दोस्तो, सनोबर की चुदाई की कहानी में आपका स्वागत है।हिंदी चुदाई कहानी के दूसरे भागगैर मर्द से चूत की प्यास बुझवाने की तैयारीमें आपने देखा कि कैसे मैं नावेद से मिलने उसके पास पहुंच गई।वो मुझे अपने घर ले गया और मुझे नंगी करके मेरे बदन से खेलने लगा।हवस में हम दोनों ने एक दूसरे के लंड-चूत का रस पीया।
अब मैं चुदने के लिए मचल गई थी।
आगे की हिंदी चुदाई कहानी:
नावेद ने मेरी चूत में जीभ चला-चलाकर मुझे बेहाल कर प्रिया था।अब लंड लिये बिना नहीं रह सकती थी।
मुझसे रुका न गया और मैंने बोला- जान, अब चोद दो प्लीज, अंदर डाल दो, रुका नहीं जा रहा।नावेद भी अपने फौलादी लंड के साथ तैयार था।
उसने मुझे एक लुब्रिकेंट दे प्रिया और कहा कि इसे मैं उसके लंड पर लगा दूं।मैंने वैसा ही किया। मैंने उसके लंड पर वो लुब्रिकेंट लगा प्रिया।
उसने भी वो लुब्रिकेंट मेरी चूत में गहराई तक लगा प्रिया।फिर उसने मेरी गांड के नीचे तकिया लगा प्रिया।
अब मेरी चूत और अच्छे से उसके सामने खुल गई।
नावेद अब मेरी चूत मारने के लिए तैयार था।उसने मेरी चूत के मुहाने पर अपना लंड रख प्रिया।
वो लंड को मेरी चूत के मुंह पर रगड़ने लगा।मैं पागल हुई जा रही थी।
मैं लंड को चूत में लेने के लिए नावेद की गांड को हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रही थी।
नावेद भी समझ रहा था कि मुझसे अब लंड के बिना रहा नहीं जा रहा है।वो शायद जानबूझकर मुझे लंड के लिए और ज्यादा तड़पा रहा था।
उसका लंड लगातार मेरी चूत के मुहाने पर रगड़ खा रहा था।हर रगड़ के साथ मेरे अंदर लंड को लेने की गहरी प्यास जग रही थी।
फिर उसने लंड को मेरी चूत में ठेल प्रिया।जैसे ही उसका मूसल लंड मेरी चूत में घुसने की कोशिश करने लगा मेरे मुंह से चीख सी निकल गई।दो बच्चों की मां होकर भी मेरी आह्ह … निकल गई।
चूत में लंड घुसने लगा।एकदम से टाइट होकर रगड़ खाता हुआ उसका लंड मुझे मेरी चूत में अंदर सरकता हुआ महसूस हो रहा था।मैं कसमसाते हुए कराह रही थी।
तभी नावेद ने मेरी चूची को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर प्रिया।मेरा ध्यान दर्द से एकदम मजे पर चला गया।मैं उसके होंठों की छुअन को अपनी चूची पर महसूस करने लगी।
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।मेरी चूत में उसका लंड था और चूची पर उसके होंठ।मेरी चूची को चूसते हुए ही उसने मेरी चूत में हल्के-हल्के धक्के लगाना शुरू कर प्रिया।
मेरी चुदाई चालू हो गई।धीरे-धीरे उसका लंड मेरी चूत में पूरी जगह बनाता जा रहा था।तभी उसने एक जोर का झटका दे प्रिया और मेरी जोर की चीख निकल गई- आआ आआ आह मर गई … ईईईई … आई ईईआ ईईई ईआ आआ अम्मी!
