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लड़कियों की गांड चुदाई पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 381 बार

अनोखी चूत चुदाई के बाद-5

सुकान्त शर्मा

12 Mar 2015 को प्रकाशित

अनोखी चूत चुदाई के बाद-5
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बहू ससुर की चूत चुदाई के बाद बहुत देर तक हम दोनों बाहों में बाहें डाले चिपके लेटे रहे।बहू रानी के नंगे गर्म बदन की छुअन कितनी सुखद लग रही थी, उसे शब्दों में बताना मेरे लिए सम्भव नहीं है।‘पापा जी, आपने कर ही ली न अपने मन की! अब लाइट बंद कर दो और सो जाओ आप भी!’ बहू रानी उनींदी सी बोली।

‘इतनी जल्दी नहीं बेटा रानी, अभी तो एक राउंड तेरी इस गांड का भी लेना है।’ मैंने कहा और उसकी गांड को प्यार से सहलाया।‘नहीं पापा जी, वहाँ मैंने कभी कुछ नहीं करवाया. वहाँ नहीं लूंगी मैं आपका ये मूसल। फिर तो मैं खड़ी भी नहीं हो पाऊँगी।’ उसने साफ़ मना कर दिया।

‘अदिति बेटा, गांड में भी चूत जैसा ही मस्त मस्त मज़ा आता है लंड जाने से, तू एक बार गांड मरवा के तो देख, मज़ा न आये तो कहना!’‘न बाबा, बहुत दर्द होगा मुझे वहाँ! अगर आपका मन अभी नहीं भरा तो चाहे एक बार और मेरी चूत मार लो आप जी भर के!’ वो बोली।

‘अरे तू एक बार ट्राई तो लंड को उसमें, फिर देखना चूत से भी ज्यादा मज़ा तुझे तेरी ये चिकनी गांड देगी।’ऐसी चिकनी चुपड़ी बातें कर कर के मैंने बहूरानी को गांड मरवाने को राजी किया, आखिर वो बुझे मन से मान गई मेरी बात- ठीक है पापा जी, जहाँ जो करना चाहो कर लो आप, पर धीरे धीरे करना!

‘ठीक है बेटा, अब तू जरा मेरा लंड खड़ा कर दे पहले अच्छे से!’मेरी बात सुन के बहूरानी उठ के बैठ गई और मेरे लंड को सहलाने मसलने लगी, जल्दी ही लंड में जान पड़ गई और वो तैयार होने लगा।फिर मैंने बहूरानी को अपने लंड पे झुका दिया, मेरा इशारा समझ उसने लंड को मुंह में ले लिया और कुशलता से चूसने लगी।कुछ ही देर में लंड पूरा तन के तमतमा गया, फिर मैंने उसे जल्दी से डोगी स्टाइल में कर दिया और उसकी चूत में उंगली करने लगा जिससे वो अच्छे से पनिया गई, फिर लंड को उसकी चूत में घुसा कर चिकना कर लिया और फिर बाहर निकाल कर गांड के छेद पर टिका दिया।

गांड के छेद थोड़ा अपना थूक भी लगाया और बड़ी सावधानी से अदिति की कमर पकड़ कर लंड को उसकी गांड में घुसाने लगा।कुछ प्रयासों बाद मेरा सुपारा गांड में घुसने में कामयाब हो गया।

‘उई माँ… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई पापा जी, निकाल लो इसे, बहुत दर्द हो रहा है वहाँ पे!’ बहू रानी दर्द से तड़प कर बोली।मगर मैंने उसकी बात को अनसुना करके धीरे धीरे पूरा लंड पहना दिया उसकी गांड में और रुक गया।अदिति ने अपनी गांड ढीली कर के लंड को एडजस्ट कर लिया।

बीच बीच में लंड पर थूक भी लगाता जाता ताकि उसका लुब्रीकेशन बना रहे।जल्दी लंड सटासट चलने लगा उसकी गांड में! बहूरानी को भी अब मज़ा आने लगा था और वो मस्त आवाजें निकालने लगी।

फिर मैंने उसकी चूत में दो उंगलियाँ घुसा दीं और गांड स्पीड से मारने लगा।‘हाँ पापा जी, अब मज़ा आने लगा है, जल्दी जल्दी स्पीड से करो आप!’ मैंने तुरन्त अपनी स्पीड बढ़ा दी और निश्चिन्त होकर दम से गांड मारने लगा।

