होम पर वापस जाएं
जवान लड़की पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,178 बार

गलतफहमी-20

संदीप साहू

19 Jul 2020 को प्रकाशित

गलतफहमी-20
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

नमस्कार दोस्तो.. अभी तक आपको कुछ बहुत अच्छी और कुछ सामान्य से भागों को पढ़ने का मौका मिला, आप सबकी समीक्षा और प्रोत्साहन संदेश मुझ तक निरंतर आते रहे। आप सबका हृदय से आभार!कहानी अब बड़े ही रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है, अभी बहुत से भाग कामुक होने उसके बाद अचानक ही शोक और विरह की लहर वाला भाग भी आयेगा।

अभी कविता ने रोहन और अपने पहले संसर्ग के बारे में बताया, अब आगे कविता की जुबानी सुनिए.

कुछ ही दिनों बाद बारहवीं का रिजल्ट आ गया, मैं ठीक-ठाक नम्बरों से पास हुई। जबकि मैंने अपनी पसंद का विषय रोहन से दूरी बनाये रखने के लिए नहीं चुना था। मैं जानती थी कि अगर रोहन और मैं एक कक्षा में रहेंगे तो दोनों की पढ़ाई खराब होगी। मैं पढ़ाई में होशियार थी मुझे खुद पर यकीन था कि मैं कोई भी कोर्स आसानी से पूरा कर लूंगी इसीलिए मैंने ग्यारहवीं में मैथ्स ले लिया था।

अब मुझे कॉलेज में दाखिला लेना था। कॉलेज करने हमें दूसरी शहर में रहकर पढ़ना था। पापा मुझे गर्ल्स कॉलेज में हॉस्टल में रख के पढ़ाना चाहते थे। मैं तो रोहन के साथ वाले कॉलेज में जाना चाहती थी, पर पापा के सामने मेरी एक ना चली। मैं और रोहन रायपुर के अलग-अलग कॉलेज में और प्रेरणा और विशाल बिलासपुर के एक ही कॉलेज में दाखिल हो गये।

मुझे दाखिला दिलाने पापा रायपुर लेकर गये, वहाँ उन्होंने अपने किसी पहचान वाले को बुलाया था. पहले तो बस में बहुत भीड़ थी और लोग मुझे छूने के लालच में और ज्यादा चिपक जाते थे, मैं कितनी भी सैक्सी क्यूँ ना होऊँ, पर मुझे ऐसी हरकतों से सख्त नफरत है।फिर हम बस स्टॉप पर उतरे, मैं आगे थी और पापा मेरे पीछे, बस से मैंने पैर नीचे भी नहीं उतारा था कि मुझे मेरे वही जवान सर नजर आये, मैं एक झटके में ही बस की सारी झुँझलाहट भूल गई, मुझे कुछ पुरानी यादें ताजा हो आई, और मन के कुछ अरमान जाग उठे, मेरे दोनों हाथ में बैग थे, इसलिए मैंने उन्हें स्माईल दी और धीरे से नमस्ते कहा.

इतनी देर में पीछे से पापा ने उसे आवाज दे दी- कैसे हो भई.. आपको हमारे लिए तकलीफ उठानी पड़ रही है।सर ने पापा से कहा- परेशानी कैसी सर जी.. ये तो मेरा फर्ज है, और आप लोग कोई पराये थोड़े ही हो।हम सबने स्माईल दी.

फिर पापा ने मेरी तरफ दिखाते हुए कहा- पहचाना इसे!उसने मुझे एक बार सामान्य सा देखा- हाँ सर, पहचान लिया, कविता काफी बड़ी हो गई है।

वैसे उसने मुझे सामान्य नजरों से पापा की वजह से देखा था, उससे पहले तो उसने मुझे खा जाने वाली नजरों से घूरा था। और उसकी बात क्या कहूं, रास्ते भर हर एक इंसान मुझे घूरे जा रहा था, क्योंकि मैं लग ही इतनी सुंदर रही थी कि कोई मुझे निहारे बिना रह ही नहीं सकता था।

