होम पर वापस जाएं
रिश्तों में चुदाई पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 346 बार

भतीज-बहू के साथ सुहागरात -1

अरविन्द कुमार

20 Feb 2010 को प्रकाशित

भतीज-बहू के साथ सुहागरात -1
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

शमशेर सिंह ने अपने भतीजे रणधीर सिंह की शादी एक ऐसी लौंडिया से करवाई, जो कमाल की हसीना थी। लौंडिया का नाम बता देना सही रहेगा, उस हसीना जिसकी गरमागरम जवानी कमाल की थी, उसका नाम था बबिता।

जब बबिता अपने दूल्हे-राजा के घर आई तो उसके सपने काफ़ी रंगीन थे, वो अपने साथ बालीवुड के हीरो और हिरोइनों की तस्वीरें लेकर आई, लौंडिया को चुदाई और सेक्स के रंगीन ख्वाबों ने घेर रखा था।

हो भी क्यों न ! आखिर उसका हुस्न लाखों में एक था ! वह थी भी एक माल जैसा पीस।

मैं आपको जरा उसकी जवानी का नक्शा बता दूँ- कुछ लहलहाते हुए धान के खेतों के रंग का सुनहरा सा रूप, सावन-भादों के काले बादलों जैसे घने बाल और उनके नीचे सुराहीदार गरदन। चूचियों का विवरण देने के लिये शब्द नहीं हैं, लेकिन इतना तय है कि इन कुवाँरी चूचियों को देखकर बड़े से लेकर बुड्डे तक सबका दिमाग, इन्हें पीने को बेताब हो जाता था। ये मयखाने थे, जो अब तक किसी ने चखे नहीं थे।

शमशेर सिंह ने अपने भतीजे रणधीर सिंह की शादी करके उसके लिये एक खूबसूरत कामुक गरमा-गर्म बहू के रूप में अपने मतलब का माल ले आये थे।

शमशेर सिंह रिटायर्ड टीचर हैं और उनका लंड बड़ा ही घातक और प्रचंड है। उस पर तुर्रा यह कि उनकी बीवी की चूत एकदम सड़े हुए पपीते की तरह नाकाम हो चली है।

अब काम कैसे चलेगा, तो शमशेर सिंह ने अपने भतीजे की शादी एक गरीब बाप की खबसूरत बेटी से तय कर दी थी।

दुल्हन अपने पिया के घर आई, चुदाई के रंगीन सपने लिये। सुहागरात का नजारा, चलने से पहले बता दें कि रणधीर सिंह जी बड़े ही दुबले-पतले लंड वाले और हिले हुए पुर्जे टाइप के इंसान थे, जिनके बस का किसी गांड को मारना या, चूत की सील तोड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।

सुहागरात की रात शमशेर सिंह ने यह नजारा देखने के लिये एक बड़ा ही चौकस जुगाड़ किया और जैसा कि पहले से ही सब तय था कि खुद का कमरा और सुहागरात वाला कमरा आजू-बाजू ही थे और एक ही दीवार दोनों को अलग करती थी। एक खिड़की थी जो सुहागरात वाले कमरे में झांकने का रास्ता थी। उसे उसने पहले से ही थोड़ा हिला-हिला के झिर्रीदार बना दिया था।

जैसे ही चूत की कहानी शुरु होती, शमशेर सिंह ने अपनी आँखें खिड़की से लगा दीं। रणधीर सिंह हिलते हुए अपनी दुल्हन के सामने खड़ा था, वो नीचे देख रही थी और वो ऊपर देख रहा था। कौन किसको चोदने वाला है, यही समझ नहीं आ रहा था लेकिन दुल्हन ने पहल की।

वो समझ गई थी कि ये लौंडा एकदम बकचोदू है और चिकलांडू है क्योंकि सामने चूत का मौका देख कर कोई बकलँड ही इस तरह कांप सकता है।

शमशेर सिंह को खिड़की से यह दृश्य दिखाई दे रहा था और उनका लंड धोती के अंदर डिस्को भांगड़ा करने लगा था। उन्होंने आंखें गड़ा दीं।

बहू ने रणधीर सिंह की शेरवानी खोल दी और पजामे का नाड़ा जल्दी में खींच के तोड़ डाला। कहानी उल्टी चल रही थी और शमशेर सिंह इतनी गर्म बहू देख कर एकदम बाग-बाग थे क्योंकि वो जान गये थे कि इतनी गर्म और कामुक बहू इस नादान और नामर्द लौंडे से संभलने वाली नहीं है, इसीलिए तो उन्होंने इसकी जल्दी ही शादी करवा दी थी।

बहू ने रणधीर सिंह को पूरा नंगा कर दिया। आज वो अपना हक अपने मर्द से छीन लेने वाली थी कि अपने पति का ‘टिंगू-लंड’ देख कर उसका दिल बैठ गया। एकदम दो इंच का लंड था और खड़ा होकर साढे तीन इंच का हो गया था। इसे तो चूसा भी नही जा सकता, हद है भई !

