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चाची की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 719 बार

मौसी से सेक्स ज्ञान-1

विजयपाल माही

22 Aug 2009 को प्रकाशित

मौसी से सेक्स ज्ञान-1
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काम के सभी पुजारियों को माही के लहराते लण्ड का सादर प्रणाम।

आपने मेरी कहानी

वो पूस की एक रात

पढ़ी होगी।

अब एक नई दास्ताँ लेकर हाजिर हूँ, सही बताऊँ तो सबसे पुरानी दास्ताँ !

मित्रों काम ही इस संसार का नियामक तत्व है यही बाकी सभी क्रियाओं का मूल है और फ्रायड ने इसे सिद्ध भी किया है।काम को न तो भाषा की जरूरत है ना काम किसी बंधन की परवाह करता है यह तो प्रकृति की अविरल धारा है जो कभी भी कहीं भी फूट सकती है।

मैं उस समय बीए सेकेंड ईयर में पढ़ता था, उम्र यही कोई अठारह साल थी। उस समय लण्ड का आकार सात इंच हो चुका था।तने होने पर पैंट के ऊपर से इसे साफ़ महसूस किया जा सकता था और सुबह के वक्त तो यह चड्डी को बिल्कुल तम्बू बना देता था इसीलिए मैं हमेशा चादर ले कर सोता था।

गर्मियों की बात थी, मेरी सगी मौसी मेरे घर आई हुई थी। मम्मी की सबसे छोटी बहन…. नाम है निम्मी।

मौसी की शादी पास के ही एक गाँव में हुई थी और मौसा जी खेती करते थे।

मौसी अक्सर किसी न किसी काम से लखनऊ आती थी तो वह हमारे घर जरूर आती थी।

पर मैं पिछले कुछ महीनों से देख रहा था कि वो मम्मी से अकेले में बड़ी देर तक अपना दुःख सुनाती थी।

मैंने उनको कहते हुए सुना था कि मौसा जी का गाँव की किसी विधवा औरत से चक्कर चल रहा था और वो मौसी में बिल्कुल रुचि नहीं लेते थे।

वे अक्सर रात को खेत की रखवाली के बहाने उस औरत के घर पर पड़े रहते थे। मौसी अपनी 12 साल की बेटी के साथ अक्सर घर में अकेले रात बिताती थी।

सच में किसी के पति का लण्ड उसकी सूखी चूत को हरी करने की बजाये किसी गैर औरत की चूत में घुसे, यह उस औरत के लिए अपमान की बात है।

माँ के कहने से मौसी ने मौसा जी को बहुत समझाया, दुआ-तावीज़ भी कराया पर उल्टे कई बार मौसा ने उनकी पिटाई कर दी थी।

अब तो मौसी ने जैसे हालात से समझौता कर लिया था, वो कई कई दिन हमारे घर रहती थी, गाँव से आती थी तो एक-आध दिन रुक कर ही जाती।

हाँ वो जब भी मुझे मिलती थी तो पकड़ कर गालों पर बहुत चुम्मी लेती थी, मेरा मुन्ना कह कर ! और मुझे उनकी साँसों की गंध ऐसी बुरी लगती कि मैं उनसे हाथ छुड़ा कर भागता- अरे मौसी, अब मैं बड़ा हो गया हूँ !

यह देख मेरी माँ हंस देती।

ऐसे ही गर्मी की वो रात थी, माँ, पिताजी और मेरा छोटा भाई छत पर खुली हवा में सोते थे, केवल मैं रात देर रात तक पढ़ाई के कारण नीचे सोता था।

उस दिन भी देर रात तक पढ़ कर मैं अपने कमरे में पड़े तख्त पर सो गया।

रात को अचानक मेरी नींद खुल गई जब मुझे लगा कि कोई मेरा हाथ पकड़ कर खींच रहा है।

अँधेरे में मैं समझ गया कि यह मौसी थी वो मेरा हाथ खींच कर अपने चूचियों पर रख कर ऊपर से अपने हाथ से दबा रही थी।

मेरे बदन में करेंट सा लगा।

मौसी अपने ब्लाउज के बटन आगे से खोले थीं, उनके बड़े बड़े चुच्चे मेरी हथेलियों के नीचे थे, उस पर मौसी का हाथ था और वो अपने हाथ से मेरी हथेली दबा दबाकर अपने चुच्चे मसल रही थी और हल्के से कराह भी रही थी।

मेरे लण्ड में आंधी-तूफ़ान चलने लगा, मैं बंद आँख से भी मौसी की खूब गोल-गोल भरी भरी चूचियों को महसूस कर सकता था, कई बार ब्लाउज से आधी बाहर झांकती देख चुका था उनको !

पर आज जाने क्या को रहा था मुझे? कामवासना का भूत मेरे सर चढ़ चुका था।

मन तो किया कि ऊपर चढ़ कर मैं खुद मौसी की चूचियों को रगड़ कर रख दूँ और उनकी टांगों को फैलाकर उनकी चूत का सारा रस पी लूँ और उनकी टांगें फैला कर बुर में ऐसा लण्ड पेलूँ कि वो वाह-वाह कर उठें औररात भर अपनी टांगें न मिला सकें।

लेकिन मेरे मन में डर था कि कहीं मौसी इतना सब कुछ न करना चाहती हों और वो घर में सब को बता दें तो?

