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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 701 बार

मेरी बीवी की उलटन पलटन-7

मेरी बीवी की उलटन पलटन-7
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कई दिन बाद:

उस दिन उपिन्दर और अंशु अपने अपने काम से बाहर गए हुए थे। मैंने मम्मी को फोन किया और उसके घर चली गयी।

“ये क्या तूने पैंट कमीज़ क्यों पहनी है?”“मम्मी बस में आना था न … अभी बदल लेती हूँ.”फिर मैंने सलवार कमीज़ पहन ली।दोपहर को खाना खा के सो गयी।

शाम को नींद खुली तो देखा मम्मी किसी से बात कर रही थी, स्पीकर ऑन था।“नमस्ते चौधरी साहब। कैसे हैं आप?”“मैं अच्छी हूँ और अब आप से बात करके तो और अच्छी हो गयी। आप कैसे हैं?”“मैं भी अच्छा हूँ.”“और वो कैसा है?”“वो कौन?”“वो कौन नहीं चौधरी साहब, आपका वो, जो मेरे अंदर बारिश करता है.”“अंदर … बारिश … मैं कुछ समझा नहीं। तू साफ साफ बोल मालिनी.”

मैं समझ गयी कि कोई मम्मी का चोदू यार है।

“चौधरी साहब आप समझ तो सब गए हैं पर मेरे मुंह से सुनना चाहते हैं। ठीक है, आपका लण्ड कैसा है?”“अरे उसी के लिए तो तुझे फोन किया है, फुल खड़ा है, मैं आ रहा हूँ, तेरी लेनी है.”“क्या चौधरी साहब मैं गरीब आपको क्या दे सकती हूँ, क्या लेंगे आप?”“साली मेरी रंडी मेरे से मज़ाक करती है, तेरी गांड लेनी है.”“चूत नहीं?”“नहीं, आज तेरे चूतड़ों के बीच में पेलना है.”

“चौधरी साहब याद है एक बार आप कह रहे थे कि मैं कुछ हट के करना चाहता हूँ.”“नहीं … मुझे याद नहीं तू क्या कह रही है?”“मेरा बेटा आया हुआ है, जो बेटा है पर बेटी जैसा है। अब समझे?”“ओह, समझा। चिकना है? मज़ा देगा? छाती लड़कों की तरह सपाट तो नहीं?”“अरे नहीं चौधरी साहब, छाती तो उसकी है नहीं … भरी भरी चुचियाँ हैं और चूतड़ों से तो पूरी लड़की ही है। और मज़ा देगा नहीं, मज़ा देगी और गांड भी देगी.”“ठीक है। उसे तैयार कर, पूरी छमिया बना दे। मैं आ रहा हूँ। और, घर में दारू है? या मैं लेके आऊं?”“जी, शराब है तो सही, पर आपकी पसन्द की नहीं है.”“ठीक है, मैं थोड़ी देर में पहुंचता हूँ.”

मैं आंखें बन्द कर के लेटी हुई थी। मम्मी ने उठाया और बोली- कपड़े बदल ले, कोई आने वाला है.“क्या मम्मी … जो आये तो मुझे उसके सामने मत बुलाना, मैं सलवार कमीज़ में ही ठीक हूँ, पैंट शर्ट पहनने का मन नहीं है.”“अरे, तुझे पैंट शर्ट नहीं पहननी, लंहगा चोली पहननी है.”“क्या, मैं लहंगे चोली में किसी अजनबी के सामने?”“अरे वो चौधरी साहब हैं, मंत्री हैं.”“तो वो यहाँ क्यों आ रहे हैं?”

“तू समझ वो मेरा बहुत ख्याल रखते हैं, मेरा कोई भी काम हो, करवा देते हैं और मुझे बहुत प्यार भी करते हैं!”“मतलब आपकी चूत पे उनके लण्ड का ठप्पा लगा हुआ है.”मम्मी मुस्कुराई- सिर्फ चूत पे नहीं … बात समझ में आई?मैंने प्यार से मम्मी के गाल पे हाथ फेरे- मैंने सारी बातें सुन ली थीं, तैयार होती हूँ!

मैंने कपड़े उतारे, नहाई, फिर बदन पे सेंट लगाया, ब्रा पैंटी, लहंगा, चोली और फिर ओढ़नी ले ली। ढका हुआ सिर, और ओढ़नी में छुपे हुए मेरी छाती के उभार।मम्मी आयी- मस्त लग रही है तू, चौधरी साहब खुश हो जाएंगे। मैं भी तैयार हो जाती हूँ.

