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चुदाई की कहानी पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 876 बार

पेरिस में कामशास्त्र की क्लास-3

विक्की कुमार 0099

12 Aug 2010 को प्रकाशित

पेरिस में कामशास्त्र की क्लास-3
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प्रेषक : विक्की कुमार

जैसा कि हमने तय किया था, वो दिन हमारा बिना कपड़ों के ही निकला, पूरे दिन हम या तो कुछ ना कुछ बना कर खाते रहे या फिर बिस्तर पर कुश्ती लड़ना शुरु कर देते। बीच-बीच में जब भी मेरा वीर्य छुट जाता व मैं ठंडा पड़ जाता तो क्रिस्टीना कोई ना कोई ब्ल्यू फिल्म लगा देती। उसके पास नायाब कलेक्शन था। बस फिल्म देखते देखते जैसे ही वह मेरे लिंग महाराज को छू भर देती और वह फिर खड़ा हो जाता व हम फिर फोर-प्ले शुरु कर देते, और उसके बाद चुदाई।

फिर शाम होते होते दोनों बेदम हो गये और लगभग 9 बजे बाहर धूप थी पर हमने तो मन लिया कि रात हो चुकी है व थककर चूर होकर सो गये।

अगले दिन जब उठे तो मैंने अपने वादे के अनुसार क्रिस्टीना की मसाज की तो मुझे महसूस होने लगा कि अब तो मैं मसाज एक्सपर्ट हो गया हूँ। फिर मुझे ख्याल आने लगा कि भविष्य में किसी कारणवश मेरी नौकरी चली गई, व मैं बेरोजगार हो गया तो मैं ‘विमेंस मसाज सेंटर’ खोलकर भी महिलाओं को अपनी सेवाएँ देकर भी अपना पेट भर सकता हूँ। हालांकि मुझे नहीं पता कि हिन्दुस्तान में कितनी महिलायें मुझ जैसे पुरुष से मसाज कराने की इच्छुक होंगी, पर मुझे लगता है कि जब हिन्दुस्तान में कई पुरुष गायनिकोलाजिस्ट अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे हैं तो मुझसे मसाज कराने में महिलाओं को क्या झिझक होगी। और फिर संतुष्ट ग्राहकों की माउथ पब्लिसिटी तो फायदा करेगी ही। खैर यह तो खामखाह की बातें हैं, पर ख्याली पुलाव पकाने में क्या जाता है।

पर क्रिस्टीना से सीखी इस मसाज को प्रोफेशन के तौर पर तो नहीं वरन किसी जरुरतमंद महिला को निशुल्क सेवा देने के बारे में जरुर सोचा जा सकता है, क्योंकि उस हर्बल आयल से मसाज तो वाकई में कमाल की चीज है, इससे किसी का फायदा होता है तो मुझे जरुर किसी की मदद करना चाहिये। अतः मैंने सोचा है कि अगर कोई महिला मसाज के लिये मुझसे सम्पर्क करेगी तो मैं मानव सेवा का यह काम करने में पीछे नहीं हटूँगा। इतना पुण्य तो मुझे इस जन्म में कमा ही लेना चाहिये, ताकि मरने के बाद भगवान चित्रगुप्त के दरबार में जब मेरे पाप पुण्य का लेखा जोखा हो रहा हो तब, मैं भी शान से कह सकूँ कि, “है देवाधिदेव चित्रगुप्त, मैं भी स्वर्ग में जाने का अधिकारी हूँ, क्योंकि मैंने चमत्कारी आयल से मसाज कर जरुरतमंद महिलाओं के शरीर को स्वस्थ बनाने में उनकी मदद करने की कोशिश की है।”

अब हम तीन दिनों में अनवरत इतनी बार चुदाई कर चुके थे कि अब हमारा तन व मन दोनों भी कहने लगे कि अब बस करो, अब थोड़ी देर हमें विश्राम दो।

