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Group Sex Story • पठन समय: 17 मिनट • पढ़ा गया: 1,005 बार

भाई बहन की चुदाई के सफर की शुरुआत-11

रोहण गुप्ता

05 Jan 2026 को प्रकाशित

भाई बहन की चुदाई के सफर की शुरुआत-11
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बहन भाई सेक्स की कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि जंगल कैम्प में मैंने अपनी बहन की चूत चोदी जबकि मेरी चचेरी बहन पास में सो रही थी. उसके बाद मुझे चाचा के कमरे में झाँकने के लिए एक छेद मिल गया.

मैंने अपनी बहन को दिखाया तो वो हंस पड़ी और हम दूसरे कमरे में देखने लगे।

अब चाचा बेड के किनारे पर खड़े हुए अपने कपड़े उतार रहे थे। उन्होंने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी और सिर्फ चड्डी में ही बैठ गए। किरण चाची बाथरूम से निकली और चाचा के सामने आकर खड़ी हो गयी; उन्होंने गाउन पहन रखा था।चाचा ने अपना मुंह चाची के गुदाज पेट पर रगड़ प्रिया और उसके गाउन की गाँठ खोल दी। चाची ने बाकी बचा काम खुद किया और गाउन को कंधे से गिरा प्रिया। चाची ने नीचे सिर्फ पेंटी पहन रखी थी।

चाची के मोटे मोटे चुचे बिल्कुल नंगे थे और चाचा के सर से टकरा रहे थे। मैंने इतने बड़े चुचे पहली बार देखे थे… मेरे मुंह से “आउउ” निकल गया। ऋतु जो मेरे आगे खड़ी हुई थी उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी और बोली- वाह… किरण चाची की ब्रेस्ट कितनी बड़ी और सुंदर है. तुम्हारी तो पसंदीदा चीज है न इतनी बड़ी चूचियां… है ना?मैंने सिर्फ हम्म्म्म कहा और दोबारा वहीं देखने लगा। मेरा लंड अब फिर से खड़ा हो रहा था और ऋतु, मेरी बहन की की गांड से टकरा रहा था.

चाचा ने चाची की कच्छी भी उतार दी और उसे पूरी नंगी कर प्रिया…”क्या चीज है यार पूरी नंगी चाची! ” मैंने मन ही मन कहा।चाची का पूरा शरीर अब मेरे सामने नंगा था, उसकी बड़ी-बड़ी गांड, हल्के बालों वाली चूत और बड़ी बड़ी चूचियां देख कर मेरा इस कमरे में बुरा हाल था।

चाचा ने ऊपर मुंह उठा कर चाची का एक चुचा अपने मुंह में ले लिया और उसे चबाने लगे। चूस वो रहे थे और पानी मेरे मुंह में आ रहा था। चाची थोड़ी देर तक अपने चुचे चाचा से चुसवाती रही और खड़ी हुई मचलती रही। फिर चाची ने चाचा को धक्का देकर लिटा प्रिया और चाचा का अंडरवीयर एक झटके से निकाल फेंका। चाचा का लंड देख कर अब ऋतु का मुंह भी खुल गया… क्योंकि काफी बड़ा था; मेरे लंड से भी बड़ा और मोटा, काले रंग का था, उसकी नसें चमक रही थी।

चाची ने चाचा का लंड अपने मुंह में डाला और उसे चूसने लगी। चाचा ने अपनी आँखें बंद कर ली और मजे लेने लगे। किरण चाची हिल हिल कर चाचा का लंड चूस रही थी तो उनके मोटे मोटे चुचे झटकों से ऊपर नीचे हो रहे थे। आधी बैठने की वजह से उस की गांड बाहर की तरफ उभर कर काफी दिलकश लग रही थी… मैं तो उसके भरे हुए बदन का दीवाना हो गया था।

