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भाई बहन पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 576 बार

दीदी के दूध की चाय से चुदाई तक का सफर- 3

अभिनय तिग्गा

13 Sep 2018 को प्रकाशित

दीदी के दूध की चाय से चुदाई तक का सफर- 3
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भाई Xxx बहन सेक्स कहानी में मेरी दीदी को मैंने सेक्स के लिए तैयार करके अपना लंड दिखाया तो उन्हें लंड पसंद आया. फिर तो मैंने दीदी की चूत और गांड दोनों मारी.

कहानी के दूसरे भागदीदी मेरे साथ सेक्स के लिए तैयार हो गईमें आपने पढ़ा कि अपनी चूचियों में से फालतू दूध चुसवाने के चक्कर में दीदी मेरे साथ सेक्स करने को मान गयी.

अब आगे भाई Xxx बहन सेक्स कहानी:

दीदी ने उसे सारा का सारा चाट-चाटकर पी लिया, “भाई, इतना मीठा लंड अब तक मुझसे छुपाकर रखा था! लेकिन अब मुझे ये रोज़ चाहिए!”

चूँकि अब मेरा लंड मुरझा चुका था, तो मैं दीदी को किस करने लगा।दीदी भी मेरा साथ देने लगीं।

सच कहूँ, तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।मैं दीदी की जीभ को भी चूस रहा था जिस पर अभी-अभी दीदी ने मेरे लंड का रस पिया था।बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर मैंने दीदी के पूरे बदन को चूमने और चाटने लगा।

मैंने दीदी को पेट के बल लिटा दिया।फिर पहले दीदी के कान, गला, फिर पीठ को चूमते हुए उनकी बड़ी-बड़ी गद्देदार गांड तक पहुँच गया।

मैं पहली बार दीदी की इतनी बड़ी गांड इतनी नज़दीक से देख रहा था।मैं तुरंत जीभ निकालकर दीदी की मस्त गांड को चाटने लगा, चाट-चाटकर पूरे गांड को गीला कर दिया जो एकदम किसी शीशे की तरह चमकने लगी।

फिर मैंने दोनों हाथों से दीदी के गांड के दरार को फैलाया और उनकी गांड के छेद को जीभ से कुरेदने लगा।दीदी की गांड का छेद भूरे रंग का था लेकिन बड़ा ही टेस्टी था।

जीभ डाल-डालकर चाटने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।दीदी को भी बड़ा मज़ा आ रहा था।वो भी ‘आह उह आह उफ मेरे भाई, बड़ा मज़ा आ रहा है! और चाट अपनी दीदी की गांड!’ बोलकर मज़े ले रही थीं।वे लगातार आह आह उह उह उफ कर रही थीं।

दीदी की ऐसी सिसकारियाँ सुनकर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा।वे भी पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं.अगर उन्हें बिना चोदे छोड़ दिया जाए तो शायद वो ज़िंदा ही न रह पाएँ, ऐसा लग रहा था।

दीदी, “भाई, और मत तड़पा अपनी दीदी को! डाल दे अपना लंड मेरी चूत में!”

मैंने भी देर करना उचित नहीं समझा, मैंने अपना लंड सीधे दीदी की चूत पर टिकाया और ज़ोर का धक्का दिया।दीदी के मुँह से आह निकल गई, “आराम से कर भाई! तेरा बहुत बड़ा लंड है। दर्द हो रहा है!”

मैंने धीरे-धीरे करके दीदी को चूमते-चूमते कब पूरा लंड दीदी की चूत में उतार दिया, दीदी को भी पता नहीं चला।फिर मैं चुदाई करने लगा।

दीदी को भी मज़ा आने लगा।वे ज़ोर-ज़ोर से ‘आह आह … उह उह उफ … ये आह आह वाह आह’ कर रही थीं।

वे मुझे गाली देने लगीं, “ज़ोर से चोद मुझे! और बन जा बहनचोद!”मैंने कहा, “ठीक है दीदी!” और चोदने लगा।

दीदी फिर से गाली देने लगीं, “साले भड़वे, अब मुझे तू दीदी मत बोल! तूने मुझे चोदकर भाई-बहन का रिश्ता तार-तार कर दिया है। अब मैं तेरी दीदी नहीं रही। तू मुझे मेरे नाम से बोल। उषा बोल, उषा रंडी बोल, लेकिन दीदी मत बोल! आज से मैं तेरी दीदी नहीं, तेरी बीवी बन गई हूँ। तू जब चाहे, मुझे तब चोद सकता है। तू इतनी अच्छी चुदाई करता है। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। वरना मैं किसी और से शादी ही नहीं करती!”

