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मेरी बीवी की उलटन पलटन-6

मेरी बीवी की उलटन पलटन-6
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मेरी इस सेक्सी कहानी के पहले पांच भागों में पढ़ा कि मैं क्रोस ड्रेसर हूँ, लड़की बन कर रहना पसंद करता हूँ, मेरी शादी हो चुकी है लेकिन मेरी बीवी और उसका यार मुझे अपनी पत्नी और गुलाम की तरह रखते हैं. मेरी मम्मी भी उन दोनों की गुलाम और रखैल है.

होली के अगले दिन …सबकी छुट्टी तो तो थी, सुबह नाश्ते के बाद सब लोग बैठे थे तब उपिन्दर बोला- चलो पिक्चर देखने चलते हैं.मम्मी उसके पास ही बैठी हुई थीं, पूरी बेशर्मी से हाथ उसकी पैंट के सेन्टर पे रख के बोली- छोड़ो, यहीं घर में मज़े करते हैं.

उपिन्दर ने मेरी माँ की चुचियाँ मसलीं- वापस घर पे आके तो तेरी लूंगा ही, वहां अंधेरे में प्रोग्राम शुरू करेंगे, मज़ा आएगा.

अंशु ने सबके कपड़े तय किये।उपिन्दर और राकेश कुर्ते पाजामे में, बिना कच्छे के, वो खुद सलवार कमीज़ में, मैं यानि विजय यानि कामिनी साड़ी में, शैली जीन्स और टाइट टॉप में और मम्मी स्कर्ट टॉप में।

मम्मी ने थोड़ी आनाकानी की पर मान गयी।

सच कह रही हूँ मम्मी माल लग रही थीं; चिकनी जाँघें जो आज स्कर्ट पहनने के लिए ही क्लीन की गयी थीं, स्कर्ट में हिलते हुए कूल्हे और टाइट टॉप में बड़ी बड़ी छातियाँ।

हम सिनेमा हॉल में पहुंचे। वहाँ बस गिनती के लोग थे। उपिन्दर ने कोने की सीटें ली थीं, आसपास कोई नहीं।हम बैठे ऐसे … कोने में उपिन्दर, फिर मम्मी, राकेश, शैली, अंशु और मैं।

पिक्चर शुरू हुई, हॉल में अंधेरा हो गया। शराब की बोतल साथ में थी ही … हम उसी में से नीट घूंट भरने लगे।

मैं पिक्चर देखने लगी। मेरा ध्यान पिक्चर में लग गया। थोड़ी देर में अंशु ने मेरा चेहरा अपनी और घुमाया तब मैंने देखा कि अंशु की सलवार और पैंटी उतरी हुई थी, मेरी बहन उसके सामने घुटनों पे और उसका चेहरा मेरे पति अंशु की जांघों के बीच में।और उधर मेरी माँ की चड्डी गायब थी, स्कर्ट उठी हुई है और उपिन्दर और राकेश की एक एक उंगली उसकी भोसड़ी में घुसी हुई है। दोनों मम्मी की चुचियाँ दबा रहे थे और चूत में उंगली कर रहे थे और मेरी माँ आंखें बन्द कर के मज़ा ले रही थी।

अंशु मेरे होंठ चूसने लगी। उसके होंठों का रस मेरे मुंह में आने लगा। राकेश और उपिन्दर की उंगलियां मम्मी की गहराई में और शैली की जीभ अंशु के अंदर तेज़ी से चलने लगी, दोनों आनन्द से आआह आआह करने लगी और फिर दोनों की चूत गीली हो गयी।

शैली अपनी सीट पे आ गयी। अंशु ने भी सलवार पहन ली।इंटरवल हो गया; हॉल में रोशनी हो गयी। हमने समोसे और कोल्ड ड्रिंक्स ले लिए, खाने पीने लगे।पिक्चर फिर शुरू ही गयी।अंधेरा हो गया।

दोनों मर्दों ने पाजामे के नाड़े खोले और मर्दाने हथियार बाहर आ गए। मम्मी एक एक हाथ में पकड़ के प्यार से सहलाने लगी।उपिन्दर बोला- क्यों मालिनी, मज़ा आ रहा है पिक्चर में?“बहुत, दामाद जी”“अब किसका चूसेगी?”“बारी बारी दोनों का चूस लूंगी.”

“पर हमें तो एक साथ पानी निकालना है.”“तो एक बेटी को बुला लेती हूँ.”“किसको बुलाएगी?”“जिसे तुम कहो!”तब राकेश ने कहा- कामिनी भाभी को!“आजा कामिनी!”