अचानक चाचा के रूम का दरवाजा खुला और मेरी माँ कमरे में दाखिल हुई।मैं उन्हें एक दम देख कर हैरान रह गया।मम्मी ने भी गाउन पहन रखा था पर उन्हें किरण चाची को चाचा का लंड चूसते देखकर कोई हैरानी नहीं हुई; किरण ने सर उठा कर माँ को देखा तो वो भी बिना किसी हैरानी के उन्हें देख कर मुस्कुरा दी और फिर से लंड चूसने में लग गयी।

जितना हैरान मैं था, उतनी ही ऋतु भी; वो मुंह फाड़े उधर देख रही थी और फिर हैरानी भरी आँखों से मेरी तरफ देखा और आँखों से पूछा- ये क्या हो रहा है?मैंने अपने कंधे उचका दिए और सर हिला प्रिया… मुझे नहीं मालूम कहने के स्टाइल में!

हमने वापिस अन्दर देखा। माँ अब बेड पर जा कर उन के पास बैठ गयी थी, वो दोनों अपने काम में लगे हुए थे और हमारी माँ, चाची को विजय चाचा का लंड चूसते हुए देख रही थी. मेरा तो दिमाग चकरा रहा था कि ये सब हो क्या रहा है।

अब चाचा उठे और मेरी माँ को देख कर मुस्कुराते हुए घूम कर नीचे बैठ गये और किरण चाची को अपनी वाली जगह पर वैसे ही लिटा प्रिया। मेरी माँ ने भी चाचा को निहारा और एक सेक्सी सी स्माइल दी।चाचा ने अपना मुंह किरण की सुलगती हुई चूत पर लगा प्रिया ‘आआआआ आआअह्ह्ह.. म्मम्म… आआ आआह्ह्ह’

पूरा कमरा चाची की गरम आह से गूंज उठा…चाचा चाची की चूत चाट रहे थे, चाची पूरी नंगी थी!मेरी माँ आगे आई और बेड पर चाची के बराबर लेट गयी और अपने हाथ से चाची के बालों को सहलाने लगी। विजय चाचा पूरी तन्मन्यता से चाची की चूत चाट रहा था।

अचानक उन्होंने एक हाथ बढ़ा कर मेरी माँ के गाउन में डाल प्रिया। मेरी हैरानी की कोई रीमा न रही जब मेरी माँ ने चाचा को रोकने के बजाय अपनी टाँगें थोड़ी और चौड़ी कर ली और विजय के हाथ को अपनी चूत तक पहुचने में मदद की… मैं ये देखकर सुन्न रह गया।

मेरी माँ पूर्णिमा अब चाची के बगल में उसी अवस्था में लेट गयी और अपनी आँखें बंद कर ली और फिर उन्होंने अपने गाउन को खोला और अपने सर के ऊपर से घुमा कर उतार प्रिया और अब वो भी चाची की तरह बेड पर उनकी बगल में नंगी लेटी हुई थी।

मैंने पहली बार अपनी माँ को नंगी देखा था, मैं उनके बदन को देखता रह गया। अब समझ आ रहा था कि ऋतु किस पर गयी है; साफ़ सुथरा रंग, मोटे और गोल गोल चुचे, ऋतु से थोड़े बड़े पर किरण से छोटे, और उन पर पिंक कलर के निप्पल अलग ही चमक रहे थे।उनका सपाट पेट, जिस पर ऑपरेशन के हल्के मार्क्स थे और उसके नीचे उनकी बिल्कुल साफ़ और चिकनी बिला बालों वाली चूत…हालांकि हम दूसरे कमरे में थे पर मम्मी की चूत की बनावट काफी साफ़ दिखाई दे रही थी।

मेरा तो लंड खड़ा हो कर फुंफकारने लगा जिसे ऋतु ने अपनी गांड पर महसूस किया; उसने अपनी गांड का दबाव पीछे करके मेरे लंड को और भड़का प्रिया।

