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पहली बार चुदाई पठन समय: 20 मिनट पढ़ा गया: 718 बार

अपनी चूत की जलन का उपचार करवाया-3

सोनाली शाह

18 Jun 2024 को प्रकाशित

अपनी चूत की जलन का उपचार करवाया-3
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लेखिका : सोनाली

सम्पादिका : शिप्रा

मैं मुस्कराते हुए रूपेश के सामने नग्न खड़ी अपनी चूचियों को दोनों हाथों से छुपाने का भरसक प्रयत्न करने लगी थी! उसने मेरी इस हालत का लाभ उठाते हुए तथा तुरंत नीचे बैठते हुए मेरी पैंटी को खींच कर मेर्र पैरों के पास पहुँचा प्रिया और मेरे नग्न जघनस्थल को चूम लिया!

उसके उस चुम्बन से मैंने सिहर उठी और मेरे शरीर में एक लहर उठी जिससे मेरी चूचियों सख्त हो गई तथा उनके ऊपर की चुचुक एकदम कड़क हो गई!

अब मैं उसके सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी और मेरी चूत के अन्दर हो रही खलबली के कारण वह बुरी तरह गीली हो गई थी, तभी रूपेश ने फुर्ती से मुझे अपनी गोदी में उठा कर बिस्तर पर लिटा प्रिया और खुद भी मेरे साथ लेट कर मेरी चूचियों को चूसने लगा।

मेरी एक चूची उसके मुँह में थी दूसरी चूची को वह अपने एक हाथ से मसल रहा था और उसका दूसरा हाथ मेरी चूत को मसलने में लगा हुआ था! उसके द्वारा की जा रही इस प्रक्रिया के कारण मैं बहुत ही उत्तेजित हो रही थी और मेरे मुँह से हलकी सिसकारियाँ भी निकल रही थी।

उस उत्तेजना की स्थिति में जब मुझे अपनी जाँघों पर रूपेश के लंड की चुभन महसूस हुई तब मैं अपने को रोक नहीं सकी और एक हाथ में झट से उसके लंड पकड़ कर मसलने लगी एवं उसके ट्टटों को दबाने लगी।

मेरा ऐसा करने से वह भी उत्तेजित हो कर हल्की सिसकारियाँ लेने लगा और अपनी कमर हिला कर अपने लंड को मेरे हाथ की मुठ के अन्दर बाहर करने लगा।

कुछ ही मिनटों में उसका कड़क लंड एक लोहे की रॉड जैसा सख्त हो गया और उसके टट्टे ऊपर चढ़ कर लंड के साथ चिपक गए!

इस स्थिति में पहुँचते ही रूपेश घूम कर 69 की अवस्था में लेट गया और अपना मुँह मेरी जांघों के बीच में डाल कर मेरी चूत के होंटों को चूसने लगा।

मेरी चूत पर उसका मुँह लगते ही मेरे शरीर में एक बार फिर झुरझुरी हुई और मेरी चूचियाँ सख्त हो गई तथा दोनों चुचूक एकदम कड़क हो गई। मेरी बढ़ी उत्तेजना के कारण मैं अपने को रोक नहीं सकी और मैंने रूपेश के लंड को अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू कर प्रिया।

शायद मेरे ऐसा करने से वह अधिक उत्तेजित हो गया था क्योंकि उसके लंड में से बहुत ही स्वादिष्ट रस की कुछ बूँदें रिस कर मेरे मुँह में आ गई।

तभी रूपेश ने अपनी जीभ को मेरी चूत में डाल कर हिलानी शुरू करी जिसके कारण चूत के अन्दर हलचल होने लगी और मुझे पूरे शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी महसूस हुई। रूपेश की जीभ जब भी अन्दर की ओर जाती तभी मेरी चूत सिकुड़ कर उसे पकड़ने की कोशिश करती लेकिन उसकी जीभ फिसल कर बाहर निकल जाती।

