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भाई बहन पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,193 बार

एक भाई की वासना -46

जूजाजी

03 Nov 2018 को प्रकाशित

एक भाई की वासना -46
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सम्पादक – जूजा जीहजरात आपने अभी तक पढ़ा..जाहिरा बाहर गई तो फैजान टीवी लाउंज में बैठ कर ही टीवी देख रहा था.. जाहिरा सीधे जाकर उसकी गोद में बैठ गई।फैजान एकदम से घबरा गया और रसोई की तरफ देखते हुए.. उसे अपनी गोद से हटाने की कोशिश करने लगा।लेकिन जाहिरा कहाँ मानने वाली थी- क्या बात है भैया.. एक ही दिन में आपका दिल मुझसे भर गया है.. अब तो आप मुझसे दूर भाग रहे हो.. और थोड़ी देर पहली कैसे भाभी के साथ मजे कर रहे थे..। क्या अब मैं आपको अच्छी नहीं लगती हूँ?अब आगे लुत्फ़ लें..

फैजान- नहीं नहीं.. जाहिरा.. ऐसी बात नहीं है.. वो बस तुम्हारी भाभी भी क़रीब ही हैं ना.. तो इसलिए डर लगता है। उसे कहीं जाने दो.. फिर देखना मैं तुम को कैसे चोदता हूँ..यह कहते हुए फैजान ने एक बार तो अपनी बहन की दोनों चूचियों को अपनी हाथों में लेकर दबा ही प्रिया।

जाहिरा ने भी मस्त होते हुए अपने गर्म-गर्म गुलाबी होंठ आगे बढ़ाए और अपने भाई के होंठों पर रख दिए और उसे चूमने लगी। थोड़ी देर के लिए तो फैजान भी अपनी बहन की गरम जवानी में सब कुछ भूल गया और जाहिरा के होंठों को चूमने लगा। लेकिन साथ ही उसे मेरा ख्याल आ गया और फिर उसने खुद को अपनी बहन के जवान जिस्म से अलग कर लिया।

कुछ ही देर में मैंने और जाहिरा ने टेबल पर खाना लगा प्रिया और फिर हम सब टेबल पर बैठ कर खाना खाने लगे।

खाने के दौरान भी जाहिरा मेरे इशारे पर टेबल के नीचे से ही अपने पैर के साथ अपने भाई को टीज़ करती रही और जब भी मौका मिलता तो उसके लण्ड को अपनी पैर से टच कर देती। इस सब के दौरान हर बार फैजान खुद को मेरी नजरों से बचाने की भरसक कोशिश कर रहा था।

खाना खाते हुए ही हमने शाम को फिल्म देखने के लिए चलने का प्लान बना लिया.. जिसको फैजान ने भी मान लिया।फिर खाने के बाद कुछ देर के लिए हम लोग आराम की खातिर लेट गए।शाम को हम फिल्म देखने जाने के लिए तैयार होने लगे.. तो मैं जाहिरा के पास आई और बोली- आज तुमको बहुत ही हॉट और सेक्सी ड्रेस पहनना है।

जाहिरा आँख मारते हुए बोली- तो भाभी क्या मैं ब्रा और पैन्टी में ही ना चली चलूं?मैंने भी करारा जबाव प्रिया- तुझे मैंने सिर्फ़ तेरी भाई से चुदवाना है.. पूरे शहर से नहीं..हम दोनों हँसने लगीं।

मैं- देख सिनेमा हॉल में खुल कर उसे तंग करना है और तड़पाना है.. एक तरफ तेरे हुस्न और शरारत की वजह से उसका लंड अकड़ता जाए और दूसरी तरफ मेरे डर से उसकी फटती जाए बस.. वो कुछ करना चाहे.. मगर कुछ भी ना कर सके..जाहिरा- ठीक है भाभी.. ऐसा ही होगा।

फिर मैंने जाहिरा के लिए एक ब्लैक टाइट लेगिंग सिलेक्ट की… जो कि उसके जिस्म के साथ बिल्कुल ही चिपकने वाली थी। उसके साथ जो टॉप सिलेक्ट किया.. वो एक टी-शर्ट टाइप की थी.. जो कि नीचे तक लंबी थी और उसके चूतड़ों को कवर करती थी। लेकिन सिर्फ़ हाफ जाँघों तक रहती थी। उसका गला भी थोड़ा सा डीप था.. जिसमें से उसका क्लीवेज साफ़ नज़र आता था।मैंने उससे कहा- चल.. अब इसे पहन ले मेरे सामने..जाहिरा थोड़ा शर्मा कर बोली- भाभी आपके सामने.. कैसे?

