सुबह दीपा विनोद 8 बजे सोकर उठे. विनोद को आज ऑफिस तो जाना नहीं था.
विनोद ने दीपा से चाय बनाने के लिए कहा और खुद अनिल के रूम में जाने लगा.दीपा ने विनोद से कहा- रुको, पहले मैं कपड़े ठीक से पहन लूं, रात की बात और थी.पर विनोद ने कहा- अनिल से कोई तकल्लुफ नहीं है, तुम यही नाईट ड्रेस डाल लो.
दीपा ने फिर बिना ब्रा के ही ड्रेस डाल ली. हालांकि उसके मम्मों की नुकीली नोक उठ कर आ रही थी तो उसने विनोद से कहा- मैं ब्रा पहन लेती हूँ.तो विनोद बोला- रहने दो, देखना अभी उसका फिर खड़ा हो जाएगा.
अब दीपा की बला से … जब उसके आदमी को ही फर्क नहीं है तो उसे किसी की परवाह नहीं.दीपा वाशरूम से फ्रेश होकर रसोई में गयी तो पीछे से हँसता हुआ विनोद आया और दीपा को इशारे से बाहर बुलाया और होंठों पर उंगली रख कर चुप रहने का इशारा किया.वो उसे लेकर अनिल के कमरे में गया.
अनिल बेसुध सोया पड़ा था पर बिल्कुल नंगा … उसका लंड देख कर दीपा को मजा आ गया. लम्बा और मोटा और इस समय भी खड़ा हुआ.नीचे वो ही टिश्यू पड़ा था जिस पर रात की कहानी लिखी थी अनिल ने.
दीपा ने चुपके से वो टिश्यू उठा लिया और मुस्कुराते हुए बाहर आ गए दोनों.
विनोद ने किवाड़ बंद कर प्रिया और बाहर आकर अनिल को जोर से दो आवाज दी.अनिल जग गया और फिर दस मिनट बाद फ्रेश होकर कपड़े पहन कर बाहर आया.
बाहर चाय रखी थी और दीपा पूरे मूड में मुस्कुराती हुई बैठी थी. अनिल ने एक ही नजर में दीपा के मम्मों के नुकीले उभार देख लिए. उसका बस चलता तो अभी दबोच लेता.
चाय पीकर अनिल और विनोद बाहर घूमने चले गए. उन्होंने दीपा से भी कहा तो दीपा बोली- नहीं मेड आती होगी, मैं नाश्ता बनाती हूँ, तुम दोनों घूम आओ.दीपा ने ड्रेस चेंज कर ली. उसने दीपा नैक की काफ्तान पहनी और बोटम कुछ नहीं. लाल फूलों के प्रिंट की काफ्तान, खुले बाल … उसका अंदाज कातिलाना था.
मेड से काम करवा कर और नाश्ता बना कर दीपा फर्श हो गयी.
अनिल और विनोद लौट आये. दीपा ने नाश्ता लगा प्रिया और उनसे कहा कि आ जाएँ.विनोद को एक बार फिर फ्रेश होने जाना था.
अनिल हाथ धोकर टेबल पर आ गया. अनिल की प्लेट एक छोटी प्लेट से ढकी थी.
दीपा कुछ सामान लेने का बहाना कर के रसोई में गयी. अनिल ने जैसे ही अपनी प्लेट हटाई तो उसमें रात वाला टिश्यू रखा था और उस पर दीपा के होंठों के लाल लिपिस्टिक के निशाँ बने थे. अनिल सकुचा गया!इसका मतलब दीपा का मालूम पड़ गया कि उसने रात मुठ मारी है.और क्या पता दीपा सुबह कमरे में आई हो.
तभी दीपा के आने की आहट हुई तो उसने टिश्यू छिपा लिया और अपनी प्लेट में नाश्ता परोसने लगा.
विनोद भी आ गया था.
दीपा ने एक टेढ़ी निगाह अनिल की ओर देखा और आँख मार दी.अनिल मुस्कुरा प्रिया.