मैं शहर पढ़ने जा रही थी इसलिए पापा ने मेरे लिए पांच जोड़ी नये कपड़े लिए थे, मेरी पसंद कॉटन के सूट थे, जिंस टी शर्ट भी पसंद के थे पर पापा को अच्छा नहीं लगता, और पता नहीं फर्स्ट ईयर था तो कॉलेज में चलता या नहीं। इसलिए मैंने सामान्य रेंज के लेकिन खूबसूरत रंगों वाले कॉटन के सूट लिये थे। उसी में से एक प्रिंटेड लाल रंग के सलवार के साथ फूल बांह वाली पीली कुरती मैंने पहन रखी थी, दुपट्टा मैंने सलिके से ओढ़ रखा था। फिर भी उभार तो उभार होते हैं, कपड़ों के ऊपर से भी उनका आभास हो रहा था।सुराहीदार गर्दन, थोड़ी गहरी पीठ और उभरे नितम्बों से जुड़ी हुई लंबी टांगें, जो हील वाली सैंडल पर टिकी थी, दोनों हाथों में आकर्षक बैग थे, मेरी बालों के लट चेहरे पर आ रहे थे, पिंक कलर की हल्की लिपस्टिक मेरे होठों को कातिल बना रही थी, मैंने धूप से बचने के लिए बड़ा सा काला चश्मा पहना था जो कि बस से उतरते वक्त मैंने सिर में डाल रखी थी। और मैं जिस उम्र में थी उस उम्र की चंचलता और शोखी.. शायद बताने की जरूरत नहीं।

कुल मिला कर मैं आते-जाते सभी लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र थी। सबसे पहले हमने एक ऑटो रोका और उसमें बैठ गये, सर हमें रास्ता बताते हुए अपनी बाईक पर आगे-आगे चल रहे थे। पापा ने आटो में सर की तारीफ की- अच्छा इंसान है.. इसने शादी में बुलाया था पर मैं नहीं आ पाया, मैंने आने से पहले इसे फोन करके बता प्रिया था हम आ रहे हैं तो ये स्टेशन तक आ गया। आजकल के भागदौड़ भरी जिंदगी में इतना समय कौन देता है।

पापा की बातें सुनकर मुझे अंदर ही अंदर हंसी आ रही थी, क्योंकि मैं सर के आने का कुछ-कुछ कारण समझ रही थी, अब मैं खुश भी हो रही थी, मुझे सर का साथ जो मिल रहा था, पर सर की शादी हो गई है, ये बात मेरे दिल को दुखाने वाली थी।

खैर जो भी हो हम उनके घर तक पहुंचे, सर ने गेट खटखटाया और जिस लड़की ने गेट खोला उसे देख कर मैं हैरान रह गई, क्योंकि वो लड़की मेरी वही सीनियर थी जिसे मैंने इस सर के साथ सेक्स करते देखा था, मेरा मुंह खुला का खुला रह गया, मैंने सर को कहा- सर, आपने अपने ही स्टूडेंट से शादी कर ली?सर ने मुझे चुप रहने का इशारा किया, मैंने खुद को शांत किया पर मन का ज्वार भाटा उफान पर था। कब हुआ, कैसे हुआ.. किसी ने कुछ नहीं कहा.. और पता नहीं क्या कुछ..

गनीमत है कि पापा उस समय आटो वाले को पैसे दे रहे थे, उनके पास आते ही सर ने परिचय करवाते हुए पापा से कहा- सर ये कोमल है.. हमारे घर पेइंग गेस्ट के रूप में रहती है, हमारे ही स्कूल में पढ़ती थी, इसके पापा जी मेरे रिलेशन में फूफा जी लगते हैं, तो उन्होंने इसे पढ़ाई के लिए मेरे पास छोड़ा है।

इतनी बातें करते हम घर के अंदर तक आ गये थे, तभी अंदर से एक सुसंस्कारित औरत अपना सिर ढक कर आई और पापा के पैर छूने लगी।तभी सर ने फिर कहा- ये आपकी बहू है।पापा ने मुंह दिखाई में 500 का नोट उसे थमाया, और उसकी खूबसूरती की तारीफ की- क्या चांद जैसी बहू ढूंढ कर लाये हो, जीते रहो.. सदा सुहागन रहो..