लगभग दस मिनट तक हमारा 69 का यह खेल चलता रहा तभी मेरी चूत में सिकुड़न की एक बहुत ही तेज लहर आई, मेरा शरीर ऐंठ गया एवं मेरी टांगें अकड़ गई और मेरी चूत के अन्दर से निकल रहा पानी बाहर की ओर बहने लगा।

रूपेश ने अपनी जीभ से जब उस पानी का स्वाद चखा तो शायद उसे स्वादिष्ट लगा होगा क्योंकि तभी उसने मेरी चूत को तेज़ी से चाटना शुरू कर प्रिया, तेज़ी से चाटते हुए उसने कई बार मेरे दाने को भी जीभ से रगड़ प्रिया जिस से मेरी चूत को हलचल का झटका लगता और मेरा पूरा शरीर कांप जाता लेकिन उस समय जो आनन्द की अनुभूति होती है उसे सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है, लिख कर उसकी व्याख्या नहीं की जा सकती!

तीस मिनट तक संसर्ग-पूर्व क्रिया करने के कारण मैं बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थी और मेरी वासना भी आनन्द और संतुष्टि के लिए अत्यंत व्याकुल हो उठी थी, मुझे ऐसा महसूस होने लगा कि पूर्ण आनन्द और संतुष्टि के लिए मेरी चूत के अन्दर कुछ जाना चाहिए।

तब मैंने रूपेश से पूछा- जानू, मेरी चूत के अन्दर बहुत तेज़ जलन हो रही है, अब वह सहन नहीं हो रही है! कब बुझाओगे इस आग को?

तब रूपेश बोला- मेरी जान, अभी तो तुम्हारी चूत के बहुत ही स्वादिष्ट रस पी रहा हूँ! तुम एक जाम और पिला दो अपने रस का, फिर बुझाता हूँ तुम्हारी आग को!

इसके बाद रूपेश मेरे दाने को अपनी जीभ से रगड़ने लगा और देखते देखते मेरी चूत में से रस की एक धारा बह निकली।

मेरे चूत-रस का जाम पी कर रूपेश उठ खड़ा हुआ और झुक कर पहले तो मेरे होंटों पर चूमा, फिर मेरी चूचियों को चूमा और फिर मेरी चुचूकों को कुछ क्षणों के लिए चूसा, उसके बाद मेरे शरीर के अन्य स्थानों के चूमता हुआ मेरी नाभि को और जघनास्थल को चूमा और मेरी दोनों टाँगे चौड़ी करके उनके बीच में बैठ गया।

कुछ क्षणों के लिए प्यार भरी निगाहों से मुझे देखा और फिर झुक कर मेरी चूत को मुँह लगा प्रिया और उसे अन्दर बाहर से अच्छी तरह अपने थूक से गीला कर प्रिया।

इसके बाद रूपेश ने मेरी गीली चूत के होंठों को अपने दोनों हाथों से खोला और मुझ से पूछा- मेरी जान, क्या तुम अपनी चूत की जलन का उपचार कराने के लिए तैयार हो?

मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया, तो रूपेश ने अपने लंड को मेरी चूत के होंठों के बीच में सैट कर के थोड़ा जोर लगा कर उसे चूत के अन्दर घुसेड़ने की कोशिश करी!

लेकिन मेरी अनचुदी चूत का मुँह बहुत तंग होने के कारण वह उसको अन्दर नहीं घुसेड़ सका क्योंकि हर बार उसका लंड इधर उधर फिसल जाता था।

लंड को बार बार फिसलता देख कर रूपेश ने पूछा- मेरी जान, तुम्हारी चूत तो बहुत ही तंग है और मेरा लंड इसमें जा ही नहीं रहा! क्या घर में मक्खन या मलाई है?

मैंने उत्तर प्रिया- मेरे जानू, मक्खन तो नहीं होगा, लेकिन गैस के चूल्हे पर उबला हुआ दूध रखा है उसके ऊपर तो मलाई ज़रूर होगी! लेकिन तुमने उनका क्या करना है?