नाश्ते में विनोद और अनिल बैठे, दीपा गर्म गर्म कटलेट सेक रही थी तो वो नहीं बैठी.विनोद ने जिद की कि सेक लो, फिर एक साथ नाश्ता करेंगे.
दीपा फटाफट कटलेट सेक लायी और अब सोच रही थी कि चार लोगों वाली टेबल पर कहाँ बैठूं.
जाहिर है विनोद के साथ ही बैठती … पर अभी एक मिनट पहले विनोद रसोई में आकर उससे कह गया था कि वो अनिल के साथ बैठे.दीपा अनिल की साथ ही बैठी.
अनिल ने उसकी प्लेट में नाश्ता सर्व किया. अब विनोद नीचे से दीपा के पैर अपने पैर से सहलाने लगा और अनिल की ओर करने लगा.दीपा समझ गयी कि विनोद उसकी अनिल से नजदीकी चाहता है.उसने किसी बहाने से अपनी कुर्सी अनिल की कुर्सी से सटा ली.
अब दीपा की बांहें अनिल की बांहों से टकरा रही थीं.
अनिल ने हलवे की एक चम्मच मुंह में डाल कर कहा- दीपा तुम चीनी डालना तो भूल गयीं.दीपा चौंकी, बोली- चीनी तो मैंने डाली है.अनिल ने अपनी चम्मच से हलवा दीपा को खिलाया तो वो बोली- है तो मीठा.अब अनिल ने उसी चम्मच से फिर खाया और बोला- हाँ अब तुम्हारी झूठी चम्मच से खाने से मीठा हो गया.
दीपा उसकी बदमाशी समझ गयी, उसने एक धौल लगा प्रिया अनिल को.
तभी विनोद का फोन बजा और वो फोन सुनने के लिए बालकनी में गया.नजर बचा कर अनिल ने दीपा को किस कर लिया. अब अनिल के पैर दीपा के पैरों को सहला रहे थे और अनिल बार बार अपनी चम्मच से दीपा को कुछ न कुछ खिला रहा था.
उधर से आते समय विनोद ने उनकी हरकत देख ली थीं और उसने दीपा को एक फ़्लाइंग किस भी दे प्रिया यानि ‘लगे रहो मुन्ना भाई.’नाश्ता करके अनिल ने सिगरेट लगाई तो पैकेट दीपा विनोद को भी ऑफर किया.
दीपा ने लाइटर से पहले अनिल की फिर विनोद की सिगरेट जलाई. उसने अपनी अलग से सिगरेट नहीं ली. वो कभी एक सुट्टा अनिल की सिगरेट से, कभी विनोद की सिगरेट से लगा लेती.विनोद अनिल से दीपा ने जल्दी से नहाने को कहा ताकि घूमने चला जाए.
दीपा विनोद से बोली- तुम दोनों एक साथ नहा लो, अपनी पुरानी यादें ताजा कर लो, मैं रसोई संभाल कर अपने वाशरूम में तैयार होती हूँ.अनिल भी हंस कर बोला- चल विनोद, अपन दोनों साथ नहायेंगे.वो विनोद को खींच ले गया.
विनोद जाते जाते बोला- मेरा टॉवल तो दे दो.दीपा बोली- तुम नहाओ, मैं देती हूँ.अनिल विनोद दोनों बाथरूम में घुस गए.
दीपा हंसती हुई रसोई में समेटने लगी. वो टॉवल लेकर गयी तो उसने विनोद को आवाज देकर कह प्रिया कि टॉवल बाहर दरवाजा हैंडल पर टंगा है.तभी अंदर से विनोद की आवाज आई- एक मिनट सुनो.
दीपा रुकी तो अंदर से विनोद ने झाँका और बोला- हमारी पीठ पर साबुन लगा दो.वो बोली- मैं तुम्हारी बातों में नहीं आने वाली, चुपचाप नहा लो.
अब विनोद बाहर आ गया. उसने अंडरवियर पहना हुआ था और पूरा भीगा था, बोला- प्रॉमिस कोई बदमाशी नहीं करेंगे, बस तुम साथ आ जाओ.दीपा नहीं मानी तो उसने दीपा को आलिंगन करके दीपा किस प्रिया और कहा- प्लीज.
