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Group Sex Story पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,315 बार

गर्लफ्रेंड की सहेलियों संग रासलीला- 7

विवान श्रीवास्तव

02 Dec 2025 को प्रकाशित

गर्लफ्रेंड की सहेलियों संग रासलीला- 7
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थ्रीसम चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे अपनी गर्लफ्रेंड की दो सहेलियों को एक साथ चोद कर मजा प्रिया. मुझे भी इस ग्रुप सेक्स में खूब मजा आया.

दोस्तो, थ्रीसम चुदाई की कहानी के पिछले भागगर्लफ्रेंड की सहेलियों संग रासलीला- 6मैं विवान अपनी गर्लफ्रेंड आयशा की दोनों सहेलियों के साथ चुदाई करते हुए आप सभी को थ्री-सम चुदाई का मजा दे रहा था. मेरा लंड अपनी साली दीक्षा की चुत का भोसड़ा बनाने में लगा हुआ था. धकापेल चुदाई चल रही थी.

अब आगे थ्रीसम चुदाई की कहानी:

कुछ देर की चुदाई के बाद दीक्षा की एक कसक भरी आवाज निकली- आह … जीजू मेरी चुत टपकने वाली है. आह तेज तेज चोदते रहो.अपनी रफ़्तार को मैं और बढ़ाते हुए टूटी सी आवाज में, पसीने में तर होकर बोला- आह जान … मेरा भी बस आने वाला है.

मैं धकापेल चोदता गया और बड़बड़ाता गया- आह दीक्षा तू मस्त है यार … कितनी बार चूत देगी अपने इस लंड महाराज को … मुआह तेरी जैसे साली हर किसी को मिले.

उधर दूसरे दीवान पर अनामिका होश में आ गई थी और वो लेटे लेटे ही हम दोनों को देख रही थी. उसकी आंखों में अभी भी नशा था.अनामिका कुछ खिसक कर नजदीक आई और दीक्षा के एक चूचे को अपने मुँह में भरके चूसने लगी.

मैं अब भी अपने लंड की पिचकारी छोड़ने की तैयारी कर रहा था.

कुछ करीब 20-30 झटके खाने के बाद दीक्षा ने फिर से अपनी चुत से पानी छोड़ प्रिया. मेरा लंड भी झड़ने के करीब था … मैं उसे चोदता रहा.

अब उसकी चूत और तेज आवाज करने लगी थी. चुत से पानी निकलने के कारण ‘फच्च फच्च.’ की आवाज कुछ तेज हो गई थी.

बीस झटकों के बाद जब मेरा रस आने वाला हुआ तो मैंने लंड बाहर निकाल लिया. मेरा लंड दीक्षा की चुत के जूस से चमक रहा था.

मैं यूं ही अपने हाथ से लंड को आगे पीछे करने लगा. कुछ ही देर बाद मेरे लंड ने पिचकारी मारते हुए पानी छोड़ प्रिया.

वीर्य की कुछ बूंदें दीक्षा के चूचों पर गिरते हुए उसकी नाभि तक गिरती चली गईं. बाकी रस मैंने दीक्षा की नाभि में ही भर प्रिया. मैंने अपने लंड एक दो बार और आगे पीछे करके सारा माल दीक्षा की नाभि में भर प्रिया और खाली पड़े दीवान में जाकर आंख बन्द करके लेट गया.

दीक्षा भी मदहोशी में लेटी थी. कमरे में कुछ देर के लिए शान्ति छा गई थी. बस मेरी और दीक्षा की सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी.

इतने में अनामिका दीक्षा को छोड़ कर मेरे पास आ गई. कमरे में कूलर और पंखे के चलने के बावजूद भी पसीने से भीगे मेरे चेहरे को और सीने को अनामिका चूमने लगी.उसने मेरे चेहरे पर चुम्मियों की बरसात कर दी थी. मैं तो जैसे होश में ही नहीं था.

वो लगातार मुझे चूमे जा रही थी और बोले जा रही थी- वाह जीजू, आपने तो मुझे आज स्वर्ग दिखा प्रिया है. ये दिन मैं चाह कर भी नहीं भूल पाऊंगी.