मैं दीदी को ऐसे चोद रहा था कि पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाज़ से गूँज रहा था जो चुदाई में मज़ा को दोगुना कर रहा था।

मैंने दीदी को आधे घंटे तक ज़ोरदार चोदा।इस दौरान दीदी दो बार झड़ गई थीं।

अब मेरा निकलने वाला था।मैंने दीदी से पूछा, “दीदी, मेरा वीर्य निकलने वाला है!”

दीदी, “मेरे मुँह में निकाल! मुझे तेरा सारा रस चाट-चाटकर पीना है!”

मैंने दीदी की चूत से लंड निकालकर उनके मुँह में दे दिया।दीदी ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगीं।फिर मेरे लंड का सारा रस दीदी के मुँह में गिरने लगा।

दीदी ने एक बूँद भी बर्बाद नहीं होने दिया और सारा का सारा रस चट कर गईं।

मैंने फिर से दीदी का मीठा, रसीला दूध पिया और फिर से चुदाई करने लगा।मैं पूरी रात दीदी की चुदाई करता रहा।

दीदी भी अपनी ज़िंदगी में पहली बार चुदाई का भरपूर मज़ा उठा रही थीं।सुबह जब मेरी आँख खुली, तो मैंने देखा कि दीदी बिस्तर पर नहीं हैं।मैं उठकर किचन में पानी पीने के लिए जाने लगा।

तभी देखा कि दीदी किचन में अपना दूध दबा-दबाकर निकाल रही हैं ताकि चाय बना सकें।

जब मैं किचन में पहुँच गया, तो दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी।वो मुस्कुरा रही थीं और अपना दूध निकाल रही थीं।

दीदी, “भाई, दूध पीना है क्या?”मैंने कहा, “हाँ!”

दीदी ने अपनी एक चूची मेरे मुँह में डाल दी और दबाने लगीं।मैंने कुछ देर दीदी का दूध पिया, फिर फ्रेश होने चला गया।

जब वापस नहाकर आया, तो दीदी ने मेरे साथ चाय-नाश्ता किया।

मैं दीदी को देखता रहा और सोचने लगा कि कितनी प्यारी हैं मेरी दीदी। सच में, रात की चुदाई के बाद दीदी का अंग-अंग खिल गया था।दीदी मुझे और भी कामुक लग रही थीं।

नाश्ता करने के बाद दीदी घर के काम में लग गईं और मैं टीवी देखने लगा।

टीवी देखते-देखते सो गया।शायद रात की चुदाई के कारण ठीक से सो नहीं पाया था।यही वजह थी।

कुछ देर बाद मेरी नींद खुली।मैंने देखा कि दीदी सामने ही बैठी हैं और बच्चे को अपना दूध पिला रही हैं।बच्चा भी आराम से दूध पी रहा था।इस बार खास बात ये थी कि दीदी ने अपने दूध को ऐसे ही खुले रखकर दूध पिला रही थीं।

मैं उठा।दीदी, “भाई, उठ गया?”मैं, “हाँ दीदी!”

मैंने कहा, “पता नहीं दीदी, इतनी नींद क्यों लग रही है?”

दीदी हँसने लगीं और बोलीं, “अरे भाई, तूने रात में इतनी मेहनत जो की थी! उसी का फल है ये!”

फिर हम दोनों हँसने लगे।

मैंने पूछा, “दीदी, अब बच्चे की तबीयत कैसी है?”दीदी, “शायद दवा ने तेज़ी से असर किया। तभी तो जल्दी ठीक हो गया है!”

मैंने कहा, “दीदी, मुझे भी आपका दूध पीना है!”दीदी, “आजा, पी ले! किसने तुझे मना किया है? तेरे लिए ही तो मैंने इतने बड़े दूध उगाए हैं ताकि मेरा भाई जी भरकर अपनी दीदी का दूध पी सके!”