रणधीर सिंह जी हांफ़ रहे थे, दुल्हन के इस गर्मागर्म रूप को देख कर। उसने रणधीर सिंह को पटक कर उनके मुँह पर अपनी चूत रख दी और रणधीर सिंह की सांसें फ़ूलने लगीं।

‘साले लंड में नहीं था गूदा तो लंका में काहे कूदा !’ गाली देते हुए बोली- काहे तेरे मास्टर चाचा ने मेरी शादी तेरे से की ! मादरचोद ले, अब चूस मेरी चूत और सुबह उस धोती वाले की धोती में आग लगा न दी तो मेरा नाम बबिता नहीं।

शमशेर सिंह का दिल बागम-बाग हो गया, लंड को तेल लगा कर उन्होंने मोटा और नुकीला किया और अपनी धोती खोल कर सहलाते हुए सो गये। बहुत जल्दी सीन में उन्हें एंट्री मारते हुए अपनी बहू को कब्जा लेना था। सुहागरात में अपने भतीजे रणधीर सिंह का नाकाम फ़्लाप शो देख कर खुश हुआ कि अब तो मेरे लंड को चौका मारने का मौका मिलना तय ही है।

सुबह उसने अपने भतीजे रणधीर सिंह को किसी काम से 6-7 दिनों के लिये बाहर भेज दिया। अब घर में अकेले बहू बबिता और खूसट ठरकी बुढ़ऊ शमशेरसिंह ही बचे थे। खाना परोसते समय बहू का आँचल सरक गया, उसके ब्लाउज का मुँह बड़ा चौड़ा था, तो उजली चूचियों शमशेर सिंह के नजरों में चमक गईं। शायद यह बबिता की सोची समझी चाल थी।

शाम को शौच के लिये उसे बाहर जाना था, खुले में।

बहू को डर लगा तो शमशेर सिंह के पास आई और पूछा- चाचाजी, मुझे बाहर जाना है, दो नम्बर के लिये ! लेकिन पहली बार इस गांव में निकलते हुए डर लग रहा है।

बुढ़ऊ का दिल बाग-बाग हो गया और उसने कहा- चिन्ता ना कर बहू, घर की चारदीवारी में ही खुले में इसी काम के लिए गड्डा बना रखा है, चली जा। मैं छत पर ही रहूँगा, कोई डरने की बात नहीं है।

बबिता चली गई और बुड्डा छत पर से उसे टट्टी करते देखता रहा। अचानक दोनों की नजरें मिल गईं। बबिता ने अपनी चूत पर टार्च जला कर बुड्डे को अपनी झांट वाली ‘बम्बाट’ बुर दिखा ही दी।

वहीं छत पर खड़े-खड़े बुड्डे की धोती में आग लग गई, लंड खड़ा होने लगा और बुड्डे शमशेर ने अपना सुपारा हाथ में लेकर रगड़ना शुरु कर दिया। अब वह चूत का मैदान मारने की तैयारी कर चुका था।

जैसे ही बबिता अंदर आई, दरवाजे पर ही उसने उसे दबोच लिया।

वो बोली- अरे पापा जी रुकिये, गांड तो धो लेने दीजिए अभी टट्टी लगी है उसमें, इतने बेसबरे मत होइये।

शमशेर तुरंत हैंड्पंप के पास जाकर पानी चलाने लगा और बबिता ने लोटे से पानी लेकर अपनी गांड उस बुड्डे के सामने ही छप्पाक-छ्प्पाक धो डाली।

कहानी बुड्डे के अनुसार ही चल रही थी। बूढ़े को अपनी बहू की बड़ी गांड का छोटा छेद बड़ा प्यारा और नाजनीन लगा। वह समझ गया कि यही है मेरे लंड का अंतिम डेस्टिनेशन !

कहानी जारी रहेगी !

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

भतीज-बहू के साथ सुहागरात

कुल भाग: 2
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

घर में दो भोसड़े और एक सीलपैक चुत मिली- 2
रिश्तों में चुदाई

घर में दो भोसड़े और एक सीलपैक चुत मिली- 2

अम्मा सेक्स कहानी मेरे घर में चुदाई के नंगे नाच की है. पहले मेरी खाला ने अपनी चूत चुदवाई. फिर खाला ने मेरी बहन मेरे नीचे लिटा दी. उसके बाद मेरी अम्मी भी!

12 मिनट 387
रैगिंग ने रंडी बना दिया-46
रिश्तों में चुदाई

रैगिंग ने रंडी बना दिया-46

अब तक की इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि सुमन के पापा ने उसको मॉल में ले जाकर किसी दूसरे की बेटी के लिए कह कर सुमन से ही उसके लिए बहुत शॉपिंग करवा ली थी।अब आगे..

11 मिनट 983
चचेरी बहन बनी बिस्तर की रानी-1
रिश्तों में चुदाई

चचेरी बहन बनी बिस्तर की रानी-1

आपके प्रोत्साहन से प्रेरित हो के मैं आपके सामने अपनी एक और आप बीती सुनाने आया हूँ, आशा है आपको पसंद आएगी। कृपया अपने मेल से मुझको जरुर बताएँ कि कहानी कैसी लगी।

10 मिनट 1,032

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।