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जवान लड़की पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 720 बार

दिव्या की चूत और गाण्ड फाड़ चुदाई -1

दीपक कुमार 211

21 Oct 2014 को प्रकाशित

दिव्या की चूत और गाण्ड फाड़ चुदाई -1
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हैलो पाठको, आप सभी को मेरा प्रणाम..दोस्तो मैं दीपक चंडीगढ़ से हूँ। मेरी उम्र 23 साल है और मेरे लंड का साइज़ 8 इंच है।अब तैयार हो जाइए एक बहुत ही कामुक और रोमांचित कहानी के लिए..

कहानी आज से 3 महीने पहले की है, हमारे पड़ोस में एक लड़की रहती है बड़ी ही मादक है.. उसका नाम दिव्या है, उसकी उम्र 24 साल, उसके मम्मे बहुत ही बड़े-बड़े हैं और उसकी गाण्ड भी बहुत बड़ी है। उसका फिगर 36-34-38 का होगा.. जब वो चलती है.. तो क़यामत लगती है। उसके दोनों बड़े-बड़े चूतड़ गजब हिलते हैं..

उसके हिलते हुए चूतड़ों को देख कर तो मेरा दिल करता था कि उसको जाकर पीछे से ही पकड़ कर उसकी गाण्ड में अपना लंड डाल कर अच्छी तरह से चोद दूँ.. पर अफ़सोस हमारी कोई इतनी अच्छी दोस्ती भी नहीं हुई थी।मुझे जब भी मौका मिलता.. मैं उसे छुप कर देखता रहता। मेरी मम्मी और उसकी मम्मी के आपस में बातचीत होती थी।

फिर एक दिन अचानक से मेरे परिवार को 3 दिनों के लिए दिल्ली जाना पड़ गया। मुझे जॉब से छुट्टी नहीं मिल पाई.. तो मुझे घर पर ही रुकना पड़ा।मेरे खाने-पीने की कोई दिक्कत ना हो इसलिए मेरी मम्मी ने दिव्या की मम्मी को मेरा ध्यान रखने के लिए बोल दिया और वो मान गईं।

मेरे घर वाले सुबह ही घर से निकल गए थे। फिर में नाश्ता करके जॉब पर चला गया और शाम को 6 बजे घर आया। फिर थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद 8 बजे दिव्या की मम्मी ने मुझे खाने के लिए बुलाया.. तो मैंने थके होने के कारण घर में ही खाना भेजने को कह दिया।

दिव्या मेरे लिए खाना लेकर आई.. मैं तो उसे देखता ही रह गया। एकदम अप्सरा लग रही थी। वो लाल सूट में आई थी.. चूंकि वो एकदम गोरी थी.. तो वो और भी मस्त लग रही थी।उसने कहा- खाना खा लो..

तो मेरी नजरें उस पर से हटीं और वो चली गई।फिर थोड़ी देर बाद वो यह पूछने के लिए आई कि कुछ और तो नहीं चाहिए.. तो मैं उसके बड़े-बड़े मम्मों की तरफ देखते हुए बोला- मुझे दूध पीना है..तो वो मेरी नजरों को देख कर शर्मा गई और दूध लेने चली गई।

फिर वो जब दूध लेकर आई तो मैंने जानबूझ कर कुछ उठाने का नाटक किया और वहाँ पड़े ब्लेड से अपने उंगली पर कट मार लिया।मैंने इस हरकत का उसे पता नहीं चलने दिया कि मैंने जानबूझ कर अपनी उंगली को कट किया है।

मेरी उंगली से खून निकलने लगा.. जिसे देख कर वो डर गई और बोली- लाओ मैं कुछ दवा लगा दूँ।मैंने उंगली उसकी तरफ बढ़ा दी.. उसने डेटोल लगाया और पूछा- अब दर्द तो नहीं है?मैंने कहा- दर्द तो आपके हाथ लगाने से ही उड़ गया।

अब वो मेरे साथ थोड़ा खुलने लगी और उसने अपने हाथों से मुझे दूध भी पिला दिया।

फिर हम इधर-उधर की बातें करने लगे और फिर सोने का टाइम होने लगा। मेरी मम्मी ने दिव्या की मम्मी को रात में किसी को हमारे घर में सोने के लिए बोला था.. इसकी वजह थी कि मुझे रात को सोते वक़्त किसी चीज़ की खबर नहीं रहती थी।तो उस रात दिव्या की मम्मी यानी आंटी ने अंकल को सोने भेज दिया। हम सो गए फिर सुबह मैं ऑफिस चला गया और शाम को घर आया।

आज कोई डिनर के लिए कहने नहीं आया तो मैं खुद ही पूछने के लिए चला गया। मुझे पता चला कि आंटी की तबियत सुबह से ही खराब है.. दिव्या खाना बना रही थी और आंटी अन्दर लेटी हुई थीं.. तो मैंने दिव्या को बोला- लाओ.. मैं कुछ मदद कर दूँ?तो उसने कहा- ओके.. कर दो।

मैंने उसके साथ खाना बनवाने में मदद की.. फिर हमने खाना खाया।आज अंकल को किसी काम से बाहर जाना पड़ गया था.. वो घर पर नहीं थे इसलिए आंटी बोलीं- दिव्या आज तुम्हारे घर सो जाएगी..