फिर मैंने बहूरानी के बाल पकड़ कर अपनी कलाई में लपेट खींच लिए जिससे उसका मुंह ऊपर उठ गया और इसी तरह चोटी खींचते हुए अब मैं बेरहमी से गांड में धक्के मारने लगा।

मस्त हो गई बहूरानी! वो भी अपनी गांड को मेरे लंड से ताल मिला कर आगे पीछे करने लगी।फिर मैं रुक गया मगर बहूरानी नहीं, वो अपनी ही मस्ती में अपनी कमर चलाते हुए लंड लीलती रही।कितना कामुक नज़ारा था वो!

मैं तो स्थिर रुका हुआ था और बहूरानी अपनी गांड को आगे पीछे करती हुई मज़े ले रही थी, जब वो पीछे आती हो मेरा लंड उसकी गांड में घुस जाता और वो आगे होती तो बाहर निकल आता!इस तरह बड़े लय ताल के साथ बहुत देर तक बहू खेलती रही।

मैं अब उसकी चूत में उंगली करता जा रहा था और वो अपने आप में मग्न कमर चलाये जा रही थी। आखिर इस राउंड का भी अंत हुआ और मैं उसकी गांड में ही झड़ गया और लंड सिकुड़ कर स्वतः ही बाहर आ गया और बहूरानी औंधी ही लेट गई बिस्तर पर…मैं भी उसी के ऊपर लेट गया और अपनी साँसें काबू करने लगा।

‘मज़ा आया बेटा?’‘हाँ, पापा जी. बहुत मज़ा आया, शुरू में तो बहुत दर्द हुआ, बाद में चूत जैसा ही मज़ा वहाँ भी आया।’ वो बोली और उठ कर कपड़े पहनने लगी।मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए और लेट गया।

‘चलो अब सो जाओ पापा, बहुत रात हो गई, तीन तो बजने वाले ही होंगे। पापाजी मैं जल्दी उठ के अँधेरे में ही नीचे चली जाऊँगी, आप आराम से सोते रहना!’ वो बोली।‘ठीक है बेटा, गुड नाईट, स्वीट ड्रीम्ज़!’ मैं जम्हाई लेते हुए बोला।‘गुड नाईट पापा जी!’ वो बोली और मुझसे लिपट के सो गई।

तो मित्रो, इस तरह हम ससुर बहू लिपट कर सो गये।मेरी नींद खुली तो दिन चढ़ आया था, बहू रानी पता नहीं कब उठ कर चली गई थी पर उसके जिस्म की खुशबू अभी भी कोठरी में रची बसी थी।

हमारे यहाँ परिवार में शादी के बाद सोमवार को सत्यनारायण की कथा होती है तो कथा का आयोजन होते ही सारे मेहमान विदा हो हो के चले गये।अभिनव की छुट्टियाँ भी ख़त्म हो गईं तो वो भी बहू को ले के चला गया।

इस घटना के कोई डेढ़ महीने बाद मैं अभिनव के पास चला गया। असली मकसद तो बहूरानी को चोदना ही था तो अभिनव के ऑफिस जाते ही हम लोग शुरू हो गये।

मैं तीन दिन रुका वहाँ पे और बहूरानी को अनगिनत बार चोद चोद कर अपनी हर कल्पना साकार कर ली, दीवार के सहारे खड़ा करके, शावर के नीचे नहाते हुए और जितने आसन मुझे आते थे वो सब के सब बहूरानी की चूत में लगा के चोदा उसे!हाँ, एक बार उसकी झांटें भी मैंने खुद साफ़ कीं जैसे कि अपनी पत्नी रानी की करता हूँ हमेशा!

मित्रो कहानी अब समाप्त… उम्मीद है सबको मज़ा आया होगा और सबने अपने अपने लंड चूत को भी मज़ा दिया होगा साथ साथ!कृपया अपने अपने विचार, कमेंट्स लिखें और मुझे भी नीचे लिखे पते पर ई मेल करें कि आपको कहानी कैसी लगी क्या अच्छा लगा और क्या नहीं!support@mohakkisse.com

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अनोखी चूत चुदाई के बाद

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