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चाची की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 714 बार

कुछ पुरानी यादें : चाची की चुदाई-4

गुरु आशिक

07 May 2011 को प्रकाशित

कुछ पुरानी यादें : चाची की चुदाई-4
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इस चाची सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा कि चाची के बीमार होने पर मैंने उनकी सेवा की और मुझे चाची की चुदाई का मौक़ा भी मिला.

चाची की दूसरी चुदाई करने के बाद चाची की सांसें अभी भी तेज चल रही थी. चाची बोली- अरे अशोक, तुम कितना चोदते हो, मेरी चुत की हालत खराब हो जाती है… आह!मैं हल्का सा मुस्कुरा कर बोला- चाची, अब मुझे आपकी गांड मारनी है.चाची बोली- क्या गांड, नहीं नहीं वो नहीं…मैं- क्यों?चाची- नहीं, अपनी चाची की चूत जितनी मर्जी चोद, कभी नहीं रोकूंगी पर गांड का चर्चा नहीं करना… वो अच्छा नहीं होता, गन्दा होता है.मैं- मेरे मोबाइल में देखो तो वो लोग कैसे गांड चोदते हैं.

मैंने मोबाइल में से बी एफ खोल के दिया. चाची देखने लगी. चाची ने आश्चर्य से बोली- हाँ रे अशोक, ये तो सच में, अरे बाप रे…!चाची और आगे देखने लगी.फिर चाची बोली- अरे अशोक ये देख, दो दो आदमी चोद रहा है एक गांड में!मैं मुस्कुरा कर जबाब दिया- हाँ चाची, देखिये न!चाची देखते हुए बोली- अशोक, कितना मजा आता होगा!मैं- हाँ चाची… बहुत मजा आता है.

चाची अब गर्म होने लगी थी, उसकी आँखों में हवस नजर आ रहा था. चाची मेरे ओर देखने लगी और बोली- अरे अशोक क्या ऐसा मजा हमें नहीं मिल सकता है. फिरं चाची मेरे ओर देख कर बोली- ठीक है मार ले पर आराम से मारना, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है.मैं खुश हो गया और बोला- ठीक है आराम से नहीं प्यार से मारूंगा मेरी जान वो भी तेल लगा के.

मेरा लंड गांड के नाम से खड़ा हो चुका था, मैं सरसों का तेल लगा कर आया, चाची वहीं सोफे पर झुक गई और साड़ी उठा कर एक हाथ से चूतड़ के दोनों भाग अलग किए जिससे गांड के छेद को मैं देख सकूं.मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को फैला कर उसकी गांड के छेद को चौड़ा कर दिया और अपनी एक उंगली को अपने थूक से गीला करा कर उसकी गांड में धकेलने की कोशिश करने लगा.चाची की गांडबहुत टाइट थी, मगर मैंने उसकी गांड को तेल से भिगाया.

मैंने अपने खड़े लंड को उसकी गांड के छेद के सामने लगा दिया, चाची बोली- अब धीरे से पेलना!पर मैंने एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लंड उसकी गांड में एक ही धक्के में पेल दिया. तेल लगे होने के कारण बिना कोई रुकाबट के घुस गया. ‘आहहऽऽऽ…!!! अशोक उईई अशोक मत करो मेरी फट रही है मैं नहीं झेल पाऊँगी ऊईई ईई छोड़ो!!’ कहते हुए पैर पटकने लगी थी. चाची एकदम से चीख पड़ी और खड़ी हो गई. फिर गुस्से से बोली- मैं कह रही हूँ कि धीरे से डालो और तुमने पूरा एकदम से डाल दिया.मैं- सॉरी चाची जान सॉरी! अब ग़लती नहीं करूँगा, धीरे से ही डालूँगा! सॉरी!चाची फिर फर्श पर ही उल्टी लेट गई और वो धीरे धीरे मेरी गाण्ड में अपना लंड डालने लगा.जैसे जैसे लंड अंदर जा रहा था वैसे वैसे चाची कह रही थी- आई ईईई… उई ईईई मा… मां री! आई ईइआ… उउ… सस्स… आह्ह!

मेरा लंड गांड में जा चुका था.फिर मैं चाची के कान के पास जा कर धीरे से बोला- जान अब ठीक है?चाची बोली- बस अशोक बस! अब बस करो! निकाल लो इसे! बहुत दर्द हो रहा है.मैं चाची के कान में ही बोला- बस यार, थोड़ा सा! बड़ी टाइट है तेरी गाण्ड! आ… एयेए… आह… आह्ह्ह! बस थोड़ी देर बर्दाश्त कर लो.

मैंने फिर अपना लंड पूरा बाहर निकाल लिया और गांड के छेद पर भिड़ा कर एक जोर का झटका दिया और इस बार फिर मेरा पूरा लौड़ा उसकी गांड में घुस गया.चाची तो दर्द के मारे चिल्ला उठी- कुत्ते अईई… कमीनेएए… मादरचोद… अईई… ईईईई… छोड़ मुझे!बोल कर मुझे धकेलने लगी पर मैं चाची के कमर को कस कर दबा रखा था, मैंने उसको नहीं छोड़ा, मैंने फिर जोर से लंड अंदर बाहर कर चोदना चालू कर दिया. चाची जोर-जोर से चिल्लाती रही-मुझे छोड़ दे साले, हअशोकी, मैं मर जाऊँगी, छोड़ दे मुझे, मादरचोद छोड़ दे, मुझे!

चाची बोलती रही, चिल्लाती रही, गिड़गिड़ाती रही पर मैंने उस पर थोड़ा भी रहम नहीं किया. वहाँ उसकी चीख सुनने वाला भी कोई नहीं था, मैं गांड को जोर-जोर से चोदता रहा.मुझे बहुत ही मजा आ रहा था.