मैं- वाह भई वाह.. अपने भाई से तो नंगी होकर चुदवाती हो.. और अब भी नंगी होने को तैयार हो.. लेकिन मेरे सामने नंगी होते हुए तुमको शर्म आती है। अभी सुबह ही तो मैंने तेरी मलाई खाई है.. वो भूल गई हो किया?

जाहिरा भी हँसने लगी और फिर उसने अपनी पहनी हुई शर्ट उतार दी।नीचे उसने जो ब्रा पहनी हुई थी.. वो भी उसने उतारी और फिर उसकी दोनों खुबसूरत चूचियों नंगी हो गईं। मैंने झट से आगे बढ़ कर उसकी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और उनको दबाते हुए चूमने लगी।मैं- उफफ्फ़.. जाहिरा.. तेरी चूचियों का शेप कितना सेक्सी है..

जाहिरा- मैं तो भाभी आप और भैया से बहुत तंग हूँ.. जब भी जहाँ भी मौका मिलता है.. आप लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए मुझ बेचारी को पकड़ लेते हो.. और इसे चक्कर में मेरी प्यास बढ़ा देते हो।

मैंने हँसते हुए जाहिरा को छोड़ प्रिया और वो अपनी दूसरी ब्रा पहनने लगी.. तो मैंने उसे मना कर प्रिया कि आज तुम बिना ब्रा के ही चलो।जाहिरा ने एक नज़र मेरी तरफ देखा और फिर अपनी ब्रा वापिस अल्मारी में रख दी और बिना ब्रा के ही वो टी-शर्ट पहन ली। उसकी टी-शर्ट भी बहुत टाइट थी और बिल्कुल उसके जिस्म के साथ चिपक गई हुई थी।उसकी दोनों चूचियाँ बहुत ही सेक्सी लग रही थीं..

फिर जाहिरा ने अपनी टाइट्स पहनी तो वो भी उसकी जाँघों और चूत के एरिया में उसके जिस्म के साथ बिल्कुल चिपक गई।मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा.. तो एक लम्हे की लिए मेरी अपनी नियत भी खराब होने लगी.. लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल किया। फिर मैंने उसकी चूचियों को सहलाया और उसके निप्पलों पर उंगली फेरीं.. तो उसके निप्पल अकड़ने लगे। कुछ ही पलों बाद उसके निप्पल बिल्कुल साफ़ उसकी शर्ट में से नज़र आ रहे थे।

उसकी निप्पलों को अपनी उंगलियों के दरम्यान मसलते हुए मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसे किस करने लगी। इसी के साथ मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू भी कर प्रिया।जाहिरा भी मस्ती के हाथों मजबूर होकर मेरा साथ देने लगी।

चंद लम्हों तक एक-दूसरे को किस करने और एक-दूसरे के होंठों चूसने के बाद मैं अलग हुई और बोली- कुछ देर में तुम भी मेरे कमरे आ जाओ और मेकअप कर लेना।

फिर मैं अपने कमरे मैं चली गई। उधर फैजान बिस्तर पर लेटा हुआ था.. तैयार होकर मैंने भी अपने लिए टाइट्स और एक थोड़ी लूज कमीज़ निकाल ली।तभी जाहिरा भी कमरे में आ गई। जैसे ही फैजान की नज़र जाहिरा पर पड़ी.. तो उसकी आँखें चमक उठीं और मुँह एकदम से खुला रह गया।

मैं दोनों बहन-भाई को थोड़ा प्यार करने का मौका देने के लिए अपने कपड़े लेकर बाथरूम में चली गई और फिर अन्दर से झाँकने लगी।

जैसे ही बाथरूम का दरवाज़ा बंद हुआ.. तो फैजान जंप लगा कर उठा और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हुई अपनी बहन के पीछे आ गया। उसने पीछे से ही उसे दबोच लिया और उसकी दोनों टाइट चूचियों को पकड़ कर सहलाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा।जाहिरा- उफफफ्फ़.. भैया.. क्या हो जाता है आपको.. प्लीज़ छोड़ दो.. अभी भाभी आ जाएंगी.. तो पता नहीं क्या कर देंगी।

फैजान- उफफफ्फ़ ज़ालिम.. क्या हुस्न है तेरा.. अब तो तुझे छोड़ने को नहीं बल्कि चोदने को दिल करता है। तूने तो आज नीचे से ब्रेजियर भी नहीं पहनी हुई है.. क्यों मुझे कत्ल करने का प्रोग्राम बनाया हुआ है तूने..

