होम पर वापस जाएं
कोई मिल गया पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 475 बार

चूत की प्यास में हुई बेवफा- 2

सुमन सौरभ ओझा

28 Jul 2020 को प्रकाशित

चूत की प्यास में हुई बेवफा- 2
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

हॉट भाभी सेक्स स्टोरी में मैं काफी दिन बातें करने के बाद एक अनजान मर्द से आकर्षिक हो गयी। मैं चुदना चाह रही थी। मैं उससे मिलने पहुंच गई। उसने मुझे दुल्हन की तरह सजाया और …

दोस्तो, मैं आपको अपनी दोस्त सनोबर की कहानी उसी की जुबानी बता रही थी।

पहले भागगैर मर्द का लंड देख चूत गीली हुईमें आपने पढ़ा कि कैसे सनोबर शौहर की शराब की लत के कारण परेशान थी।ट्रेडिंग के जरिए उसकी मुलाकात नावेद से हुई जो 34 साल का जवान मर्द था।

ऑनलाइन चैट में नावेद ने अपना लंड दिखाया तो सनोबर की चूत भी मचल उठी।दोनों ने एक दूसरे का चैट पर पानी निकलवा प्रिया।

अब आगे की हॉट भाभी इंडियन सेक्स स्टोरी सनोबर की जुबानी:

मैं नावेद से ऑनलइन चरम-चैन पाकर चैन की नींद सोई।सुबह आँख खुली।

मोबाइल की रिंगटोन उठकर देखी तो अम्मी का कॉल था।

कॉल रिसीव की तो अम्मी कहने लगी कि आज उनकी आंख का ऑपरेशन है। पास कोई नहीं है और वो अकेली है।वे मुझसे आने के लिए कहने लगी।

मैंने अम्मी की बात अपनी सास से करवा दी और मुझे जाने की इजाजत मिल गई।

तभी देखा कि वॉट्सऐप पर नावेद का मैसेज आया हुआ था- गुड मॉर्निंग डार्लिंग!मैंने रिप्लाई किया- आज मैं गोरखपुर जा रही हूं। अम्मी की आंख का ऑपरेशन करवाना है। मुझे रातभर वहीं पर रुकना होगा।

वो बोला- अकेली कैसे जाओगी?मैंने कहा- ऑटो से सेलमपुर, वहां से आगे बस से!वो बोला- तुम सेलमपुर आ जाओ, वहां से आगे गाड़ी में ले जाएंगे।

मैंने कहा- ठीक है। अब मैं तैयार हो जाती हूं। पहुंचने में भी वक्त लगेगा।

मैं फ्रेश होकर नहा ली और रेडी हो गई।मैंने डार्क ब्लू कलर की साड़ी, मैचिंग स्लीवलेस ब्लाउज पहना।फिर मेकअप करके मैं निकल गई।

रास्ते में ऑटो में सबकी नजर मेरी मस्तानी चिकनी गांड और संतरे जैसी चूचियों पर थी।मैं हल्का घूंघट किये हुए थी।

मैं ऑटो से सलेमपुर पहुंची।मैं भाड़ा देने को पर्स निकाल ही रही थी कि नावेद ने पहुंच कर भाड़ा दे प्रिया।पहली बार मैंने उसको असली में देखा।

नावेद 6 फिट का, लम्बा तगड़ा, आकर्षक मर्द था।

वह बोला- सोना … आइये, ये अपनी गाड़ी है।पास में ब्लैक कलर की स्कार्पियो खड़ी थी।

मैं गाड़ी में आ गयी।नावेद बोले- चाचा चलो।

तभी गाड़ी चल दी।नावेद एकटक मेरे हुस्न का दीदार कर रहे थे।

बोले- सोना, आप बहुत खूबसूरत हो। बिल्कुल हुस्न की शहजादी।मैं शरमा गई।

नावेद- उफ्फ ये शरमाना … आप तो जैसे मेरी नई नवेली दुल्हन लग रही हो।मैं- मैं तो हूं ही आपकी दुल्हन!