मुझे दर्द में देख वो थोड़ा रुक गया।फिर वो मेरे होंठों को चूसने लगा।
उसका लंड अब मेरी चूत में पूरा का पूरा उतर चुका था।मेरी चूत में उसका लंड ठुका हुआ मझे अलग से महसूस हो रहा था।फंसे हुए लंड के साथ उसने मेरी चूत में धक्के लगाना शुरू किया।
अब मैं उसके लंड को बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी।कुछ ही देर में मुझे मजा आने लगा।
मेरी चूत को चुदने में आनंद आने लगा।मेरी बुर से पानी चूने लगा और वो चिकनी होकर नावेद के लंड को पूरी जगह देने लगी।
अब चुदाई में असली मजा आने लगा।उसका लंड चिकना हो चुका था और मेरी चूत में शाफ्ट की तरह फिसल जाता था।मैं भी अब गांड हिला हिलाकर लंड को अंदर तक लेने के अहसास से खिल जाती थी।
कुछ देर में चूत से काफी पानी निकलने लगा।वो इतना था कि चूत-लंड के मिलन से अब पच-पच की ध्वनियां फूटने लगीं।नावेद भी लगातार स्पीड को बढ़ाए जा रहा था।
मैं उसके मूसल लंड के धक्कों के सामने ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई।मेरी चूत ने उसके लंड पर कामरस उड़ेल प्रिया।उसका लंड मेरी चूत के रस में नहाकर और भी ज्यादा चिकना हो गया।
अब तो नावेद की रफ्तार और भी ज्यादा बढ़ गई, वो मुझे और भी जोर से ठोकने लगा।उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया।
मेरी चूत उसके लंड को और ज्यादा जगह देने लगी।अब उसके लंड के प्रहार और अंदर तक चोट करने लगे।
उसकी चुदाई से अब मैं परमसुख पा रही थी।
नावेद ने एक हाथ से मेरी चिकनी गांड को सहलाना शुरू कर प्रिया।एकाएक उसकी उंगली मेरी गांड के छेद में सरक गई।गांड चुदाई मैं पहले अपने पति से भी करवा चुकी थी और मुझे मजा भी आता है।
मगर नावेद के लंड को गांड में लेने के ख्याल से भी मुझे डर लग रहा था।इतना तगड़ा और मोटा लंड गांड के छेद में डलवाने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी।
नावेद मुझे पूरी स्पीड से चोदता जा रहा था।वो बोला- सोना … माल तुम्हारी बुर में ही गिराऊंगा!मैंने कहा- गिरा दो, दवा ले लूंगी।
उसका लंड सटासट मेरी चूत में जा रहा था।हम दोनों चुदाई के दौरान अब पसीने से लथपथ हो चुके थे।
मेरी चूत में इतना मजा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकती थी।मैंने नावेद को कसकर अपनी बांहों में भींच लिया।
वो भी मुझे ऐसे ठोक रहा था जैसे मेरे छेद में गड्ढा खोद देगा।
एकाएक मेरी चूत से रस का फव्वारा चल पड़ा।नावेद भी एकदम से आह्ह … आह्ह करने लगा और उसके लंड से वीर्य की गर्म पिचकारी मेरी चूत में गिरने लगी।दोनों के रस का मिलन होने लगा और हम दोनों कसकर एक दूसरे से लिपट गए।
उसका लंड गर्म-गर्म वीर्य से मेरी बुर को भरने लगा।रसों का स्खलन होने के बाद कुछ देर तक हम यूं ही एक दूसरे के जिस्मों से चिपटे रहे, एक दूसरे को सहलाते रहे और हल्का हल्का चूमते रहे।
फिर हम अलग हुए।वो बोला- सोना … आज तुमने जो मुझे खुशी दी है, पहले ऐसी खुशी कभी नहीं मिली। आई लव यू!मैं भी नावेद का प्यार पाकर, और मेरी चूत उसके लंड के वीर्य से नहाकर बहुत खुश थी।
कुछ देर हम ऐसे ही इत्मिनान से लेटे रहे।नावेद ने अलग होकर मेरे बालों को सहलाते हुए कहा- कैसा रहा चुदाई का पहला राउंड?मैंने मुस्कराकर कहा- पूरी तसल्ली मिल गई आज!