रूपेश बोला- मेरी गुलबदन, मैं तेरी चूत और अपने लंड पर मलाई मल कर बिलकुल चिकना कर दूंगा फिर देखना तुम्हारी चूत की आग कैसे बुझती है!

इतना कहते हुए रूपेश भाग कर रसोई में गया और एक कटोरी में दूध के ऊपर से मलाई उतार कर ले आया! वह एक बार फिर मेरी टांगों के बीच में बैठ गया और अपने हाथों में खूब सारी मलाई ले कर मेरी चूत के होंठों पर और अपनी उँगलियों से चूत के छेद के अन्दर तक मलाई मल कर बहुत ही चिकना कर प्रिया!

उसके बाद रूपेश ने अपने हाथों से अपने लंड पर भी मलाई मली और उसे भी बिल्कुल चिकना कर प्रिया।

फिर रूपेश ने कटोरी में बची हुई और अपने हाथ में लगी हुई मलाई को मेरी चूचियों और चुचुक पर लगा कर मसल प्रिया जिससे मेरी उत्तेजना में वृद्धि हो गई!

फिर उसके कहने पर मैंने उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के होंटों के बीच में सैट किया और उसके धक्के की प्रतीक्षा करने लगी।

रूपेश ने आगे झुक कर मेरी चुचूकों के चूमा और फिर अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख कर चूमने लगा और नीचे की ओर से अपने लंड को मेरी चूत के अंदर घुसेड़ने के लिए जोर लगाया।

क्योंकि लंड और चूत मलाई के कारण बहुत चिकने हो चुके थे इसलिए रूपेश के जोर लगाते ही उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में घुस गया और मेरे मुख से दर्द के मारे चीख निकल गई!

लेकिन मेरे होंठों पर रूपेश के होंठ होने के कारण मेरी चीख उसके मुँह में ही दब कर रह गई।

दर्द के मारे चीखों के साथ साथ मेरी आँखों में से आँसू भी निकलने लगे थे लेकिन रूपेश ने मेरी उस हालत की परवाह किये बिना थोड़ा सा पीछे हुआ और फिर ज़ोर लगा कर धक्का प्रिया और लंड को तीन इंच चूत के अन्दर घुसेड़ प्रिया!

मैं दर्द के मारे तड़प उठी और बहुत जोर से चिल्लाने लगी, तथा अपने नाख़ून उसकी पीठ में गाड़ दिए लेकिन रूपेश वासना के वशीभूत हो कर कोई भी परवाह लिए बिना अपने लंड का दबाव मेरी चूत में घुसेड़ने के लिए बनाए रखा।

वह बहुत ही हल्के धक्कों के साथ अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर-बाहर करता रहा, फिर अचानक चार-पांच हल्के धक्कों के बाद उसने एक तेज़ झटका मारा और अपना छह इंच लम्बा लंड पूरा का पूरा मेरी चूत के अंदर कर प्रिया।

उफ़फ्फ़ ओह, बहुत ही तकलीफ़देह थे वे क्षण…!

मैं दर्द के मारे बुरी तरह तड़प रही थी, मेरे मुँह से चीखें निकल रही थी और मैं आंसू बहाते हुए बुरी तरह से रो रही थी!

उस हालत में मैं रूपेश से बार बार कह रही थी- प्लीज़ जानू… प्लीज़… मेरी विनती है प्लीज़ बाहर निकाल लो… बहुत बड़ा और मोटा है तुम्हारा.. प्लीज़ मेरे जानू आज छोड़ दो कल फिर कर लेंगे… मैं मर जाऊँगी.. प्लीज़ अभी तो इसे निकाल लो..!

रूपेश मेरे बात को सुना अनसुना कर के अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर बाहर करता रहा!