यह कह कर मम्मी ने साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट, ब्रा पैंटी सब उतार दी.“आप क्या पहनेंगी?”मम्मी मुस्कुराई- कुछ नहीं … वो कहते हैं कि मालिनी तू मुझे कपड़ों में अच्छी नहीं लगती, इसलिए जब भी मैं आऊं, नँगी मिला कर!

तभी बाहर से आवाज़ आयी- दरवाज़ा खोल मालिनी!मैं बैडरूम में थी, पर्दे से झांक रही थी।मम्मी ने दरवाज़ा खोला।

लम्बा सांवला एकदम कड़क जाट …अंदर आते ही उसने मम्मी को बांहों भरा और भरपूर चुम्मा लिया। और चुम्बन के दौरान अच्छे से मेरी माँ के नँगे चूतड़ मसले। फिर सोफे पे बैठ गया और मम्मी को अपनी जांघ पे बिठा लिया। चूची दबाते हुए- कैसी है रानी?“जी अच्छी हूँ। उसे बुलाऊँ?”“जल्दी क्या है, अब आया हूँ तो उसे रगड़ के ही जाऊंगा। मेरे बैग में से शराब निकाल और पेग बना के ले आ!”

मम्मी ने निकाली जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल और पेग बनाने रसोई में चली गयी।

मैं झांक के देख रही थी। चौड़ा सीना, मज़बूत बांहें, चेहरे पे रौब और सोच रही थी कि पाजामे के अंदर का सामान कैसा होगा।

तभी मम्मी ने एक पेग मुझे पकड़ाया और बाकी दो और खाने का समान लेकर चली गयी।मैंने एक घूंट पिया, मम्मी ने भी एक घूंट पिया तब तक उसने गिलास खाली कर प्रिया।मम्मी फटाफट दूसरा बना के ले गयी।

अब उसने मम्मी को अपनी गोद में बिठाया और मम्मी के पूरे बदन को सहलाया, दबाया। फिर चूत में उंगली करने लगा- आज इसमें मेरा लण्ड नहीं जाएगा.“चौधरी साहब आपका टेस्ट बदलते रहना चाहिए.”

फिर उसने अपना पाजामा उतारा और कुर्ता ऊपर उठाया। ये मोटा और ये लम्बा काला सख्त तना हुआ लौड़ा। इतना शानदार मैंने पहली बार देखा था।“उसे बुला ले, और तू ये चूस!”“आजा बेटी!” कह के मम्मी सोफे के नीचे बैठ गयी और चूसने लगी।

मैं धीमे धीमे चलती हुई गयी- नमस्ते चौधरी साहब!“क्या नाम है तेरा?” और उसने हाथ बढ़ा के मेरी ओढ़नी के अंदर डाला और चूची को ज़ोर से दबाया।“आह … जी कामिनी!”“चुचियाँ अच्छी हैं तेरी। देख के मुझे लगा पैडिंग होगी, पर असली हैं, मस्त हैं।”“जी थैंक यू!”“पीछे घूम …”

मैंने उसकी तरफ पीठ कर ली, उसने पकड़ के लहंगा ऊपर उठाया। मैंने नीचे जी स्ट्रिंग पहना हुआ था, दरार में पतली सी डोरी और चूतड़ ओपन!उसने मेरे चूतड़ दबाये- मालिनी तेरी छोकरी पास हो गयी.

मम्मी भी खड़ी हो गयी, वो भी और उसने मेरी कमर में हाथ डाला- चल अब बिस्तर पे! तू मुझे पसंद आ गयी है, अब तू मेरा माल है। ठीक है न?“जी!”“जा पेग बना के ले आ. और मालिनी तू बैठ के आराम से शराब पी और रंगारंग प्रोग्राम देख!”

मैं पेग ले के आयी, तीनों ने पीनी शुरू की।“कामिनी, एक सांस में खत्म कर!”उसने अपना पेग खत्म किया, कुर्ता उतारा और लेट गया- आ मुझे प्यार कर!