जब वो मेरे सीने पर मेरी घुंडियों को भी चूमने लगी, तब मेरी आंख खुली.

मैंने उससे कहा- बस अनामिका अभी नहीं … बाद में करना.

उसने घुंडियों को चूसना छोड़ प्रिया और फिर से कुछ चुम्बन मेरे गालों पर दे दिए. वो मेरे बगल में लेट गई.

उसी समय मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, तो रात के साढ़े ग्यारह बजने वाले थे. मेरी आंखें मुंदती चली गईं.

करीब आधे घंटे यूं ही लेटने के बाद मेरी आंख खुलीं तो अनामिका एक लॉन्ग टॉप पहने हुए थी. वो नीचे टांगों से नंगी थी और गैस पर ताहरी चढ़ाने की तैयारी कर रही थी.

दीक्षा शायद बाथरूम में थी. मैंने भी शॉवर लेने का सोचा और उठ गया.

जब मैंने उठ कर बिस्तर की तरफ देखा, तो मंद मंद मुस्कुराने लगा. हमने क्या कोहराम मचाया था … पूरे बिस्तर में दाग ही दाग थे. कहीं गीला था, तो कहीं चॉक्लेट लगी हुई थी. चादर की तो जैसे हमने बैंड बजा दी थी. वो ऐसा लग रहा था जैसे सूखे पापड़ पर किसी ने बुलडोज़र चढ़ा प्रिया हो.

मैं यूं ही कुर्सी में बैठ कर थोड़ी देर सोच में डूब गया.

इतने में कुकर की एक सीटी बजी, तो मैं अपने ख्यालों से बाहर आ गया. दीक्षा भी उसी टाइम बाथरूम से शॉवर लेकर चमक कर नंगी ही कमरे में आ गई थी.

उसे देखता हुआ मैं बाथरूम में घुस गया और नहाने लगा.

अब सब भूल ही गए थे कि बाथरूम में दरवाजा भी है.

मैं मजे से नंगा नहा ही रहा था कि इस बार अनामिका मेरे पास आने लगी.उसने रास्ते में ही अपने कपड़े उतार कर फेंक दिए और अन्दर चली आई.

मैंने बाहें फैला दीं … और वो मेरे कंधे के ऊपर से अपने हाथ डालकर मेरे ऊपर चढ़ सी गई. जिसका मैंने सोचा भी नहीं था. मैं उसके यूं अचानक लड़ने से गिरते से बचा.

फिर हम दोनों शॉवर के नीचे ही स्मूच करने लगे. मजे से दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.

मेरे हाथ उसकी मस्त उठी गांड के पीछे घूम रहे थे. कभी कभी मैं उसकी गांड को मसल भी देता था.

फिर मैंने उसको गांड से उठाते हुए दीवार से टिका प्रिया. उसने अपनी टांगें मेरी कमर और गांड के पीछे से लॉक कर दी थीं. हम एक दूसरे को यूं ही चूमने चूसते लगे.उसके हाथ मेरे कंधों से होते हुए मेरे बालों को सहलाने लगे थे.

थोड़ी ही देर में मेरा लंड खड़ा हो गया था, जिसका अहसास अनामिका को भी हो गया था. वो मेरे लंड के लिए बेताब सी होकर थोड़ा नीचे होने लगी. लेकिन जैसे ही वो नीचे आई तो हम दोनों का बैलेंस बिगड़ गया और वो झटके से नीचे उतर गई.

अब वो नीचे झुक कर मेरा लंड अपने मुँह में भरकर मस्त ब्लोजॉब देने लगी.

इससे पहले इससे अच्छा ब्लो जॉब मुझको किसी ने नहीं प्रिया था. मैं मजे से आंख बंद करके उसके मुँह की गर्मी का मजा लेने लगा.

थोड़ी देर बाद मैं उसका सर पकड़ कर अपना लंड चुसवाने लगा.

लंड के सुपारे को अनामिका कुछ ज्यादा उत्तेजना से चूस रही थी. वो कभी सुपारे पर जीभ फेर देती थी तो कभी उसको गोली जैसा पकड़ कर सुट्टा मारने लगती थी.

