होम पर वापस जाएं
बीवी की अदला बदली पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 401 बार

लागी लंड की लगन, मैं चुदी सभी के संग-41

शरद सक्सेना

02 Jun 2025 को प्रकाशित

लागी लंड की लगन, मैं चुदी सभी के संग-41
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

जब मैं अश्वनी से फ्री हुई तो देखा कि सब अपने अन्तिम पड़ाव में हैं और सभी औरतें लंड से निकलने वाले रस चाटने का मजा ले रही हैं।केवल अभय सर अकेले बैठे हुए थे, मैं उनके पास गई, वो कुछ सोच रहे थे, उनकी नुन्नी बिल्कुल नुन्नी हो चुकी थी।

मुझे देख कर वे मुस्कुराये और हल्का सा सरक गये, मैं उनके बगल में बैठ गई और उनकी जांघों में हाथ फेरने लगी।

दीपाली भी बगल में आकर बैठ गई और अभय सर की नुन्नी से खेलने लगी। फिर धीरे धीरे मेरा और दीपाली मैम का खेल अभय सर के साथ शुरू हो गया, वो उनके सुपारे को अपने अंगूठे से रगड़ रही थी और मैं उनके निप्पल के दानो को अपने दाँतों के बीच लेकर चूस रही थी।

फिर हम दोनों ही थोड़ा सा नीचे आई और उनके लंड को अपनी जीभ से बारी-बारी चाटने लगी। मेरा ध्यान केवल अपने, अभय सर और दीपाली की हरकतों पर ही था, और बाकी लोग क्या कर रहे थे, मैं नहीं ध्यान नहीं दे रही थी।

हम दोनों उनके लंड को चाटे जा रही थी जबकि अभय सर हम दोनों के चूचियों से खेल रहे थे। कभी हमारे गोलों को पम्प करते तो कभी निप्पल को चिकोटी काटते।

कुछ देर तो ऐसा ही चलता रहा, फिर हम दोनों घोड़ी के पोजिशन में हो गई और अपनी गांड और चूत का मुंह अभय सर की तरफ कर दी। अभय सर हम दोनों की गांड और चूत को बारी बारी से चाटकर गीला करने लगे।

दीपाली मेरी चूची को दबा रही थी और मैं दीपाली की चूची दबा रही थी। घोड़ी वाले पोजिशन में आने के बाद जब मेरी नजर बाकी सभी पर पड़ी तो देखा कि नमिता और सुहाना अमित के साथ वही क्रिया कर रही है जो मैं और दीपाली अभय सर के साथ कर रही थी।

मीना रितेश के साथ लगी हुई थी। जबकि अश्वनी और टोनी एक सौफे पर बैठ कर एक दूसरे का लंड को फेंट रहे थे। तभी मेरी गांड में लंड का प्रवेश हुआ और फिर धक्का लगने लगा।

फिर लंड बाहर था और उंगली अन्दर… 2 मिनट बाद ही मेरी गांड गीली हो गई। मतलब साफ था कि अभय सर फ्री हो गये थे और सोफे पर बैठ कर हांफ रहे थे।दीपाली ने मेरी तरफ देखा और फिर बुरा सा मुंह बनाते हुए बोली- बस इसके साथ यहीं तक का साथ होता है, खुद जल्दी झड़ जाता है और फिर मेरी चूत में आग लगी रहती है।

मैंने दीपाली को इशारे से चुप कराया और अश्वनी और टोनी जो एक दूसरे के लंड को मसल रहे थे हम दोनों जाकर सीधा उन दोनों की गोद में बैठ गई, मैं टोनी की गोद में थी और दीपाली अश्वनी की गोद में बैठ गई, दोनों के हाथ सीधे हमारी चूचियों को मसलने लगे।अचानक मेरी नजर घड़ी पर पड़ी तो छः बजने वाले थे। कल ही शाम की गाड़ी से मुझे ऑफिस के काम से अपने ससुर के साथ कोलाकाता जाना था।

खैर मैं अभी मजे लेने के विचार में थी, मैं टोनी की गोद से उतरी और उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया।दीपाली ने भी वही किया, वो भी अश्वनी के लंड को अपने मुंह में लिये हुई थी।

मैं टोनी को इस अन्तिम चुदाई के खेल का मजा देना चाहती थी। मेरे कहने पर टोनी सोफे से थोड़ा बाहर आया और अपने दोनों पैरों को सोफे पर रख लिया।अब मेरे लिये उसके गांड का छेद, गोले और लंड तीनों के साथ खेलना आसान हो गया।

जब मेरा एक हाथ उसके लंड को सहला रहे होते तो मैं उसके लंड को चूसती और दूसरे हाथ की उंगली उसके छेद को सुरसुराहट दे रही होती।टोनी के मुंह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… बस ऐसे ही करो बड़ा मजा आ रहा है, ऐसे शब्द सुनकर मेरे भी हौंसले और बढ़ रहे थे, कभी मैं उसकी गांड को अपनी जीभ का मजा देती तो कभी अपनी उंगली का मजा देती।इसी तरह कभी उसका लंड मेरे मुंह में होता तो कभी मेरा अंगूठा उसके सुपारे से खेल रहा होता।