मैं यह सुन कर बहुत खुश हो गया.. लेकिन मैंने सहानुभूति दिखाते हुए आंटी से कहा- आंटी अगर आपकी तबियत ठीक नहीं है.. तो दिव्या को अपने साथ सुला लो।उन्होंने बोला- नहीं.. मैं मैनेज कर लूँगी..मैंने कहा- ठीक है।

और दिव्या मेरे साथ सोने के लिए आ गई। जिसे मैं हमेशा चोदने के सपने देखता था.. आज वो मेरे साथ थी पूरी रात के लिए.. मेरी तो खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था।हम सोने की तैयारी करने लगे.. हमारे घर में नीचे 2 कमरे हैं.. पहले दिव्या दूसरे कमरे में सोने लगी तो मैंने सोचा अगर आज नहीं चोद पाया.. तो फिर कभी भी ये मौका नहीं मिलेगा।

मैंने कुछ सोचा और फिर बाहर जाकर मैंने दिव्या के कमरे की लाइट का कनेक्शन हिला दिया.. जिससे उसके कमरे की लाइट चली गई।उसने मुझसे कहा- मेरे कमरे की लाइट चली गई है..तो मैंने उससे कहा- सुबह देख लेंगे.. अब तुम मेरे कमरे में ही सो जाओ।पहले तो वो कुछ सोचने लगी.. लेकिन फिर उसने कहा- ठीक है।

मेरे कमरे में एक डबलबेड था और एक सोफा भी पड़ा था.. तो मैं सोफे पर सोने लगा।उसने कहा- नहीं.. तुम भी बिस्तर पर ही सो जाओ..मैंने कहा- ठीक है।हम लाइट्स ऑफ करके सोने लगे।

थोड़ी देर बाद दिव्या शायद सो गई थी.. पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने दिव्या की तरफ देखा तो वो दूसरी तरफ मुँह करके सो रही थी।

मैं धीरे से उसके पास खिसक गया और फिर धीरे से एक हाथ उसकी बड़े-बड़े चूतड़ों पर रख दिया.. जैसे कि मैंने नींद में भूल से रख दिया हो।

फिर मैं सोने की एक्टिंग करने लगा और कुछ देर बाद जब उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैं उसकी गाण्ड को थोड़ा हाथ से सहलाने लगा.. पर वो शायद सच में सो रही थी।फिर मैंने एक पैर उसकी जाँघों पर रख दिया.. आह्ह.. कितना मजा आ रहा था मुझे.. मेरी साँसें तेज हो रही थीं और साथ में डर भी लगा रहा था।

फिर वो थोड़ा सा हिली.. शायद उसकी नींद टूट चुकी थी.. पर फिर भी वो वैसे ही लेटी रही.. अब शायद उसे भी मजा आने लगा था इसलिए उसने कुछ नहीं कहा। मैं एक हाथ से उसके मम्मों को मस्ती से दबाने लगा और अपना दूसरा हाथ उसकी पैन्टी में घुसा दिया। धीरे-धीरे मैं अपना हाथ उसकी गाण्ड की दरार में लगाने लगा।

अब उसने गाण्ड और मेरी तरफ को कर दी.. और अपनी कामुकता को कुछ हद तक खोल दिया। अब तक मेरा लंड भी पूरी तरह से खड़ा हो चुका था.. लौड़ा इतना अधिक कड़क हो चुका था कि फटने को हो रहा था। मैंने अपना लंड वैसे ही कपड़ों के ऊपर से ही उसकी गाण्ड की दरार में लगा दिया।

उसने भी गाण्ड पीछे की ओर कर दी। अब मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर उसके हाथ में रख दिया.. जिसे देख कर शायद वो चौंक गई और उसने एकदम से आँखें खोल लीं.. जिससे मैं भी थोड़ा डर गया।

कहानी का अगला भाग :दिव्या की चूत और गाण्ड फाड़ चुदाई-2

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दिव्या की चूत और गाण्ड फाड़ चुदाई

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

कूल जोनी

6 days ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

विनय कुमार

2 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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