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वीर्यदान महादान-6

विक्की कुमार 0099

31 Mar 2022 को प्रकाशित

वीर्यदान महादान-6
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विक्की कुमारजब मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो गया तो सोचा कि उसकी चूत मारूँगा पर इस बार गीता उल्टी लेट गई व एक तेल की शीशी को मुझे पकड़ाते हुए कहा- इसे मेरी गाण्ड के छेद में लगाओ।मैंने तब से पहले कभी गाण्ड नहीं मारी थी… अजी गाण्ड तो छोड़ो मैं तो अंजली की चूत भी ढंग से नहीं मार पाया था।मैंने सोचा कि जब यह गाण्ड मरवा रही है, तो फिर मुझे भी मजे ले ही लेना चाहिये, मैंने उससे कहा- जानू, आज से पहले मैंने कभी गाण्ड नहीं मारी है।तो उसने कहा- ट्राई करो, मजा आयेगा।अब मैंने उसकी गाण्ड में तेल की शीशी में से थोड़ा तेल डाला व उंगली से रास्ता बनाने लगा। जब जब मेरी उंगली अंदर जाती तो गीता उछल पड़ती, व चिल्लाने लगती।जब मुझे उंगली अंदर बाहर करते बहुत देर हो गई तो फिर वह मुझसे बोली- क्या उंगली से ही गाण्ड मारेगा, लण्ड का क्या अचार डालेगा?मैं समझ गया कि अब इसकी भाषा बदल रही है, मतलब इसकी जवानी अब बेकाबू हो रही है।इसके पहले मैंने भी कभी गाली नहीं दी थी, पर मजे बढ़ाने के लिये मैंने उससे कहा- आता हूँ गंडमरी, अब मेरे लण्ड से तेरी गाण्ड ही फाड़ दूँगा… साली चूत होने के बाद भी अभी तक चूत नहीं मारने दे रही है।तो गीता ने भी उत्साहित होकर कहा- आजा मेरे गाण्डू राजा, बजा दे मेरा बाजा !मैंने गीता को समीप में रखी मेज पर उलटा मुँह कर खड़ा कर प्रिया, डागी स्टाईल में, उसके चूतड़ मेरी तरफ हो गई, व आहिस्ते से अपने लण्ड का टोपा उसकी गाण्ड के मुहाने पर रख कर जगह बनाने की कोशिश करने लगा।हालांकि उसकी गाण्ड बहुत संकरी थी, तो मैंने एक झटका में अपना लण्ड घुसेड़ प्रिया।अब गीता मारे दर्द के चीख पड़ी, बोली- लौड़ूदीन, थोड़ा रुकता तो सही, बाप का माल समझ रखा है क्या जो सीधे पेल प्रिया…मैंने कहा- तेरी ही गाण्ड में खुजाल मच रही थी, मैंने सोचा कि चल, मिटा दूँ।तो उसने कहा- थोड़ा तेल ओर डाल दो, व फिर रुककर शुरु करो।अब मैंने तेल डालकर उसकी गाण्ड चिकनी करी व फिर उसकी गाण्ड में अपना लण्ड पेलना शुरु कर प्रिया।गीता मीठे दर्द के कारण ओर चिल्लाने लगी- हाँ हाँ राजा मजा आ रहा है। बढ़ाओ स्पीड बढ़ाओ।अब मैं अपने दोनों हाथ से उसके स्तनों को मसलने लगा व उसकी गाण्ड को चूत समझकर चोदने लगा।सच में बहुत मजा आ रहा था, वह भी पक्की गाण्डू थी, थोड़ी देर बाद मजे लेकर मेरे लण्ड ने फिर से पानी छोड़ प्रिया।गीता ने तीन बार मेरा लण्ड खाली करवा प्रिया लेकिन अभी तक अपनी फ़ुद्दी नहीं चुदने दी। साली पक्की खिलाड़िन दिख रही थी।अब दोपहर हो चली थी, भूख लगने लगी थी, उधर देखा दीपक सोफे पर पसरा बैठा हमारा तमाशा देख रहा था।हम दोनों ने उससे पूछा- खाना खा लें?तो उसने कहा- हाँ, भूख लग रही है।सबसे पहले हमने कपड़े पहने व कमरे को व्यवस्थित किया, वेटर को अंदर बुला कर खाने का आर्डर प्रिया। कुछ देर बाद खाना खाने के बाद वेटर खाली प्लेटें उठाकर चला गया।अब मैंने दीपक से पूछा- सच बताना कैसा महसूस कर रहे हो क्योंकि मैं तुम्हारे सामने तुम्हारी बीवी को नंगी कर उसकी चूत चोद कर मजे ले रहा हूँ।