दीदी ने अपने दोनों दूध नंगे कर दिए।एक चूची को बच्चा पी रहा था और एक को मैं दबा-दबाकर पी रहा था।

उधर दीदी की आह आह उह उह उफ ओह आह वोह निकल रही थी।बच्चा दूध पीते-पीते सो गया।

दीदी, “चलो, बेडरूम में चलते हैं!”मैं भी दीदी के पीछे-पीछे चलने लगा।

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दीदी ने बच्चे को सुलाकर बेड में आ गईं और मुझे अपना दूध पिलाने लगीं।वे गर्म होने लगीं।

मैंने उनके और अपने सारे कपड़े उतारकर दोनों को नंगे कर दिया।मैं फिर उनके दूध छोड़कर चूत का रस पीने लगा और दीदी की चुदाई करने लगा।

फिर मैंने दीदी को घोड़ी बनने को कहा और उनकी चुदाई करने लगा।

साथ-साथ उनकी बड़ी-सी गांड में उँगली कर रहा था।वे आहें भर रही थीं और मैं उन्हें लगातार चोदे जा रहा था।

उधर उनके बूब्स हवा में उछल रहे थे।बड़ा ही कामुक नज़ारा था।

चारों तरफ फच्च फच्च की आवाज़ आ रही थी।मैंने दीदी से कहा, “दीदी, मुझे तुम्हारी गांड बहुत अच्छी लगती है। मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ!”

दीदी, “भाई, मैं जानती हूँ कि तुझे मेरी गांड बहुत अच्छी लगती है। जिस दिन से तू आया है, उस दिन से ही तेरी नज़र मेरी गांड पर ही तो है। और हो भी क्यों न? मेरी गांड ही ऐसी है। किसी का भी लंड खड़ा हो जाए, तो फिर मेरा भाई क्या चीज़ है!”

चोदते-चोदते मेरा लंड अकड़ने लगा।मैंने तुरंत दीदी को सीधा करके अपना लंड उनके मुँह में दिया।वो सारा रस पी गईं।

लंड का रस निकल जाने से मेरा लंड सो गया।

मैंने दीदी से कहा, “दीदी, मुझे तुम्हारी गांड मारनी है। मेरे लंड को खड़ा कर दो!”दीदी, “भाई, अभी मुझे बहुत काम है। तुम ऐसा करो, बाद में मेरी गांड मार लेना। मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ!”

दीदी अपने कपड़े उठाने लगीं पहनने के लिए।मैंने दीदी का हाथ पकड़ लिया और मना कर दिया।

मैं, “दीदी, जब घर में हम दो ही हैं, तो फिर हमारे बीच ये पर्दा कैसा!”

दीदी भी मेरी बात मान लीं और नंगी ही घर का सारा काम करने लगीं।मैं भी घर में नंगा ही घूमता था क्योंकि दीदी के ससुराल में घर गाँव से थोड़ा बाहर की तरफ एक ही था।जिसके चारों तरफ खेत ही खेत थे।थोड़े दूर बाद ही कोई घर दिखता था।

हमें घर में नंगे रहने में कोई दिक्कत नहीं थी।वैसे भी मुझे दीदी नंगी ही बहुत सुंदर लगती थीं।

दीदी को किचन में गए काफी देर हो गई थी।

मुझसे रहा नहीं जा रहा था।मैं भी किचन की तरफ जाने लगा। देखा, दीदी खाना बना रही हैं और उनकी गांड मेरी तरफ है।

इस समय दीदी थोड़ा झुकी हुई थीं।दीदी के गांड के छेद और चूत दिखाई दे रहे थे।

इसे देखकर मेरा सोया हुआ लंड फिर से खड़ा हो चुका था।मैंने उसे हाथ से सहलाया और किचन में चला गया।

पीछे से दीदी को पकड़कर अपना मुँह दीदी की मस्त गदराई गांड में डाल दिया और चाटने लगा।

दीदी पीछे मुड़ीं और हँसने लगीं, “क्या भाई, तुम्हें तो थोड़ी भी सब्र नहीं है!”