वो फिर ऊपर आकर मेरे होंठों को चूसने लगी.

मैं भी उसके चूचों को पकड़ कर मसलने लगा. मैं कभी उसके उठे हुए मोटे और कड़क निप्पलों को अंगूठे और उंगली के बीच दबाकर मसल कर मजा लेने लगा.

वो सांस लेने के लिए मुँह खोलती थी … मगर मैं उसके होंठों फिर से मुँह में भर के, कभी ऊपर के … कभी नीचे के होंठ चूसने लगता.

कुछ देर बाद मैं उसके चूचों को भी चूसने लगा. निप्पलों को खींच खींच कर चूसने लगा. वो अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरा लंड आगे पीछे करने लगी … और मुझको अपने करीब खींच कर, दीवार से चिपकते हुए मेरा लंड अपनी चूत के ऊपर से रगड़ने लगी.

मेरे पूरे लंड की लम्बाई उसकी चूत में आगे पीछे हो रही थी. वो आंखें बंद करके मेरे कंधों पर दांतों से काटने में … तो कभी किस करने में लगी थी.

मैं भी गर्म हो चुका था. मैंने अपने एक हाथ से उसकी दायीं टांग उठा कर लंड सैट किया. मैंने अपना गर्म लंड उसकी चिकनी चूत में लगा प्रिया.

उसकी चुत पहले से पनिया रही थी … और ऊपर से पानी के बूंदें भी थीं. मैं इस चिकानी का सहार लेते हुए अपना लंड उसकी चूत में पेल प्रिया.लंड सरकता हुआ चुत के अन्दर चला गया … और अनामिका की मीठी आह निकल गई.

मैंने धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा. ‘फच फच गच्छ फच्च फच्च ..’ की आवाजें आने लगीं.

इतने में कुकर की दूसरी सीटी बज उठी. मतलब ताहरी तैयार हो गई थी.

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अनामिका दीवान पर नंगी लेटी थी, उसने आंख खोल कर देखा. फिर दीक्षा की नजर हम दोनों पर आ गई उसका मुँह हल्का खुला हुआ था. मेरे हर झटके के बाद अनामिका कराह ले रही थी.

दीक्षा हमारी चुदाई देख कर बोली- वाह … जीजा साली चुदाई में लगे हैं … जल्दी करो … सीटी खुलने … और मेरे दही खीरे के रायता बनने से पहले तुम दोनों चुदक्कड़ बाहर आ जाना, वरना साली की गांड में बेलन पेल दूंगी.

अनामिका गाली देते हुए बोल रही थी- कमीनी जीजा चोद … तेरी बार मैंने कुछ बोला था!

उन दोनों की नोक-झोंक में यहां मैंने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी.

अनामिका चिल्ला चिला कर दीक्षा को खिजा रही थी- हां जीजू चोद अपनी साली को … आह ऐसे ही रगड़ से आह ऐसे ही चोद कर फाड़ दे मेरी चूत … आह ये साली बहुत तड़फाती है. लंड देख कर साली पानी पानी हो जाती है. आह जीजू चोदो … और तेज चोदो.

मेरा लंड लगातार अन्दर बाहर करते हुए फच फच फच.. की आवाज निकाल रहा था.

मैं उसकी टांग उठाए हुए अब थक सा गया था, तो मैंने उससे कहा- तुम बाल्टी पकड़ कर डॉगी पोज़ में आ जाओ.

वो तुरंत बाल्टी उल्टा करके उसको पकड़ कर कुतिया बन गई. मैंने अब आराम से खड़े होकर उसकी कमर पकड़ ली और अपना लंड के झटके पर झटके मारते हुए उसकी चुत को मजे से चोदने लगा. मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जाने लगा था.

अनामिका आवाजें निकाल निकाल कर चुद रही थी- आह आह जीजू उम्हा … मुआह आह … जीजू बड़ा मजा आ रहा है … और तेज पेलो … और तेज पेलो … आह मेरा पानी निकाल दो.

मैं धक्के पर धक्के … झटके पर झटके … मारता गया. अपना लंड उसकी चूत में बड़ी तेजी से अन्दर बाहर करने लगा.