पापा ने सच ही कहा था, उनकी बीवी वाकई बहुत खूबसूरत थी, एक पल के लिए तो मैं भी उससे जल भुन गई।लेकिन मेरा कौतूहल अब खत्म हो गया था।

हमने एक जगह पर समान रखा और हाथ मुंह धो कर तैयार हुए, और चाय नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल पड़े, अब तक वो सीनियर मुझे लगातार घूरे जा रही थी।

गर्ल्स कॉलेज में मेरा दाखिला बहुत जल्द हो गया, लेकिन हॉस्टल के लिए तकलीफ थी, क्योंकि उस हॉस्टल में रिपेरिंग का काम चल रहा था, इसलिए हॉस्टल वालों ने दस दिन बाद शिफ्ट होने को कहा.हमने हॉस्टल में अपनी सीट बुक कराई और वार्डन से मिलकर वापस आ गये।

घर आकर हमारे वापस आने की बात होने लगी क्योंकि अब मैं दस दिन कहाँ रहती।तभी सर ने कहा- सर ये दस दिन कोमल के साथ इसी घर में रह सकती है।पापा ने एक लाईन में बात काट दी- नहीं, तुम कष्ट क्यों करते हो, ये दस दिन बाद आ जायेगी।तब मेरे हीरो सर ने फिर कहा- वो सब तो ठीक है सर.. लेकिन दस दिनों की पढ़ाई? कविता को पढ़ाई कवर करने में तकलीफ हो जायेगी।

अब पढ़ाई का मैटर था तो पापा ने हाँ कह प्रिया।फिर मुझे दो चार नसीहत दी, और कुछ पैसे दिये। और ‘एक मोबाईल ले लेना…’ कह के अलग से पैसे दिये। और सर को भी साथ जाने को कहा।

सच में वो पल विदाई से कम नहीं था, मैं पहली बार बिना माँ बाप के अंजान शहर में अकेले रहने वाली थी, एक बार तो मेरी आंखों से आंसू ही छलक आये। तभी मेरी सीनियर कोमल ने मुझे संभाला और पापा भी उतरे हुए चेहरे के साथ, फोन लेने के बाद बात करते रहना, और पढ़ाई में मन लगाना कहते हुए नजरों से ओझल हो गये।

यह भी पढ़ें (Recommended)

दोपहर में नेहा का मजा-2

उस दिन तो मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगा, मैं थकी भी थी तो मैं जल्दी सो गई।

मुझे सिमरन के कमरे में उसी के बेड में उसी के साथ रहना था। बहुत सी बातें मन में थी पर माँ पापा और छोटी को याद करने में उस दिन का मेरा दिन और रात गुजर गया।

दूसरे दिन सुबह कॉलेज की हड़बड़ी थी, मुझे सर ने अपनी बाईक पर बिठा के कॉलेज छोड़ा, उधर थोड़ा और आगे कोमल का कॉलेज भी पड़ता था तो हम दोनों ही बाईक पर बैठी थी, कोमल सर से चिपक कर बैठी थी और उसके पीछे मैं। एक बार फिर मैंने अपने और कोमल के बीच अंतर तलाशना चाहा, तो मुझे उसकी कही गई पुरानी बात याद गई- तू एक बार सेक्स तो कर, फिर देखना तू हम लोगों से भी कहीं ज्यादा अच्छी माल निकलेगी।उसने सच ही कहा था, आज मैं और वो दोनों ही अप्सराओं जैसी लग रही थी, वो भी गोरी थी, खूबसूरती का भंडार था उसमें, कोमल शारीरिक सुडौलता, और अदाओं से परिपूर्ण थी, उसके बावजूद भी मैं आज उससे कुछ ज्यादा ही अच्छी लग रही थी।अब वो अंतर क्या था मुझे नहीं पता।

मैंने आज अपने पांच जोड़ी ड्रेस में से अपना दूसरा सलवार कुरता पहना था, मेरी सलवार क्रीम कलर की प्रिंटेड कपड़े की थी, और पिंक कलर का हाफ बाजु कुरता था। मैंने दुपट्टा आज गले में रखा था, और मस्त उभरे उरोजों की नुमाईश में कोई कसर नहीं छोड़ी, पतली कमर, उभरे उरोज, उभरे नितम्ब को लहराते हुए मैंने अपने कॉलेज के गेट पर कोमल और सर को कातिल मुस्कुराहट का शिकार बनाते हुए बाय किया और कॉलेज के अंदर चली गई।

मैं भले सुंदर थी, होशियार थी, पर थी तो कस्बे की, शहर और कस्बे की लड़कियों में आत्मविश्वास और स्टाईल का बहुत अंतर रहता है, मेरे साथ भी यही हुआ, मैं शहर की स्टाइलिश और अपने से कम सुंदर लड़कियों के सामने खुद को कमजोर समझने लगी।लेकिन मैं पीछे रहने वाली कहाँ थी, मैंने उनसे आगे बढ़ने के लिख खुद से वादा किया और एक महीने की समय रीमा तय की।

कॉलेज के बाद मैं घर आई तो कोमल पहले ही आ गई थी, मैं उसे आज भी दीदी कहकर ही सम्बोधित करती थी, मैंने कदम रखते ही कहा- दीदी तुम कब आई?उसने कहा- कॉलेज में फुल टाईम अटेंड करना जरूरी नहीं होता।मैंने उसकी ओर पीठ करके कपड़े बदलने चाहे तो उसने कहा- जरा इधर तो घूम..मैंने जैसे आज्ञा का पालन किया.