अब मैं और मम्मी ज़मीन पे और लौड़े मुंह में। मैं राकेश का और मेरी माँ उपिन्दर का लण्ड चूसने लगी। सच गर्म लौड़ा मुंह में आते ही मज़ा आ गया। दोनों मर्द आंखें बन्द करके चुसाई का मज़ा लेने लगे और अंशु और शैली हमारी पिक्चर देखने लगीं।

थोड़ी देर में हमारे होंठों के बीच में सफेद बौछार हो गयी।पिक्चर के बाद सब घर आ गए।

मूड बना हुआ था ही। हॉल में बिस्तर लगा दिए गए।

शैली बोली- अब कैसे करना है, क्या करना है?तो मम्मी ने कहा- करना क्या है? वही सदियों पुराना खेल, लण्ड चूत चूचियों होंठों और गांड का!“वो तो ठीक है मम्मी … पर कौन किसके साथ?”

फैसला अंशु ने किया- आज मेरा मन कर रहा है एक साथ अपने दोनों छेद चुसवाने और चटवाने का; तो मेरी बीवी और साली मेरे साथ और उपिन्दर और राकेश तुम दोनों मेरी सास को जैसे चाहो पेलो.

अंशु करवट लेट गयी; आगे शैली और पीछे मैं … हम धीरे धीरे उसकी चूत और गांड को चूमने चूसने चाटने लगे।मैंने कहा- अंशु इस पोजीशन में हमें कुछ दिख नहीं रहा है कि मम्मी का रंगारंग प्रोग्राम कैसे चल रहा है.“ठीक है मैं तुम दोनों को बताती हूँ.”

दोनों मर्द नँगे हो चुके हैं; तुम्हारी मम्मी की भी स्कर्ट और टॉप उतर चुका है। उपिन्दर उसकी ब्रा खोल रहा है, राकेश पैंटी उतार रहा है। पूरी नंगी करके दोनों ने तुम्हारी माँ को दबोच रखा है। उपिन्दर होंठ चूस रहा है राकेश चुचियाँ मसल रहा है। अब उपिन्दर ने लण्ड मुंह में दे प्रिया है, राकेश अभी भी चूचियों का बैंड बजा रहा है। हाए राम ये क्या … दोनों ने लौड़े मुंह में दे दिए हैं। तुम्हारी माँ एक साथ दो लण्ड चूस रही है।

हम दोनों की जीभ अब तेज़ी से चलने लगी। अंशु की चूत गीली होने लगी। बीच बीच में वो अपने हाथ से शैली का सिर अपनी जांघों के बीच में दबाने लगी।और उसकी कमेंट्री चालू थी- अब तुम्हारी मम्मी घोड़ी बन गयी है। राकेश उसके सिर के पास घुटनों पे है और उसने लण्ड मालिनी के मुंह में दे प्रिया पीछे से उपिन्दर ने चूत में। डबल चुदाई शुरू हो गयी। राकेश मुंह चोद रहा है और उपिन्दर भोसड़ी बजा रहा है। धक्के तेज़ हो गए हैं दोनों के लौड़े पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहे हैं। और … और … दोनों ने पानी छोड़ प्रिया।

रात काफी हो चुकी थी। हम सो गए।

अगले दिन:

शाम को मम्मी और शैली को वापस जाना था। सुबह सब लोग उठे, फ्रेश हुए; नहाना, नाश्ता सब हुआ। इस दौरान हल्की फुल्की बातें, चुम्मियां, जफ्फियां हुईं। पर सीरियस दबाना, मसलना, चूसना ऐसा कुछ नहीं हुआ।

सब लोग बैठे हुए थे, इधर उधर की बातें चल रही थीं। चारों औरतें (मैं बता ही चुका हूँ कि मैं खुद को औरत ही समझता हूँ) नाइटी में थीं और दोनों मर्द कुर्ते पाजामे में।पता नहीं क्यों … मुझे लग रहा था कि अंशु और उपिन्दर ने कुछ प्लान बना के रखा है।

तभी अंशु बोली- कामिनी, आज थोड़ी देर के लिए तू विजय बन जा, बस यूं ही तुझे कुर्ते पाजामे में देखने का मन कर रहा है.मैंने जवाब प्रिया- अंशु, तुम्हें पता है, मुझे वो पसन्द नहीं है, पर तुम्हारी बात मैं टाल नहीं सकता.मैं कपड़े बदल के आ गया।

