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भाभी की चुदाई • पठन समय: 11 मिनट • पढ़ा गया: 989 बार

माँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल -1

जलगाँव बॉय

23 Oct 2024 को प्रकाशित

माँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल -1
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इस कहानी को लिखने में मुम्बई की एक भाभीजी मदद की है.. उनका नाम यहाँ नहीं बता सकता.. उन्हें बुरा लगेगा और मैं उनका विश्वास नहीं तोड़ना चाहता.. तो पेश है एक नई कहानी..

पुनः लिख रहा हूँ कि यह कहानी पूर्णतय: काल्पनिक है।

मेरे घर में मेरी सौतेली माँ.. भाभी और भैया रहते थे। मेरे पिताजी ने कम उम्र की लड़की से शादी करे उन्हें मेरी माँ बना प्रिया था।

मेरी सौतेली माँ की उम्र 35 साल है। मेरे पिताजी और भाई एक दिन शहर जाते हुए एक्सिडेंट में मारे गए थे। भाई की शादी को सिर्फ 3 महीने ही हुए थे। तब से घर खेत के काम माँ ही देखती हैं और घर के सभी काम भाभी देखती हैं।

मैं माँ और भाभी का लाड़ला हूँ। बचपन से मैं माँ के साथ ही खेतों में हगने के लिए जाता था। हमारे गाँव में सभी बाहर ही खेतों में हगने जाते थे। हमारे घर के पीछे ही कुछ दूरी पर खेत हैं.. वहीं सभी गाँव की औरतें भी हगने जाती थीं।

हगने के लिए माँ मुझे अपने पास ही बिठाती थीं, हमेशा अपनी माँ की चूत गाण्ड रोज देखता था। हगने के बाद माँ मुझे नहलाया करती थीं। नहाने से पहले.. माँ मेरे लण्ड की तेल से मालिश करती थीं।

भाभी के आने के बाद कई बार मैं भाभी के साथ भी जाता था। कई बार भाभी ने भी मेरे लण्ड की मालिश की है। भाभी भी मुझे अपने पास ही हगने के लिए बिठाती थीं।

अब जब मैं बड़ा होने लगा.. तो खुद अकेला ही हगने जाता था और नहाता भी अकेला ही था।

अब मैं एक गबरू जवान हो गया था.. और रोज कसरत करता था। मेरी मस्त बॉडी बन गई थी। रोज सुबह जब नहाने जाता था.. तब मेरे लण्ड की मालिश के लिए भाभी मुझे रोज हाथ में तेल जरूर देती थीं.. कभी माँ भी देती थीं।

एक दिन माँ की तबियत खराब हो गई तो माँ जल्दी सो गईं। मैं अब हगने के लिए जाने वाला था.. हाथ में पानी का डिब्बा उठाया.. तो भाभी हँसते हुए बोलीं- कहाँ जा रहे हो देवर जी?मैं- भाभी अभी आता हूँ हग कर..भाभी- पहले तो मेरे साथ हगते थे.. और अब अकेले-अकेले हग कर आते हो.. क्या आजकल किसी गाँव की दूसरी औरतों के साथ हगते हो?इतना कह कर वे जोर-जोर से हँसने लगीं।

मैं शरमाते हुए बोला- भाभी आपने ही तो मेरे हगना बंद कर प्रिया.. और अब ऐसा कहती हो?भाभी- कोई बात नहीं.. बंद कर प्रिया तो क्या हुआ.. अब फिर चालू कर देते हैं।मैं- ठीक है.. चलो चलते हैं।

भाभी और मैं हगने के लिए हमारे घर के पीछे वाले खेतों में निकल पड़े। रास्ते में चलते-चलते मैं भाभी के पीछे चलने लगा, भाभी पीछे से मस्त गाण्ड मटका मटका कर चल रही थीं।

कुछ देर में हम दोनों खेत में काफी अन्दर आ गए थे। अच्छी साफ़ जगह देखकर हम दोनों बैठने लगे। भाभी ने अपनी साड़ी ऊपर की और अपनी चड्डी नीचे कर ली और मेरे सामने हगने बैठ गईं।मैं भी पैन्ट और अन्डरवियर नीचे करके हगने बैठ गया।

भाभी ने मेरे लण्ड को घूरते हुए कहा- अरे वाह देवर जी.. अब तुम्हारी नुन्नी तो लण्ड बन गई है।मैं- हाँ.. ये तो माँ और आप की मेहरबानी है।

हम दोनों हँसने लगे।

भाभी- पर इतने बाल हैं लण्ड पर.. कभी निकालते नहीं हो क्या..?मैं- नहीं इनके बारे में ख्याल ही नहीं आया… और आपने भी बाल निकालना कहाँ सिखाया।मैं भी भाभी की चूत को गौर से देख रहा था.. और भाभी भी ये देख रही थीं कि मैं उनकी चूत देख रहा हूँ।