नावेद ने अब ड्राइवर की ओर से पर्दा खींच प्रिया।अब हम अकेले थे।ना कोई बाहर से देख सकता था और न अंदर से।

नावेद ने मेरी गोरी हथेलियों को अपने हाथ में लेकर चूम लिया।उसका पहला स्पर्श मेरे रोम-रोम में फैल गया।उसके हाथ काफी मजबूत थे।

मेरे चेहरे को देखते हुए उसने कहा- सोना … तुम्हारे होंठ मुझे बुला रहे हैं। मिल लूं क्या इनसे?मैंने मुस्कराकर कहा- हां मिल लो! आपकी ही अमानत हैं।

उसने मेरे चेहरे को हाथों में ले लिया और अपने तपते होंठ मेरे गुलाबी होंठों पर रख दिए।फिर आहिस्ता से मेरे निचले होंठ को अपने होंठों में दबा लिया।

मेरा बदन सिहर उठा।नावेद की जीभ मेरे होंठों को कुरेद रही थी।

मैंने मुंह खोल प्रिया।अब उसकी जीभ और मेरी जीभ के बीच भीतर ही भीतर घमासान होने लगा।इस जोरदार किस से मेरा अंग-अंग रोमांचित हुआ जा रहा रहा था।मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में पूरी तरह दे दी।

इस लम्बी किसिंग ने मेरी सांसों की रफ्तार बढ़ा दी।

मैं नावेद के मजबूत सीने से चिपकी हुई थी।उसे अहसास हो गया था मेरी धड़कनों का।

फिर हम अलग हुए।थोड़ी इधर-उधर की बातें हुईं।

वो बोले- जान … आज रात हम एक साथ रहेंगे।मैंने पूछा- कैसे?

तब नावेद ने एक प्लान बताया।बोला- शाम को अम्मी को बोल देना कि घर जाना है। मैं तुम्हारे साथ ही चल लूंगा।

तभी मेरे शौहर का ऑडियो कॉल आ गया। उन्होंने पूछा तो मैंने सारी बात बता दी। मैंने यह भी कह प्रिया कि चार्जर नहीं लेकर आई हूं तो ज्यादा देर नहीं चलेगा फोन।

मैं बोली- बात ना कर पाऊं तो टेंशन मत लेना। रातभर मैं मां के पास रुकूंगी और कल ही आऊंगी।शौहर बोले- ठीक है, रुक जाना। अपना ध्यान रखना। रात को बाहर नहीं निकलना।

उनका कॉल कट जाने के बाद मैं एकदम से सोच में पड़ गई।मैंने सोचा ‘क्या मैं अपने शरीक़ ए हयात को धोखा देकर सही कर रही हूं?’

लेकिन कहते हैं कि ये जिस्म की आग ऐसी होती है कि इसमें हरेक मर्यादा, मान और वादा जलकर खाक हो जाता है।इसी सोच में थी कि नावेद ने गाड़ी एक जूस की दुकान के सामने रोक दी।

नावेद मेरे लिए अनार का जूस ले आए।ना-ना करते हुए भी मुझे वो जूस पीना पड़ा।

हम वहां से चल पड़े।कुछ देर में हम हॉस्पिटल पहुंच गए।

दिनभर नावेद मेरे साथ ही रहे लेकिन दूर-दूर।शाम होने लगी तो नावेद ने कॉल पर कहा- मां से विदा लेकर अब आ जाओ, मैं नीचे गाड़ी के पास इंतजार कर रहा हूं।

प्लान के अनुसार मैं मां से विदा लेकर गाड़ी के पास आ गई।नावेद मेरा इंतजार कर रहे थे।

हम गाड़ी में बैठे और वहां से निकल लिए।कुछ दूरी पर जाकर हमने डिनर किया।

फिर हम नावेद के नए घर में गए।घर काफी सुंदर और मॉडर्न था।

उसके चाचाजान गाड़ी लेकर चले गए।नावेद ने थैले में कुछ लिया हुआ था।फिर हम अंदर गए।

नावेद ने कहा- दिनभर की थकी हुई होगी, जाकर नहा लो, थकान उतर जाएगी। फिर तैयार हो जाओ।देखा कि नावेद गहरे गुलाबी रंग का लहंगा-चोली लिए खड़े थे।

मैं नहाने गई।बाथरूम अच्छा था।

घुसते ही नावेद पास आकर बोले- अपनी स्वीटी को एकदम क्लीन कर देना। हेयर रिमूवर पास ही रखा हुआ है।मैं मुस्करा दी।

फिर मैं नहाने लगी।नहाकर मैं तौलिया लपेट कर बाहर निकली।

नावेद भी नहा चुका था।वो केवल ट्राउजर और टीशर्ट में था।वो काफी हैंडसम लग रहा था।

मुझे देखकर उसने अपनी बांहें फैला दीं।मैं निसंकोच उसकी बांहों में समा गई।

फिर मेरे गालों को चूमकर कहा- अपनी दुल्हन को अपने हाथों से सजाने का मन कर रहा है।

मैंने भी धीरे से कान में कहा- तो रोका किसने है, सजा लो!नावेद- तुम बहुत प्यारी हो, अपनी आंखें बंद कर लो। सजाने के बाद ही खोलना अब!