फैजान ने जाहिरा की शर्ट को नीचे से थोड़ा ऊपर उठाया और उसके चूतड़ों को नंगा कर लिया और उसकी टाइट्स के ऊपर से उसकी गाण्ड पर हाथ फेरने लगा। फिर अपना हाथ आगे ले जाकर उसकी चूत को सहलाने लगा।

मैंने अपने कपड़े चेंज किए और फिर थोड़ा सा शोर करके बाहर को निकली.. तो तब तक फैजान वापिस बिस्तर पर लेट चुका था.. लेकिन जाहिरा ने अपनी टी-शर्ट को अपनी चूतड़ों से नीचे नहीं किया था और उसकी चुस्त लैगी में उसके दोनों चूतड़ बहुत ही सेक्सी अंदाज़ में नंगे दिख रहे थे।

मैं भी जाहिरा के पास ही आ गई और मेकअप करने लगी।मैंने थोड़ी ऊँची आवाज़ में कहा ताकि फैजान भी सुन सके- अरे जाहिरा.. यह तुमने कैसा ड्रेस पहन लिया है.. क्या यह पहन कर जाओगी बाहर?जाहिरा अपनी आगे-पीछे देखते हुए बोली- क्यों भाभी इसमें क्या बुराई है?मैंने फैजान को इन्वॉल्व करती हुए कहा- क्यों फैजान यह ड्रेस ठीक है क्या?

फैजान ने एक नज़र अपनी बहन की तरफ देखा और फिर बोला- हाँ ठीक तो है.. बस अब चेंज करने के चक्कर में देर ना कर.. पहले ही शो के लिए बहुत देर हो रही है।

मैंने मुस्कुरा कर जाहिरा की तरफ देखा तो उसने भी मुझे एक आँख मारी और फिर हम लोगों ने अपने मेकअप को फाइनल टच प्रिया.. और फिर बाहर निकल आईं.. जहाँ फैजान अपनी बाइक लिए तैयार खड़ा था।

पहले की तरह ही मैंने जाहिरा को फैजान के बिल्कुल पीछे.. सेंटर में बैठाया और खुद उससे पीछे बैठ गई।उसे आगे को पुश करते हुई बोली- यार थोड़ा सा आगे होकर बैठो न.. मुझे तो थोड़ी सी जगह और दो ना..

फैजान को तो पहले ही पता था कि उसकी बहन ने नीचे से ब्रा नहीं पहनी हुई है और अब जब उसने अपनी चूचियों उसकी पीठ से लगाईं.. तो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बहन की दोनों चूचियाँ बिल्कुल ही नंगी होकर उसकी पीठ पर लगी हुई हैं।जाहिरा ने अपना एक हाथ आगे किया और उसे फैजान की जाँघों पर रख प्रिया और फिर हम चल पड़े।

सड़क पर थोड़ा-थोड़ा अँधेरा हो रहा था.. कुछ ही देर में जाहिरा का हाथ फिसलता हो अपने भैया के लौड़े पर आ गया। उसने अपने भाई के लंड पर अपना हाथ रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसको सहलाने लगी। पीछे से वो अपने होंठों को फैजान की गर्दन पर टच कर रही थी। कभी-कभी मौका देख कर उसे चूम भी लेती थी। जाहिरा के फैजान की गर्दन पर चूमने की हल्की सी आवाज़ मेरे कान में भी आई।

‘ना कर.. तेरी भाभी पीछे ही बैठी है..’तभी मैंने भी सहारा लेने के लिए अपना हाथ आगे किया और फैजान की जांघ पर रख प्रिया।

एक लम्हे के लिए तो फैजान जैसे घबरा ही गया.. लेकिन फिर खुद को सम्भाल लिया। इसी तरह से मैं और जाहिरा फैजान को तंग करते हुए सिनेमा पहुँच गए।

रात का लास्ट शो था.. 10 बज चुके हुए थे और हर तरफ अँधेरा हो रहा था। शो शुरू हो चुका हुआ था.. इसलिए ज्यादा रश नज़र नहीं आ रहा था। फैजान ने गैलरी की तीन टिकट ली और हम ऊपर गैलरी में आ गए। वहाँ गैलरी में भी बहुत कम लोग ही बैठे हुए थे.. बल्कि सिर्फ़ दो कपल्स थे.. वो भी सबसे अलग-अलग होकर दूर-दूर बैठे हुए थे। हमने भी एक कॉर्नर में अपनी जगह बना ली। हॉल में बहुत ही ज्यादा अँधेरा था। फैजान को दरम्यान में बैठा कर मैं और जाहिरा उसके दोनों तरफ बैठ गईं।

आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।support@mohakkisse.com

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एक भाई की वासना

कुल भाग: 49
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 34
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भाग 36
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