भाभी ने हँसते हुए कहा- क्यों देवर जी किसी की चूत नहीं देखी क्या.. जो मेरी चूत इतनी गौर से देख रहे हो।मैं- देखी तो बहुत हैं और पेली भी हैं भाभी।भाभी- क्या? कब.. किसकी देख ली और पेल ली..उन्होंने थोड़ा गुस्सा होते हुए और अचम्भे से पूछा।

मैं- क्या भाभी.. यहाँ तो रोज ही हगने आता हूँ.. और गाँव की सारी औरतें भी हगने के लिए यहीं आती हैं। अब तक गांव की सारी चूतें देख चुका हूँ। गाँव की हर लड़की.. भाभी और बुढ़ियों तक की देख ली है.. और तो और गाँव की नई-नई दुल्हनों की भी चूतें देखी हैं।

भाभी- अरे वाह.. मेरे शेर.. मैं तो तुम्हें बच्चा समझ रही थी और तुम तो काफी आगे निकले.. तो सिर्फ देखी ही हैं या कुछ किया भी है.. या यूँ ही कह रहे हो कि पेली हैं।

मैं- हाँ भाभी रोज रात में गाँव की जिस भी औरत की चूत में खुजली होती है.. तो वो यहीं आ जाती है और हगने के बाद मैं उनकी मस्त पेलता हूँ।

भाभी- क्या रवि.. गांव की इतनी औरतों को चोदा.. और घर की चूतों का ख्याल ही नहीं रखा तुमने?मैं- मतलब.. भाभी मैं समझा नहीं कुछ?भाभी- ज्यादा भोले मत बनो। मैंने और सासू माँ ने इतनी मालिश की तुम्हारी.. और तुम हो कि कभी हमारे साथ कुछ किया ही नहीं..

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मैं- भाभी आपको और माँ को कैसे चोद सकता हूँ मैं?भाभी- वाह.. रोज लण्ड की मालिश करवा सकते हो.. हमारे साथ नहा सकते हो.. हग सकते हो.. तो फिर चोद क्यों नहीं सकते..?मैं- ठीक है आपको तो चोद लूँगा.. पर भाभी.. माँ को कैसे चोदूँ?

भाभी- मैं सब बता दूँगी.. चलो अभी घर चलते हैं.. आज से ही शुरू करते हैं और माँ की चिंता मत करो.. वो खुद तुम्हारे लण्ड के इंतजार में हैं। इसी लिए तो बेचारी वे तुम्हारे लण्ड की मालिश रोज करती थीं।मैं- क्या सच में?भाभी- हाँ..

मैं- ये आपको कैसे पता..? और माँ ने भी मुझे कभी नहीं कहा.. वे तो रोज ही लण्ड हाथ में लेती थीं.. जब इतनी बात थी तो आप दोनों ने मेरे लण्ड को चूत में क्यों नहीं लिया?भाभी- तब तुम बच्चे थे.. अब बड़े जवान और बड़े लण्ड वाले हो.. एक दिन मैंने तुम्हारी माँ को चूत में गाजर डालते देखा था.. तो उन्होंने मुझे देख लिया था। मुझे देखते ही वो थोड़ी डर गई थीं.. और मुझे बुला कर उन्होंने कहा भी था कि किसी को मत बताना। मैंने भी कहा कि इसमें किसी से कहने की क्या बात है। मैं भी तो रोज उंगली या गाजर-मूली डाल लेती हूँ। तब तुम्हारी माँ बोलीं कि अब समय आ गया है कि रवि का लण्ड लिया जाए और जीवन का सूनापन दूर किया जाए।

मैं- अगर ऐसी बात है.. तो मैं अब आप दोनों को कभी प्यासा नहीं रहने दूँगा.. रोज चोदूँगा। आज से गाँव की औरतों की चूत मारना बंद समझो..भाभी- हाँ जरूर रोज चोदना हम दोनों सास-बहू को.. और हाँ गाँव की चूतें जो तुमने अपने बड़े लण्ड से भोसड़ा बना दी हैं.. उन्हें भी जरूर चोदते रहना। उन्हें क्यों नाराज करते हो.. उनकी भी प्यास मैं समझ सकती हूँ।मैं- ठीक है भाभी.. जैसा आप कहें।

अब मेरा लण्ड हगते हुए खड़ा हो गया था.. भाभी की भी नजर उस पर पड़ी।भाभी- अरे ये क्या.. तेरा लण्ड तो अभी से खड़ा हो गया.. शायद रोज इसी समय चुदाई करते हो.. तो इसी कारण खड़ा हो गया होगा।मैं और भाभी हँसने लगे।

