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क्या माल है मेरी मम्मी-2

अनजान सिंह

16 Jan 2014 को प्रकाशित

क्या माल है मेरी मम्मी-2
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माँ पीली साड़ी और लो कट ब्लाउज में एकदम हुस्न की देवी लग रही थी…फिर आंटी में दूसरा पैग बनाकर दिया…अब अंकल माँ के गोरे गोरे उरोज ब्लाउज से ऊपर दबाने लगे… आंटी ने अंकल की लुंगी की गाँठ में खोल दी… फिर मस्ती में आकर खुद भी कपड़े उतारने लगी…

माँ के आधे चूचे बाहर आ चुके थे… यह तो में रोज देखता था… काम करते करते कभी कभी तो निप्पल भी दिख जाता था…

फिर एक धमाका हुआ… आंटी ने एक झटके में पूरे कपड़े – घागरा–चोली उतार फैंकी… पर उनकी चूत दिखाई नहीं दे रही थी, अलबत्ता गांड काफी सुंदर थी पर मोटी थी- दोनों वजनदार चूचियाँ लटक रही थी…

फिर अंकल ने तीसरा पैग पीया…मुन्ना बोला- अब साले का लवडा, लवड़े से लंड बन जाएगा और पीस कर रख देगा तेरी माँ–छिनाल को…मुझे मुन्ना के शब्द बहुत अच्छे लग रहे थे…

तभी अंकल खड़े हुए… उनका लटकता लंड 6 इन्च लंबा था… सबसे पहले उन्होंने माँ के रसीले होंठ चूमे, फिर ब्रा सहित ऊपर से नंगी कर दिया…माँ का हुस्न देख मैं बौरा गया…

फिर अंकल माँ के चूतड़ दबाकर बोले- रानी, आज तेरी गांड मारुँगा। मना मत करना… जब तू मटक मटक कर चलती है, कसम से मेरा बस नहीं चलता नहीं तो सड़क पर ही तेरी गांड में लंड पेल दूँ…माँ बोली- आपकी है, मारो या फाड़ो?अंकल आंटी से बोले- देख तेरी सौतन की मैं गांड मारूँगा… चल मादरचोद जल्दी से गांड गीली कर उसकी…

बोल कर अंकल ने जोर से चांटा आंटी को जड़ दिया… आंटी ने कुछ नहीं कहा, बस तेल लेने चली गई।

माँ बोली- क्यों मरते हो बेचारी को?अंकल बोले- साली छेद छोटा लेकर आई है, लंड जाता ही नहीं उसकी चूत में…फिर वो माँ को चूमते हुए साड़ी खोलने में लग गए।

इधर मुझे पता ही नहीं चला कि कब झुक कर पिंकी की चूत में मुन्ना ने लंड डाल दिया.. वो धीरे धीरे लंड अंदर बाहर कर रहा था… पिंकी सीत्कारें भर रही थी…मुझे अब मजा आने लगा… मैं इंतजार कर रहा था… कि माँ और आंटी में से किसी की भी चूत के दर्शन हो जायें!तभी मेरी मनोकामना पूरी हुई- आंटी तेल की शीशी लेकर सामने से आ गई… उनकी प्यारी चूत मेरे सामने थी- चूत की दरार का दीदार होते ही मेरे लंड में करंट आ गया, मेरा लंड अब कड़क हो गया पर मुझे डर लग रहा था।

उस वक्त पिंकी और मुन्ना में जमकर चुदाई चल रही थी।मुझे कुछ समझ नहीं आया पर जैसे ही मैंने छेद से फिर देखा ‘उफ्फ्फ…’ मेरी प्यारी प्यारी माँ एकदम नंगी हो चुकी थी… कसम से क्या शरबती बदन था… कमर तो इतनी चिकनी थी कि अंकल के हाथ फिसल फिसल जा रहे थे… चूतड़ एकदम तराशे हुए बुत की तरह…फिर जैसे ही अंकल ने उन्हें गोद में उठाया और चूमा उनके पैर खुल गए!फिर मेरे सामने थी मेरी ‘माँ की चूत’ वाह वाह… क्या चूत थी… आगे का समोसा फुला हुआ… हलके सुनहरी बालों से लबरेज़ चूत… माँ की चूत!लम्बी चूत की फटान- उसमें से झांकती गुलाबी पुत्तियाँ और ऊपर मदमाता चना…

फिर अंकल ने माँ की फ़ुद्दी के चने को मसलना चुरू किया… इधर मेरे लंड की माँ चुदने लगी… इतना कड़क हो चला कि कहीं टूट ना जाए…फिर थोड़ी देर में ही माँ की चूत में से झरने की तरह यौवन रस निकलने लगा… हाय माँ… काश अंकल की जगह मैं होता…