हम दोनों नंगे ही लेटे हुए थे।नावेद- सोना … तुम मुझसे हमेशा ऐसे ही मिलती रहोगी ना?मैंने हां में गर्दन हिला दी।
फिर मैं उठी और टॉवल लपेट कर बाथरूम करने गई।मैं पेशाब करने के लिए बैठ गई।
जब पेशाब की धार निकली तो उसके साथ मेरी चूत से गाढ़ा वीर्य भी निकला।
मैं चूत की अच्छे से धुलाई की।फिर वापस आई तो देखा कि नावेद दो गिलास जूस लिए बैठा है।
मुझे देखकर मुस्कराते हुए बोला- जूस पी लो, ताकत बनी रहेगी।
मैं भी इठलाती हुई नावेद के पास गई और उसकी गोद में बैठ गई।उसकी गोद में बैठकर मैं जूस पीने लगी।
नावेद ने सिर्फ एक लुंगी लपेटी हुई थी।
मेरे बैठते ही लंड में तनाव आने लगा और उसका मोटा लंड मुझे गांड पर महसूस होना शुरू हो गया।ऐसा लग रहा था जैसे किसी डंडे पर बैठी हूं।
नावेद ने एक हाथ में जूस का गिलास पकड़ा हुआ था जबकि दूसरे हाथ में मेरी चूची थी जिसे वो लगातार दबाए जा रहा था।नीचे उसके लंड के कड़क झटके मेरी गांड पर लग रहे थे।
हम दोनों ने जूस खत्म किया और अपने अपने गिलास नीचे रख दिए।तभी नावेद ने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा।मैं भी उसका साथ देने लगी।
मैं उसकी जीभ को मुंह में लेकर चूसने लगी।वासना का तूफान फिर से उठने लगा।
नावेद का हाथ मेरी पतली कमर को सहला रहा था तो कभी मेरी चिकनी गांड को दबा रहा था।
वो बोला- सोना … कभी गांड मरवाई है?मैंने झूठ कह प्रिया- नहीं!उसने कहा- गांड चुदाई करवाना चाहोगी?
मैं बोली- नहीं, बहुत दर्द होगा।उसने मुस्कराकर कहा- दर्द नहीं होगा पगली, बहुत मजा आएगा।मैं बोली- नहीं, फिर कभी मिलूंगी, तब कर लेना।
ये सब बातें होते हुए मैं नावेद की गोद में चेहरा उसकी तरफ करके बैठी थी।नावेद मेरे बदन को चूमे जा रहा था।
दूसरी तरफ उसके मोटे लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के होंठों को बार-बार चूम रहा था।मेरी चूत पनिया चुकी थी।
मैं भी गीली चूत को नावेद के लंड पर रगड़ देती जिससे उसकी आह्ह … निकल जाती थी।
फिर वो तकिए के सहारे लग गया और अधलेटा सा हो गया।मैं उसके ऊपर ही बैठी हुई थी।
नावेद ने पास ही रखी क्रीम उठाकर लंड पर लगा ली और मुझे लंड पर बैठने को कहा।
मैंने प्यार किया
मैं नावेद के चिकने लंड पर बैठने लगी।लंड का टोपा मेरी चूत पर लगा था।पच करके लंड एकदम से चूत में आधा उतर गया।
मुझे रुकना पड़ा क्योंकि लग रहा था जैसे कि चूत में लंड फंस गया है।लंड एकदम से कस कर जा रहा था।
मैं लंड को चूत में आधा लिए हुए ही कमर को हिलाने लगी।
नावेद मेरी चूचियों को अपने हाथ में लेकर भींचने में लगा हुआ था।मेरी चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी।
जैसे जैसे लंड चूतरस में भीगता गया मेरी चूत उसे अंदर तक रास्ता देती गई।
देखते ही देखते चूत पूरे लंड को खा गई।अब मैं नावेद पर झुक गई और वो मेरी चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा।
मेरी चूत का दर्द भी कम हुआ और चुदने में मजा आने लगा।
आज मेरी हर इच्छा पूरी हो रही थी। मेरे पति कभी मुझे इस तरह ऊपर बैठाकर लंड की सवारी नहीं करवाते थे।लेकिन आज मेरी यह ख्वाहिश भी नावेद ने पूरी कर दी।
मैं नावेद के ऊपर झुकी हुई उसके होंठों को चूस रही थी।मेरी चूत में लंड अंदर बाहर हो रहा था।इतना मजा आ रहा था कि बस चुदती ही रहूं।
तभी मुझे अहसास हुआ कि एक मोटा सा, लंड के टोपे जैसा कुछ चिकना सा मेरी गांड के छेद पर टिका है।मैंने पूछा- ये क्या है?वो बोला- देखती जाओ, तुम्हें बहुत मजा आने वाला है जान!
