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कामदेव के तीर-1

रोनी सलूजा

01 Sep 2011 को प्रकाशित

कामदेव के तीर-1
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मैं अपने ऑफिस में बैठा मेल चैक कर रहा था, इस बार ज्यादातर मेल मध्यप्रदेश के जबलपुर, ग्वालियर, इन्दौर, सागर, भोपाल और अन्य शहरों से भी थे।उनमें एक मेल फरहा बेगम का था जिसमें लिखा था- रोनी सलूजा, आपकी कहानी बहुत अच्छी लगी। बड़ा मजा आया इसे पढ़कर!

मैंने जबाब दिया– कहानी पसंद आई, आपको इसके लिए धन्यवाद!

मैंने जवाब दिया- फरहा जी, भोपाल तो आता हूँ पर आप मुझसे क्यों मिलना चाहती हो? कहानी पढ़ो और मजे करो! मुझे अपने ही बहुत से काम होते हैं, मैं सभी से नहीं मिल सकता, अगर आपको कुछ कहना है तो मेल कर सकती हो!

फरहा– रोनी जी, आपकी कहानी अगर सच्ची होती है तो मेरे से मिलने में आपको एतराज नहीं होना चाहिए क्योंकि कहानी के मुताबिक तो आप औरतों के मामले में बड़े रसिक हो, कितनी ही औरतों से आपने मिलन किया है और कितने ही तरीकों से उन्हें संतुष्ट किया। मुझे अपने शहर में किसी बात की कमी नहीं है लेकिन आपसे रूबरु होकर आपको देखना चाहती हूँ, मैं अपना फोटो भेज रही हूँ, देखकर बताना कि मैं कैसी लगी आपको!

उसका फोटो देखा, वो एकदम गोरी-चिट्टी, दूध से धुली हुई परी के समान लग रही थी।सुभान-अल्लाह! बरबस ही मेरे मुख से निकल गया उसकी फोटो देखकर! पर इस तरह की कई फोटो मेरे लिए कितनी ही लड़कियों या महिलाओं द्वारा भेजी गई है, उनका तो यह भी पता नहीं चलता कि वाकयी लड़की है या फेक ID पर कोई लड़का मेल कर रहा है!जबाब देना अलग बात है, किसी का भी दिल दुखाना नहीं चाहता इसलिए जबाब देता रहता हूँ, पर उनसे मुलाकात के बारे में तो कभी नहीं सोचता!

वैसे भी भोपाल और उसके आस पास शहर से बहुत से मेल आते हैं पर मैं ज्यादा ध्यान नहीं देता। आगे भी उसके मेल आते रहे, मैं जबाब देता रहा, मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या किया जाये!

फरहा का अगला मेल– रोनी, तुम्हारी तमन्ना करते करते कामदेव ने भी मुझे घायल कर दिया है, जिसका मलहम सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे ही पास है। मेरे शौहर पांच दिन बाद एक सप्ताह के लिए दुबई जा रहे हैं, इन सात दिनों में कोई भी एक दिन के लिए आप मेरे से मिलने का समय निकाल लो, आपकी बड़ी मेहरबानी होगी!

मैं समझ गया कि फरहा कामाग्नि से पीड़ित है और इसका ज्वर इसकी आरजू पूरी होने के बाद उतरेगा!

मैंने कहा- आप सच कह रही हो, कैसे विश्वास करूँ?

तो बोली मेरा फोन नंबर 99- — – 4 इस पर आप मुझसे गुफ्तगू कर सकते हो! जब यकीन हो जाये तभी मेरे से मिलने का इरादा बना लेना। पर वक्त कम है।

फिर फरहा ने फोन से बात की मेरे से, और पांच दिन में कई बार बात हुई। संतुष्ट होकर अंततः मैंने उससे मिलने की योजना बना डाली!

अगले दिन फरहा ने बताया कि उसके शौहर दुबई चले गए और मेरे घर पर ही आप मेरे से मुलाकात करना! मैं आपको लेने आ जाऊँगी तो मैंने कह दिया- कल दोपहर 1 बजे की ट्रेन से आऊँगा!

नियत समय पर खुद ही कार चला कर फरहा मुझे लेने आई। उसने बुर्का पहना हुआ था, सिर्फ चेहरा बुर्का से बाहर नुमाया हो रहा था। उस पर भी बड़े शीशों का चश्मा लगा रखा था।

जैसा उसने पहले ही तय कर दिया था, मैं कार के पास गया तो उसने अन्दर से ही दरवाजा खोल दिया, मैं बैठ गया तो वो सीधा अपने घर ले गई, जिस गेट के सामने उसने कार रोकी, वो एक बहुत बड़ी कोठी थी जो एक पोश इलाके में बनी हुई थी! गेट को एक महिला ने खोला।

फरहा ने हमें बताया- यह रजिया है, हमारी बिटिया की आया है जो हमारे साथ ही रहती है, घर के काम भी करती है!