मैंने दीदी की कोई बात नहीं सुनी और मन भरकर दीदी की गांड का स्वाद लिया।फिर लंड निकालकर दीदी की गांड में डालने लगा।

दीदी, “भाई, दर्द कर रहा है! निकाल लो। मुझे बहुत समय हो गया गांड मरवाए हुए!”

इतना कहकर वो सरसों के तेल की बोतल मुझे दे दी।मैंने उसे अपने लंड और दीदी के गांड के छेद में बहुत सारा लगाया।फिर दीदी की गांड में डालने लगा।

तेल की फिसलन की वजह से मेरा पूरा लंड दो-तीन झटकों में दीदी की पूरी गांड में उतर गया।दीदी चीखने लगीं, “हाय, मारा डाला! फाड़ दी मेरी गांड! कितना कमीना भाई है मेरा!”

शायद इतना बड़ा लंड पहली बार दीदी की गांड में घुसा था, इसलिए इतना दर्द हो रहा था।

मैंने थोड़ी देर अपने लंड को दीदी की गांड में वैसी ही रखा और दीदी को किस करता रहा।

दोनों हाथों से उनकी चूचियों को दबाने लगा।जब दीदी नॉर्मल दिखने लगीं, तो मैंनेबहन की गांडमें अपने धक्कों की रफ्तार तेज़ कर दी।

दीदी की आहें निकलने लगीं।वे ‘आह आह उह उह उह हांह अह आह’ कर रही थीं।

दीदी, “और ज़ोर से चोद मेरे भाई! मेरे दूसरे पतिदेव, आह आह! चोद के संतुष्ट कर दे आज अपनी उषा को! बना ले मुझे अपनी उषा रंडी!”

मैं लगातार धक्के लगाए जा रहा था।मज़े के सागर में गोते लगा रहा था।

दीदी भी ऐसी शानदार चुदाई पहली बार कर रही थीं।वो भी एक अलग ही दुनिया में थीं।

चोदते-चोदते कब मेरे लंड ने दीदी की पूरी गांड मेरे वीर्य रस से भर दी, पता ही नहीं चला।मैं दीदी के ऊपर ही लुढ़क गया।

फिर दीदी ने मुझे अपने ऊपर से हटाया और खाना तैयार करने लगीं।फिर मैंने और दीदी ने साथ में डिनर किया।

दीदी ने मुझे अपने साथ बेडरूम में सोने को कहा।फिर हमने रातभर चुदाई की।

दोस्तो, मैं जितने दिन दीदी के यहाँ रहा, उनकी जमकर चुदाई की।भाई Xxx बहन सेक्स चलते लगभग एक महीना होने वाला था और जीजू आने वाले थे।

मैंने दीदी से कहा, “दीदी, मुझे जीजू के आने से पहले ही यहाँ से निकलना होगा। नहीं तो उन्हें कुछ शक न हो जाए हम दोनों के रिश्ते के बारे में!”दीदी, “तुम ठीक कह रहे हो।”

जीजू के आने के एक दिन पहले मैंने दीदी की ज़ोरदार चुदाई की।दीदी के दूध की चाय पीकर वहाँ से जा रहा था।

दीदी, “रुको, मैं अभी आई!”दीदी साड़ी पहनकर तैयार हो गईं और किचन से दो बोतल लेकर आईं और मुझे दे दीं।

मैंने पूछा, “दीदी, ये क्या है?”

दीदी, “भाई, इसमें मेरा दूध है, जो तुझे बहुत पसंद है। इसलिए मैंने इसमें तेरे ले जाने के लिए पैक कर दिया है!”मैंने दोनों दूध से भरी बोतलें अपने बैग में रख लीं।

फिर दीदी को ज़ोरदार किस किया और बोला, “आई लव यू दीदी!”दीदी, “आई लव यू टू भाई!”

दीदी मेरे जाने से रो रही थीं।मैंने दीदी से प्रॉमिस किया, “मैं फिर आऊँगा!” कहकर वहाँ से निकल गया।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये भाई Xxx बहन सेक्स कहानी? ज़रूर बताएँ।support@mohakkisse.com

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दीदी के दूध की चाय से चुदाई तक का सफर

कुल भाग: 3
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