मैं गिलास खाली कर के बिस्तर पे चढ़ गयी। पहले उसके होंठों को चूमा, चूसा। फिर गर्दन पे चुम्मियां लीं, उसके बालों से भरे सीने पे धीरे धीरे अपने होंठ फेरती रही। फिर उसकी जांघों को प्यार किया। उसके लौड़े को हाथ में पकड़ा और उसके टॉप को धीमे धीमे चाटने लगी।

“मालिनी, तूने ये अच्छी चीज़ निकाली है अपनी भोसड़ी से, मस्त मज़ा दे रही है.”“आपको पसन्द आयी, अच्छा लगा!”मैं लण्ड चूसने लगी।

“चल अब चोली और ब्रा उतार और कच्छी भी और घोड़ी बन जा!”उसने मेरा लहंगा ऊपर उठाया और अपना लौड़ा पेल प्रिया।मेरी चीख निकल गयी- आआह … फट जाएगी.वो दनादन पेलने लगा; मैं मस्त हो के मरवाने लगी। बड़ा ही मस्त चोदू था।

फिर अचानक उसने बाहर निकाल लिया- “लेट जा सीधी और टांगें उठा ले!उसने मेरे पैर अपने कंधों पे रखे और फिर से मेरे खुले चूतड़ों के बीच में घुसा प्रिया।

धक्के फिर शुरू हो गए, तेज़, करारे … मेरी गांड चुदाई, धुंआधार … तबियत से मेरी गांड बजा के उसने पानी छोड़ प्रिया और मेरे ऊपर लेट गया।कुछ देर हम ऐसे ही लेटे रहे।

“मज़ा आया मेरी छमिया?”“जी बहुत! आपका ये भी बड़ा प्यारा है और आप पेलते भी मस्त हैं!”“मुझे भी तू बहुत पसंद आयी है, जल्दी ही फिर मुलाकात होगी!”थोड़ी देर आराम करने के बाद चौधरी जी चले गए।

मैं और मम्मी भी सो गए।

अगले दिन सुबह मेरी नींद देर से खुली। सबसे पहले रात की मस्त गांड चुदाई याद आयी और मैं मुस्कुराने लगी। आराम से फ्रेश होते, नहाते दोपहर हो गयी।

हम खाना खा रहे थे, मम्मी का फोन बजा।“चौधरी साहब का है.” कह के मम्मी ने उठाया।कुछ सुना और “जी, ज़रूर” कह के रख प्रिया।

मेरी तरफ देख के मुस्कुराई और बोली “शाम को तुझे बुलाया है, चौधराईन मिलना चाहती है.”“चौधराइन?”“हाँ, उसकी बीवी। मुझे पता है वो उसे सब कुछ बताता है, तेरे बारे में भी बताया होगा।”“अब चौधरी ने बुलाया होता तो बात समझ में आती, पर उसकी वाइफ…”“तू बेफिक्र होके जा … आज रात को भी चौधरी तेरे ऊपर ज़रूर चढ़ेगा।”

शाम को मैं तैयार होकर बिना ब्रा की बैकलैस चोली और साड़ी पहन के उनके घर पहुंची। दरवाज़ा चौधरी ने खोला.“नमस्ते चौधरी साहब!”“नमस्ते! जा अंदर मेरी घर वाली ने तुझे बुलाया है.”

मैं अंदर गयी।बिना ओढ़नी के लहंगे चोली में लम्बी ऊंची तन्दरुस्त जाटनी। तनी हुई छातियाँ, मोटापा कतई नहीं! बाकी ढीले लहंगे में कूल्हों का तो अंदाज़ा नहीं होता।“आजा आजा … क्या नाम है तेरा?”“जी, कामिनी!”“बताया तो था चौधरी ने, पर मैं भूल गयी। कल खूब मज़ा आया?”मैं चुप रही।

“शर्मा मत, मेरा मरद मेरे को सब कुछ बताता है। अरे तेरी माँ को तो उसने मेरे सामने भी चोदा है। अब बता कल कैसा लगा?”“जी, अच्छा लगा.”“अच्छा बता चाय पीयेगी या ठंडा?”“जी जो आपको ठीक लगे.”“मैं तो इस टाइम शराब पीती हूँ”“जी, ठीक है.”हम पीने लगे। इधर उधर की बातें होती रही।

कुछ देर के बाद, हम दोनों जो नशा हो गया था, तो मैंने पूछा- आपने मुझे अपने साथ शराब पीने के लिए बुलाया था?“नहीं, तेरे से सेवा करवानी है.”

वो बिस्तर पे लेट गयी उल्टी- आ मेरा बदन दबा!