जब मैं दर्द के मारे एक बार फिर जोर से चीखी तब शायद वह वासना के वश से बाहर निकला और उसे मेरी तकलीफ की चेतना आई! मेरे बार-बार के अनुरोध स्वीकार करते हुए उसने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाला!

रूपेश का लंड जब मेरी चूत से बाहर निकला तब मैंने देखा कि वह खून से लथपथ था तब मैं समझ गई कि मेरा शील भंग हो चुका है और मैं अपना कौमार्य खो चुकी थी!

मेरी योनि से काफ़ी खून निकला था जिस कारण बिस्तर पर भी खून का बहुत बड़े बड़े दाग लग गए थे। चादर पर लगे उन दागों को देखते ही मुझे चक्कर आने लगे और मैं घबरा कर चिल्लाई- जानू…… यह क्या किया तुमने? मैंने तो तुम्हें चूत की जलन बुझाने के लिए कहा था और तुमने तो मेरी चूत को ही फाड़ कर रख दी है! अब तो लगता है कि इसे सिलवाने के लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा!

रूपेश मेरी चीखना एवं चिल्लाना सुन कर थोड़ा गंभीर होते हुए बोला- इस तकलीफ के बारे में तो मैंने तुम्हें पहले से ही सावधान कर प्रिया था और अगर तुम हाँ नहीं करती तो मैं एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता! अब कृपया तुम शांत हो जाओ तथा चिंता मत करो यह अभी थोड़ी देर में ही ठीक हो जाएगी!

उधर मेरी चूत और उसके आस पास के हिस्से में अत्यंत ही तीव्र दर्द होने के कारण मैं अपनी चूत को दोनों हाथों से दबा कर एक ओर करवट की में लेट कर जोर जोए से कहराती और रोती रही।

रूपेश मुझे चुप कराने का प्रयत्न करता रहा लेकिन मेरा रोना बंद ही नहीं हो रहा था!

अंत में रूपेश ने मुझे ज़बरदस्ती उठाया और पानी पिला कर बाथरूम में लेजा कर मेरी चूत को ठन्डे पानी से धोया तब मुझे उस दर्द से कुछ चैन मिला और मेरा रोना सिसकियों में बदल गया।

इसके बाद रूपेश ने बिस्तर की चादर बदल कर मुझे उस पर लिटाया और फिर मेरे पीछे की ओर से मेरे साथ लिपट कर खुद भी लेट गया!

लगभग दो घंटे के बाद जब मुझे चूत की दर्द से कुछ ठीक राहत मिली तब मैंने रूपेश की ओर करवट कर ली!

रूपेश ने मेरे चेहरे पर चिंता और दर्द की काफी कम सुमनएँ देखी तब वह मुझे फिर से प्यार करने लगा और अधूरी परिक्रिया को पूरा करने के लिए कहने लगा!

मेरे ना कहने पर रूपेश ने बहुत ही प्यार से मुझे समझाया- देखो मेरी जानमन, पहली बार तो हर लड़की को दर्द होता है! एक लड़की से औरत बनने की प्रक्रिया में यह एक सामान्य बात है और तुम्हें ज़िंदगी के मज़े लेने के लिए इस दर्द को बर्दाश्त कर आगे की ओर चलना ही चाहिये! मेरी प्रियतमा, अब इस दर्द को भूल कर स्त्री पुरुष के मिलन के असीमित आनन्द के लिए अग्रसर हो जाओ!

मैंने उसकी बात सुन कर झल्ला कर बोली- मेरी चूत फट कर खूनोखून हो गई है और मुझे बेहद दर्द हो रहा है और तुम्हें ज़िन्दगी के मज़े की पड़ी है! काश यह दर्द तुम्हें भी होता तो पता चलता! नहीं.. मुझे नहीं करना अब कुछ भी!

रूपेश ने मुझ से लिपट कर मुझे प्यार किया और कई चुम्बन लिए तथा आधे घंटे तक बहुत ही संयम से मुझे फिर समझाया!

