रोनी सलूजा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@rana-salja
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
रोनी सलूजा की रचनाएं
निगोड़ी जवानी-6
शाम को मैं फिर घर पहुँची। राजेश आये तो उन्होंने रात को सोते समय फिर मुझे दबोच लिया, अपना खड़ा लंड मेरे हाथों में थमा प्रिया।
निगोड़ी जवानी-5
मैंने उनके लंड को एक बार फिर पप्पी लेकर छोड़ प्रिया, सोचने लगी कि कल का दिन मेरे लिए यादगार दिन रहेगा जब मैंने दो अलग अलग लोगों के साथ सम्भोग करके अपनी वासना की आग बुझाई।
निगोड़ी जवानी-4
मैं उनके बालों को सहलाते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के गर्व से फूली नहीं समा रही थी।
निगोड़ी जवानी-3
मैंने सर को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया, वो भी मेरे ऊपर आकर मेरे से लिपट गए, मेरे चेहरे को थामकर मेरे होंठों का रसपान करने लगे। उनका खड़ा लंड मुझे अपनी नाभि के पास चुभता महसूस हो रहा था।
निगोड़ी जवानी-2
मैंने कई बार डॉक्टर को लुभाने किसी न किसी बहाने से अपने स्तन भी दिखा दिए, जिन्हें वो चोरी छुपे देख भी रहे थे। एक बार उनके चेंबर में साड़ी में कीड़ा है, कहकर जांघें तक दिखा डाली परन्तु कैसे उन पर अपना जादू चलाऊँ, यह समझ नहीं आ रहा था।
कामदेव के तीर-5
मैं पलंग से उठा ही था तभी रजिया मेरे लिए चाय लेकर आ गई और मेज पर रख दी। मैंने पीछे से रजिया को दबोच लिया
कामदेव के तीर-4
घर में किसी के आने का कोई अंदेशा नहीं था, बड़ी निश्चिन्तता से सारा काम चल रहा था। मुझे नींद ने आ घेरा, कब सो गया पता ही नहीं चला!
कामदेव के तीर-3
मैंने कहा- डार्लिंग, अब तो कल तक के लिए यही हूँ, थोड़ी थकावट मिट जाये, फ़िर रात में जरूर उस तरीके से तुम्हें चोदूँगा।