मैंने पीछे झुक कर देखा तो उसके हाथ में एक रबड़ का डिल्डो था जो बिल्कुल काले रंग का था।उसे उसने मेरी गांड के छेद पर टिका रखा था और रगड़ने में लगा था।
वो उस डिल्डो को मेरी गांड के छेद पर घिसने लगा।मुझे मजा आने लगा।
एक तो मेरी चूत में पहले से ही उसका लंड मजा दे रहा था।अब गांड के छेद पर भी वो डिल्डो खुजली पैदा कर रहा था।
ऐसे ही करते-करते मुझे मजा आने लगा और गांड का छेद खुद ही खुलने लगा।एकदम से फिर वो डिल्डो मेरी गांड के छेद में प्रवेश कर गया।
मिनट भर के अंदर ही नावेद ने आधा डिल्डो मेरी गांड में उतार प्रिया।अब मेरी चूत में भी मूसल था और गांड में भी! दोनों छेद भरे हुए लग रहे थे।
दोस्तो, मुझे इस वक्त ऐसा लग रहा था कि काश मेरे पास दो-तीन छेद और होते, और उनमें भी कोई मर्द ऐसे ही अपने लंड फंसाकर मुझे बुरी तरह चोदते।
पहली बार मुझे दो-दो लंड एकसाथ लेने का अहसास मिल रहा था जो कि बहुत ही कामुक था।अब वो धीरे-धीरे रबड़ के लंड को मेरी गांड में हिलाने लगा।
धीरे-धीरे मुझे भी मस्ती आने लगी।मैं तेजी से नावेद के लंड पर उछल रही थी और वो दूसरे लंड से भी मुझे पेल रहा था।
दो-दो लंड से चुदती हुई मैं मस्त होती जा रही थी।मेरी कमर चलाने की रफ्तार बढ़ती जा रही थी।नावेद भी नीचे से जोर का प्रहार कर रहा था।
उसका लंड मेरी बुर की गहराई तक चोट कर रहा था।मेरी बुर पानी-पानी होकर लंड को पूरा चिकना कर चुकी थी।
मुझे और ज्यादा मस्ती छा रही थी।मैंने झुक कर नावेद की छाती पर यहां-वहां चूमा।फिर उसके निप्पलों पर होंठ रख कर मैं जीभ को गोल-गोल घुमाने लगी।
मैंने निप्पलों को होंठों में दबा लिया।नावेद के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … स्स्स … आह्ह!
जोश में आकर उसने रबड़ का पूरा लंड मेरी गांड में ठेल प्रिया।वो जोर जोर से उस रबड़ के लंड से मेरी गांड को चोदने लगा।
मैं नावेद के लंड पर उछलती हुई अब चरम की ओर बढ़ रही थी।
मेरी चूत में से रस का सैलाब छूटने वाला था।तेजी से गांड को ऊपर नीचे करते हुए मैं झड़ने लगी।जैसे ही चूत का रस छूटने लगा मैं नावेद के सीने से चिपक गई।
नावेद नीचे से धक्का पेल में लगा था।उसका लंड मेरी चूत में खुदाई करता जा रहा था और डिल्डो मेरी गांड के छेद को चौड़ा करने पर तुला था।
नावेद के साथ मेरा यह तीसरा चरमसुख था।मैं बुरी तरह से उसके होंठों को चूस रही थी।वो भी बराबर मेरा साथ दे रहा था।चूत से निकला कामरस उसके लंड को भिगोता हुआ उसके आंडों तक आ गया था।
नावेद- सोना … पोजीशन बदल लो … घोड़ी बन जाओ जल्दी से! मैं घोड़ी की सवारी करूंगा।मैं मुस्करा दी और बोली- आपके लिए जान भी हाजिर है!
