ ही एंजॉय करूंगा।
क्या करते, तुषार मेरे पास खड़ा था, मैंने खुद ही थोड़ा सा ऊपर उठ कर उसका लंड पकड़ा और हिलाने लगी।तुषार नीचे को झुका और उसने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया, मैं चूसने लगी।इससे प्रेमजी को कोई खास दिक्कत नहीं हुई, वो अपना लगे हुए थे।
मेरे चूसने से तुषार का लंड एकदम कड़क हो गया। लंड खड़ा होने के बाद वो स्नेहा की तरफ चला गया, मैं जानती थी कि मेरा देवर अपनी भाभी यानि मुझे तो पहले ही चोद चुका था, (मेरी पहली कहानी बलम छोटा लंड मोटा पढ़ें) अब वो भी नई चूत को चोदना चाहता होगा।
जब उसने जा कर स्नेहा को अपना लंड चूसने को दिया, तो स्नेहा बहुत आश्चर्यचकित हो कर बोली- हे भगवान, इतना मोटा, मैं तो मर जाऊँगी, मैं नहीं ले सकती इसे!मगर मेरे पति के कहने पर स्नेहा ने तुषार का लंड चूसना शुरू कर दिया।
मैंने देखा, स्नेहा की तो जैसे आँखें ही बाहर निकल आई हो, दर्द के भाव उसके चेहरे पर साफ पढ़े जा सकते थे। इतना दर्द तो मुझे तब नहीं हुआ था, जब मैं पहली बार चुदी थी।मतलब साफ था, प्रेमजी स्नेहा को भरपूर संभोग सुख नहीं दे रहे थे, उनका लंड लंबा ज़रूर था, मगर मोटा नहीं था।
तुषार ने बड़ी बेदर्दी से स्नेहा की चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया, इधर मेरे मन में हलचल पैदा हो गई कि साले ने पहले मेरी चूत क्यों नहीं मारी, मुझे ये दर्द क्यों नहीं दिया।स्नेहा की चुदाई देख कर मेरा अपनी चुदाई से मन उचाट हो गया। मैंने प्रेमजी का लंड अपनी चूत से निकाला और जाकर तुषार के पास बैठ गई।
तुषार ने मुझे मेरे बालों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये, मैंने भी उसका साथ दिया और उसके बदन पर अपनी तीखे नाखून चलाने लगी।मेरे पति ने अपने आप को मेरे नीचे एडजस्ट किया और मेरी चूत चाटने लगे, प्रेमजी भी मेरे पास आ गए और मेरे बूब्स से खेलने लगे, कभी दबाते तो कभी मुँह में लेकर पीते।
अब मेरे तो चूत मुँह और चूची तीनों चीजों पर मर्दों की ज़ुबान चल रही थी, तो मैं तो बस 5 मिनट भी बड़ी मुश्किल से काट पाई और झड़ गई।
झड़ने के बाद मैं साइड पर बैठ गई और उन चारों को देखने लगी.तुषार ने अपनी चढ़ती जवानी का रंग दिखाया और स्नेहा की खूब जोरदार चुदाई की, इतनी जोरदार कि बेचारी रो ही पड़ी। उसके लिए तो ऐसे था जैसे आज पहली बार उसकी कौमार्य भंग हुआ हो।जब स्नेहा शांत हो गई तो तीनों मर्द फिर से मेरी और देखने लगे क्योंकि मैं पिछले 10 मिनट से आराम से बैठी थी।तीनों उठ कर मेरी तरफ आ गए, मुझे तो इसी बात का बहुत संतोष था कि एक साथ तीन तीन मर्द मेरे को चोदेंगे।
मेरे पति ने नीचे लेट कर मुझे ऊपर लेटने को कहा, मैंने उनका लंड पकड़ा अपनी चूत पे रखा और अंदर ले लिया, जब मैं उनका पूरा लंड अपनी चूत में लेकर उनके ऊपर लेट गई, तो प्रेमजी ने मेरे पीछे आ कर अपना लंड मेरी गांड पर रखा।अब मैं तो अपने पति से भी गांड मरवाती थी तो प्रेमजी का लंड मुझे क्या कहता… उन्होंने डाला और मैंने आराम से ले लिया।तुषार मेरे सामने खड़ा था, उसका शकरकंदी जैसा लंड मेरे सामने हवा में ऊपर को मुँह उठाए खड़ा था, मैंने उसका लंड खींच कर अपनी तरफ किया और उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।
एक लंड मेरे मुँह मे, एक गांड में और एक चूत में…मैं सच में किसी रंडी जैसी फीलिंग ले रही थी। ऊपर नीचे, आगे पीछे, मेरे लंड अंदर बाहर आ जा रहे थे। मैंने आँखें बंद कर रखी थी और अपनी इस मज़ेदार शाम का आनन्द ले रही थी।
तभी तुषार ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल लिया और प्रेमजी ने भी अपना लंड मेरी गांड से निकाल लिया।
वो चौदह दिन- 3
प्रेमजी ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया, जिसे मैं चूसने लगी, मगर जब तुषार मेरे पीछे जा कर बैठ गया, तो मैं घबरा गई, और मैंने तुषार से कहा- अरे तुषार, तुम नीचे आ जाओ, अपने भैया की जगह और तुम्हारे भैया पीछे आ जाएंगे।
मगर तुषार बोला- नही भाभी मुझे तो तुम्हारी गांड मारनी है।
अब स्नेहा वाली हालात मेरी हो गई थी, मैं अपनी गांड बचाना चाहती थी, मगर तुषार ने अपने लंडन को क्रीम से चुपड़ लिया और मेरी गांड पर भी क्रीम लगाने लगा।मैंने उठना चाहा, मगर मेरे पति और प्रेमजी दोनों ने मुझे दबोच लिया.