उसने जवाब प्रिया- तुम निश्चिंत रहो, अगर मुझे बुरा लग रहा होता तो हम यहाँ तक नहीं आते, अब चूंकि मैं लम्बे समय से गीता को संतुष्ट नहीं कर पा रहा हूँ, तो यह ठीक ही है कि यह मेरे सामने ही चुद रही है। अन्यथा अगर यह मेरी पीठ पीछे किसी से चुदेगी, उससे तो अच्छा ही है।मैंने फिर शिष्टाचार निभाते हुए दीपक से कहा- मैं सोफे पर बैठता हूँ, व इस बार आप जाओ।तो उसने फिर मना करते हुए कहा- अभी तो तुम जाओ, मैं बाद में आऊँगा।मैंने भी सोचा कि ‘पहले आप ! पहले आप !!’ वाले इस नवाबी शिष्टाचार को निभाने में चूत की गाड़ी ही छुट जायेगी, गीता किसी तीसरे के लण्ड को पकड़ कर चुदवा लेगी।मैंने फिर गीता को अपनी बाहों में ले लिया और पूछा- बतलाओ डार्लिंग, अब कौन सा तीर है तुम्हारे तरकश में, या करती हो, अपनी चूत मेरे हवाले?वह हंसी और बोली- ठीक है मेरी गीली चुदक्कड़ चूत के चोदू राजा, अब यह फुद्दी तुम्हारे हवाले !मैंने फिर से उसके कपड़े खोले, इस बार साली ने ब्रा व पेंटी पहनी ही नहीं थी, कि फिर खोलना पड़ेगी, गीता मेरे सामने मादरजात नंगी खड़ी थी, मन हुआ कि सीधे ही लण्ड उसकी चूत में पेल दूं, लेकिन सोचा ‘नहीं, थोड़ा इसके भी मजे लेना चाहियें।’अब मैंने उसे पलंग पर लेटा प्रिया, व उसकी चूत को चाटना शुरु कर प्रिया। सबसे पहले उसके दाने को चूसना शुरु किया, तो वह तो उछलने लगी, गालियाँ देकर मुझे उकसाने लगी।फिर मैंने देखा कि यह पूरी गर्म हो गई है तो, अपनी जीभ को गोल घुमाकर उसे चूत में अंदर-बाहर करने लगा।गीता तो पागलों की तरह बिस्तर पर उछलने लगी।फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये। अब मेरा लण्ड उसके मुंह में था, मैं अपनी जुबान को तेजी से अंदर बाहर उसकी चूत में करने लगा जैसे उसकी चुदाई हो रही हो।कुछ देर बाद मैंने देखा कि उसने अपनी चूत का पानी छोड़ प्रिया, व मेरे जीभ लिसलिसी हो गई, मैंने उसका जीह्वाचोदन कर प्रिया था, वह झड़ गई थी।इसके साथ ही मेरे लण्ड ने भी पानी छोड़ प्रिया।फिर कुछ देर बाद जब हम तैयार हुए तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में प्रविष्ट करा प्रिया, उसकी चूचियों को चूसना शुरु कर प्रिया।कुछ ही क्षणों में उसकी चूत की प्यास फिर जाग गई, वह मुझे आगे पीछे कर धक्के देकर मेरा उत्साहवर्धन करने लगी।फिर अचानक देखा कि दीपक भी अपना लण्ड लेकर सामने आकर खड़ा हो गया। मैंने सोचा गीता उसकी बीवी थी, उसका पहला हक है। उसने पास आकर गीता के उरोजों पर हाथ फिराना शुरु कर प्रिया।मैंने देखा कि दीपक का लण्ड पूर्ण रूप से खड़ा है, तो मैंने अपना लण्ड गीता की चूत में से निकालते हुए दीपक से कहा- चलो, अब तुम शुरु कर दो।दीपक खुश होते हुए बोला- ठीक है।वह गीता के नंगे बदन पर चढ़ गया, उसने गीता की चुदाई शुरु कर दी।मैं यह देखकर सोफे पर जाकर बैठ गया, सामने चल रही दीपक व गीता की ब्लू फिल्म देखने लगा।गीता भी उसका चिल्ला चिलाकर उत्साहवर्धन कर रही थी। कुछ देर बाद दीपक व गीता दोनों एक साथ ठण्डे पड़ गये।फिर दोनों बाथरुम से आकर मुझे धन्यवाद देने लगे, कहा- सच में आज करीब दो साल बाद मैं गीता को चोद कर संतुष्ट कर पाया हूँ।उसके अनुसार मेरे कारण ही यह सब हुआ है।फिर गीता ने मुझसे माफी माँगते हुए कहा की सारी तुम्हें भूखा रखा।मैंने कहा- इसमें क्या हुआ, तुम दोनों की खुशी में ही मेरी खुशी है।फिर हम दोनों कुछ देर तक बातें करते रहे, व फिर अचानक दीपक हमसे बोला कि मैं थक चुका हूँ, अतः अपने रूम में जाकर सोना चाहता हूँ।मैं समझ गया कि अब यह हमें एकांत देना चाहता है।मैं बोला- जैसे आपकी मर्जी !