यही सोच कर मैं सोने का नाटक करने को मजबूर होकर तड़पता रहा।

मौसी ने मेरे हाथों को पकड़ कर अपने चुच्चे खूब मसलवाये फिर मुझे पकड़ कर अपनी और घुमा लिया और मेरे ओंठों को अपने अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर प्रिया।

मैं अभी भी आँखें बंद किये था, मेरा लण्ड झटके पर झटके खा रहा था मेरे लण्ड की हालत समुन्दर में प्यासे मगर्मच्छ के जैसी थी।

तभी मौसी ने अपनी एक टांग उठा कर मेरे ऊपर ऐसे रखी कि मेरा लण्ड उनकी गर्म-गर्म रान के नीचे दब गया।

मैंने महसूस किया कि उनकी मैक्सी कमर तक ऊपर थी।

जीवन में पहली बार इतनी चिकनी टांग मैंने अपनी टांग पर सटी हुई महसूस की, बहुत ही गर्म और केले की जैसे चिकनी बेहद नरम जांघें थी, शायद एक भी बाल नहीं होगा उन पर।

मेरे लण्ड का पानी छूटने को हो गया पर डर गया कि मौसी सब जान जायेंगी कि मैं जग रहा हूँ। मैंने पूरी ताकत लगा कर लण्ड को कंट्रोल में किया हुआ था।

अब मौसी की चूचियाँ मेरे सीने से रगड़ रही थी, मेरे होंठ उनके होंठों के बीच में थे, उनकी एक बांह मेरे ऊपर से होते हुई मेरी पीठ को सहला रही थी।

मेरे कुंवारे लण्ड की अग्नि परीक्षा हो रही थी और मैं ससम्मान इसमें उत्तीर्ण होने का भरसक प्रयास कर रहा था।

अचानक मेरे ऊपर उनकी नंगी टांग और चढ़ गई। मैंने धधकती चूत की गर्मी को अपने लण्ड के बिल्कुल करीब महसूस किया।

मुझे कहने में कोई शर्म नहीं कि जीवन में पहली चूत का स्पर्श मुझे मेरी मौसी जी ने प्रिया।

मेरी चड्डी में खड़े लण्ड का लालच मौसी से रोका न गया वो मेरे सात इंच के लण्ड पर चड्डी के ऊपर से ही हाथ फिराने लगी थी और लण्ड पर हाथ रखते ही वो कराह उठीं जैसे उनके सारे जिस्म के दर्द की दवा उन्हें मिल गई हो।

मेरा दिल बड़े जोर से धधक-धड़क रहा था, मेरे लण्ड में फड़कन को मौसी ने बखूबी महसूस किया था इसीलिए उन्होंने मेरे फड़कते लण्ड को कस कर अपने हाथों में मजबूती से जकड़ लिया।

दोस्तो, यह मेरी सहनशीलता का चरम था।

बड़ी बड़ी झांटों वाली गद्दीदार पाव रोटी जैसी बुर का गर्म एहसास अपनी जांघ पर पाकर बड़ी बड़ी चूचियों से सटे होकर एक औरत के हाथ में लण्ड कितनी देर बर्दाश्त करता।

मैंने भी सारी शर्म त्याग दी और चड्डी के अन्दर ही मौसी के हाथों में कसे कसे लण्ड ने पूरी धार से पानी छोड़ प्रिया।

मैं ऊँ ऊ ऊं.. करके उनकी बाहों में एक बार मचला, फिर शांत हो कर लण्ड को आख़िरी बूँद तक झड़ने देता रहा।

मौसी अभी यही समझ रहीं थीं कि मैं उत्तेजित होकर नींद में ही झड़ा हूँ। उन्होंने मेरा लण्ड कस कर पकड़े रखा जब तक मैं पूरा झड़ नहीं गया।

उनका हाथ चड्डी के ऊपर से गीला हो चुका था, मैंने अपनी जांघ पर उनकी चूत का गीलापन साफ़ महसूस किया वो भी झड़ चुकी थी।

अपने हाथ में लगे मेरे लण्ड के पानी को चाट रही थी वो ! चुद तो नहीं सकी थी पर एक युवा मर्द के संपूर्ण अंगों से खेलने का सुख शायद उनको बहुत समय बाद मिला था।

वो बिस्तर पर मेरा किसी औरत के स्पर्श का पहला अनुभव था और औरत के जिस्म का सही पहला सुख…

मैं मौसी को उस रात चोद तो न सका, शायद अनाड़ीपन और शर्म के कारण !

पर अपने कसरती जिस्म का जो चस्का मैंने मौसी जी को लगा प्रिया था उससे मुझे पता था कि आने वाली सैकड़ों रातों में वो मेरे बिस्तर पर खुद आने वाली थी और मैंने भी सोच लिया था कि मौसी की सालों से बंजर पड़ी चूत के खेत में अपने लण्ड से न सिर्फ कस कर जुताई करनी थी बल्कि खाद पानी से उसे फिर से हरा भरा करना था।

मौसी को कस कर पेलने का अरमान दिल में लिए मैं गीली चड्डी में चिपचिपेपन को बर्दाश्त करता हुआ सो गया।

अगले दिन सुबह मौसी मेरे साथ इस तरह सामान्य थी जैसी रात में कुछ हुआ ही न हो।

मैं शुरू में तो उनसे आँख चुरा रहा था पर उनका बर्ताव देख कर मैं भी कुछ सामान्य हो गया पर…

कहानी आ अगला भाग :मौसी से सेक्स ज्ञान-2

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मौसी से सेक्स ज्ञान

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

धीरेन्द्र राठौर

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

राज वोहरा 007

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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