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भाभी की चुदाई • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 694 बार

मेरे जीजू और देवर ने खेली होली-2

फ़ुलवा

27 Sep 2022 को प्रकाशित

मेरे जीजू और देवर ने खेली होली-2
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कहानी का पिछला भाग:मेरे जीजू और देवर ने खेली होली-1

शाम को साढ़े तीन बजे रोहित का फ़ोन आया, कहने लगा- भाभी ! तैयार रहना, मैं थोड़ी देर में आ रहा हूँ आपको लेने।

मैंने उसे कहा- दीदी और जीजू भी चलेंगे हमारे साथ, तुम एक घण्टे से पहले मत आना क्योंकि इतना समय तो लग ही जाएगा तैयार होने में!

इस पर रोहित बोला- नहीं ! आप अकेले ही आएँगी मेरे साथ !

मेरे मन में शंका हुई, कहीं फ़िर कोई शरारत या कुछ और तो नहीं सोच रहा है रोहित ! मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि रोहित ने मुझे जीजू के साथ देख लिया था। अगर उसने कुछ बता प्रिया अपने घर में या सुमित को तो क्या होगा !

फ़िर मैंने आग्रह किया कि सब इकट्ठे ही चलेंगे बाज़ार ! तो वो नहीं माना और मुझे बताया कि उसके पास मुझे दिखाने के लिए कुछ है।

पर मेरे बार बार पूछने पर भी उसने बताया नहीं कि क्या है और मुझे तैयार कर ही लिया अकेले चलने के लिए। दीदी, जीजू का तो वैसे भी कोई कार्यक्रम था ही नहीं जाने का।

रोहित आया और हम दोनों गाड़ी में चलने लगे तो दीदी ने रोहित से कहा- ज्यादा देर मत करना, दो घण्टे तक तो आ ही जाओगे?

इससे पहले मैं कुछ बोलती, रोहित ने कहा- हाँ दीदी ! कोशिश करेंगे, पर देर भी हो सकती है।

और हम चल दिए। थोड़ा ही आगे गए थे कि रोहित ने मेरे बाएँ कंधे पर हाथ रख कर मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरे गाल पर एक चुम्मा ले लिया।

मुझे बहुत बुरा लगा- यह क्या कर रहे हो रोहित !

प्यार से एक चुम्मी ली है भाभी ! अच्छा बताओ कहाँ चलोगी?

तुम बताओ? कौन सी मार्केट आज खुली होगी?

अरे मार्केट का तो बाद में देखेंगे। कुछ मौज-मस्ती हो जाए ! वैसे भी गिफ़्ट तो पहले से ही है मेरे पास आपके लिए !

क्या है?

उसने अपना मोबाइल निकाला और कुछ बटन दबाए और मेरे हाथ में दे प्रिया।

देखो भाभी ! आपके लिए !

मैंने देखा कि उसमें जीजू और मेरा होली का छेड़छाड़ की वीडियो थी। मैं तो सन्न रह गई। लगभग तीन मिनट की वीडियो होगी वह।

क्यों भाभी ? कैसी लगी मूवी?

मेरे मुँह में जैसे बोल ही नहीं रहा था। मैंने रोहित की ओर देखा तो वो मुझे ही देख रहा था और हमारी नज़रें मिलते ही उसने मुझे फ़िर अपनी ओर खींच कर मेरे होंठ चूम लिए और उसका एक हाथ मेरी जांघ पर आ गया। मैंने जींस पहनी हुई थी। वो एक हाथ से गाड़ी सम्भाल रहा था और दूसरे हाथ से मेरी जांघ। मैंने उसका हाथ हटाने की कोशिश की तो बोला- भाभी किसी होटल में कमरा ले लेते हैं।

मेरी समझ में सब आ चुका था। रोहित मुझे ब्लैकमेल कर रहा था और इस वीडियो का फ़ायदा उठाना चाह रहा था। मैं फ़ंस चुकी थी। किसी तरह से हिम्मत जुटा कर मैंने रोहित से कहा- प्लीज़ रोहित ! इस वीडियो को डीलीट कर दो !

अरे भाभी ! इसमें ऐसा क्या है जो तुम डर रही हो। मुझे तुम्हारा और तुम्हारे जीजू का खेल अच्छा लगा तो रिकॉर्ड कर लिया, बस !

चलो अब किसी होटल में जाकर हम भी ऐसे ही कुछ खेलते हैं !

रोहित ! क्या कह रहे हो? मैं तुम्हारी होने वाली भाभी हूँ ! तुम्हें शर्म आनी चाहिए !

भाभी ! जब आपको शर्म नहीं तो मुझे काहे की शर्म? आप तो अपने जीजू के साथ खूब मौज-मस्ती कर रही थी ! खूब ऐश की होगी जीजू से अपने? पहली बार का मज़ा अपने जीजू को प्रिया या किसी यार से लुटवा ली अपनी जवानी?

रोहित ! तुम्हें पता है कि तुम क्या बके जा रहे हो? गाड़ी रोको ! मुझे नहीं जाना तुम्हारे साथ कहीं भी !

नीतू डीयर ! अब तुम अपनी मर्ज़ी से नहीं मेरी मर्ज़ी पर चलोगी।

रोहित आप से तुम पर उतर आया था।

बता ना ! किससे अपनी चूत का उदघाटन करवाया?

