मैं बहुत खुश था, आगरा का मेरा टूर दोहरा कामयाब हो रहा था।मार्किट से आर्डर भी मनचाहा मिल रहा था, होटल का खर्चा भी बच रहा था और सबसे बड़ी बात दो दो चूत लंड के नीचे थी।रितु की चूत चोद कर तो सच में बहुत खुश था, कई महीनों बाद किसी कुँवारी चूत का उद्घाटन किया था।
थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं मार्किट के लिए निकल गया, रास्ते में मुझे किरण आती हुई दिखाई दी, मैंने गाड़ी रोकी तो वो आकर गाड़ी में बैठ गई।
गाड़ी में बैठते ही किरण ने जो सवाल किया इससे साफ़ हो गया कि किरण को पता था कि आज रितु चुदने वाली है- राज… कहाँ जा रहे हो… रितु को ज्यादा तंग तो नहीं किया ना?बोलते हुए किरण के चेहरे पर एक कातिल सी मुस्कान थी।
मैं क्या जवाब देता, बस मैं भी मुस्कुरा प्रिया।
किरण ने घर तक छोड़ने को कहा तो मैंने गाड़ी घुमा दी और वापिस घर पहुँच गया। दरवाजा लॉक था, मैं ही जाते हुए लॉक करके गया था।मैंने चाबी से दरवाजा खोला और अन्दर गए तो रितु अभी भी पेट के बल लेटी हुई सो रही थी।चादर पर रितु की चूत से निकले खून और मेरे वीर्य के धब्बे स्पष्ट नजर आ रहे थे।
‘मेरी चूत में क्या कमी थी राज… जो तुमने रितु की भी फाड़ डाली…’ कहकर किरण मेरे गले से लिपट गई और उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
मेरे हाथ भी किरण की कमर और कूल्हों पर आवारगी करने लगे। हवस दोनों पर हावी होने लगी थी और फिर अगले कुछ ही पलों में हम दोनों के कपड़े जमीन पर पड़े थे और हम दोनों बाहर सोफे पर ही एक दूसरे से लिपटे अपनी कामवासना शांत करने की कोशिश में लगे हुए थे।
मेरे हाथ किरण के नंगे बदन पर घूम रहे थे, कभी उसकी पहाड़ जैसी चूचियों का मर्दन करने लगते तो कभी मेरी उँगलियाँ उसकी चूत की गहराई में समा जाती।किरण भी कभी मेरे होंठों पर मेरी छाती पर अपने होंठ घुमा रही थी तो कभी मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर मुझे जन्नत की सैर करवा रही थी।
कुछ देर ऐसे ही ऊपर से प्यार करने के बाद मैंने किरण को सोफे की बाजू पर लेटाया और लंड चूत पर रख कर जोरदार धक्के के साथ चुदाई का शुभारम्भ किया।
फिर तो कम से कम बीस मिनट तक आसन बदल बदल कर मैं किरण को चोदता रहा और किरण मस्त होकर चुदती रही।यह तूफ़ान तब रुका जब किरण की चूत का झरना तीन बार झड़ गया और मेरे लंड ने भी गर्म गर्म वीर्य की बौछार किरण की चूत की गहराई में कर दी।
आग शांत हो चुकी थी और जब नजर ऊपर उठी तो रितु भी उठ चुकी थी और हम दोनों की रासलीला देख रही थी।चुदाई करने में हम इतने खो गये थे कि पता ही नहीं चला की कब रितु कमरे से बाहर आ गई।
मेरे क्लाइंट के बार बार फ़ोन आ रहे थे तो मैं उनको शाम को जल्दी आने के कहकर जल्दी से निकल गया। आखिर चुदाई के साथ साथ काम भी तो जरूरी था।