चाचा अपनी पत्नी की चूत चाट रहा था और अपनी भाभी की चूत में अपनी उंगलियाँ डालकर उन्हें मजा दे रहा था। पूरे कमरे में दो औरतों की हल्की हल्की सिसकारियां गूंज रही थी। फिर विजय चाचा ने अपना चूत में भीगा हुआ सर उठाया और अपनी भाभी यानिमेरी माँ की चूतपर टिका प्रिया। वो एक दम उछल पड़ी और अपनी आँखें खोल कर विजय यानि अपने देवर को देखा और उसके सर के बाल हल्के से पकड़ कर उसे अपनी चूत में दबाने लगी। विजय दूसरे हाथ से चाची की चूत को मजा दे रहा था।

मुझे और ऋतु को विश्वास नहीं हो रहा था कि हमारी माँ इस तरह की हो सकती है। मेरे मन में ख्याल आया कि पता नहीं पापा को इसके बारे में कुछ मालूम है या नहीं… कि उनकी बीवी उन्ही के छोटे भाई के साथ मस्ती कर रही है और अपनी चूत चटवा रही है।

पूरे कमरे में सेक्स की हवा फैली हुई थी। मैंने घड़ी की तरफ देखा, रात के 11:30 बज रहे थे; पूजा सो रही थी; मैं और ऋतु विजय चाचा के रूम में बीच से बने झरोखे से देख रहे थे और हमारी माँ अपने देवर विजय और देवरानी किरण के साथ नंगी पलंग पर लेटी मजे ले रही थी।

मेरा दिमाग सिर्फ ये सोचने में लगा हुआ था कि मम्मी ये सब सेक्स, चुदाई वगैरा विजय चाचा के साथ कब से कर रही है? चाची को इससे कोई परेशानी क्यों नहीं है… और पापा को क्या इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं है?पर मुझे मेरे मेरे सभी सवालों का जवाब जल्दी ही मिल गया। पापा कमरे में दाखिल हुए… बिल्कुल नंगे… उनका लंड खड़ा हुआ था और वो सीधे बेड के पास आये और नंगी लेटी हुई किरण चाची की चूत में अपना लंड पेल प्रिया।

मेरी और ऋतु की हैरानी की रीमा न रही; उनका लंड अपने छोटे भाई की पत्नी जो बहु के समान होती है उनकी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था।अब मुझे सब समझ आ रहा था कि ये लोग हर साल यहाँ इकठ्ठा होते हैं और एक दूसरे की बीबी और पति से मजा लेते हैं। मैंने स्वेपिंग के बारे में और ग्रुप सेक्स के बारे में सुना था पर आज देख भी रहा था। पर मैंने ये कभी नहीं सोचा था की मैं ये सब अपने ही परिवार के साथ होते हुए देखूंगा।

मेरा लंड ये सब देखकर अकड़ कर दर्द करने लगा था’ मैंने अपनी शोर्ट्स गिरा दी और अपने लंड को हाथों में लेकर और माँ की चूत पर विजय चाचा का चेहरा देख कर हिलाने लगा।उधर ऋतु के तो होश ही उड़ गए थे अपने पापा का लम्बा, गोरा और जानदार लंड देख कर… पर जल्दी ही वो भी सब कुछ समझते हुए हालात के मजे लेने लगी थी और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर जा लगा और दूसरा हाथ घुमा कर मेरे लंड को पीछे से पकड़ लिया और मेरे से और ज्यादा चिपक गयी।

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ऋतु- मम्मम रोहन… देखो तो जरा, हमारे पापा का लंड कितना शानदार है!वो था भी शानदार, चाचा के लंड जितना ही बड़ा… पर गोरा चिट्टा!

चाची की चूत में मेरे पापा का लंड जाते ही चाची गांड उछाल उछाल कर अपनी चूत चुदवाने लगी। पापा ने अपने हाथ उसके मोटे मोटे चूचों पर टिका दिए और मसलने लगे; फिर थोड़ा झुके और उनके दायें चुचे पर अपने होंठ टिका दिए।

