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रिश्तों में चुदाई • पठन समय: 8 मिनट • पढ़ा गया: 818 बार

हसीन गुनाह की लज़्ज़त-2

राज वीर मिड्ढा

31 Aug 2018 को प्रकाशित

हसीन गुनाह की लज़्ज़त-2
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साली की बेटी की कच्ची उम्र की लज़्ज़त मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी, मैंने सोच लिया था कि आज से मैं दिया वाली साइड सोऊंगा ही

नहीं लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहा था, मेरा पक्का इरादा डाँवाडोल हो रहा था।

शाम आई… मैं घर आया, आते ही दिया मेरे लिए पानी का गिलास ले कर आई, ग़िलास पकड़ते वक़्त मैंने दिया की आँखों में देखा,

दिया ने शर्मा कर नज़र नीची कर ली और खाली गिलास ले कर चली गई।

आज रात तो कुछ हो कर रहना था, ऐसी सोच आते ही पतलून के अंदर ही मेरा लिंग भयंकर रौद्र रूप में आ गया, रात की प्रतीक्षा में

समय काटना मुश्किल हो गया था।शाम को बाथरूम में नहाते समय मैंने एक बार फिर ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ किया।

डिनर करते समय मैंने रह रह कर आती जाती सुधा के नितंबों पर चुटकी काटी। डिनर टेबल पर ही सुधा ने मुझ से दिया के कमरे के

A.C के बारे में पूछा कि कब ठीक हो के आएगा?यूं मैंने कह तो प्रिया कि एक-आध दिन में आ जाएगा पर मेरा इरादा तो दिया के कमरे के A.C को कयामत के दिन तक ना लाने का

हो रहा था।राम राम कर के डिनर निपटाया।

वैसे हम फ़ैमिली के सब लोग डिनर के बाद लिविंग रूम बैठ कर कुछ देर गप्पें हांकते है लेकिन उस दिन मैं सीधा अपने बैडरूम में

चला गया।बाथरूम में ब्रश करने के बाद मैंने अपना अंडरवियर उतार कर वाशिंग-बास्केट में डाल प्रिया और पजामा बिना अंडरवियर के पहन कर

सीधे अपने बिस्तर पर जा कर A.C का टेम्प्रेचर 20 डिग्री पर सेट कर प्रिया।

सुधा और दिया अभी बैडरूम में आईं नहीं थी, मैंने बिस्तर में लेट कर आँखें बंद कर ली, बीसेक मिनट बाद दोनों बैडरूम में आईं और

मुझे सोता पाया।10-15 मिनट हल्की-फ़ुल्की बाद गप्पें हांकने के बाद दोनों सोने की तैयारी करने लगी और बैडरूम की लाइट बंद कर दी गई।

जैसे ही बैडरूम की लाइट बंद हुई मैंने तड़ाक से आँखें खोल ली और दिया को देखने लगा। दिया तब अपने बिस्तर पर लेटने की तैयारी

कर रही थी और अपने बाल बाँध रही थी।मैंने चुपके से अपनी दाईं बाजु दिया के बिस्तर पर तकिये से ज़रा सी नीचे दूर तक फैला दी।

दिया चादर ऊपर खींच कर जैसे ही अपने बिस्तर पर लेटी, मेरी बाजु उसकी गर्दन के नीचे से उसके परले कंधे तक पहुँच गई। उसने

अपने हाथ से अपने दाएं कंधे के पास टटोल कर देखा तो मेरा दायां हाथ उसके हाथ में आ गया।

जैसे ही दिया के हाथ की उंगलियां मेरे हाथ से टच हुई, मैंने उस का हाथ जोर से पकड़ लिया।पहले तो दिया ने दो-चार पल अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन जल्दी ही मेरा हाथ कस के पकड़ लिया।

मुझे तो दो जहान् की खुशियां मिल गई जैसे… मानो सारी कायनात ठहर गई हो!मेरा दिल मेरे सीने में धाड़-धाड़ बज़ रहा था और मैं अपने ही दिल की धड़कन बड़ी साफ़-साफ़ सुन रहा था। पता नहीं ऐसे दो मिनट

बीते के दो घंटे… कुछ याद नहीं।

फिर मैंने दिया की ओर करवट ली और अपना बायां हाथ दिया के बाएं उरोज़ पर रख प्रिया, दिया ने मेरा वो हाथ फ़ौरन परे झटक प्रिया

और अपना सर बायें से दायें हिला कर जैसे अपना एतराज़ जताया लेकिन मैंने दोबारा अपना हाथ उसके बायें उरोज़ पर रख प्रिया।

दिया ने दोबारा मेरा हाथ अपने उरोज़ पर से उठाना चाहा लेकिन इस बार मेरा हाथ ना उठाने का इरादा पक्का था, दो एक मिनट की

असफ़ल कोशिश करने के बाद दिया ने अपना हाथ मेरे हाथ से उठा लिया और जैसे मुझे मनमानी करने की इज़ाज़त दे दी।मैं अँधेरे में दिया के उरोज़ की नरमी और गर्मी दोनों को अपने हाथ में महसूस कर रहा था।

धीरे धीरे मैंने अपनी उँगलियों को दिया के उरोज़ पर ज़ुम्बिश देनी शुरू की। दिया का उरोज़ बहुत नर्म सा था, मैं उस पर बहुत नरमी से