आज की शाम मस्त रंगीन होने वाली थी, मैंने भी पक्का इरादा कर लिया था कि आज दोनों की चूत का मज़ा एक साथ लेना है। बस शाम का इंतज़ार था।
मार्किट में काम करते करते कब नौ बज गये पता ही नहीं चला। जब मार्किट से निकला तो मैंने एक मेडिकल स्टोर से कंडोम का पैकेट और वियाग्रा की गोलियाँ ले ली। अमूमन मैं वियाग्रा की गोली प्रयोग नहीं करता हूँ पर आज दो मस्त जवानियाँ ठंडी करनी थी और फिर अगर कुछ एक्स्ट्रा जोश साथ हो तो रंगीन रात और भी रंगीन हो जाती है।आज रितु को असली चुदाई का मजा देना था।
लगभग दस बजे मैं घर पहुँचा तो दोनों हसीनाएँ मेरे इंतज़ार में दरवाजे पर ही खड़ी मिली। घर में घुसते ही दोनों लताओं की तरह मुझ से लिपट गई।
दोनों ने ही आज साड़ी पहनी हुई थी। रितु ने भी गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमे गजब का माल लग रही थी।
मैं अपना लैपटॉप बैग कमरे में रख कर आया और सोफे पर बैठ गया।किरण तो रसोई की तरफ चली गई पर रितु आकर मेरी गोद में बैठ गई और बेझिझक मेरे होंठो पर अपने होंठ रख कर मुझे किस करने लगी।
जवान बदन की गर्मी ने मेरे अन्दर भी आग लगा दी थी। जब तक किरण रसोई से वापिस आई तब तक रितु ने मेरी शर्ट उतार दी थी और मेरी पैंट खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाल चुकी थी।
किरण ने खाना मेज पर लगा प्रिया था पर रितु को खाने की नहीं लंड की भूख लगी थी।किरण ने कहा भी कि पहले खाना खा लो, सारी रात पड़ी है मजा करने के लिए… पर रितु नहीं मानी और मेरे लंड को मुँह में भर कर चूसने लगी।
लंड चूसते चूसते ही रितु ने अपना ब्लाउज उतार कर फेंक प्रिया, अगले ही पल ब्रा भी बदन से अलग कर दी और जैसा आपने ब्लु फिल्मों में देखा होगा वो मेरे लंड को अपनी चूचियों में दबा कर अपनी चूचियों से मेरे लंड की मालिश करने लगी और जब लंड का सुपारा चूचियों की दरार से बाहर आता तो प्यार से उसको चूम लेती।
मुझ से अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था, मैंने रितु को खड़ा किया और एक ही झटके में उसकी साड़ी, पेटीकोट और पैंटी उसके बदन से अलग कर दी।अगले ही पल वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने थी।
मैंने रितु को वही सोफे की बाजू पर उल्टा लेटाया और उसकी चूत पर अपनी जीभ लगा दी।चूत पहले ही पानी पानी हो रही थी, दिन की चुदाई के बाद जो सुजन चूत पर आ गई थी वो अब ना के बराबर ही रह गई थी।रितु की गांड मेरी जीभ के साथ ताल से ताल मिला रही थी।
मैंने बिना देर किये खड़ा होकर अपना लंड रितु की चूत पर रखा और हल्के धक्के के साथ सुपारा रितु की चूत में उतार प्रिया। रितु दर्द के मारे उछल पड़ी और उसकी हल्की सी चीख निकल गई।
‘फाड़ डाल साली की चूत… बहुत दाना उछल रहा है साली का… बोला था आराम से कमरे में जाकर चुदाई करवाना… पर इसे तो चुदने की जल्दी थी… चोद साली को… जितना चीखे चिल्लाये तुम रुकना मत… फाड़ के रख दे साली की आज!’