मैंने यह सुन कर अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा लिया और मेरे आँसू छलक पड़े। मैं सुबक पड़ी। इतनी अश्लील भाषा तो मैंने कभी सुनी ही नहीं थी।

रोहित ने खाली सड़क देख गाड़ी एक तरफ़ लगाई और मेरे दोनों हाथ अपने दोनों हाथों में ले कर मुझे अपनी तरफ़ खींचा और मेरे गालों पर से मेरे आँसू अपनी जीभ से चाट लिए। मैंने पीछे हटने की कोशिश की मगर रोहित ने और मज़बूती से मुझे पकड़ कर अपने ऊपर गिरा सा लिया और कहा- ज्यादा नखरे मत कर ! अगर ना-नुकर की तो अभी यह वीडियो सुमित को भेज दूंगा।

इतना कह कर रोहित ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूमते चूमते मेरे होंठ ऐसे चूसने लगा जैसे कोई फ़ल खा रहा हो। अब तक उसका एक हाथ मेरे शर्ट में जाकर मेरे स्तनों से खेलने लगा। मैं रोने लगी थी। पर मैंने अपने आप को रोहित के हवाले कर प्रिया। मेरा विरोध ढीला पड़ते देख रोहित ने भी थोड़ी नरमी दिखाई और मुझे छोड़ प्रिया और मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर पैन्ट के ऊपर ही रख लिया। मैंने फ़िर अपना हाथ पीछे खींच लिया। अब रोहित कुछ नहीं बोला और गाड़ी स्टार्ट करके आगे बढ़ा दी।

थोड़ा चलने के बाद रोहित बोला- नीतू ! तुम इतने नखरे क्यों दिखा रही हो। तुम्हारे जीजा को तुम्हारे साथ देख कर मैं तो समझा था कि तुम आसानी से मान जाओगी, तुम तो ऐसे नखरे दिखा रही हो जैसे कोई कुँवारी कन्या हो।

मुझे डर भी लग रहा था और गुस्सा भी आ रहा था। मेरे मुंह से गुस्से में निकल गया- तुमने क्या मुझे कोई चालू लड़की समझ लिया है?

मैं अभी तक तुम्हारी हरकतें सह रही हूँ सिर्फ़ इस वीडियो के कारण ! जीजा-साली और देवर-भाभी के रिश्ते में यह सब थोड़ा बहुत चलता ही है और तुमने इसका गलत मतलब निकाला। ये रिश्ते बने ही इस तरह से हैं कि साली अपने जीजा से और देवर अपनी भाभी से हंसी मज़ाक में ही काफ़ी कुछ सीख सके। इसका मतलब यह नहीं कि वो रीमा ही लांघ जाएँ ! मैं मानती हूँ कि जो तुमने आज मेरे जीजाजी को मेरे साथ होली खेलते देखा वो इन पवित्र रिश्तों की रीमा का सरासर उल्लंघन था, पर जो तुमने किया उसमें क्या तुमने अपनी मर्यादा का ध्यान रखा?

अरे ! साली को तो आधी घरवाली कहा भी जाता है लेकिन हमारे समाज़ में भाभी को तो माँ तक का दर्ज़ा प्रिया गया है। भाभी तो एक ऐसी माँ की तरह होती है जिससे आप वो बात भी कर सकते हो जो अपनी माँ से कहते हुए हिचकते हो। भाभी तो एक माँ और एक दोस्त का मिलाजुला रूप है।

इसी प्रकार मैं ना जाने क्या क्या बोल गई रोहित के सामने और वो चुपचाप सामने सड़क पर नज़र गड़ाए मेरी बात सुनता रहा और गाड़ी चलाता रहा। उसकी आँखों की नमी मैं देख पा रही थी।

अचानक उसने खाली सड़क देख कर गाड़ी रोकी और झुक कर मेरे पैरों की तरफ़ हाथ बढ़ाते हुए बोला- भाभी ! मुझे माफ़ कर दो ! जब मैंने आपको होली खेलते देखा तो पहले तो मुझे भी बहुत गुस्सा आया आपको उस हालत में देख कर, फ़िर मैंने सोचा कि चलो मैं भी बहती गंगा में हाथ धो लूँ ! मगर आप तो गंगा की तरह निकली जो अपने में मेरे और आपके जीजू जैसी गंदगी समेट कर भी पवित्र बनी हुई है।

लेकिन जब तुमने मेरे साथ जबरदस्ती करने की और मुझे ब्लैक-मेल करने की कोशिश की तो मैं अपनी वासना से जागी।

मैं बोलती जा रही थी और रोहित की आँखों से आँसू टप-टप गिर रहे थे। आत्म-ग्लानि उसे खाए जा रही थी। मैंने उसे इस तरह रोते देखा तो मेरा मन उसकी ओर से साफ़ हो गया और मैंने अपने दोनों हाथों से उसके आँसू पौंछते हुए उसे कहा- अब जो हो चुका उसे भूल जाओ और चलो बाज़ार, मुझे अपना उपहार भी तो लेना है !

इतना सुनते ही रोहित बिलख उठा और उसने मेरी गोद में अपना सिर रख प्रिया। उसके मुँह से बार बार यही शब्द निकल रहे थे- भाभी, मुझे माफ़ कर दो भाभी, मुझे माफ़ कर दो !

मेरी आँखें भी गंगा-जमना की तरह बह रही थी। मैंने उसका सर ऊपर किया और अपने गले से लगा लिया।

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मेरे जीजू और देवर ने खेली होली

कुल भाग: 2
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