उंगलियां चला रहा था।अचानक एक जगह हल्की सी कुछ सख़्त सी मालूम पड़ी। हल्का सा टटोलने पर पता पड़ा कि यह उरोज़ का निप्पल है।

जैसे ही मेरा हाथ निप्पल को लगा, वो और ज़्यादा टाईट और बड़ा हो कर ख़डा हो गया। मैंने अपना हाथ दिया की चादर के अंदर डाल

कर, दिया की नाईट सूट का ऊपर वाला एक बटन खोल कर, ब्रा के अंदर से हौले से दिया के उरोज़ पर रखा तो दिया के पूरे ज़िस्म में

झुरझुरी की एक लहर सी दौड़ गई जिसे मैंने स्पष्टत महसूस किया।

दिया की गर्म तेज़ साँसें मैं अपनी कलाई पर महसूस कर रहा था। दिया के उरोज़ के कठोर निप्पल का स्पर्श मैं अपनी हथेली के ठीक

बीचों बीच महसूस कर पा रहा था।

धीरे से मैंने अपनी पाँचों उंगलियां उरोज़ के साथ साथ ऊपर उठानी शुरू की और अंत में निप्पल उँगलियों के बीच में आ गया जिसे मैंने

हलके से दबाया।दिया के मुख से शाश्वत आनन्द की ‘आह’ की हल्की सी सिसकारी प्रफुटित हुई। जल्दी ही मैंने अपना हाथ दूसरे उरोज़ की ओर सरकाया

दूर वाला उरोज़ थोड़ा दूर पड़ रहा था तो दिया बिना कहे खुद ही सरक कर मेरी ओर ख़िसक आई।

अब ठीक था।मैंने अपना हाथ ब्रा के ऊपर से ही परले उरोज़ पर ऱखा और उरोज़ को थोड़ा सा दबाया। प्रिय के मुंह से बहुत ही हलकी सी ‘सी… सी’

की सिसकारी निकली।

मैंने अपना हाथ उठा कर धीरे से ब्रा के अंदर सरकाया और परले उरोज़ पर कोमलता से हाथ धर प्रिया। परले उरोज़ का निप्पल अभी

दबा दबा सा था लेकिन जैसे ही मेरे हाथ ने निप्पल को छूआ, निप्पल ने सर उठाना शुरू कर प्रिया और एक सैकिंड में ही अभिमानी

योद्धा गर्व से सर ऊंचा उठाये खड़ा हो गया।

अचानक मुझे लगा की मेरे परले हाथ की हथेली पर कुछ नरम-नरम, कुछ गरम-गरम सा लग रहा है, देखा तो अपनी चादर के अंदर

दिया मेरा हाथ बहुत शिद्दत से चूम रही थी, पूरे हाथ पर जीभ फ़िरा रही थी।

जल्दी ही दिया ने मेरे हाथ की उँगलियाँ एक एक कर के अपने मुँह में डाल कर चूसनी शुरू कर दी। मैं दिया के होंठों की नरमी और

उस की जीभ का नरम स्पर्श अपनी उँगलियों पर महसूस कर कर के रोमांचित हो रहा था।मेरा लिंग 90 डिग्री पर चादर और पजामे का तंबू बनाये फौलाद सा सख्त खड़ा था, मारे उत्तेज़ना के मेरे नलों में तेज़ दर्द हो रहा था।

अब सहन करना मुश्किल था, लेकिन इस से और आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं था।

अपने ही बैडरूम में, अपनी ही पत्नी की कुंवारी भांजी के साथ शारीरिक संबंध बनाते या बनाने की कोशिश करते, अपनी ही पत्नी के

हाथों रंगे-हाथ पकड़े जाने से ज़्यादा शर्मनाक कुछ और हो नहीं सकता था।मैं ऐसी बेवकूफी करने वाला हरगिज़ नहीं था।जिंदगी रही तो आगे ऐसे बहुत मौक़े मिलेंगे जब आदमी अपने दिल की कर गुज़रे और दिया तो राज़ी थी ही!बेमन से मन ममोस कर मैं उठा और बाथरूम में जाकर पेशाब करने के लिए पजामा खोला तो मेरा लिंग झटके से बाहर आया।

जैसे ही मैंने लिंग का मुंह कमोड की ओर पेशाब करने के लिए किया, मेरे पेशाब की धार कमोड में नीचे जाने की बजाए कमोड के ऊपर

सामने दीवार कर पड़ी, मैं अपने लिंग को नीचे की ओर झुकाऊं पर मेरा लिंग नीचे की ओर हो ही ना!

जैसे तैसे पेशाब करके मैं वापिस बैडरूम में आया ही था कि सुधा ने मुझ से टाइम पूछा, मेरी तो फट के हाथ में आ गई।ख़ैर जी!सुधा को टाइम बता कर A.C का टेम्प्रेचर थोड़ा बढ़ा कर मैं भी सोने की कोशिश करने लगा, उधर दिया भी चुपचाप चित पड़ी सोने का

बहाना कर रही थी।

बहुत रात बीतने के बाद मुझे नींद आई।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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हसीन गुनाह की लज़्ज़त

कुल भाग: 5
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