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माँ की चुदाई • पठन समय: 11 मिनट • पढ़ा गया: 928 बार

माँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल -2

जलगाँव बॉय

26 Oct 2024 को प्रकाशित

माँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल -2
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इस सेक्स स्टोरी के पहले भागमाँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल -1में अब तक आपने पढ़ा..

मेरा गाँव का देशी लण्ड भाभी के मुँह में पूरा जा ही नहीं रहा था.. काफी मोटा था। भाभी सिर्फ मेरे लण्ड का टोपा ही चूस पा रही थीं।मैं मादक आवाज में बोला- भाभी वाह्ह.. क्या मस्त लौड़ा चूसती हो आप.. अआहहह.. उम्मम.. ओहोहोहो.. हईईईई..भाभी मेरे लण्ड को 10 मिनट तक चूसती रहीं।

‘भाभी बस करो.. नहीं तो मुँह में ही झड़ जाऊँगा।’उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर प्रिया और लण्ड चूसती रहीं।मैं समझ गया कि भाभी को मेरा वीर्य पीना है।कुछ ही देर में मैंने मेरे लंड का पानी भाभी के मुँह में छोड़ प्रिया।

अब आगे..

भाभी भी मस्त चटकारे लेते हुए पूरा पानी पी गईं.. एक बून्द भी नहीं बाकी रखी।माल निकल जाने के बाद भी भाभी मेरा लौड़ा चूसती रही थीं.. जिस कारण मेरा लण्ड खड़ा ही था।

भाभी ने तुरंत बिस्तर पर अपनी टाँगें चौड़ी कर दीं.. मैंने भी समय ना गंवाते अपना लण्ड उनकी चूत में रख कर धीरे-धीरे घुसाने लगा। मेरा लण्ड काफी मोटा था तो चूत में घुसने में दिक्कत आ रही थी।

मैं सम्भलते हुए धीरे से डालने लगा, अब तक लण्ड 2 इंच तक जा चुका था।मैंने धीरे से झटका मारा.. तो भाभी जोर से चिल्ला पड़ीं- रवि आराम से.. बहुत समय से इस प्यासी चूत में लण्ड अन्दर नहीं गया..

मैंने उनकी इस बात पर ध्यान नहीं प्रिया और एक जोर का झटका मार प्रिया। अब मेरा पूरा लण्ड चूत में घुस गया था।भाभी दर्द से छटपटाने लगीं और उनकी आँखों से आंसू आने लगे।

कुछ देर ठहरने के बाद मैं चूत को पेलने लगा, भाभी को मजा मिलना आरम्भ हो गया- फाड़ दे रवि.. अपनी भाभी की चूत को आह.. आह.. उफ़..भाभी को मैंने लगातार काफी देर तक चोदा.. इस चुदाई में भाभी एक दो झड़ चुकी थीं।

मैंने अपना सारा पानी चूत में नहीं डाला.. लण्ड निकाल कर भाभी के मुँह में डाल प्रिया।भाभी के मुँह में 7-8 झटके मारते ही मेरा पानी उनके मुँह में चला गया।भाभी पूरा पानी पी गईं।रात भर भाभी की चूत मैंने 4 बार मारी, हम दोनों सुबह 4 बजे सोए..पर रोज की तरह सुबह जल्दी उठ भी गए।

सुबह माँ भी जल्दी उठीं।अब माँ की तबियत कुछ ठीक लग रही थी, मैं सुबह फिर हगने गया.. पर आज मैं अकेला गया था।

खेत में अन्दर जाते ही मैं हगने बैठ गया। उसी समय गाँव की एक लड़की.. जिसकी कुछ दिन पहले शादी हुई थी और आज ही अपने मायके वापस आई थी। मैं इसकी चूत पहले भी मार चुका था.. वो आकर मेरे बाजू में हगने बैठ गई।

मैं- अरे सरिता.. कैसी हो.. कब आई ससुराल से?सरिता भी हगते हुए बोली- मजे में हूँ.. तुम बताओ कैसे चल रहा है.. चुदाई का मजा..

मैंने हगते हुए उसकी चूत देखी और कहा- हाँ.. अब तो गाँव की बहुत चूतों को चोद चुका हूँ और ये क्या.. सरिता शादी के बाद भी तुम्हारी चूत तो पहले जैसे ही है।सरिता- क्या करूँ.. मेरे ‘वो’ कुछ खास चुदाई नहीं कर पाते हैं। जब से तुमसे चुदी हूँ.. पति के लण्ड में मजा ही नहीं आता.. अब यहाँ आई हूँ.. तो तुमसे चुदवा लेती हूँ।

मैं- हाँ ठीक है.. पर अभी नहीं.. कभी और अभी थोड़ा बिजी हूँ।सरिता ने हँसते हुए कहा- हाँ.. अब तो घर की चूतों को फाड़ने में लगे होगे।मैंने चौंकते हुए पूछा- तुम्हें कैसे पता?