किरण की आवाज सुनकर जैसे मैं सपने से बाहर आया और मेरा ध्यान किरण की तरफ गया। मैं तो रितु की जवानी में इतना खो गया था कि किरण का तो मुझे ध्यान ही नहीं रहा था।
किरण खाने की मेज के पास पड़ी कुर्सी पर बैठी थी। साड़ी उतर चुकी थी उसकी भी और वो अपनी चूचियों को ब्लाउज से बाहर निकाल कर मसल रही थी।
यह नजारा देखते ही मुझे और जोश आ गया और मैंने दो तीन जोरदार धक्के लगा कर आधे से ज्यादा लंड रितु की चूत में उतार प्रिया।रितु दर्द के मारे छटपटाई पर मैंने बिना रहम किये धक्के लगाना चालू रखा।
किरण उठी और आकर रितु के सर के पास खड़ी हो गई, उसने अपना पेटीकोट उठाया और अपनी नंगी चूत रितु के मुँह के पास कर दी।रितु खुद दर्द से तड़प रही थी, जब उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई तो किरण ने उसके बाल पकड़ कर उसके मुँह को उठाया और अपनी चूत से लगा प्रिया।
मैं लगातार रितु की चुदाई कर रहा था, रितु की चूत ने भी अब पानी छोड़ प्रिया था और लंड अब अच्छे से अंदर बाहर हो रहा था।गजब की टाइट चूत थी रितु की… चुदाई का इतना आनन्द मुझे कभी नहीं मिला था। कामाग्नि में जलती दो जवान चूत सामने पहले एक साथ कभी नहीं मिली थी।
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रितु भी अब चुदाई का मज़ा लेने लगी थी और उसने भी किरण की चूत को मुँह में भर लिया था, कमरे में मादक आवाजें गूंजने लगी थी, सच में किसी ब्लू फिल्म जैसा माहौल बन गया था।
किरण ने भी अब अपने कपड़े कम करने शुरू कर दिए थे और कुछ ही पलों में वो भी बिल्कुल नंगी खड़ी थी।वह मेरे पास आई और अपनी चूची को मेरे मुँह में दे प्रिया, मैं रितु की चुदाई करते करते किरण की चूची को मुँह में भर कर चूसने और दाँतों से काटने लगा।
किरण भी मस्ती के मारे सीत्कार उठी थी, मैंने एक हाथ की दो उँगलियाँ किरण की चूत में घुसा दी, उसकी चूत भरपूर पानी छोड़ रही थी, वो भी अब चुदाई के लिए तड़प रही थी।
करीब सात आठ मिनट की चुदाई के बाद रितु का बदन अकड़ा और उसकी चूत ने झड़ना शुरू कर प्रिया। झड़ते ही रितु थोड़ी सुस्त हुई तो मैंने लंड रितु की चूत से निकाला और किरण को रितु के बराबर में ही लेटा कर लंड उसकी चूत में घुसा प्रिया।
लगभग पांच मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद किरण और मैं दोनों एक साथ झड़ गए।हम तीनों एक बार के लिए संतुष्ट हो चुके थे पर अभी तो रात बाकी थी।
कुछ देर बाद किरण उठी और उसने खाना खाने के लिए बोला।मेरा खाना खाने का मन नहीं था तो दूध के साथ वियाग्रा की एक गोली निगल कर मैं बाथरूम में घुस गया। खाना उन दोनों ने भी नहीं खाया और फिर हम तीनों सीधे किरण के बेडरूम में घुस गए।
फिर तो सारी रात हम तीनों ने चुदाई का इतना आनन्द लिया कि लिख कर बताना मुश्किल है।
उसके बाद मैं वहां चार दिन और रुका, आप समझ सकते हो कि उन दोनों ने मिलकर मेरी क्या हालत की होगी।
आगरा में वो मेरा आखरी दिन था, रात को मुझे वापिस निकलना था। मैं सारी रात दोनों को चोद कर थका हुआ था, सुबह करीब ग्यारह बजे उठा।
शबनम घर की सफाई करने आई हुई थी। जब से मैं आगरा आया था तो यह दूसरा मौका था जब शबनम मेरे सामने थी।वो बार बार तिरछी नजरों से मेरी और देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।
तभी किरण कमरे में आई तो शबनम बाहर चली गई। मैंने किरण से शबनम के बारे में बात की तो खुद किरण ही बोली- अगर मन है तो चोद डाल साली को!