उपिन्दर बोला- अंशु, लंच से पहले दो दो पेग पी लेते हैं, फिर शाम को तो इनको जाना है.शराब शुरू हो गयी।

मेरे पास उपिन्दर बैठा था; मेरे कंधे पे हाथ रख के बोला- विजय तेरी बहन बहुत अच्छी है न!“हाँ”“तुम दोनों एक दूसरे को प्यार भी बहुत करते हो.”“हाँ वो तो है.”“तो आज तू इसे पूरा प्यार कर ले.”“मतलब?”“चोद दे इसे!”“तुम्हें पता है मुझे इसमें मज़ा नहीं आता.”

तब शैली बोली- हाँ मैने कामिनी दीदी के साथ तो बहुत कुछ किया है, एक बार अपने भैया से चुदवाने का मन है.“लेकिन शैली …”पर तब सब लोग कहने लगे और मैं मान गया।

बैडरूम में चारों कुर्सियों पे दर्शकों की तरह बैठे थे और मैं और शैली बिस्तर पे। आलिंगन चुम्बन शुरू हो गए। जल्दी ही हम नँगे हो गए।

मैंने अपनी बहन की चुचियाँ दबाईं, चूसी, चूत को सहलाया, दबाया, चूतड़ों को मसला। फिर वो मेरे खड़े लण्ड को चूसने लगी। और उसके बाद मेरे ऊपर चढ़ गयी, मेरा लौड़ा अपनी चूत में ले लिया और ऊपर नीचे होने लगी।फिर उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया। मैं अपनी बहन को चोदने लगा। सच कहूँ तो बहुत मज़ा नहीं आ रहा था। मर्द के नीचे लेटना, उसका अपने मुंह में या गांड में लेना, या औरत की चूत या गांड चाटने का मज़ा कुछ और ही होता है।

तभी उपिन्दर बोला- 2 मिनट ऐसे ही लेटे रहो.मैं रुक गया।

और फिर असली प्लान शुरू हुआ। दो हाथों ने मेरे चूतड़ फैलाये और उपिन्दर का मस्ताना लण्ड मेरी गांड में घुस गया।उपिन्दर बोला- कामिनी मेरी रानी, प्रोग्राम तो तेरी गांड चोदने का ही था, ये आईडिया अंशु और शैली का था.अंशु बोली- उपिन्दर, अब बातें मत कर, पेल हमारी औरत को!

शैली बोली- हाँ जीजा जी, मारिये दीदी की, मज़ा आ रहा है.और उपिन्दर ने ठोकना शुरू कर प्रिया। उसकी जाँघें मेरे चूतड़ों से टकराने लगी। मेरा लौड़ा शैली की चूत में और होंठ उसके होंठों से जुड़े हुए। और उपिन्दर का लण्ड दनादन मेरी गांड में अंदर बाहर होता हुआ। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। धुंआधार गांड चुदाई के बाद दोनों लौड़ों ने पानी छोड़ प्रिया।

फिर सबने खाना खाया, थोड़ा आराम किया और शाम को मम्मी, शैली और राकेश चले गए। कुछ देर के बाद उपिन्दर भी चला गया।

रात को बिस्तर पे मैं और अंशु, दोनों ब्रा पैंटी में एक दूसरे से लिपटे हुए- कामिनी, सुबह मज़ा आया था?“पहले तुम बताओ तुम्हें देखने में मज़ा आ रहा था?”“बहुत! मुझे क्या, सबको मज़ा आ रहा था। राकेश अपना लण्ड हिला रहा था, तेरी मम्मी चूत में उंगली कर रही थी.”“सच कहूँ तो शुरू में तो बहुत अच्छा नहीं लग रहा था पर जब उपिन्दर मेरे ऊपर आया फिर तो तबियत खुश हो गयी।”

अंशु ने मेरे होंठों से होंठ जोड़ दिए। मेरे होंठ चूसने लगी, अपने होंठों का रस पिलाने लगी। लम्बा, बहुत लम्बा चुम्बन। मेरी ब्रा उतर गई, चुचियाँ दबने लगी।फिर उसने अपनी पैंटी सरकाई और मुझे मुस्कुरा के इशारा किया। मैं नीचे को सरकी, चेहरा उसकी जांघों के बीच में और उसकी चूत को चूमने लगी, चूसने चाटने लगी.रात जवान होने लगी.

कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

रोहित

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

सैम यादव

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

रोहित

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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