थोड़ी देर बाद मैंने अनामिका के आगे झूल रहे आमों को पकड़ लिया और उससे चिपकते हुए थोड़ा दमदार और तेज झटके मारने लगा. मैं रुक रुक कर ‘फच … फच ..’ की आवाजों वाले झटके मार रहा था.

इतने में मेरी नजर बाहर दीक्षा पर पड़ गई. वो कुछ खीरे लिए हुए छीलने बैठी थी. उसमें एक खीरा हल्का मोटा सा और लम्बा सा था. उसे वो अपनी चुत की क्लिट पर रगड़ रही थी. थोड़ी देर बाद उसने गप्प से उस खीरे को अपनी चूत में घुसेड़ लिया और हमारी तरफ देखने लगी. अब उसकी आंखें हम दोनों की चुदाई को ही देख रही थीं.

इतने में जोश में मैंने अनामिका के दोनों निप्पलों को मसलते हुए कहा- उधर देख दीक्षा को … साली कैसे खीरा अपनी चूत में पेल रही है.

अनामिका और मैं दोनों दीक्षा को देखते हुए लगातार चुदाई कर रहे थे.

दीक्षा बोली- अरे जीजू, मैंने सोचा आपकी सुरभि वाली कमी पूरी कर दूं. याद है उसने उस दिन अपनी चुत में बैंगन डाला था. आज मैंने खीरा घुसेड़ लिया. मगर जीजू ये ज्यादा टाइट है.

वो हम दोनों को देखते हुए अपनी चूत में तेजी से खीरे को अन्दर बाहर करने लगी.

दोस्तो, यहां मैं आपको बता दूं कि इसके पहले वाली सेक्स कहानी में सुरभि भी दीक्षा की तरह अपनी चूत में बैंगन पेल रही थी. उसे आप पढ़ सकते हैं..

यहां दीक्षा भी बाथरूम में खीरा लिए हुए अन्दर आ गई … और मुझको हटाकर खुद अनामिका के पीछे आ गई.

दीक्षा ने अनामिका की चूत में खीरा घुसेड़ते हुए अपनी चूत का छेद मेरे लंड के सामने कर प्रिया. लंड को क्या चाहिए बस छेद … मैंने गीला सा लंड उसकी चूत पर पेल प्रिया और झटके देने लगा.

वहीं अनामिका की चूत में दीक्षा हरे खीरे से चोद रही थी. कुछ ही देर में अनामिका ने कराहते हुए अपना पानी छोड़ प्रिया. लेकिन फिर भी दीक्षा उसकी चूत में दे दना दन बिना रुके चूत में खीरा पेलती रही. जिससे अनामिका का सारा पानी फच फच करता हुआ बाहर गिरने लगा.

अनामिका बोली- साली कुतिया कमीनी … निकाल खीरा … अब हो गया मेरा.

अनामिका ने खुद आगे हटते हुए अपनी गांड आगे को बढ़ा दी. फिर अनामिका ने उधर से हटते हुए खीरा अपने हाथ में ले लिया.

वो हमारे आगे आकर शॉवर में थोड़ी देर खड़ी हुई. फिर पता नहीं उसे क्या सूझा कि वो खीरा को दीक्षा की खुली गांड में घुसेड़ने लगी.

अपने दोनों छेदों में हथियार पाकर दीक्षा तो जैसे पगला गई. वो अपनी आंख बंद करके अपनी गांड और पीछे करने लगी. लेकिन जब खीरे का मोटा हिस्सा उसकी गांड में जाने से दर्द देने लगा … तो दीक्षा चिल्ला उठी- आह मर गई निकाल कुतिया जल्दी से इसको निकाल रंडी.

अनामिका ने डर के मारे खीरा बाहर निकाल प्रिया. इससे दीक्षा ने चैन की सांस ली. उधर नीचे मेरे लंड के झटके उसको अब अच्छे से असर कर रहे थे.

थोड़ी देर में अनामिका मेरे कान में बोली- जीजू, आप अपना लंड दीक्षा की गांड में डालो न. मैं चूत में खीरा देती हूँ.