गेट के अन्दर शानदार बगीचा था, जहाँ रजिया के साथ फरहा की 5–6 साल की बिटिया शबा खेल रही थी। बगीचा और कोठी को देखकर उनकी रईसी और नवाबी ठाठ का अंदाजा मैंने लगा लिया! कोठी के अन्दर का नजारा तो जन्नत सा लग रहा था।

फरहा बोली- आप तशरीफ़ रखिये, मैं आती हूँ।

मैं एक गद्देदार सोफे पर बैठा तो उसमें धंसता चला गया। सामने की दीवाल पर एक युगल की तस्वीर जिसमें फरहा के साथ उसका पति होगा जो रोबदार, बांका नौजवान था।

मैं कोठी का मुआयना कर ही रहा था कि सामने के दरवाजे से फरहा नुमाया हुई, बिल्कुल चौदहवीं का चाँद थी जैसे बुर्का रूपी घने बादल में छुपी हुई थी।बुर्का निकलते ही उसकी खूबसूरती उजागर हो गई! फोटो से भी ज्यादा खूबसूरत और दिलकश थी वो!उसने लाल कसीदे वाली सलवार-कुर्ती पहन रखी थी। मेरा तो गला सूखा जा रहा था!

फरहा की काया छरहरी थी पर ऊपर नीचे के उभार बड़े उन्नत थे! बेहद हसीन हुस्न की मलिका थी। शायद कामदेव की इस पर नजर नहीं पड़ी नहीं तो इस अभूतपूर्व सौन्दर्य पर मोहित होकर वो अपनी रति को भी छोड़कर फरहा के पीछे लग जाता।

तब तक रजिया और शबा भी अन्दर आ गए!

फरहा- रजिया, जाओ चाय नाश्ते का इंतजाम करो जल्दी!

फरहा ने हुक्म दिया तो रजिया मेरी और फरहा की ओर देख मुस्कुराती हुई अन्दर चली गई।

रजिया की उम्र 30–32 से ज्यादा नहीं होगी बड़ी हसीन और बदन भरा गदराया हुआ था!फरहा की बेटी शबा मुझे उत्सुकतावश देख रही थी मैंने अपने साथ लाये चोकलेट के पैकेट्स उसे दिए तो बोली- थैंक यू अंकल!

तभी फरहा बोली- बेटा, आप अपने कमरे में जाकर पढ़ाई करो, मैं अभी रजिया को भेज रही हूँ!

मैंने कहा- रजिया क्या सोचेगी? उसे और शबा को क्या बताओगी कि मैं कौन हूँ, क्यों आया हूँ?

कहते हुए मुझसे चिपक कर बैठ गई।

फरहा के शरीर से और कपड़ों पर लगे इत्र की मस्त खुशबू मेरे दिलोदिमाग को तरोताजा कर रही थी, मैंने भी अपनी बाँहों के घेरे में लेकर फरहा को आलिंगनबद्ध कर लिया, बोला- फरहा, तुम तो एकदम अप्सरा हो, कितनी हसीं हो, कितनी मादक हो! तुम्हारे पति तुम्हारी सेक्स की आग को नहीं बुझाते क्या जो मुझे याद कर लिया!

फरहा– ऐसी बात नहीं है, मेरे खाविंद मेरी सभी ख्वाहिशों को पूरा करते हैं और सेक्स के तो वो बहुत बड़े शौकीन हैं, घर पर होते हैं तो मौका मिलते ही मुझे पकड़कर वासना में गोते लगाते रहते हैं, मुझे कभी प्यासा नहीं छोड़ते! पर मुझे लगता है कि यदि वो टूर पर बाहर जाते हैं तो शायद किसी न किसी हसीना का सुख भी भोगते होंगे पर मुझे उनसे कभी शिकायत नहीं हुई! रही मेरी बात, तो मैंने कभी अपने पति के अलावा किसी से कोई सम्बन्ध नहीं बनाया! पर मैं भी थोड़ा सा बदलाव चाहती हूँ कुछ नयापन, नए अनजान पुरुष से! और आपकी कहानियाँ पढ़कर मैंने आपसे मिलने का फैसला किया! ऐसा लगता है जैसे मुझे आपसे प्यार हो गया है।

मैंने कहा- फरहा, तुम प्यार मुहब्बत के धोखे में मत रहना क्योंकि रोनी अपनी पत्नी (मेरी जानू) के अलावा किसी भी महिला से प्यार नहीं करता, न ही उन्हें प्यार के धोखे में रखता है। मतलब रात गई और बात गई!

तभी रजिया खांसते मुस्कुराते हुए आई और ढेर सारा नाश्ता चाय पानी मेज पर लगा दिया!

फरहा– रजिया, जाकर शबा की पढ़ाई कराओ और उसका ध्यान रखना!

रजिया के जाने के बाद हमने नाश्ता किया, फिर ऊपर वाली मंजिल पर चले गए जहाँ फरहा का बेडरूम था। यहाँ पर स्वर्ग जैसी सारी सुविधाएँ मुहैया थी!

मुझे आलीशान पलंग पर बिठाकर फ़रहा बोली- अब आप अपने कपड़े बदल लो!

और फरहा बाथरूम में घुस गई।

मैं सुसज्जित शयनकक्ष को देख सम्मोहित सा हो गया था, जैसे किसी स्वप्नलोक में आ गया हूँ।

तभी बाथरूम के दरवाजे पर फरहा प्रकट हुई, उसके जिस्म पर केवल एक काला पारदर्शी गाउन था जिसमें से उसके हाहाकारी बेपर्दा जिस्म का दीदार हो रहा था!

कहानी जारी रहेगी, अपने विचार मेरी ID पर भेजें!support@mohakkisse.com@yahoo.com

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कामदेव के तीर

कुल भाग: 5
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी
s

sheru137

1 week ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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