क्रेडिट कार्ड वाली
उसने सोचा कि दोनों अंडरवियर पहने हैं. ऐसे भी तो बाहर बरमुडा में ही थे. वो बोली- ठीक है, मैं साबुन लगा देती हूँ, पर मुझे नहीं भिगोना! और पहले लाईट बंद करो.अनिल ने अंदर से लाईट बंद कर दी.अंदर अँधेरा हो गया.
अब तीनों अंदर थे. एक बार शावर चलाकर अनिल और विनोद ने पानी डाला और दीपा ने उनको शावर जेल से स्पोंज करना शुरू कर प्रिया. माहौल गर्म हो चला था. अनिल और विनोद की गर्म साँसे दीपा से टकरा रही थी और खुद दीपा भी अब शायद मन तैयार कर चुकी थी मस्ती करने का.
अनिल ने दीपा से कहा कि वो उसकी छाती पर जेल लगा दे तो दीपा उसकी ओर मुड़ी तो पीछे से विनोद ने उसे अनिल की ओर धक्का दे प्रिया. दीपा अनिल की बाँहों में आ गयी और चिपट गयी.‘अब जो होगा देखा जाएगा.’ सोच कर दीपा ने अपने होंठ अनिल के होंठों से मिला प्रिया.
अनिल ने शावर खोल प्रिया. ऊपर से पानी … नीचे जलते बदन.बीच में कपड़ों का क्या काम … अनिल और विनोद ने अपने अपने अंडरवियर उतार दिये और विनोद ने दीपा की ड्रेस भी.अब तीन नंगे जिस्म पानी में अठखेलियाँ कर रहे थे.
अनिल दीपा के मम्मे चूस रहा था और विनोद नीचे झुक कर उसकी चूत चाट रहा था.दीपा के हाथ भी अनिल का लंड मरोड़ रहे थे.
अनिल ने चाहां कि वो अपना लंड दीपा की चूत में कर दे पर अचानक दीपा को जाने क्या हुआ … वो तेजी से बाहर आ गयी और अपने वाश रूम में जाकर दरवाजा लॉक कर लिया.अनिल चिंतित हो गया कि पता नहीं क्या हुआ.पर विनोद हँसते हुए बोला- कोई बात नहीं, मैं दीपा को जनता हूँ, वो अभी नार्मल मिलेगी. बस अब हम लोग दिन में इस बारे में कोई बात नहीं करेंगे.
और यही हुआ, आधे घंटे बाद जब सब तैयार होकर निकले तो दीपा के देख कर लग ही नहीं रहा था कि अभी कोई ऎसी बात हुई है.
तीनों ने ही जींस और टी शर्ट पहनी थीं. हाँ दीपा का ओरेंज टॉप ढीला और शोर्ट था. खुले बाल, सनग्लास और ओरेंज कलर के नेल पेंट, लिपस्टिक और मैचिंग बेली.ऐसा लगता था कि कोई कॉलेज स्टूडेंट अपनी डेट पर जा रही है.
तीनों घूमने निकल गए.
विनोद ने खुद ड्राइविंग न करके कैब बुक करी क्योंकि पार्किंग की बहुत समस्या होती है. दूसरे वो चाहता था कि दीपा और अनिल की नजदीकी बढ़े.दीपा भी मस्ती में अनिल का हाथ पकड़े दिन भर घूमती रही.
गाड़ी में बियर, स्नैक्स खूब थे. आज जितनी फोटो खींची, उनमें अधिकतर में दीपा अनिल से चिपट कर खड़ी थी.
देर शाम तक सब लोग लौटे. दिन भर की थकान थी, दीपा ने डिनर का आर्डर कर प्रिया था, जिसकी डिलीवरी रात को होनी थी.
घर आकर कपड़े बदलकर चाय नाश्ते का प्रोग्राम चला.
अनिल और विनोद तो केवल शॉर्ट्स पहने रहे. दीपा ने भी शॉर्ट्स और टॉप डाला, पर बिना अंडरगार्मेंट्स के!
