रोनी सलूजा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@rana-salja
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
रोनी सलूजा की रचनाएं
नया मेहमान-4
बाथरूम में रेखा दरवाजे की तरफ मुँह करके पटरी पर जन्मजात नंगी बैठी हुई थी, उसका गोरा बदन आँखों के सामने बेपर्दा था।बाल जूड़ा बनाकर सर पर बंधे थे, दोनों पैर खुले हुए थे, चूत बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी, उसका मुँह खुला सा था, अन्दर की लालिमा दिखाई दे ...
नया मेहमान-3
मैं घर चला आया, मेरा दूसरा कदम भी कामयाब रहा। घर जाकर बेड पर लेट गया पर नींद नहीं आ रही बार बार रेखा का नग्न शरीर जो बाथरूम में देखा था, नजर के सामने आ जाता, अंत में बाथरूम में जाकर रेखा भाभी की याद कर हस्तमैथुन किया तब राहत हुई।अचानक साले साहब का...
नया मेहमान-2
मैं नाश्ता करके घर चला गया, जाकर नहाया फिर सोने के लिए पलंग पर लेट गया और प्यारी सलहज के बारे में न चाहते हुए फिर सोचने लगा कब नींद लगी पता नहीं चला।
निगोड़ी जवानी-6
शाम को मैं फिर घर पहुँची। राकेश आये तो उन्होंने रात को सोते समय फिर मुझे दबोच लिया, अपना खड़ा लंड मेरे हाथों में थमा दिया।
निगोड़ी जवानी-5
मैंने उनके लंड को एक बार फिर पप्पी लेकर छोड़ दिया, सोचने लगी कि कल का दिन मेरे लिए यादगार दिन रहेगा जब मैंने दो अलग अलग लोगों के साथ सम्भोग करके अपनी वासना की आग बुझाई।
निगोड़ी जवानी-4
मैं उनके बालों को सहलाते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के गर्व से फूली नहीं समा रही थी।
निगोड़ी जवानी-3
मैंने सर को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया, वो भी मेरे ऊपर आकर मेरे से लिपट गए, मेरे चेहरे को थामकर मेरे होंठों का रसपान करने लगे। उनका खड़ा लंड मुझे अपनी नाभि के पास चुभता महसूस हो रहा था।
निगोड़ी जवानी-2
मैंने कई बार डॉक्टर को लुभाने किसी न किसी बहाने से अपने स्तन भी दिखा दिए, जिन्हें वो चोरी छुपे देख भी रहे थे। एक बार उनके चेंबर में साड़ी में कीड़ा है, कहकर जांघें तक दिखा डाली परन्तु कैसे उन पर अपना जादू चलाऊँ, यह समझ नहीं आ रहा था।