वो अपनी जगह से उठ कर मेरे पास आई और मेरे मम्मों को छूते हुए कहा- देखा, मैंने कहा था ना कि सेक्स के बाद तू हम लोगों से ज्यादा निखर जायेगी! बता तूने किससे सेक्स किया?मैं उसके अनुभव से हतप्रभ थी, पर अचानक सवाल से मैं हड़बड़ा गई, मैंने कहा- नहीं दीदी मैंने ऐसा नहीं किया है।तो उसने कहा- सच बताती है या पेंटी उतार के चेक करूं?मैंने खुद के कपड़े अच्छे से संभालते हुए कहा- कक्षा का ही एक लड़का था, बस दो-चार बार ही किया है।

उसने कहा- हम्म… मतलब छोटा सा ही लिंग घुसा है!अनायास ही मैं कह पड़ी- छोटा नहीं दीदी, लगभग साढ़े पांच इंच से बड़ा रहा होगा!कोमल हंस पड़ी.. और कहने लगी- जब तक कोई दो तीन या बहुत से लंडों को ना देख ले, लंडों की साईज या बनावट के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता! चल तू आराम कर, अगर तेरी किस्मत अच्छी रही तो तुझे चारू का लंड दिला दूंगी।

मैंने तुरंत कहा- मुझे किसी का कुछ नहीं चाहिए। और चारू तो लड़की नाम है, उसका लिंग कैसे हो सकता है।तो कोमल ने कहा- ये जो सर हैं ना उसे तो तू जानती ही है, और तुमने तो मुझे उसके साथ देख भी लिया है, उसका नाम चरन दास तिवारी है। तू उसका नाम जानती थी।मैंने कहा- नहीं..!उसने कहा- अब तुझसे क्या छुपाना… मुझे उसका इतना घटिया नाम बिल्कुल पसंद नहीं… इसलिए मैं उसे प्यार से चारु कहती हूँ। इससे कभी कोई नाम देख या सुन भी ले तो लड़की समझ कर मुझ पर शक नहीं करता।

मैं तो कोमल के तेवर देख के हैरान थी, वो भी लड़की कस्बे की थी, पर इतना आत्मविश्वास और इस तरह की बातें। मैंने फैसला किया कि इससे स्टाईल भी सीखूँगी और इसके जरिये चारू का लंड भी पाऊंगी क्योंकि मैंने सोचा था कि शहर जाते ही रोहन से मिलकर चुदाई कराऊंगी पर अभी दस दिन ये संभव ना था और पहले से प्यासी निगोड़ी चूत को अब और संभाल पाना मुश्किल हो रहा था।

रोहन के कुछ पहचान वाले और सीनियर रूम किराये पर लेकर रहते थे, वे तीन लोग थे, तो रोहन उनके साथ चौथा पार्टनर बन कर आ रहा था। उन चारों में हमारा एक सीनियर गौरव भी शामिल था जिसका जिक्र मैंने पहले टूर पर किया था।रोहन ने मुझसे वही मिलने की प्लानिंग की थी, जब वो सब कॉलेज या छुट्टी पर जायेंगे तब हम उनके कमरे में मिल लेंगे। पर अभी दस दिन मैंने शांति से रहना और मेरे दूसरे शिकार चारू पर फोकस करना उचित समझा।

सर जब स्कूल से लौटे तो मुस्कुराहट के साथ कहा- कैसा रहा तुम्हारा पहला दिन?उस वक्त मैं लोवर टी शर्ट पहने बरामदे में बैठी थी, मैंने ललक कर कहा- बहुत बढ़िया।और वो मुस्कुरा कर अपने कमरे में चले गये।

सर कमरे से लुंगी पहन कर निकले, उनकी पत्नी सलवार सूट पहन कर काम में लगी थी। कोमल कैप्री और हाफ कुरता पहन कर उनकी पत्नी का हाथ बंटा रही थी।