अब सबसे पहले सिगरेट दीपा ने जलाई और दो चार सुट्टे मारकर विनोद को दे दी. अनिल ने अलग जला ली.दीपा विनोद की गोदी में सर रख के लेट गयी और सिगरेट के छल्ले बनाने लगी. दीपा ने अपने पैर अनिल की गोदी पर टिका दिए कि जरा दबा दो.अनिल आज्ञाकारी बच्चे की तरह दीपा की गोरी गोरी नाजुक उंगलियाँ दबाने लगा.
जितना मजा दीपा को दबवाने में आ रहा था, शायद उससे ज्यादा मजा संजय को दबाने में आ रहा था. दीपा ने अभी दो दिन पहले ही वेक्सिंग और पेडीक्योर कराया था तो सब कुछ शेप में था. उसकी स्किन ग्लो कर रही थी.
विनोद ने धीरे से उठकर लाईट बहुत धीमी कर दी. उसने दोबारा दीपा का सर अपनी गोदी में रख लिया और धीरे धीरे उसकी गर्दन की और कन्धों की मालिश करने लगा.
अब अनिल का हाथ उसके पंजे से उसके पैरों पर और धीरे धीरे घुटनों तक आ और जा रहा था. दीपा ने आँखें बंद कर लीं थीं.
उधर विनोद ने आँखों आँखों में अनिल को कुछ इशारा किया तो अनिल का हाथ कुछ ऊपर उठने की कोशिश करने लगा पर दीपा ने उसका हाथ रोक प्रिया और नीचे कर प्रिया.बेचारा अब वापिस घुटने के नीचे ही मालिश करने लगा.
अब विनोद ने अपने हाथ उसके कन्धों से हटाकर उसकी गर्दन और धीरे धीरे गले को सहलाते हुए गले से नीचे छाती की ओर जाने लगे.दीपा ने एक आँख खोल कर विनोद से कहा- ज्यादा बदमाशी नहीं.पर विनोद ने अपना हाथ उसके टॉप के अंदर कर प्रिया और अब वो उसके निप्पल तक पहुँच गया था.
उसने निप्पल के चारों ओर घेरा बनाकर उसने दीपा को निप्पल मसाज देनी शुरू कर दी. दो मिनट में ही दीपा कसमसाने लगी.
मौका देख कर अनिल ने भी दीपा के पैर अपनी गोदी से हटाये और खुद सरककर आगे हो गया और अब सीधे अपने हाथ दीपा कि नंगी जाँघों पर फिराते फिराते उसकी शॉर्ट्स के मुहाने तक पहुँच गया.अनिल की हिम्मत नहीं पड़ रही थी दीपा की शॉर्ट्स के अंदर पहुँचने की.
दीपा भी अब कामोत्तेजना से कांपने लगी थी.
विनोद ने आगे झुक कर उसके होंठों से अपने होंठ लगा दिए.
अब अनिल को मौका साफ़ लगा तो उसने अपना हाथ दीपा की चूत तक पहुंचा प्रिया. वहां तो नदी बह रही थी. दीपा की चूत ने पानी छोड़ प्रिया था.अनिल ने अपनी उंगली दीपा की चूत में घुसा दी और मालिश करने लगा.
अब दीपा कसमसा उठी … उसने विनोद से छूटकर अनिल को अपनी ओर खीन्चा और होंठ से होंठ मिला दिये. अब सभी की साँसे गर्म हो चुकी थीं और कमरा का माहोल पूरा वासनामय हो चुका था. अनिल और दीपा गुत्थम-गुत्था होकर चूमा चाटी कर रहे थे और विनोद अपनी प्लानिंग को साकार होता देख रहा था.
अनिल ने अब दीपा को छोड़ा और नीचे होकर उसकी शॉर्ट्स उतार दी और उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी.उधर विनोद ने भी अपना लंड दीपा के मुंह में दे प्रिया.
दीपा पागलों की तरह विनोद का लंड चूस रही थी क्योंकि नीचे अनिल ने उसकी चूत में अपनी जीभ से आग लगा दी थी.
पर हाय री किस्मत … तभी घंटी बजी …
कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com