फिर गीता दीपक को उसके कमरे तक छोड़ने गई व कुछ समय बाद आकर बोली- आज दीपक बहुत खुश है, आज वह मेरी पूर्ण चुदाई कर पाया।अब शाम हो चुकी थी, मैंने कहा- गीता डार्लिंग, अब मुझे भूख लग रही है, क्या हम नीचे गार्डन में चल कर खाना ले लें।तो वह तैयार हो गई क्योंकि उसे भी भूख लगने लग गई थी।हम दोनों तैयार होकर नीचे जाने लगे तो मैंने गीता से पूछा- दीपक को भी साथ ले लें?तो उसने मना कर प्रिया- आज की रात तो हम दोनों अकेले ही गुजारेंगे। वह मुझे कल ही मिलने का बोल गया है।शाम का समय बेहद सुहाना था, हम दोनों गार्डन के एक कोने में हाथ में हाथ डाले बैठ गये।गीता बेहद बातूनी थी, वह अपनी पूरी जिन्दगी के बारे में बतलाती रही, उसने मेरे सामने स्वीकार किया कि दीपक पिछले पांच साल से उसे संतुष्ट नहीं कर पा रहा था, तो दीपक इस बात को लेकर शर्मिंदा था।दीपक स्वयं गीता की चूत की तड़फ को महसूस करने लगा तो उसने स्वयं ही आगे रहकर प्रस्ताव रखा कि तुम चाहो तो किसी से चुदवा कर अपनी कामेच्छा को शांत कर सकती हो।पर गीता ने बड़े ना-नुकुर के बाद मुझसे चुदवाना स्वीकार किया। दोनों ने आपसी सहमति के बाद ही मुझसे सम्पर्क किया।फिर कुछ देर बाद हम अपने कमरे में लौट गये।अब सिर्फ हम दोनों अकेले थे। फिर हमने रात भर चुदाई का आनन्द लिया, हम दोनों ही भूखे थे, एक दूसरे की भूख मिटाने की पूर्ण कोशिश की, व सफल भी हुए।अगले दिन खाना खाने के बाद दीपक एक बार और हमारे साथ चुदाई के प्रोग्राम में शामिल हुआ और संतुष्ट दिखा।फिर शाम होने पर विदाई का समय आ गया, मैंने गीता से पूछा- क्या भविष्य में फिर से मुलाकात हो सकती है?तो गीता ने प्रसन्न होते हुए कहा- हाँ, बिल्कुल हो सकती है पर तुम्हें इसके लिये दिल्ली आना होगा।फिर वही बात हुई, वह दिल्ली में और मैं मुम्बई में। हम कितना भी कोशिश कर लें पर साल में दो चार बार से ज्यादा तो क्या मिल पायेंगे।फिर शाम को हम अच्छी यादें लेकर रवाना अपने अपने शहरों के लिये रवाना हो गये।शिमला से मुम्बई लौटने के कुछ दिनों तो सब ठीक रहा। इधर फिर मेरा लण्ड राजा खड़ा होकर कुलांचे मारने लगे, पर उधर अंजली का व्यवहार जस का तस ही रहा, वह हमेशा की तरह अपनी चूत का प्रसाद मुझे देने में कंजूसी करती है।अब प्यारे से पाठकगणों, कृपया मुझे बतलायें कि अगर मेरी इस कथा को सुनकर यदि कोई भूखी प्यासी चूतात्मा, मुझसे वीर्यदान की अपेक्षा रखते हुए सम्पर्क करती है, तो मुझे क्या करना चाहिये? मुझे चूत पर ताला लगाकर रखने वाली अपनी निष्ठुर पत्नी की परवाह नहीं करते हुए, उस चूत की खुजली मिटाते हुए वीर्यदान करना चाहिये या नहीं?क्योंकि कामसूत्र के रचयिता आचार्य श्री वात्सायन भी कह गये हैं कि वीर्यदान महादान है। अतः पौष्टीक वीर्य की आकांक्षा रखने वाली किसी सुपात्र नारी को वीर्यदान करने में देरी नहीं करनी चाहिये।शुभस्य शीघ्रम् !आपकी राय की इन्तजार मेंsupport@mohakkisse.com

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वीर्यदान महादान

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

जय वीर

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

रेयान

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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iaryan_4u

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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