खैर, फिर अंकल नीचे लेट गए, अब उनका फनफ़नाया लंड मूसलचंद को माँ मुँह में लेकर सुपड़ सुपुड़ चाटने लगी… लंड लम्बाई में बढ़ने लगा…पर मुझे आश्चर्य तब हुआ जब आंटी मेरी माँ की गांड चाटने लगी… तभी मुन्ना मेरे पीछे आया और कान में बोला- यह मेरी दूसरी माँ है… मेरी माँ को गाँव के दबंगों ने अपनी हवेली में रखा है… रोज वहाँ आने वाले मेहमान उसे चोदते हैं… पापा इसे आये… पर इसमें एक प्रॉब्लम है इनकी चूत में गहराई नहीं है… डॉक्टर बोलते हैं, यह माँ नहीं बन सकती… इसलिए पापा तेरी माँ के रसीले भोंसड़े का मजा लेते है… और ये हैल्प करती है!‘फिर इनकी प्यास कैसे बुझती है…?’

तभी पिंकी मेरा लंड हाथ में लेकर बोली- थोड़ी देर देखो, सब समझ जाओगे, यह लेस्बियन भी है और मुन्ना का लंड भी खाती है… अब मेरा बाप तेरी माँ की चटनी बनाएगा… देखना गांड और चूत दोनों फाड़ देगा… बस खेल खुरू होने को है।

माँ मस्त हो रही थी… गांड तैयार थी, लंड भी…फिर आंटी ने माँ को कुतिया बनाकर अंकल के लंड की सेटिंग कराई… लंड का सुपारा गांड के गेट पर तन कर खड़ा था… अब आंटी खुद खड़ी हो गई और अपनी चूत को खोल अंकल के मुख में रख दिया, फिर बोली- चलो चुदक्कड़ो, चुदाई शुरू करो…

माँ हंसने लगी, बोली- ठीक है, ठोको फिर! जब गांड की माँ चुदने वाली है तो मैं कौन हूँ उसे बचाने वाली…यह बोलते ही अंकल ने जोश मारा… 2-3 इंच लंड पेलने के बाद माँ की जवानी चहकने लगी, अब वो बड़बड़ाने लगी- उई… उफ़्फ़… जोर से… जोर से राजा… तुम्हारा लंड, लंड नहीं मेरा नशा है… क्या लंड है तुम्हारा… मारो मारो… मार डालो…अंकल भी बोले- ले मेरी रानी… ले मेरी बुलबुल… क्या गांड है तेरी… जब तक मेरा लंड तेरी गांड में है, मेरा लंड बादशाह है तेरी जवानी का…और अंकल ने स्पीड बढ़ाई- गच्च गच… की आवाज के साथ मेरी माँ गांड मरवा रही थी दूसरे मर्द के साथ…

मेरा लंड अब फ़ूल चुका था… मैंने पिंकी को बाहों में लेकर चूमा!तुरंत पिंकी मेरा लंड अपने कोमल होठों में लेकर चूमने लगी… मुन्ना ये सब देख खुश हो रहा था।

अब माँ की चूत पूरी तरह खुल चुकी थी, असल में गांड मरवाई के दौरान माँ को अंकल ने अपने ऊपर ले लिया था… दोनों पैर हवा में होने के कारण चूत की पुत्तियाँ खुल गई और उसमें से गुलाबी माल दिखने लगा…

मुन्ना ने बताया- देख ले, उस गुलाबी छेद से ही तू दुनिया में आया था… वही तेरी माँ का भोंसड़ा है…मुझे मज़ा आ रहा था…फिर आंटी ने माँ की चूत चाटनी शुरू की… माँ और मस्त तो गई… आंटी की जीभ और माँ की चूत का दाना दोनों ने माँ को पागल कर दिया…अब गांड मराई अपने चरम पर थी… गच गच की आवाजे… माँ की सीत्कारें और अंकल का गाली बकना चालू था…तभी अंकल बोला- मैं आ रहा हूँ मेरी जान…

माँ ने भी अपनी चूत तन्ना दी जिससे गांड और टाइट हो गई… अंकल ने माल छोड़ दिया और एक तरफ लुढ़क गए…तभी आंटी ने माँ की गांड चाटना शुरू की… माँ की गांड से निकला पूरा वीर्य आंटी ने चाट लिया…फिर माँ ने अंकल के लंड को थोड़ी देर चूमा और खड़ी हो गई।

माँ की मस्त जवानी का दीदार हो रहा था… गांड मरवाने के बाद माँ एकदम गुलाबी हसीना दिख रही थी।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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श्रृंखला

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क्या माल है मेरी मम्मी

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राज आर्य 1

1 week ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

पंकज मलिक

3 weeks ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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