‘अगर ऐसी बात है तो तुम ही कोई जुगाड़ करो…’ मैंने किरण से कहा तो उसने तुरन्त शबनम को आवाज लगाई- शब्बो… राज जी का दिल आ गया है तुम पर… आज थोड़ी सेवा ही कर दे हमारे मेहमान की!किरण ने बड़ी बेशर्मी से शबनम को कहा।किरण की बात सुन शबनम हैरानी से किरण की तरफ देखने लगी।‘अरे देख क्या रही है… कौन सा पहली बार चुदवायेगी… जैसे अपने साहब की सेवा करती है, इनकी भी कर दे…’
मुझे समझते देर ना लगी कि किरण के पति से भी शबनम चुद चुकी है और वो भी किरण के सामने। तभी तो किरण ने खुले आम उसको चुदने को बोला।
शबनम का हाथ मेरे हाथ में पकड़ा कर किरण हँसती हुई बाहर चली गई।शबनम अब भी थोड़ा शर्मा रही थी पर जब मैंने उसको अपने पास खींच कर उसकी उभार लेती चूची को पकड़ा तो वो एकदम से मुझसे लिपट गई, फिर तो दो मिनट बाद ही शबनम बिल्कुल नंगी होकर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर मुझे जन्नत दिखा रही थी।
साली एकदम एक्सपर्ट थी… कमसिन लड़की सा बदन छोटे अमरुद के जैसी तनी हुई चूचियाँ गोल मटोल गांड।
बिना देर किये मैंने शबनम को बेड पर खींच लिया और उसकी झांटों से भरी चूत के मुहाने पर लंड को रख एक जोरदार धक्के के साथ लगभग आधा लंड शबनम की चूत में उतार प्रिया।शबनम दर्द के मारे तड़प उठी पर साली ने हार नहीं मानी, बोली- साहब एक ही बार में डाल दो… बार बार दर्द सहन नहीं होता!
मैंने भी अगले दो ही धक्कों में पूरा साढ़े सात इंच का लंड जड़ तक शबनम की छोटी सी फुदी में डाल प्रिया।फिर तो धक्कों ने ऐसी रफ़्तार पकड़ी कि पूरा बेड चरमरा उठा… धकाधक… फकाफक… लंड चूत की गहराई माप रहा था और शबनम भी मंझे हुए खिलाड़ी की तरह गांड उठा उठा कर लंड ले रही थी।
कुछ देर बाद जब शबनम एक बार झड़ गई तो मैं उसको घोड़ी बना कर चोदने लगा।मस्त चुदक्कड घोड़ी थी यार… मुझे पस्त करने की पूरी कोशिश कर रही थी।
कुछ देर बाद उसने मुझे नीचे लेटाया और खुद लंड पर सवार हो गई। गांड हिला हिला कर घुमा घुमा कर चुद रही थी वो… पूरा बेड उसके धक्कों से हिल रहा था।
समय का सही अंदाजा तो नहीं पर शायद आधे घंटे से ज्यादा देर तक यह चुदाई का खेल चला और फिर शबनम झड़ने लगी और मैं भी अपने आप को रोक नहीं पाया और मेरे लंड ने भी वीर्य से शबनम की चूत भर दी।
मेरा वीर्य छूटते ही शबनम ने अपनी चूत से मेरा लंड निकाला और अपने मुँह में ले लिया और तब तक चूसती और चाटती रही जब तक की आखरी बूंद तक लंड से निकल कर उसके मुँह में नहीं चली गई।
पिछले पाँच दिन से दो मस्त चूत चोद रहा था पर जितना मस्त मजा शबनम की चूत चोदने में आया उतना वो दोनों नहीं दे पाई थी।
चुदने के बाद शबनम तो चली गई और अब मुझे भी वापसी के लिए निकलना था।आने से पहले किरण और रितु के कहने पर एक एक बार और दोनों की चुदाई की और फिर गाड़ी उठा कर वापिस घर के लिए निकल लिया।
तीन तीन मस्तानी चूतों को चोद कर मेरा आगरा का सफ़र एक यादगार सफ़र बन गया।
कहानी में दिए गए सभी नाम असली नहीं है पर पात्र और कहानी एकदम असली है।
दोस्तो, आज की कहानी यही तक…. जल्द ही एक नई कहानी के साथ आपसे फिर मुलाक़ात होगी।तब तक चोदते रहो… चुदवाती रहो!
कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताना।आपका अपना राजकार्तिक शर्माsupport@mohakkisse.com