रात को हमने एक साथ खाना खाया, घर परिवार और पढ़ाई की बातें हुई, हमारी आपसी जान पहचान बढ़ी। मैं उन तीनों को निहारती रही और वे तीनों मुझे निहारते रहे। हर एक की नजर में कुछ राज था, पर अभी मैं इतनी शातिर भी नहीं हुई थी कि हर राज समझ सकूं।

थोड़ी देर टीवी देखने के बाद करीब दस बजे हम अपने-अपने रूम में चले गये। बिस्तर पर मुझे जल्दी नींद आ गई, लेकिन लगभग एक घंटे बाद मेरी नींद हल्की सी आहट से खुली। मैं सीधे ना उठ कर लेटी हुई ही आहट को भांपने की कोशिश कर रही थी, तब भी जीरो लाईट की दूधिया रोशनी में मुझे आंखें चौंधियाने वाली चीज दिखी, कोमल एक छेद से कुछ देख रही थी और एक हाथ से अपने मम्मे और दूसरे हाथ से अपना चूत सहला रही थी। वो जिस छेद के पास खड़ी थी उसके दूसरी ओर सर का कमरा था, इसलिए मुझे माजरा समझते देर ना लगी, पर मैंने बिना कोई शोर शराबे के चुप पड़े रहना उचित समझा।

मैं वही लेटे आधी आंख खोले हुए.. उसे देखती रही।

कोमल एक बहुत खूबसूरत लड़की थी, उसका हर अंग तराशा हुआ, दूधिया रोशनी में खुद को शांत करने की कोशिश में लगी अप्सरा को देख कर मैं रुक ना पाई और मैं जाकर कोमल को सहलाते हुए धीरे से कहा- क्या देख रही हो दीदी?मुझे लगा था कि वो हड़बड़ायेगी या डरेगी… पर वैसा कुछ ना हुआ, उसने मुझे धीमी आवाज में कहा- कितना सोती है.. मैं तुझे भी ये सब दिखाना चाहती थी, मैं तुझे बहुत हिलाया-डुलाया तब भी तू नहीं उठी इसलिए अकेले देख रही थी।

मैं सन्न थी, मतलब कोमल ये रोज देखती है, और ये मुझे भी दिखाना चाहती है। मैंने कहा- मैं तो थोड़ी आहट में उठ गई, फिर आप कहती हो कि मैं नहीं उठी?तो उसने कहा- थोड़ी सी आहट नहीं पगली, चारू के हाथों से पानी का जग गिरा था, उसकी तेज आवाज यहाँ तक आई थी, तब तू उठी है। और अब समय बर्बाद मत कर चल तू भी सीन देख और मजे ले!कहते हुए वो मेरे मम्मों को सहलाने लगी और छेद के दूसरी तरफ का नजारा तो और भी पागल कर देने वाला था!

रोमांचक कहानी गलतफहमी, अब और भी रोमांचक मोड़ पर है।तो पढ़ते रहिए और अपने विचार भेजते रहिए…support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

लव स्टोरी से सेक्स स्टोरी तक का सफ़र-1
जवान लड़की

लव स्टोरी से सेक्स स्टोरी तक का सफ़र-1

यह सेक्स कहानी मेरे एक दोस्त की है.. आप उसकी ज़ुबानी ही सुनिए।

10 मिनट 736
दोपहर में नेहा का मजा-2
जवान लड़की

दोपहर में नेहा का मजा-2

फिर हम रोज बात करने लगे और कई बार फोन सेक्स भी किया। बस अब मैं उसे चोदने का मौका देख रहा था। क्यूँकि नेहा की चूत भी चुदने को बेताब थी। वो फोन पर कहती तुम्हें देखने का मन कर रहा है तो मैं कभी उसके स्कूल में कभी घर की गली में चक्कर लगा आता।

9 मिनट 637
सेक्स की लीला- 1
जवान लड़की

सेक्स की लीला- 1

मैरिड गर्ल सेक्स डिज़ायर तब और ज्यादा हो जाती है जब उसे अपने पति से पूर्ण संतुष्टि ना मिले. इस कहानी में लड़की का पति काम, नशे में इतना डूब जाता है कि वह अपनी पत्नी के सुख का ख्याल नहीं रखता.

13 मिनट 307

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रोहित

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

वैभव

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।