तब मुझे याद आया कि आचार्य रजनीश भी यही कहते थे कि यदि तुम्हे भगवान को प्राप्त करना हो तो सेक्स को लेकर जो विचार तुम्हारे मन में उठते रहते हैं उसमें अपने आपको पूरा का पूरा डुबा दो, अति कर दो कि तुम्हारा मन अपने आपको संतुष्ट मानने लगे। फिर उसके बाद सेक्स के लिये तुम्हारा मन भ्रमित नहीं होगा। ईश्वर को प्राप्त करना हो तो संभोग से ही समाधि के मार्ग पर जाया जा सकता है। हिन्दुस्तानी समाज में सेक्स को एक घृणित वस्तु बना कर पेश कर दिया जाता है। जबकी लगभग सभी आम हिन्दुस्तानी दिन रात सेक्स के खयालों में ही डूबे रहते हैं। यहाँ तक कि हम मंदिर जैसी पवित्र जगहों में भी जाते हैं तो हमारा ध्यान मूर्ति की ओर नहीं वरन आसपास खड़ी हुई नारियों के वस्त्रों के आर-पार उनके तन व स्तन दोनों को देख कर चक्षु चोदन करने में लगा रहता है, मंदीरों जैसी जगहों में मूर्ति छूने के बजाय धक्का मुक्की कर नारी तन को छूकर ही अपने आपको धन्य मान लेते हैं।

हम आम हिन्दुस्तानी सेक्स करते कम हैं, व उसके बारे में सोचते ज्यादा हैं। मेरा मानना है कि अधिकांश स्त्री पुरुष अपने आफ़िस के समय में भी दिन में कई कई बार कम्प्यूटर पर कुछ ना कुछ सेक्स से संबन्धित सामग्री पढ़ते या देखते हैं। शायद इसी कारण हम लोगों की तरक्की कम होती है क्योंकि सेक्स को हमने हौवा बना दिया है जो गुपचुप तरीके से अंधेरे में करने की चीज है। जबकि पश्चिमी देश इन तमाम बातों से आगे आ चुके हैं, तभी उनकी तरक्की होती है व वे आर्थिक रूप से हमसे कहीं आगे हैं। उनका मानना है कि अगर मन में सेक्स के बारे में खयाल उठ रहे हैं तो फिर इस काम को पहले निपटा लो, ताकि तन की संतुष्टि के बाद आपका ध्यान नहीं भटके, व आपके काम के परिणाम ज्यादा अच्छे आयेंगे।

खैर विक्की बाबा के प्रवचन बहुत हो चुके, अब ‘दास्तान ए क्रिस्टीना’ को आगे बढ़ाये जाये।

जब लगातार तीन दिनों के अनवरत संभोग से हमारा तन व मन दोनों संतुष्ट हो चुके, तो फिर तय किया कि अब हम अति नहीं करेंगे, सेक्स तभी करेंगे जब हमारा शरीर मांग करेगा। फिर उस शाम को हम एक हिन्दुस्तानी रेस्टोरेंट ‘जोधपुर पेलेस’ में खाना खाने गये। आज बाहर जाना अच्छा लगा। और फिर ऊपर से हिन्दुस्तानी खाना, मजा आ गया।

रात को सोते समय क्रिस्टीना ने कहा- मैं प्रतिदिन एक हेल्थ क्लब में एक्सरसाईज करने जाती हूँ, क्या तुम चलना पसंद करोगे?

तो मैंने सोचा कि घर पर अकेले रहने से तो अच्छा है कि क्लब जाया जाये। यदि कोई एक्सरसाईज नहीं भी कर पाया तो थोड़ा मन बहल जायेगा।

अगले दिन अल सुबह हेल्थ क्लब पहुंचे, चूंकि क्रिस्टीना यहाँ लम्बे समय से आ रही है अतः सब उसके परिचित ही थे। उसने वहाँ उपस्थित सभी स्त्री पुरुषों से मेरा परिचय कराया। फिर ट्रेनर ने मुझसे पूछा- तुम कौन सी एक्सरसाईज करना पसंद करोगे?