अब हमने अपनी-अपनी गाण्ड धोई.. और घर की तरफ निकलने लगे।

घर जाते ही भाभी ने देखा कि माँ सो रही थीं। भाभी ने घर का दरवाजा ठीक से बंद कर प्रिया और मुझसे चिपक गईं, भाभी मेरे होंठ चूसने लगीं, मैं भी भाभी के होंठ चूसने लगा।

क्या बताऊँ दोस्तों.. भाभी के होंठ इतने नर्म थे.. जैसे कोई गुलाब के फूल की पंखुरियाँ हों।हमने लगातार 10 मिनट तक होंठ चूसे।

अब मैं भाभी के बोबे दबाने लगा। उनके बोबे काफी बड़े और सख्त थे.. दबाने में इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊँ। हम दो जिस्म एक जान बन गए थे। इसी में 30 मिनट निकल गए।मैंने झट से भाभी की साड़ी ऊपर की और उनकी चड्डी निकाल दी, भाभी की झाँटों वाली चूत चाटने लगा।

हम दोनों कुछ देर पहले तो हग कर आए थे.. तो भाभी ने बिना हाथ-पैर धोए और चूत धोए चूमना चालू कर प्रिया।क्या मस्त मादक गंध थी भाभी की चूत की.. कभी उनके मूत की गंध.. तो कभी उनकी मादक और प्यासी चूत की गंध..

मैंने चूत को हाथों से सहलाया और चूत चौड़ी करके चाटने लगा। कभी भाभी के मस्त काले हल्के भूरे रंग के दाने को चाटता.. तो कभी पूरी जीभ चूत के अन्दर डालने लगता।

अब भाभी की चूत से मस्त खारा और चिकना पानी आने लगा। मैं पूरा पानी चाटने लगा और पीने लगा।पानी छोड़ने के बाद भाभी अब थोड़ी शांत हो गई थीं।

अब भाभी उठीं और मेरे लण्ड को मेरी पैन्ट से निकालने लगीं।लण्ड निकालने में दिक्कत आ रही थी क्योंकि लण्ड फूल कर काफी कड़ा और बड़ा हो गया था।

भाभी ने मेरी पूरी पैन्ट निकाल दी, अब मैं नीचे से पूरा नंगा हो चुका था, भाभी ने लण्ड हाथ में लिया और बोलीं- बापरे.. ये तो पहले से भी ज्यादा बड़ा दिख रहा है.. इतना लंबा और बड़ा हो गया है कि हाथ में भी नहीं आ रहा है।मैं बोला- ये तो आप दोनों की मालिश की देन है और आज आपको चोदने की उत्सुकता भी बहुत हो रही है.. इसी कारण इतना फूल गया है।

भाभी ने लण्ड को सहलाना चालू किया और अब मेरे लण्ड को चूसने लगीं।मैंने भी हगने के बाद घर आकर लण्ड और हाथ-पैर नहीं धोए थे.. लण्ड पर लगी मूत की कुछ बूँदें भी भाभी चाट रही थीं।

मेरा गाँव का देशी लण्ड भाभी के मुँह में पूरा जा ही नहीं रहा था.. काफी मोटा था। भाभी सिर्फ मेरे लण्ड का टोपा ही चूस पा रही थीं।मैं मादक आवाज में बोला- भाभी वाह्ह.. क्या मस्त लौड़ा चूसती हो आप.. अआहहह.. उम्मम.. ओहोहोहो.. हईईईईई..भाभी मेरे लण्ड को 10 मिनट तक चूसती रहीं।

‘भाभी बस करो.. नहीं तो मुँह में ही झड़ जाऊँगा।’उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर प्रिया और लण्ड चूसती रहीं।मैं समझ गया कि भाभी को मेरा वीर्य पीना है।

अब कुछ ही देर में मैंने मेरे लंड का पानी भाभी के मुँह में छोड़ प्रिया।

तो मित्रो, कैसी लगी मेरी काल्पनिक कहानी.. मेल करके जरूर बताएं। अब मेरी सारी गर्म भाभियाँ.. आंटियां और लड़कियां जल्द उंगली डालना खत्म करें और मुझे चूत खोल कर ईमेल करें।support@mohakkisse.com

सेक्स स्टोरी का अगला भाग :माँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल -2

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माँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल

कुल भाग: 2
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Hello, dosto main Rajan aaj fir se aapke liye apni ek bilkul nayi indian bhabi sex kahani le kar aaya hoon. Dosto ye ek sachi ghatna hai jo ki mere sath piche 3 mahine pehle ghati thi.

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