बस फिर क्या था, मैं हिल भी नहीं पाई, और तुषार के लंड का टॉप मेरी गांड में घुस गया। आज तक मुझे अपनी गांड में इतना दर्द नहीं हुआ था। कमीने ने बड़ी बेदर्दी से अपना आधे के करीब लंड मेरी छोटी सी गांड में उतार दिया। मेरे भी आँसू निकल आए और गांड से खून भी टपक पड़ा, मगर तुषार ने अंदर घुसा कर ही छोड़ा, नीचे से मेरे पति मुझे पकड़े थे, ऊपर से प्रेम जी ने मेरे मुँह में अपना लंड ठूंस रखा था।
जो औरत कुछ ही मिनट पहले अपने तीन मर्द साथियों के साथ मजा ले रही थी, वही औरत अब खुद को किन्ही वहशी दरिंदों में फंसी महसूस कर रही थी।अगले आठ मिनट मुझे पता है मैंने कैसे बिताए, हर तरफ से मर्दों के लंड मेरे बदन में अंदर बाहर आ जा रहे थे। ना मैंने ठीक से सांस ले पा रही थी, ना ठीक से बैठी थी, न खड़ी थी, बस जैसे हवा में लटकी थी।तीनों मर्द अपनी अपनी ताकत के प्रदर्शन में लगे थे, जैसे उनका एक दूसरे से मुकाबला हो कि देखें पहले कौन झड़ता है।मगर इस सब में माँ मेरी चुद रही थी।
सबसे पहले प्रेमजी ने मेरी गांड में अपने माल की पिचकारी मारी। मुझे महसूस हुआ कि उनका माल भी कम ही निकला।उसके 2 मिनट बाद मेरे पति ने मेरी चूत को अपने माल से भर दिया, मगर माल गिरने के बाद भी उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर नहीं निकाला, बल्कि मैं भी टिक कर बैठ गई कि उनका खड़ा लंड मेरे अंदर ही खड़ा रहे।तुषार मेरे सर के बाल पकड़ कर मेरा मुँह चोद रहा था।
स्नेहा दूर बैठी मुझे देख रही थी, शायद उसे मेरी हालत पर तरस आ रहा था, या वो मेरी ऐसी दुर्गति देख कर मन ही मन खुश थी, कह नहीं सकती।कोई 2-3 मिनट मेरे मुँह और गले के ताबड़तोड़ चुदाई के बाद तुषार ने अपना माल गिराया। मेरा मुँह भर दिया, इतना कि मेरे मुँह से उसका वीर्य चू कर मेरे सीने और पेट से होता हुआ मेरे पति के पेट पे जा गिरा।
मेरे पति ने भी कहा- अबे साले, सारी उम्र का माल क्या आज ही निकाल दिया?वो बोला- भैया, क्या करूँ, भाभी है ही इतनी ज़बरदस्त के अंदर से माल की आखरी बूंद तक चूस कर बाहर ले आती है।
और तीनों मर्द ‘हे… हे… हे…’ करके हंसने लगे।मैं नीचे को लुढ़क गई… तीनों ने इतना थका दिया मुझे कि मुझे अपना मुँह, अपना बदन साफ करने का भी दिल नहीं किया।
सुबह 3 बजे मेरी आँख खुली, मैं उठ कर बाथरूम गई, मुँह का स्वाद बहुत गंदा हो रहा था, पहले ब्रुश किया, फिर नहाई, फ्रेश हो कर नंगी ही बाहर आ गई, अब किस से शर्म करनी थी।
पहले फ्रिज में से कुछ निकाल कर खाया, एक गिलास बीयर और डाली, और जब रूम में वापिस आई तो देखा, रूम मेरे पति और प्रेमजी तो नंग धड़ंग सो रहे थे, और दोनों के लंड तने पड़े थे, मगर स्नेहा और तुषार नहीं दिखे।
मैंने उन्हें ढूंढा तो देखा दोनों तुषार के बेडरूम में गले में बाहें डाले सो रहे थे।मतलब तुषार ने एक और बार स्नेहा की चूत बजाई होगी।
मैं वापिस आ गई। बीयर पी कर, खाना खा कर मैं फिर वहीं पे उन दोनों के साथ सो गई।
पहले मैं सोचती थी कि अपने मर्द के साथ सेक्स करने का मजा है, मगर अब मेरी सोच और विशाल हो गई है, सेक्स करने का अपना ही मजा है, मर्द चाहें जितने मर्ज़ी हो। जितने ज़्यादा होंगे, मजा भी उतना भी ज़्यादा होगा।ग्रुप सेक्स और बीवी की अदला बदली की चुत चुदाई कहानी आपको कैसी लगी?support@mohakkisse.com