तब मैंने बताया- मैं तो सिर्फ स्विमिंग ही करूँगा।

क्योंकि मैं तो इसके पहले कभी किसी हेल्थ क्लब में नहीं गया, क्योंकि मैं तो प्रतिदिन योगा करता हूँ और मैं बिल्कुल स्वस्थ हूँ।

कुछ समय पश्चात जब मैं तैर कर वापिस आया तो एक पुरुष ने पूछा- मेरा भी मन योगा सीखने को कर रहा है, क्या आप मुझे योगा सिखा सकते हैं?

इतना सुनकर तो उस हाल में उपस्थित लगभग सभी स्त्री पुरुष मेरे पास एकत्रित हो चुके थे, यहाँ तक कि उनका ट्रेनर भी। आजकल सारी दुनिया में योगा की धूम मची हुई है, यह एक हाट सेलिंग ब्रांड है। योगा के नाम को दुनिया सम्मान देती है।

मैंने कहा- मुझे तो कोई आपत्ति नहीं है, मैं करीब तीन सप्ताह तक यहाँ हूँ, व इस समय में योगा आसानी से सीखा जा सकता है। पर इसके लिये मुझे क्रिस्टीना से सहमति लेना होगी क्योंकि मैं तो उसका मेहमान हूँ।

तो क्रिस्टीना ने कहा- मुझे क्या आपत्ति, मैं तो स्वयं ही योगा सीखना चाह रही हूँ।

तब फिर यह तय रहा कि अगले दिन सुबह सात बजे से आधे घंटे के लिये हम उसी हेल्थ क्लब में योगा करेंगे। इसके लिये आवश्यक जगह व योगा मेट को क्लब का ट्रेनर ही जुटायेगा।

इसके बाद हम हेल्थ क्लब से हम घर ना जाते हुए पेरिस की घूमने के लिये निकल पड़े। हालांकि यहाँ मैं पहले भी कई बार आ चुका था, अतः मैंरे लिये पेरिस घूमने का कोई विशेष आकर्षण मेरे लिये नहीं था, किन्तु आज की बात ओर थी, आज मुझे क्रिस्टीना जैसी सुन्दरी के साथ पेरिस की हर गली, हर भवन, हर चौराहा मुझे नया और खूबसूरत लग रहा था। आज हमने तय किया था कि दिन भर घूमते रहेंगे व दोपहर का खाना आईफेल टावर के ऊपर बने रेस्टोरेंट में करेंगे।

लगभग सभी महत्वपूर्ण सड़कों से हम गुजरे, पर रुके कहीं भी नहीं। फिर हम दोपहर दो बजे तक पेरिस की सड़कों पर कार से ही घूमते रहे। फिर हम आईफेल टावर आ गये। वहाँ टिकट के लिये लगी लम्बी लाईन को देखकर मेरा दिमाग चकरा गया, पर क्रिस्टीना ने कहा- चिन्ता मत करो, हमें लाईन में लगने की जरुरत नहीं है, मैंने नेट पर पहले से बुकींग कर रखी है, अतः हम अपने टाईम स्लाट में लिफ्ट से सीधे ही ऊपर चले जायेंगे।

थोड़ा बहुत समय हमने टावर से पेरिस को देखने व महत्वपूर्ण इमारतों को खोजने में गुजारा, वह अपने साथ एक दूरबीन लाई थी, जिससे दूर की वस्तुएँ भी नजदीक दिखलाई दे रहीं थी। फिर जब देखने को कुछ नहीं बचा तो फिर हम दूसरी मंजिल पर बने रेस्टोरेंट में आकर बैठ गये।

क्रिस्टीना ने मुझसे कहा- जब तक तुम पेरिस में रहोगे, तब तक मैं भी तुम्हारे साथ वेज खाना ही खाऊँगी।

तब मैंने उससे कहा- ठीक है, पर मैं एक नान-वेज वस्तु तो खाऊँगा।

तो वह आश्चर्य से मेरी ओर देखने लगी- क्या?