फिर उसने मेरी आंखों पर एक रेशम की, काले रंग की पट्टी बांध दी।

नावेद ने मेरे जिस्म से तौलिया को अलग कर प्रिया।मैं अब पूरी नंगी उसके सामने खड़ी थी।

मैं देख तो नहीं सकती थी लेकिन मैंने अपनी बुर को अपने हाथों से पूरी तरह से ढक लिया था।नावेद मेरे गीले बदन को तौलिया से पौंछने लगा।

उसके हाथ अब मेरे बदन पर फिरने लगे।शायद वो मेरे बदन पर बॉडी लोशन लगा रहा था।मुझे लोशन की महक आ रही थी।

हाथ फिराते हुए वो मेरी चूची को भी सहलाने लगा।मेरे निप्पल कड़क होने लगे।

फिर निप्पलों पर उसके होंठों का अहसास हुआ।

अगले ही पल वो मेरे निप्पलों को मुंह में भरकर चूसने लगा।साथ ही उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर चल रहे थे।मेरी चूत में कुलबुलाहट होने लगी।

चूत कुलबुलाती भी क्यों नहीं, 6 महीने से मैं चुदी नहीं थी।

तभी नावेद ने मुझे एक चेयर पर बैठा प्रिया।वो मेरे पैरों में लोशन लगाने लगा।

उसके हाथों के कड़क स्पर्श से मेरा रोमांच सातवें आसमान पर था।उसके हाथ मेरी जांघों पर फिर रहे थे।

कभी फिसलकर मेरी पावरोटी की तरह फूल चुकी चूत पर चले जाते थे।फिर एकदम उसके हाथ रुक गए।

एक मिनट के बाद मुझे किसी दूसरी क्रीम की खुशबू आने लगी।वो क्रीम उसने मेरी बुर पर लगाई और मलने लगे।

मेरी चूत में सरसरी पैदा होने लगी।एकाएक नावेद ने उंगली मेरी चूत में घुसा दी।

मैं तो तड़प गई।उफ्फ … निकल गई मेरे मुंह से!

वो उंगली को मेरी चूत में गोल-गोल घुमाने लगा और एक मिनट में ही चूत पानी-पानी हो गई।

फिर उसने उंगली को बाहर निकाल लिया।

मुझे हाथों का सहारा देकर खड़ी किया।वो अब मेरी पीठ पर लोशन लगाने लगा।

उसने मेरी चिकनी गांड पर लोशन लगाया और फिर कुछ अलग सा लुब्रिकेंट मेरी गांड के छेद में लगाया।मेरी गांड के छेद को भी उसने पूरा चिकना कर प्रिया।

गांड में उंगली करवाते हुए मेरी चूत तक खुजली जा रही थी।

फिर उसने हेयर ड्रायर से मेरे बालों को सुखाया।बालों को सुखाने के बाद उसने मेरे बदन पर कपड़े पहनाने शुरू किए।

पहले लहंगा और फिर चोली।बोला- जान … आज ब्रा और पैंटी का कोई काम नहीं है।

फिर उसने मेरे गले में नेकलेस भी पहना प्रिया।फिर उसने मेरी आंखों से पट्टी हटा दी।

शीशे में मैंने एक नई, खूबसूरत सनोबर को देखा।कपड़े के साथ मैचिंग ज्वैलरी और वैसा ही हेयर स्टाइल।

मैं नावेद के सीने से लग गई और उसे आई लव यू बोला।

नावेद ने भी मुझे कसकर सीने से लगा लिया।उसने अपने होंठों से मेरे होंठों को ढक प्रिया।वो जोर से मेरे होंठों को चूसने लगा।

अब सब्र तो मुझसे भी नहीं हो रहा था।मैं भी बदले में उसके होंठों को चूसने लगी।

उसके हाथ मेरे लहंगे पर जाने लगे।अगले ही पल वो मेरे लहंगे को उतारने लगा जो उसने कुछ देर पहले ही मुझे पहनाया था।

मैंने भी उसका टीशर्ट उतार कर फेंक प्रिया।उसका गठीला बदन अब मेरे सामने नंगा था।

उसकी ये जवानी देखकर मैं भी खुद को रोक न सकी और उसकी छाती को चूमने लगी।मेरे होंठ उसके बदन पर जैसे रुक ही नहीं रहे थे।