मैं बैठ के उसकी पीठ दबाने लगी। वो आंखें बन्द करके लेटी थी। मैं सोच रही थी क्या बेकार काम के लिए बुलाया है।“अब मेरे पैर दबा!”मैं दबाने लगी।

थोड़ी देर बाद:“और ऊपर!”“जी, और ऊपर मतलब?”“मतलब क्या, मेरे चूतड़!”मैं दबाने लगी।

अब पता चल रहा था कि उसकी कूल्हों की शेप अच्छी थी और कसे हुए थे।“लहंगा ऊपर उठा दे!”उसने नीचे कुछ नहीं पहना था। मैं नँगे चूतड़ दबाने लगी।“कैसे हैं मेरे?”“जी बहुत खूबसूरत!”“तो फिर प्यार कर इन्हें!”मेरा मन खुश हो गया। मैं झुकी और चिकने चूतड़ों को प्यार से चूमने लगी; मेरे होंठ हर कोने पे फिसल रहे थे।

“चौड़े कर और बीच में भी प्यार कर, मेरी गांड पर!”मैंने चूतड़ फैलाये, एक भरपूर चुम्बन और फिर मेरी जीभ उस नशीले छेद पे थिरकने लगी।मैंने कहा- जी, अगर आप बैठ के चुसवाएँ तो आपको शायद ज्यादा मज़ा आये!“छोरी, मैं बैठी तो तू मेरे चूतड़ों के नीचे कैसे घुसेगी?”“जी, मेरा मतलब मैं लेट जाती हूँ और आप मेरे चेहरे पे …”“समझ गयी … ठीक है, लेट जा!”

वो चुस्त चूतड़ मेरे गालों से जुड़ गए। मैं गांड चूसने, चाटने लगी। उसने मेरा आँचल हटाया और मेरी छाती के उभार दबाने लगी।“छोरी, चुचियाँ तो चोखी ले री है.” कह के उसने मेरी चोली ऊपर सरका दी।

अच्छे से अपनी गांड का स्वाद मुझे दे कर फिर बोली- अब यूं बता … मेरी चूत कैसे चूसेगी?“जी जैसे आप चाहें!”“आ जा फिर!” कह के वो सीधी लेट गयी टांगें चौड़ी करके।“आज तेरे लिए ही साफ चिकनी की है.”

मैं उसकी टांगों के बीच में झुकी और फिर अपने पसंदीदा प्रोग्राम में शुरू हो गयी। उसकी चूत की फांकों को होंठों में दबाना, दाने को जीभ से छेड़ना, पूरी चूत को चूसना, गहराई में जीभ घुसाना।वो आआह आआह कर रही थी। मेरा चेहरा खुशबू और स्वाद से भीग रहा था।

फिर उसकी टांगों ने मेरे चेहरे को दबोच लिया और उसकी चूत गीली ही गयी।थोड़ी देर हम ऐसे ही रहे।

फिर उसने आवाज़ लगाई- आजा चौधरी, मेरा काम हो गया। अब तू इसकी मार ले!मैं उठ के खड़ी हुई।

चौधरी अंदर आया, आंखें लाल, नशे में धुत, सिर्फ एक पाजामे में- के चौधराइन … इब तक तूने छोरी नंगी भी नहीं करी?और उसने एक झटके में मेरी साड़ी और पेटीकोट उतार प्रिया।

उसका जोश देख के मैंने फटाफट अपनी चोली उतार दी और इस से पहले कि मैं चड्डी उतारती … उसने मुझे जकड़ लिया और बड़ी बेदर्दी से मेरे होंठ चूसने लगा। कभी मेरे ऊपर के कभी नीचे के होंठों का अपने होंठों से दबाता, कभी मेरे मुंह में जीभ घुसा के मेरी जीभ से छेड़खानी करता, कभी मुझे अपने होंठों का रस पिलाता।उसका एक हाथ मेरी कमर में था, दूसरे से कभी मेरी चूची मसलता कभी कच्छी में डाल के मेरे चूतड़ दबाता।

फिर हम बिस्तर पे आ गए। वो करवट लेट गया और मैं उसका लण्ड हाथ में लेकर चूसने चाटने लगी। फिर मेरे हाथ उसके चूतड़ों से लिपट गए और वो मेरा मुंह चोदने लगा।“अब लेट जा छोरी, मैं चढ़ूंगा तेरे ऊपर!”

मैंने अपनी पैंटी उतारी और उल्टी लेट गयी, जांघों के नीचे एक तकिया लगा लिया।टांगें चौड़ी, चूतड़ खुले हुए … उसने लण्ड निशाने पे लगाया और एक धक्के में पेल प्रिया।“उम्म्ह… अहह… हय… याह…”और वो ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा।

“आज तो मेरा मरद पूरे मूड में है। अच्छे से मार इसकी गांड, पूरे मज़े ले!”उसके हाथ मेरी बगल से नीचे आ के मेरी चूचियों से लिपटे हुए थे और वो तूफानी गांड चुदाई कर रहा था। लौड़ा मेरी गांड में गहराई तक मार कर रहा था।फिर उसने पानी छोड़ प्रिया।

रात को हम तीनों वहीं बिस्तर पे सो गए।

कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

अंजलि अरोड़ा

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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