फिर मेरी जीभ टोनी के पूरे जिस्म में अपना खेल दिखाने लगी, उसके लंड और जांघ को चाटते हुए मेरी जीभ उसकी नाभि में हलचल पैदा करने लगी।जैसे जैसे मैं उसके जिस्म को अपने जिस्म से रगड़ते हुए ऊपर उसकी छाती की तरफ बढ़ रही थी, वैसे वैसे ही टोनी का जिस्म सोफे से नीचे की तरफ आ रहा था। अब मेरी जीभ उसके निप्पल को मजा दे रही थी और टोनी की आवाजज आह-आह ओह-ओह मिसरी की तरह मेरे कान में घुल रही थी।

मेरी जीभ तो टोनी के निप्पल के ऊपर तो चल ही रही थी, पर मेरी चूत में उठ रही खुजली को शांत भी करना जरूरी था तो मेरी एक हथेली मेरी चूत की सेवा करने में लगी हुई थी।शायद यह बात टोनी को समझ में आ गई, उसने मुझे सोफे पर पटक दिया और मेरे चूत पर अपने मुंह को लगा दिया।

मेरी हथेली जो चूत पर थी, उसको हटा कर फांकों को फैलाते हुए अपनी जीभ को अन्दर पेल दिया और अन्दर ही अपनी जीभ को घुमाने लगा, जहां तक उसकी जीभ अन्दर जा सकती थी उसने अन्दर डाल दी, फिर मेरी क्लिट को अपने दांतों के बीच लेकर उसे चबाने लगा और चूसने लगा।

कुछ देर ऐसा करने के बाद वो हाफ पोजिशन में खड़ा होकर मेरी चूत में अपने लंड को डाल कर सीधा खड़ा हो गया। इससे मेरे कमर का हिस्सा हवा में झूल रहा था और बाकी सोफे से टिक गया था।टोनी मुझे बड़ी ताकत से चोद रहा था।

पहले तो अभय जब मेरे और दीपाली की चुदाई कर रहे थे उस समय हम लोग अपने चर्मोत्तोकर्ष पर भी नहीं पहुंच पाये थे कि अभय सर झर गये। लेकिन इस समय टोनी ने चोदना भी शुरू नहीं किया था कि मैं एक बार झर चुकी थी।

टोनी लगातार ताकत के साथ मेरी चूत चोदे जा रहा था और उसके लंड का अहसास मुझे अन्दर तक हो रहा था।

थोड़ी देर तक चूत चोदने के बाद टोनी ने मुझे उल्टा किया और मेरी गांड में अपनी जीभ चलाने लगा और अंगूठे से छेद के ऊपर रगड़ रहा था। फिर उसके बाद एक ही झटके से मेरी गांड में अपना लंड पेल दिया।मुझे वो बहुत ही स्पीड से चोद रहा था, कभी मेरी गांड की चुदाई करता और कभी चूत के अन्दर लंड डाल कर मेरी चूत का भोसड़ा बनाने में लगा था।

खैर जितनी स्पीड से चोद रहा था, उतनी ही तेज वो चिल्ला रहा था। साथ में मेरी चूत का भोसड़ा बनाने की बात कहे जा रहा था, मेरे दोनों छेद की चुदाई अच्छे से कर रहा था। मैं एक बार और झड़ गई थी।

इधर दिपाली की भी हालत खराब थी, क्योंकि अश्वनी भी दीपाली की चूत और गांड का बाजा बजा रहा था।

फिर टोनी ने लंड को मेरे मुंह में पेल दिया और धक्के लगाने लगा। उसके हर धक्के के साथ उसका माल मेरे गले के नीचे उतर रहा था।मेरा दम घुट रहा था पर टोनी जब तक पूरा मेरे मुंह में झड़ नहीं गया तब तक उसने अपने लंड को मेरे मुंह से बाहर नहीं निकाला।अश्वनी ने दो चार बूंद दीपाली के मुंह के अन्दर गिराई और बाकी उसके चेहरे पर और फिर अपने हाथ से ही अपने माल को दीपाली के चेहरे पर मलने लगा, ऐसा लग रहा था कि वो दीपाली के चेहरे को क्रीम लगा रहा था।

जो लोग निपटते जा रहे थे वे हमारे पास आकर हमारी चुदाई देख रहे थे।

जब हम चारों भी निपट गये तो हम सभी एक दूसरे के गले मिलने लगे। फिर सभी एक दूसरे को इस प्रोग्राम के लिये थैंक्स बोलने लगे।

रितेश ने पूछने पर सभी ने इस एक्सपीरिएन्स को बहुत ही अच्छा बताया और फिर मौका पड़ने पर मिलने का वादा किया।अमित और रितेश ने टोनी और मीना को स्टेशन छोड़ा, जबकि बॉस और दीपाली ने अश्वनी और सुहाना को स्टेशन छोड़ दिया।

अन्त में मैं, रितेश, नमिता और अमित भी बॉस से विदा होकर चलने लगे तो बॉस ने एक बार मुझे गले लगाया और मेरे गाल को चूमते हुए मुझे थैक्स कहा और कल शाम कलकत्ता जाने की बाद भी याद दिलाई।