मेरे आगे खड़ी ऋतु ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे पापा वो सब उसके साथ कर रहे है क्योंकि वो उनके झटके के साथ साथ अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी और पापा द्वारा चाची के चुचे पर मुंह लगते ही वो भी सिहर उठी और अपनी चूत से हाथ हटा कर अपने निप्पल को उमेठने लगी।ऋतु ने एक झटके में अपनी टी शर्ट उतार दी और अब वो अपने आगे झूलते हुए मोटे मोटे चूचों को एक एक कर के दबा रही थी और लम्बी लम्बी सिसकारियां ले रही थी।

मैं समझ गया लो मेरी बहन को उसके पापा का लंड पसंद आ गया है… जैसे मुझे मम्मी का बदन और उनकी चूत पसंद आ गयी है।

मम्मी ने अपनी आँखें खोली और उठ कर बैठ गयी; उसने विजय चाचा के चेहरे को पकड़ कर उठाया और बड़ी व्याकुलता से अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए। फिर तो कामुकता का तांडव होने लगा बेड पर… विजय चाचू माँ के होंठ ऐसे चूस रहे थे जैसे उन्हें कच्चा ही चबा जायेंगे; उनके मुंह से तरह तरह की आवाजें आ रही थी।

माँ ने चाचा के चेहरे पर लगे अपने रस को सफा चट कर प्रिया। मम्मी उनकी घनी मूंछों से ढके होंठों को वो चबा रही थी और बीच बीच में उनकी मूंछों पर भी अपनी लम्बी जीभ फिरा रही थी।विजय चाचा से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने माँ को दोबारा लिटा प्रिया और अपना तन तनाता हुआ लंड मां की गीली चूत में पेल प्रिया.आआआ आऐईई ईइ मररर गयीईई…” माँ धीरे से चिल्लाई।

मेरा तो बुरा हाल हो रहा था अपनी माँ को अपने सामने चुदते हुए देख कर; पापा भी अपनी पूरी स्पीड में चाची की चूत को चोद रहे थे। ऋतु की नजरें पापा के लंड से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।

अचानक चाची ने पापा के लंड को अपनी चूत में से निकाल प्रिया और बेड पर उलटी हो कर कुतिया की तरह बैठ गयी। पापा ने अपना चेहरा चाची की गांड से चिपका प्रिया। मैंने नोट किया कि पापा किरण चाची की चूत नहीं गांड का छेद चाट रहे है… मेरी उत्तेजना अपनी चरम रीमा पर थी।

पापा उठे और अपने लंड को चाची की गांड के छेद से सटाया और आगे की तरफ धक्का मारा। चाची तो मजे के मारे दोहरी हो गयी… ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’उसकी गांड में पापा का लंड फ़चाआअक की आवाज के साथ घुस गया।

पापा अब चाची की गांड मार रहे थे। दोनों के चेहरे देख कर यही लगता था की उन्हें इसमें चूत मारने से भी ज्यादा मजा आ रहा है।ये देखकर ऋतु की सांसे तेज हो गयी और उसने अपने हाथों की गति मेरे लंड पर बड़ा दी और अपनी गांड को पीछे करके टक्कर मारने लगी।

ऋतु ने अपने दूसरे हाथ से अपनी स्कर्ट उतर दी; नीचे उसने पेंटी नहीं पहनी थी; अब उसके गोल चूतड़ मेरे लंड के सुपारे से टकरा रहे थे; वो उत्तेजना के मारे कांप रही थी।ऐसा मैंने पहली बार देखा था।वो थोड़ा झुकी और अपनी गांड को फैला कर अपने हाथ दीवार पर टिका कर खड़ी हो गयी और मेरे लंड को पीछे से अपनी चूत पर टिका प्रिया. मैंने एक हल्का झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी रसीली चूत में जा घुसा।