क्योंकि मैं अब अपने को पहले से बहुत बेहतर महसूस कर रही थी क्योंकि दर्द भी कम हो गया था और खून भी नहीं बह रहा था इसलिए मैंने उसे आगे की चुदाई के लिए हाँ कर दी!

रूपेश ने एक बार फिर मेरे होंठों और शरीर के अंगों को चूमा और मेरी चूचियों को दबाने तथा चुचूकों को चूसने लगा!

उसका ऐसे करने से मैं फिर से उत्तेजित होने लगी और रूपेश के लंड और ट्टटों को मसलने व हिलाने लगी।

दस मिनट के बाद जब मैंने महसूस किया कि उत्तेजना के कारण मेरा दर्द बहुत कम हो गया था और चूत में चींटियाँ रेंगने लगी थी तब मेरे मन में रूपेश के लंड को अपनी चूत में लेने की इच्छा जागृत हो गई, मैंने रूपेश के चेहरे को पकड़ कर अपनी जाँघों के बीच में ले लिया और खुद उसकी जाँघों के बीच में अपना सिर रख प्रिया्।

रूपेश बिना कुछ कहे सुने मेरी मंशा को समझ गया और उसने तुरंत मेरी चूत को चाटना शुरू कर प्रिया।

मैंने भी उसके लंड को अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू कर प्रिया! अगले दस मिनट ऐसा करते रहने से हम दोनों इतने उत्तेजित हो उठे की मैंने रूपेश से मेरी चूत में लंड डाल कर मुहे चोदने का निवेदन कर प्रिया।

मेरा आग्रह सुन कर वह तुरंत उठा और मेरी टाँगें चौड़ी कर के उनके बीच में बैठ गया और अपने थूक से मेरी चूत और अपने लंड को खूब गीला कर लिया, उसके बाद उसने मेरी टांगें उठा कर अपने कंधे पर रख ली और अपने लंड को मेरी फटी चूत की फांकों के बीच में सैट कर के दबाव प्रिया!

मैंने भी उसकी सहायता के लिए अपनी चूत को बिल्कुल ढीला छोड़ प्रिया जिससे उसका कड़क लंड बहुत आराम से मेरी चूत में घुसने लगा।

रूपेश ने कोई जल्दी नहीं दिखाते हुए बहुत ही आहिस्ता आहिस्ता लंड का दबाव बढ़ाया और कुछ ही क्षणों में उसका पूरा लंड मेरी चूत में समां गया!

मुझे दर्द तो होता रहा लेकिन मैंने उस दर्द को बर्दाश्त किया और रूपेश की जीभ के अपने मुँह में लेकर चूसती रही!धीरे धीरे रूपेश ने हिलना शुरू किया और लंड को चूत के अन्दर बाहर करने लगा तब मैंने महसूस किया कि इस बार बहुत कम दर्द हो रहा था और जहाँ पर से मेरी झिल्ली फटी थी जब वहाँ पर लंड की रगड़ लगती थी तभी दर्द होता था।

बेशक़ मुझे दर्द हो रहा था और मैं उसे बर्दाश्त भी कर रही थी लेकिन दाद तो रूपेश की करने पड़ेगी क्योंकि वह मुझे बहुत ही प्यार से चोद रहा था!

पहले वह बहुत ही आराम से धीरे-धीरे हिल रहा था, फिर थोड़ा तेज़ तेज़ और फिर बहुत तेज़ी से धक्के देता रहा तथा अंत में उसने अत्यंत ही तेज़ी से झटके मारे।

करीब पन्द्रह मिनट तक वह मुझे चोदता रहा और साथ में मेरी चूचियों को मसलता और चूसता रहा!

बीच बीच में वह मेरे होंठ तथा मेरी जीभ चूस लेता और मुझे अपने होंठ और जीभ चूसा देता!

चुदाई की अंत घड़ी नज़दीक आते आते वह मेरा सारा दर्द भूल कर पूरे ज़ोर से झटके मारने लगा जो मेरे लिए कुछ असहनीय हो रहा था!