तब मैंने कहा- तुम, मैं तुम्हें तो कच्चा ही खा जाऊँगा।

तो वह बहुत हंसी। उसकी इस निश्छल हंसी पर तो मैं मर-मिट गया। फिर तकरीबन घंटे भर बाद खाना खाने के बाद टावर नीचे उतरे, तब हमने इस बार लिफ्ट से नहीं जाते हुए पैदल सीढ़ियों से उतरने का फैसला लिया। ताकि आसमान से जमीन पर एक एक कदम बढ़ाते हुए उतरें, ना कि धम्म से सीधे जमीन पर आ गिरें। आईफेल टावर के आसपास मुझे ढेरों हिन्दी-पंजाबी बोलते हुए लड़के मिले, जो सोविनियर बेच रहे थे।

आईफेल टावर से खाना खाने के बाद हम सीधे घर पहुँचे। क्रिस्टीना ने हाथ मुँह धोकर खूबसूरत रेशमी पारदर्शी गुलाबी रंग की नाईटी पहनी, व उसमें से स्टायलिश उसी कलर की ब्रा व पेंटी देखकर मेरी जान ही निकल गई किन्तु हम दोनों आज बेहद थके हुए थे, अतः एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर सो गये। मैं तो बिस्तर पर लेटते ही सो गया।

सुबह तकरीबन चार बजे का समय रहा होगा, मैं कच्ची नींद में ही था कि मुझे अपने शरीर पर कुछ हरकत महसूस हुई। वैसे भी आठ घंटे की नींद हो चुकी थी अतः मेरी आँखें खुलने लगी। देखा की क्रिस्टीना अपने नाजुक हाथों से मेरे सीने पर सुगंधित कुछ तेल या क्रीम जैसा कुछ मल रही है। वह जो कुछ भी था उसकी खुशबु उत्तेजक थी।

वह बड़ी कातिलाना अंदाज में मुस्कुराई व गुड मार्निंग कहते हुए मेरे होठों पर किस करते हुए मुझे लेटे ही रहने को कहा। फिर मैंने देखा कि वह सुगंधित क्रीम उसने मेरे पूरे सीने पर लगा दी, उसके बाद उसने एक और बोतल से नया तरह का तेल निकाला और मेरे लिंग महाराज पर मल दिया। उससे लगाते ही उसमें एक अजब सी सनसनी सी होने लग गई।

फिर वह मेरे ऊपर आ गई और अपने होंठों को मेरे होंठों से लगाकर बहुत तेजी से अपनी जबान को मेरे मुँह में अंदर बाहर किया, वैसे ही जैसे की संभोग करते समय लिंग को योनि के डाला व निकाला जाता है। अब वह अपने होठों को मेरे शरीर के भागों पर पर छूते हुए किस करते हुए नीचे उतरने लगी। वह अपनी जीभ से मेरे शरीर के सभी हिस्सों को जैसे गर्दन, सीने, नाभि को चूमने लगी, फिर वह चूमते हुए लिंग तक पहुँच गई।

क्रीम लगे हुए मेरे शरीर के जिस भी भाग को वह अपने भीगे होंठों व जीभ से छू लेती, तो मेरा अंग-अंग तड़फ उठता।

फिर अंत में उसने मेरे लिंग को अपने मुँह मे प्रविष्ट करा लिया। क्रिस्टीना ने मेरा मुख-चोदन तो पहले भी कई बार किया था, किन्तु इस बार क्रीम लगी होने से एक जानलेवा अनुभव होने लगा।

फिर इसके बाद कुछ समय बाद क्रिस्टीना अपने रेशमी बालों वाली योनि को मेरे माथे पर रगड़ने लगी, उसमें से योनि रस का स्त्राव होने से मेरा माथा भीगने लगा, उस पर जो उसने क्रीम लगाई थी वह अब तांडव मचाने लगी। फिर वह अपनी योनि को मेरे शरीर के निचले भाग की ओर ले जाने लगी। हर जगह वह थोड़ी देर रुकती, उस जगह अपनी योनि को रगड़ कर हाहाकार मचाती हुई मेरे फिर ओर आगे बढ़ जाती।