ऋतु ने अपनी आँखें बंद कर ली और पीछे हो कर तेजी से धक्के मारने लगी. फिर तकरीबन 5 मिनट बाद अचानक उसने मेरा लंड निकाल प्रिया और उसे पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर टिका प्रिया।मैंने हैरानी से उसकी तरफ देखा… तो ऋतु बोली- प्लीज… मेरी गांड में अपना लंड डाल दो!मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई उसे ना कहने की… मैंने ऋतु की चूत के रस से भीगा हुआ अपना लंड उसकी गांड के छेद पर ठीक से लगाया और एक करारा झटका मारा।ऋतु चिल्लाई- आआआआ आआआ अह्ह्ह्ह… मररर… गयी…तो मैंने उसके मुंह में अपनी उंगलियाँ डाल दी ताकि वो ज्यादा न चिल्ला पाए; वो उन्हें चूसने और काटने लगी’ उसके मुंह की लार ने मेरी सारी उंगलियाँ गीली कर दी और मैंने वही गीला हाथ उसके चेहरे पर मल कर उसे और ज्यादा उत्तेजित कर प्रिया।

मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी गांड में घुसा हुआ था। मैंने उसे बाहर निकाला और अगली बार और ज्यादा तेजी से अन्दर धकेल प्रिया… वो पहले झटके से उबर भी नहीं पायी थी कि दूसरे ने तो उसकी गांड ही फाड़ दी.

ऋतु थोड़ी देर के लिए नम सी हो गयी, उसका शरीर एकदम ढीला हो गया और वो मेरे हाथों में लटक सी गयी… वो झड़ भी चुकी थी।

वहां दूसरे रूम में पापा ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर से हुंकारते हुए अपना टैंक किरण चाची की चूत में खाली कर प्रिया। चाची अपनी मोटी गांड मटका- मटका कर अपने जेठ का लंड और उसका रस अपनी चूत के अन्दर ले रही थी। चाची का चेहरा हमारी तरफ था और वो अपने मुंह में अपनी उँगलियाँ डाले चूस रही थी… जैसे कोई लंड हो।

विजय चाचू भी लगभग झड़ने के करीब थे, उन्होंने एक झटके से मेरी माँ को ऊपर उठा लिया जैसे कोई गुड़िया हो और खड़े खड़े उन्हें चोदने लगे। माँ ने अपने हाथ चाचू की गर्दन के चारों तरफ लपेट लिए थे और टांगें उनकी कमर पर।

तभी चाचा ने एक जोर का झटका प्रिया और अपने रॉकेट जैसी वीर्य की धारें मेरी माँ की चूत में उछाल दी; माँ भी झड़ने लगी हवा में लटकी हुई; मेरी माँ की चूत में से चाचा का रस टपक कर नीचे गिर रहा था।मैंने माँ को झड़ते देखा तो मेरा लंड भी जवाब दे गया और मैंने भी अपना वीर्य अपनी बहन की कोमल गांड में डाल प्रिया और अपने हाथ आगे करके उसके उभारों को पकड़ा और दबाने लगा।

ऋतु ने अपनी कमर सीधी करी और अपने एक हाथ को पीछे करके मेरे सर के पीछे लगाया और अपने होंठ मुझ से जोड़ दिए। मेरा लंड फिसल कर उसकी गुदाज गांड से बाहर आ गया और उसके पीछे पीछे मेरा ढेर सारा रस भी बाहर निकल आया।

हम एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रहे थे। ऋतु ने आँखें खोली और अपनी नशीली आँखों से मुझे देखकर थैंक्स बोली… पर तभी पीछे देख कर वही आँखें फैल कर चौड़ी हो गयी।

हमारी कजिन सिस्टर पूजा उठ चुकी थी और हमारी कामुकता का नंगा नाच आँखें फाड़े देख रही थी।

कामुकता से लबालब मेरी यह कहानी जारी रहेगी अगले भाग में।देवर भाभी, जेठ बहू के इस स्वैपिंग गेम पर आप अपने विचार मुझे मेल कर सकते हैं, इंस्टाग्राम पर भी मुझ से जुड़ सकते हैं।support@mohakkisse.com/ass_sin_cest

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
र

राज वीर 69

3 months ago

जीजा साली की नोक-झोंक और फिर ये रोमांस! लाजवाब कहानी।

अ

अरुण सिंह 54

3 months ago

रिश्तों की ये कहानी सच में बहुत ही कामुक थी। अंत बहुत ही गर्म था।

म

माया प्रजापति

4 months ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

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