मैं जैसे उसके रोम-रोम को होंठों से छूने की कोशिश कर रही थी।

फिर उसने मुझे हटाकर मेरी चोली को उतार प्रिया।

वो मुझे फिर से नंगी अवस्था में ले आया।अब उसने मुझे पलंग पर लेटा प्रिया।

लेटाने के बाद वो मेरी संतरे जैसी गोल चूचियों पर टूट पड़ा।वो एक चूची को सहलाता तो दूसरी को दूसरी को चूमने लगता।फिर मेरे बदन को चूमता हुआ वो नीचे नाभि की तरफ बढ़ने लगा।

उसके होंठ मेरी गहरी नाभि पर जा लगे।चूमते हुए बोला- जान, तुम तो बहुत हॉट हो।चूमते हुए वो मेरी जांघों के बीच मुंह डालकर मेरी बुर को चाटने लगा।

उसने अपनी जीभ को मेरी बुर में पेल प्रिया।मेरा बदन अब ऐंठने लगा।

उफ्फ … मैं तो मस्त हो चली।

उसकी जीभ मेरी चूत को कुरेद रही थी जिससे मेरे अंदर एक करंट सा दौड़ जाता था।मैं नागिन के जैसे पलटा खा जाती थी।

उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर एक तूफान पैदा कर रही थी।ऐसी गुदगुदी और रोमांच मैंने कभी महसूस नहीं किया था।उसकी जीभ से कुरेदने के कारण मेरी चूत जैसे लसलसी हो गई थी।

मेरा भी मन कर रहा था कि मुझे भी मर्द के अंग की छुअन का अहसास मिले।

मैं उसके लंड की तरफ हाथ बढ़ाने लगी।

उसका लंड पकड़ने का मन कर रहा था मेरा!

फिर मेरी इच्छा उसने जल्द ही पूरी कर दी।वो उठकर मेरे सामने आ गया और लंड को मेरे मुंह के सामने कर प्रिया जबकि उसका मुंह मेरी चूत की तरफ ही था।

हम 69 की पोजीशन में आ गए।मैंने प्यासे होंठों से उसके लंड को मुंह में भर लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे जल्दी से मुझे इसका रस निकाल कर पीना है।

मैंने आज तक कभी भी लंड नहीं चूसा था लेकिन आज बहुत मन कर गया मेरा।

जिस शिद्दत से नावेद मेरी चूत को चूस रहा था, उसी शिद्दत से मैं उसके लंड को चूस रही थी।

मैं जानबूझकर अपनी जीभ को उसके लंड के टोपे पर फिरा देती थी।जैसे ही मेरी जीभ उसके टोपे पर सहलाती, उसकी जीभ मेरी चूत के और अंदर तक जाने की कोशिश करती।इससे मेरा मजा दोगुना हो जाता था।

नावेद के लंड का सुपाड़ा बहुत मोटा था और जल्दी ही मेरा मुंह दुखने लगा।उसने मेरी चूत को जीभ से कुरेद कुरेदकर मेरी हालत खराब कर दी थी।

मैंने लंड को मुंह से निकाल प्रिया और जीभ से सुपाड़े को चाटने लगी।

मेरी चूत में चुदने की आग भड़कती जा रही थी।मुझे अब किसी भी हाल में चूत में लंड चाहिए था लेकिन मैं खुद से कहना नहीं चाह रही थी।

आपको यह हॉट भाभी सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है, मुझे तक अपनी राय जरूर भेजें।आप कहानी के नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं, या फिर मुझे ईमेल भी कर सकते हैं।support@mohakkisse.com

हॉट भाभी सेक्स स्टोरी का अगला भाग:चूत की प्यास में हुई बेवफा- 3

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

चूत की प्यास में हुई बेवफा

कुल भाग: 4
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

अनजान शहर में मिली एक अनजानी
कोई मिल गया

अनजान शहर में मिली एक अनजानी

एक दिन मैं कंपनी के कम से बड़ौदा गया था. पूरे दिन में काम करके मैं शाम को घूमने निकलता था.

4 मिनट 1,037
प्रशंसिका ने दिल खोल कर चूत चुदवाई-4
कोई मिल गया

प्रशंसिका ने दिल खोल कर चूत चुदवाई-4

मूतने के बाद मैंने अपना लोअर पहना और रचना से बोला- अब मुझे ऑफिस भी जाना है, तुम भी अपना काम निपटा लो, फिर शाम को मिलते हैं। और तुम्हारी झांट भी बनाते हैं।कह कर मैं अपने रूम में आ गया और तैयार होकर ऑफिस आ गया।

13 मिनट 457
प्यार का सफ़र-2
कोई मिल गया

प्यार का सफ़र-2

मैंने उससे पूछा- इतनी लड़कियाँ तेरे संपर्क में आई कैसे?

12 मिनट 1,314

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

पायल सक्सेना

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

रमेश देसाई

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।