मुझे उसकी बात जंच गई और हम दोनों ऐसा ही करने लगे. अनामिका ने दीक्षा के नीचे बैठकर उसकी चूत में खीरा घुसेड़ प्रिया. साथ ही वो दीक्षा की उसकी क्लिट पर जीभ फेरने लगी.

मैंने दीक्षा की गांड में जैसे ही लंड डाला … वो मजे से कराह उठी- आह जीजू … बहुत अच्छा लग रहा है. आह करते रहो.

उसी समय अनामिका ने दीक्षा की चूत में खीरा पेल प्रिया. दीक्षा मजे में आह जीजू … डबल मजा … मुआअह … लगे रहो.

अनामिका उसकी क्लिट पर लगातार जीभ फेरने में लगी थी. मैं लगातार उसकी गांड में अपने लंड से झटके दिए जा रहा था.

करीब 30-40 झटकों … और नीचे से खीरे के करीब 20-25 झटके लगे तो मेरा लंड अकड़ने लगा.मैं अब आगे झुककर उसके चुचे पकड़े हुए उसके निप्पलों को मसल रहा था.

इसी पोजीशन में मैंने दो चार झटके और मारे कि मेरा पानी निकल गया. जिसे बिना लंड निकाले हुए मैंने दीक्षा की चूत में ही झाड़ प्रिया.

कुछ सेकण्ड्स बाद मैंने लंड बाहर निकाला और मदहोशी में आंखें बंद करके दीवार के सहारे से शॉवर के नीचे बैठ गया.

वहां अनामिका अभी भी दीक्षा की चुत में लगातार खीरा अन्दर कर रही थी. इससे दीक्षा ने भी कुछ ही देर में पानी छोड़ प्रिया.

मैं और अनामिका साथ में दीवार के सहारे फर्श पर शॉवर के नीचे बैठ गए थे. दीक्षा भी हम दोनों के सामने आकर बैठ गई.

फिर दीक्षा यूं ही बैठी बैठी मेरे गले से लग गई और बोली- जीजू … यार आप सच में बहुत चोदू हो … स्वर्ग का सारा मजा इसी धरती पर दे रहे हो. जीवन का सारा सुख मैं आपके साथ ही भोग रही हूँ.

इतने में अनामिका भी साइड से मेरे और दीक्षा के गले लग गई- जीजू, सच में आज आपने मुझे भी पूरी तरह संतुष्ट कर प्रिया. ये बात सच है कि चूत लंड मांगती है … आदमी नहीं. मर्द का चेहरा कोई सा भी हो, लंड किसी का भी हो, माजरा सारा चुदाई और प्यास बुझाने का है. तड़प मिटाने का है.

वो दोनों मुझको यूं ही पप्पियां देने लगीं.

इतनी देर में कुकर की सीटी खुल गई और ढक्कन उसी में गिरने की हल्की सी आवाज आई. हम सब फटाफट बाहर आने लगे. आगे दीक्षा, उसके पीछे अनामिका और लास्ट में मैं.

अनामिका ने दीक्षा की गांड में चपत लगा दी. चपत की आवाज सुनते और देखते ही मैं भी अनामिका की मस्त शेप वाली गांड में दोनों हाथों से चपत लगाने लगा.

हम सब बाहर आकर मजा करने में लग गए थे.

दोस्तो, अभी मैं इस थ्रीसम चुदाई की कहानी को यहीं विराम दे रहा हूँ … आगे पूरी रात मैंने दीक्षा और अनामिका की घमासान चुदाई कैसे की … कैसे उन दोनों की गांड मारी … कैसे वोडका और पेस्ट्री के मजे लिए … और कौन ने हमारी चुदाई के बीच में रात को 2.30 बजे दरवाजा खटखटा प्रिया था.

आपको मेरी ये थ्रीसम चुदाई की कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं … कुछ सुधारना हो … या तारीफें या शिकायतों के लिए आप मुझे निम्न जगह पर संपर्क कर सकते हैंsupport@mohakkisse.comआपका चोदू विवान आपके जवाबों का इंतजार करेगा.

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

समीर 751

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

आयुष वर्मा

4 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

विशाल मल्होत्रा

4 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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