मैं उठकर अब पलंग पर जाकर घोड़ी बन गई।डिल्डो मेरी गांड में ही घुसा हुआ था। नावेद ने एक कपड़ा लिया और मेरी चूत को गहराई तक पौंछ प्रिया।
फिर उसने अपने लंड को साफ किया।उसने डिल्डो को गांड से निकाल प्रिया।गांड का छेद खुला का खुला रह गया।
फिर उसने जैली या लिक्विड जैसा कुछ मेरी गांड में डाला।
मुझे अजीब सी सनसनाहट हुई।मैं बोली- अभी कुछ मत डालना अंदर, मेरी गांड फट जाएगी।
उसने मुस्कराते हुए मेरी गांड पर चपत लगाते हुए कहा- जान, जब तक तुम्हारी गांड मेरे लंड के लिए राजी नहीं हो जाती, मैं तब तक गांड में कुछ नहीं डालूंगा।
फिर नावेद ने उसी जैली से मेरी चूत में मालिश की और फिर चूत में लंड को पेल प्रिया।उसने मेरी पतली कमर को थाम लिया और धीमे-धीमे धक्के लगाते हुए मेरी चुदाई करने लगा।
उसका लंड मेरी चूत में पूरी गहराई तक जा रहा था।फिर उसने सिरहाने से कुछ निकाला।
मैंने देखा कि उसके हाथ में एक नया डिल्डो था।यह पहले वाले से भी बड़ा था।
मैं समझ गई कि अब ज्यादा बड़ा डिल्डो मेरी गांड में जाने वाला है।नावेद ने उस पर जैली लगाई और गांड के छेद पर टिका प्रिया।धीरे-धीरे वो उसे मेरी गांड में घुसाने लगा।
मैंने भी गांड को बिल्कुल ढीला छोड़ प्रिया।वो खिलौना पक् … करके मेरी गांड में घुस गया।
उधर नावेद का लंड मेरी चूत की जोरदार चुदाई करने में लगा था।डिल्डो को हिलाते हुए नावेद उसे मेरी गांड में अंदर सरकाने में लगा था।
डिल्डो की मस्ती में मैं भी खुद ही गांड को आगे पीछे करती हुई चुद रही थी।
लगभग 6 इंच तक डिल्डो मेरी गांड में समा चुका था।उधर नावेद का 7 इंच का लंड मेरी बुर में सरपट दौ़ड़ रहा था।नावेद मस्ती में अपने लंड का जोर लगाए घपाघप पेल रहा था।
वो डिल्डो को तेजी से मेरी गांड में पेले जा रहा थाबीच-बीच में वो एक कुछ पल का विराम देकर मेरी चूचियों को पीने लगता था।फिर दोबारा से दोहरी चुदाई चालू कर देता था।
घोड़ी बनाए हुए वो मुझे जबरदस्त पेल रहा था।मैं अब चुदाई के आनंद में जैसे सातवें आसमान पर तैर रही थी।
तभी वो एकाएक रुक कर बोला- चलो पोजीशन चेंज करते हैं।फिर उसने उस खिलौना लंड को मेरी गांड में से निकाल लिया।
अब उसने मुझे पीठ के बल लेटा लिया।मेरे दोनों पैरों को कंधों पर ले लिया।
मेरी चूत एकदम से लसलसाई हुई थी।एकदम से उसने लंड को मेरी बुर में गचाक् से उतार प्रिया और लगा मुझे पेलने।
उसका जिस्म बहुत मजबूत था और छाती का धक्का मेरी चूचियों तक लग रहा था।धक्का इतना जोर का होता था कि लंड बच्चेदानी को छूकर जा रहा था।
कुछ ही देर में मेरा बदन ऐंठने लगा।मैं बदहवास सी चुदती हुई बड़बड़ा रही थी- आह राजा … मेरी जान … सोना … आज से मैं बस आपकी हुई … आह्ह … खुश कर प्रिया तुमने!
नावेद ने अब चुदाई की गति और तेज कर दी।मैं बस अब छूटने ही वाली थी।
एकाएक मेरा बदन कांपने लगा और मेरी चूत ने फव्वारा फेंक प्रिया।उधर नावेद के जिस्म में भी करंट सा दौड़ा और झटके देते हुए वो मेरी चूत में खाली होने लगा।
उसके गर्मागर्म वीर्य से मेरी चूत भरने लगी।इतना मजा मुझे कभी नहीं आया था और मैं जैसे बेहोशी की हालत में पहुंच गई थी।
कुछ देर हम यूं ही पड़े रहे।मुझे फिर पता ही नहीं चला कि मुझे कब में नींद आ गई।
मैं नंगी ही सोती रही।
फिर मेरी नींद एक आवाज के साथ टूटी- अरे मियां! रात भर कितना पेला है इस बेचारी को … अभी तक बेसुध पड़ी हुई है!ये आवाज नावेद की नहीं थी, किसी और की थी।
आपको यह हिंदी चुदाई कहानी कैसी लग रही है, मुझे तक अपनी राय जरूर भेजें।आप कहानी के नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट या फिर ईमेल कर सकते हैं।support@mohakkisse.com
हिंदी चुदाई कहानी का अगला भाग:चूत की प्यास में हुई बेवफा- 4