वह अपना पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर बाहर कर रहा था और जिसकी रगड़ से मेरी चूत में बहुत ही ज़बरदस्त हलचल होने लगी थी और वह बार बार सिकुड़ने भी लगी थी!

ऐसी ही एक तेज़ सिकुड़न होने के समय मेरी चूत का पानी भी निकल गया।

उस सिकुड़न के समय मेरी सांसें और मेरे दिल की धड़कने भी तेज हो गई थी और मुझे हल्का सा पसीना भी आ गया था लेकिन मैंने रूपेश को कुछ भी नहीं कहा और चुदाई का आनन्द लेने लगी!

मेरे शरीर में हो रही गुदगुदी और मेरी चूत में हो रही हलचल के पहले अनुभव के बारे में वर्णन करना बहुत ही मुश्किल है!

उस समय मैंने जो कुछ भी मैंने अनुभव किया वह शायद एक स्त्री के जीवन के सब से आनन्दमयी और सुखी पल होंगे!

जब मैं उन सुखी पलों की अनुभूति में लीन थी तभी रूपेश ने मुझ से पूछा- जानू, मेरा रस छूटने वाला है, बताओ इसे कहाँ छोडूं तुम्हारी चूत के अंदर या फिर बाहर? अगर बाहर छोड़ना है तो उसे कहाँ पर छोडूँ यह भी बता दो!

मैंने उसकी बात सुन कर कह प्रिया- जानू, बाहर मेरी छाती पर छोड़ दो और फिर उस रस से मेरी चूचियों की मालिश भी कर देना, प्लीज!

मेरी बात सुन कर वह मुस्कराया और बहुत ही तेज़ी के साथ मेरी चुदाई करने लगा।

तभी मैंने महसूस किया की मेरी चूत के अन्दर उसका सुपारा एकदम से फूल गया था और मेरी चूत सिकुड़ गई थी तथा हम दोनों का शरीर ऐंठने लगे थे!

तभी रूपेश ने अकस्मात् ही अपना लंड चूत से बाहर निकाल कर मेरी छाती की ओर तान प्रिया और उसमें से सफ़ेद रंग के गाढ़े और गर्म रस की पिचकारी छूटी जो मेरी छाती और चूचियों पर आ गिरी।

हम दोनों के दिल की धड़कनें और साँस तेज़ हो गई थीं तथा दोनों पसीने में भीग गये थे।

फिर भी जब पाँच छह बार पिचकारी छोड़ कर रूपेश का लंड ठंडा पड़ गया तब रूपेश ने मेरी टाँगें नीचे रख दी और मेरी छाती पर गिरे सारे रस से मेरी चूचियों की मालिश कर दी!

अंत में वह थक कर मेरे पास लेट गया और मैं भी उसकी ओर करवट कर उससे चिपक कर लेट गई!

आधा घंटा आराम करने के बाद हम दोनों बाथरूम में जाकर एक दूसरे के साफ़ किया और फिर साथ साथ नहाए।

नहाने के बाद जब मैंने कमरे में आकर ड्रेसिंग टेबल के आईने में अपनी चूत को देखा तो उसे बुरी तरह सूजा हुआ पाया!

लेकिन उस सूजन के बाबजूद भी हम दोनों ने अगले दो दिन भी मेरी चूत की सील टूटने की ख़ुशी को कई बार चुदाई कर के मनाई थी!

उन्होंने मेरे जीवन की इस घटना को सम्पादित कर उसे एक बहुत ही सुंदर शब्दों की माला में पिरो प्रिया है!

मैं इसके लिए उनका बहुत ही धन्यवाद करना चाहूँगी!

आपको यह रचना कैसी लगी इस पर आप के विचार आप निम्न लिखित मेल आई डी पर भेज सकते हैं:

sonalishah1294@ gmail.com

xxshipra@ gmail.com

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