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गैर मर्दों की बाहों में मिलता है सुख-2

गीता मेहरा

05 Dec 2019 को प्रकाशित

गैर मर्दों की बाहों में मिलता है सुख-2
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गैर मर्दों की बाहों में मिलता है सुख-1

मैंने बताया था कि पड़ोसी ने मेरे साथ अवैध संबंध बनाए वैसे भी मुझे शादीशुदा मर्दों से चुद कर मजा आता है पड़ोसी के ऑस्ट्रेलिया जाने से अब मेरी फुद्दी प्यासी थी तड़फ़ रही थी। एक दिन घर में मेरी बड़ी बहन का नंदोई आया था, मम्मी घर नहीं थी और वो किसी काम से शहर आया था। रात हो जाने के कारण उसको रुकना पड़ा।

मैं डिनर तैयार करने लगी। पापा उसको बिठा कर खुद बाहर ठेके से दारू की बोतल लेने गये। मैं किचन में काम करते वक्त चुन्नी नहीं लेती थी और वैसे भी मैं डीप-नेक और पीछे ज़िप वाले सूट पहनती हूँ।

वो किचन में ग्लास, पानी, नमकीन लेने आया, बोला- नमकीन दे दो!

मैं डिब्बे से नमकीन निकालने लगी जो उपर वाली शेल्फ पे था। मैंने कहा- रुकना! मैं स्टूल ले कर आती हूँ।

वो बोला- उसकी क्या ज़रूरत? उसने पीछे से आकर उठा प्रिया और बोला- लो डिब्बा उतार लो उसकी इस हरक़त में उसने मेरे चूतड़ों को हल्के से दबा डाला। जाते जाते मेरे मम्मों को भी दबा गया।

फिर पापा और वो बैठ कर पीने लगे। उसकी क्षमता काफ़ी लगती थी पापा को चढ़ गई लेकिन दूसरी बोतल भी खुल गई। पापा थोड़ा नमकीन और पानी लाने के लिए उठने लगे। वो बोला- प्लीज़ अंकल जी! आप बैठो मैं लाता हूँ।

रसोई में आकर उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरी गर्दन पे अपने होंठ रख दिए। मुझे गरम करने के लिए उसने मेरे मम्मों को दबाया और बिना बोले वहाँ से चला गया। उसकी मजबूत बाहों से मेरी प्यासी फुद्दी गीली होने लगी।

थोड़ी ढेर में पापा को ज्यादा चढ़ गई। तभी भाई का फोन आया कि वो आज अपने ससुराल में ही रुकने वाले है। मैंने गेस्ट रूम में बिस्तर लगा प्रिया। उसके लिए खाना लगाने लगी।

तभी वो एक पेग हाथ में लेकर मेरी तरफ आया और मुझे पिलाने लगा। मैंने मना किया लेकिन उसने पेग पिला ही प्रिया। सरूर जल्दी ही चढ़ने लगा। दोनों खाना खाने डाइनिंग टेबल पे बैठ गये। वो उठा और दो पेग बना लाया, बोला- नीता जी! एक जाम और मेरे नाम का!

मैं वो पेग गटक गई। खाना खाने के बाद मैं उठी, बर्तन वगैरा रख के अपने कमरे में चली गई और नशे में सरूर सा आने लगा। तभी वो कमरे में आया और कुण्डी चढ़ा दी।

उसने आते ही मुझे दबोच लिया, ज़िप खोल मेरा कमीज़ उतार प्रिया, ब्रा उतार कर मेरे मम्मों को मसलने लगा, बोला- नीता! तुम बहुत मस्त माल हो ,कैसी गोल-मोल गाण्ड! उफ़फ्फ़! कायल कर प्रिया तूने!

कहते ही मैंने भी उसके गले में बाहें डाल दी और बोली- आप भी असली मर्द हो। आपकी यह चौड़ी छाती, घने बाल, मर्दानगी की कायल तो मैं हो गई आपकी!

वो मेरी दोनों टांगों के बीच बैठ कर अपनी ज़ुबान से मेरी फुद्दी चाटने लगा। जब वो मेरे दाने को चबाता, कसम से आग मच जाती! अहह उह!!!

मैंने उसको धकेलते हुए पीछे किया और जल्दी से उसका लंड पकड़ लिया और घुटनो के बल बैठ कर चूसने लगी।

वो बोला- हाय जान! रानी! राण्ड! माँ की लौड़ी! चूस!

वो अपने पैर से नीचे मेरी गाण्ड के छेद में अंगूठा डालने की कोशिश करने लगा। फिर दारू में टल्ली उसने मुझे सीधा लिटाते हुए अपना मोटा लंड मेरी फुद्दी में धकेल प्रिया।अहह धीरे!बोला- कमीनी! चुप साली रंडी!

मैं ज़ोर ज़ोर से चुदने लगी। जब जब उसका लंड मेरी बच्चेदानी से रग़ड़ ख़ाता, मानो स्वर्ग बिस्तर पे आ गया लगता था।अब मैं खुद नीचे से बोली- हाए मेरे ख़सम! फाड़ डाल! छोड़ना मत!

और मैं गाण्ड उठा उठा के चुदने लगी। उसने मुझे घोड़ी बना लिया और पेलने लगा। मैं झड़ गई लेकिन वो थमा नहीं। करीब 25 मिनट यूँ ऐसे ही गैर मर्द की बाहों में झूलती हुई जो चुदी।

उसने अपना गरम गरम पानी जब मेरी बच्चेदानी के पास में छोड़ा, मैं पागल हो गई। कितना लावा निकालता था उसका लंड!

सो दोस्तो था वो मेरी बहन का नंदोई लेकिन सारी रात उसके नीचे मैं सोई।उसने मुझे 3 बार चोदा, 1 बार गाण्ड में!

यह था मेरी जिन्दगी का दूसरा लंड!उसके बाद वो मुझे मोबाइल से फ़ोन करता, जब हमारे शहर में आता तो मुझे कॉलेज से लेकर करके होटल में ले जाता और खूब चोदता।2 महीने मेरा उसके साथ सम्बंध रहे। फिर मैंने उसे मुँह लगाना छोड़ प्रिया।

फ़िर भी अब कभी जब घर आता है तो मौका देख 1 बार चोद ही लेता है मुझे!अगले गैर मर्द की बाहों की दास्तान! सफ़र चुदाई का लेकर जल्दी रुबरू हो जाऊँगी।

खाओ लंड, लो आनन्द, जाए चूत में लंड!जय चूत लण्ड की!support@mohakkisse.com

गैर मर्द की बाँहों में एक बार फिर

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गैर मर्दों की बाहों में मिलता है सुख

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

भोगी राज

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

नरेन्द्र कश्यप

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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