धीरे-धीरे वो भी शान्त होने लगी, अब शायद चाची को अच्छा लगने लगा था और मेरा साथ देने लगी, बोली- अशोक अच्छा हुआ, तू नहीं रुका, अब मुझे बहुत मजा आ रहा है, अब चोद मुझे और जोर से चोद मुझे… आह ईई सच में गांड मराने में भी मजा आ रहा है.

मैं उत्तेजना के कारण पागलों की तरह जोर जोर से अपनी कमर को हिलाकर चोदने लगा और ‘ईइइशश… अआहह्ह्ह… ईइइशश… अआआहहह्ह्ह…’ की आवाज करने लगा.मैंने अपने दोनों हाथों से चाची के कमर को छोड़ कर कँधों को पकड़ लिया और स्पीड बढ़ा दिया जिससे चाची और उत्तेजित हो कर मुँह से इईशश… श…श… अआआहहा… हाँ…हाँ… इईशश… श…श… अआहहा… हम्म…हाँ… की मादक सिसकारियाँ निकालने लगी जिससे मेरा जोश दोगुना हो गया और मैं तेजी से धक्का लगाने लगा.अब चाची जोरों से चिल्ला रही थी- आअहह आहह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… अशोक आययई ह्ह्ह्ह मेरे ग्ग्ग्ग गांड में सूऊ सुर सू सूऊ सुरसुराहट हो रही आह है… रुक मत और ज़ोर से पेल ईई ईई आहह…

‘मज़ा आ रहा हैं चाची?’ मैं बोला.‘हां अशोक ब ब्बब्ब बहुत!’‘जोर से लंड चाहिए अपनी गांड में?’‘हां… अशोक हाँ ये ये जोर अब मजा आ आ स आ रहा है.’‘तो ये ले…’ अब मैं लंड को जड़ तक अंदर बाहर कर रहा था.चाची आह आह उईई कर मजा ले रही थी.

फिर अचानक वो और ज़ोर से ‘आआआ अहह… आआआअहह’ करके चिल्लाने लगा और मैं बहुत ही तेज़ी से गांड मारने लगा.मैं अब झरने के बहुत करीब था. मैंने अपने दोनों हाथों से चाची की कमर को ज़ोर से जकड़ लिया. चाची हिल नहीं पा रही थी और मैं अब लंड अंदर बाहर नहीं कर रहा था, गांड के अंदर ही रोक दिया था.‘साले कुत्ते ये क्या कर रहा है, रुक क्यों गया ययय?’ चाची चिल्लाई मुझ पर.

‘आआहह… आआअहह…’ करके मैंने झरना शुरू किया.‘आआई यईईई आऐईयईईई…’ कर चाची भी चिल्लाई.मैंने अपना वीर्य चाची की गांड में भर दिया.

आख़िर मैंने अपना लंड बाहर निकाला फिर चाची के पेटीकोट से पौंछा और खड़ा हुआ. चाची भी उठी और अपनी गांड मको पेटीकोट से पौंछ कर मेरे लंड को हाथ में लेकर बोली- तुम्हारा लंड तो कमाल है.अब मैं चाची से खुल चुका था, मैंने कहा- हाँ मेरी रानी… तुम भी तो कमाल की हो!चाची जोर से हंसने लगी.

फिर चाची बोली- तुम बैठो, मैं चाय बना कर लाती हूँ.चाची चाय बनाने किचन में चली गई.

उसी समयमेरी चचेरी बहनसीमा कोचिंग से आ गई, मुझे देख कर बोली- छोटे, क्या अब माँ ठीक है?मैं- हाँ दीदी, चाची अब ठीक है… सूई का कोर्स पूरा हो गया है. और अगर कोई दिक्कत होगी तो मैं हूँ न!

उसी समय चाची आ गई चाची बोली- हाँ बेटी, अब ठीक हूँ… वैसे अशोक ने पूरा ख्याल रखा है.सीमा बोली- हाँ माँ, छोटे नहीं होता तो गाँव में कोई सूई देने वाला भी नहीं है.

फिर चाची ने चाय मुझे दी, मैं चाय पीने लगा. सीमा कुर्सी पर बैठ गई. मैंने सीमा को ध्यान से देखा तो उसकी भी चूची बढ़ चुकी थी.

कुछ देर में चाय पी कर मैं वहाँ से निकल गया, बाजार जा कर सब्जी खरीद कर माँ को दे आया फिर अपने कमरे में जा कर मोबाइल में बी एफ देखने लगा.

अब मेरे ऊपर हवस सवार हो गई थी, हर किसी को मैं चोदने की नजर से देखने लगा था.दूसरे दिन क्लिनिक से लौटने के बाद फिर चाची को चोदने उसके घर गया. वहाँ गया तो देखा कि चाचा जी आ चुके थे. मेरा मन उदास हो गया.चाची ने चुप रहने का इशारा किया.

मैंने चाचा को प्रणाम किया. चाचा ने मेरा हाल चाल पूछा. फिर मैं चाय पी कर वहाँ से चला आया.मेरी चुदाई की पुरानी यादों सेक्स स्टोरी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

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कुछ पुरानी यादें : चाची की चुदाई

कुल भाग: 4
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मुझे अपनी चाची को चोदने की पहले ही इच्छा थी और मैं उनको जब भी चांस मिलता, तब उनको छू देता था और कभी किस भी किया करता था गाल पर. वो कुछ बुरा नहीं मानती थी.

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

प्रेम शर्मा

3 weeks ago

चाची की चूत का वर्णन बहुत ही कमाल का किया है।

अजय शर्मा, पंजाब

1 month ago

पड़ोसन आंटी की तो बात ही अलग है। बहुत ही गरमा-गरम कहानी!

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