हम लोग घर पहुंचे, सास के हाथ का बना बढ़िया बढ़िया खाना खाया और थके होने के कारण जल्दी से सो गये।

सुबह उठ कर सब काम निपटाने के बाद मैं ऑफिस के लिये निकलने वाली ही थी कि डोर बेल बजी।दरवाजे खोलने पर सामने अभय सर खड़े थे, अन्दर बुलाकर उनका सबसे इन्ट्रोड्क्शन कराया।

फिर अभय सर ने मुझे दो पैकेट दिया और सबसे दुआ सलाम करने के बाद यह कहते हुए चले गये कि शाम के जाने की तैयारी करो। आज ऑफिस से छुट्टी है।

मैं उनके जाते ही जैसे पैकेट खोलने वाली थी कि मोबाईल की रिंग बजी।अभय सर की कॉल ही थी, जैसे ही मैंने कॉल पिक की, अभय सर बोले एक पैकेट में 25000/- रू॰ और टिकट था, 25000/- रू॰ वो थे जो कलकत्ते में होने वाले खर्चे के लिये थे और दूसरा पैकेट तुम्हारा पर्सनल है, सबके सामने मत खोल देना।इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया।

मैंने पैसे वाला पैकेट ससुर जी को पूरी बात बता कर पकड़ा दिया और दूसरा पैकेट लेकर अपने कमरे में आ गई।चूंकि पैकिंग हो चुकी थी, मैं अब इत्मीनान से थी कि मुझे कोई एक्सट्रा काम नहीं करना है।

रितेश अभी भी ऑफिस जाने के लिये तैयार हो रहा था, पैकेट देखकर पूछने लगा, मैंने उसे पूरी बात बताई, वो भी मेरे बगल में बैठ गया।हम दोनों ने उस पैकेट को खोला, पैकेट में पैन्टी और ब्रा के अलावा कुछ नहीं था, 5 सेट पैन्टी और ब्रा के थे और पांचों डिजाईनर थे। एक नेट की था, एक ट्रांसपेरेन्ट थी, एक तो केवल दो पत्तों से मिला कर बनाई गई थी और उसको इलास्टिक से जोड़ दिया गया था, वो केवल चूत को ढक सकती थी और पीछे वाली पत्ती तो मेरे गांड के छेद में छुप गई थी, रितेश के कहने पर मैं उसको पहन-पहन कर दिखा रही थी।

जब सभी पैन्टी और ब्रा की ट्रॉयल हो गया तो रितेश बोला- यार, अगर मैं तुम्हारे साथ जा रहा होता तो इस पैन्टी का कुछ यूज भी होता। पापा साथ जा रहे हैं तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाता।

मैंने उसकी नाक को कस कर पकड़ा और बोली- तुम जाते तो इसको पहनने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिलता। पापा के साथ जाने से कम से कम में इसको पहन सकती हूँ।

मेरी इच्छा थी कि रितेश आज ऑफिस से छुट्टी ले ले और मेरे साथ रहे क्योंकि मेरा जिस्म बहुत दर्द कर रहा था, मैं चाहती थी कि रितेश मेरी मालिश भी कर दे।पर रितेश बोला- यार, तुम्हारा बॉस तुम्हें चूत के बदले छुट्टी दे सकता है, पर मेरा बॉस भी मर्द है और मेरे पास लंड ही है। इसलिये मुझे छुट्टी नहीं मिल सकती।

कहकर वो अपने ऑफिस को चल दिया।

अब मैं लेटी-लेटी करवट बदलने लगी कि तभी सूरज आ गया।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

लागी लंड की लगन, मैं चुदी सभी के संग

कुल भाग: 53
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

अनजाना अंजाम: वाइफ़ स्वैपिंग का भूत-2
बीवी की अदला बदली

अनजाना अंजाम: वाइफ़ स्वैपिंग का भूत-2

दोनों कपल में एक दूसरे के प्रति लगाव हो गया था, वे एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे, दोनों की बीवियाँ एक दूसरे के पति को प्रेम करने लगी थी। जिसमें नैना को आरव से बहुत ज्यादा प्यार हो गया था, वह जब आरव के साथ घूमने वगैरा जाती तो बोलती- काश मैं तुम्...

11 मिनट 1,100
उत्तेजना की चाहत बन गयी शामत-3
बीवी की अदला बदली

उत्तेजना की चाहत बन गयी शामत-3

इस कामुक कहनी के पिछले भागउत्तेजना की चाहत बन गयी शामत-2

13 मिनट 550
बीवी की चूत और दोस्त का लण्ड -1
बीवी की अदला बदली

बीवी की चूत और दोस्त का लण्ड -1

दोस्त, आपने इतना प्यार दिया.. उसके लिए धन्यवाद, आप मेरी हर कहानी पढ़ते हो और उसमें रह गई कमियां भी मुझे बताते हो.. उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी दोस्त मुझे अपने जीवन की गुप्त बातें भी शेयर करते रहते हो.. उसके लिए आपका धन्यवाद।

10 मिनट 814

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।