दो ही मिनट के अंदर शिखा रानी ने टांगें कस के ‘दन दन दन दन’ मेरे मुँह पर धक्के लगाये और एक लम्बी सी सीत्कार भरते हुए स्खलित हो गई, गर्म गर्म चूत रस की एक फुहार ने मेरी जीभ को तृप्त किया और मैं झन्नाटे से शिखा रानी के मुँह में फूटा।उसने मेरे चूतड़ थाम कर मुझे संभाले रखा और सारा लावा मुँह में झड़ने दिया।
मैं भी अपनी रोज़ की दिनचर्या में पहले जैसे लग गया।पाठकों और पाठिकाओ… इस कहानी में भी सभी कहानियों की तरह नाम बदल दिये गये हैं। यदि कोई लड़की वास्तव में इस नाम की इस शहर में रहती है तो यह केवल एक संयोग मात्र है।धन्यवाद