उसने अपनी के भगनांकुर के ऊपरी हिस्से पर उसने एक छल्ला पहन रखा था जो ठीक उसी प्रकार था जो लड़कियाँ अपने कानों में बालियाँ पहनती हैं। जब वह बाली मेरे शरीर को छूते हुई चलती तो एक आनन्ददायक अनुभूति होती। अंत में उसकी मुनिया खिसकते हुए मेरे लिंग महाराज तक पहुँच गई और बहुत आहिस्ते से अपनी योनि में मेरे लिंग को प्रविष्ट करा लिया।

उसने मेरे लिंग पर जो तेल लगाया था वह मेरे शरीर के ऊपरी भाग में लगाये गये क्रीम से अलग था। जैसे ही वह योनि के सम्पर्क में आया उसमें से ठंडी-मीठी-सनसनाती तरंगे छुटने लगी, मुझे लगा कि उस तेल में मेंथाल जैसा कुछ मिला होगा, जिसके कारण मुझे वह दिव्य अनुभव हो रहा था।

अब रह रहकर उसने अपनी योनि को सिकोड़कर टाईट करना व कुछ देर रोककर ढीला छोड़ना शुरु कर दिया। जब भी वह अपनी योनि को सिकोड़ती, मेरे लिंग महाराज पर एक मीठा सा दबाव बनता व तन व मन दोनों पर एक नशा, एक पागलपन छाने लगता। कुछ देर तक उसने अपना यह लिंग दबाऊ प्रोग्राम जारी रखा। अब वह अपनी योनि को ऊपर नीचे कर चुदाई शुरु कर दी। जैसे ही उसने देखा कि मेरे चेहरे पर परम आनन्द के भाव आने लगे हैं, तो उसने तत्काल ही योनि घर्षण बंद कर दिया व मेरे सीने को अपने स्तनों से रगड़ने लगी ताकि मेरा ध्यान भटक जाये और मेरा वीर्य स्खलन ना हो।

फिर इसी प्रकार रुक कर उसने मुझे पागल बनाये रखा। अंत में जब वह स्वयं भी स्खलन के नजदीक आ गई तो उसने मुझे इशारा कर दिया कि अब हम दोनों साथ साथ ही चरम आनन्द की प्राप्ति कर लेते हैं।

शायद उन सुख के उन क्षणों मे भगवान भी स्वयं मेरे सामने खड़े होकर मुझसे कहते कि ‘बोल बेटा कोई वरदान मांग ले, तो शायद मैं यही कहता- हे प्रभु, अभी थोड़ी देर जरा ठहरो, पहले मैं चुदाई जैसा यह अत्यावश्यक काम पहले निपटा लूँ। आज अगर आपको जल्दी है तो आप चले जाओ, फिर कभी फुर्सत से वरदान देने आ जाना !’

पहले क्रिस्टीना ने अपने वक्षों से मेरी मसाज कर, और आज मेरे शरीर पर व लिंग पर सनसनाहट वाला तेल लगाकर जो सातवें आसमान की सैर कराई। उसे शब्दों में बयान करना बहुत मुश्किल है।मैंने इस जन्म में तो ढेरो पाप किये है, व करता ही जा रहा हूँ, लेकिन आज जो मैं आनन्द उठा रहा हूँ वह निश्चित रूप से मेरे पिछले जन्म के किये गये अच्छे कर्मों का ही फल होगा, कि मुझे क्रिस्टीना जैसी सुंदरी का साथ मिला।

कहानी जारी रहेगी।

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पेरिस में कामशास्त्र की क्लास

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

लव कुमार शैली

4 days ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

नरेश सुथार नागल

3 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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