सरिता- कल रात तुम्हें डिब्बा लेकर हगने जाते देख कर मैं भी तुम्हारे पीछे आई थी। मैंने सोचा था कि चलो आज फिर हगते हुए रवि के बड़े लण्ड से चुदा लेती हूँ.. पर साथ में तुम्हारी भाभी थीं.. इसी लिए कल छुप कर हगने बैठी और तुम दोनों की सारी बातें सुन ली थीं।

मैं- क्या करूँ सरिता.. भाभी ठीक ही तो कह रही थीं.. भैया की और पिताजी की मौत के बाद से उन्हें कोई लण्ड ही नहीं मिला.. कैसे रहती होगीं बिना लण्ड के.. आखिर में उन्हें खुश रखना भी तो मेरी जिम्मेदारी ही है।सरिता- हाँ तुम सही कह रहे हो.. तुम जरूर खुश रखना उन्हें.. और खूब चोद-चोद कर खुश रखना। अभी के लिए मैं बिना तुम्हारा लण्ड लिए चली जाती हूँ.. पर अगली बार 2-3 बार जरूर चोद देना।

मैं- बस इतना ही.. तू कहे तो तुझे मेरे बच्चे की माँ बना दूँ?सरिता- सच?मैं- हाँ.. बोल लेगी मेरा बच्चा अपनी कोख में?सरिता- नेकी और पूछ-पूछ?

हम दोनों हँसने लगे।अब हमने अपने चूतड़ धोए और घर निकल पड़े।

घर आते ही मैं नहाने घुस गया.. आज भाभी की जगह माँ ने लण्ड की मालिश के लिए तेल प्रिया।माँ हँसते हुए बोलीं- ले बेटा.. तेल.. मालिश के लिए.. ठीक से लगाना.. पहले तो तू हमारे हाथों से लगवाता था.. पर अब खुद ही लगाता है.. माँ और भाभी से कैसी शर्म..

माँ के ऐसा कहने पर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया.. पर मन में आया कि ऐसे भी कल भाभी को चोदा है और आगे माँ को भी तो चोदना ही है.. क्यों न आज लण्ड पर तेल लगवाते हुए कुछ प्रयास किया जाए।

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‘नहीं माँ.. शर्म कैसी.. तेल से मालिश की वजह से शायद तुम्हारे हाथों में दर्द होता होगा.. इसी लिए मैं खुद ही लगा लेता हूँ।’

माँ की आँखों में चमक थी और मादक मुस्कान के साथ वे बोलीं- भला मेरे बेटे के लण्ड की मालिश से मेरा हाथ क्यों दुखेगा.. लण्ड की मालिश से आगे मेरे बेटे की पत्नी काफी खुश रहेगी.. इसी लिए मैं पहले से मालिश करते आ रही हूँ।मैंने उनके मुँह से लण्ड शब्द सुना तो मैं उनकी चुदास को समझ गया और मैंने कहा- हाँ ठीक है न माँ.. आज तुम्हीं मेरे लण्ड की मालिश कर दो।

हम दोनों घर के बाथरूम में आ गए, माँ ने गर्म पानी की बाल्टी भरी और मुझे मेरे कपड़े निकालने के लिए कहा।मैं कपड़े निकाल ही रहा था कि माँ ने मुझसे पहले अपने कपड़े निकाल दिए, अब माँ सिर्फ सफेद रंग की चड्डी में थीं।

माँ के बड़े तरबूज के जैसे बड़े-बड़े बोबे मेरे सामने खुले थे। माँ की लंबी-लंबी खुली नंगी टाँगें मेरे सामने थीं। सफेद पैन्टी में माँ किसी हूर जैसी लग रही थीं।मेरा लण्ड तुरंत खड़ा हो गया।

माँ मेरे लण्ड को देखते ही बोलीं- बाप रे, बेटा रवि इतना बड़ा लण्ड हो गया तेरा.. मेरी मेहनत काफी रंग लाई है।मैं- हाँ माँ.. ये तुम्हारी और भाभी की मेहनत का नतीजा है।

अब माँ ने मेरे लण्ड पर तेल लगाया और मालिश करने लगीं। माँ मालिश करते करते समय अपने बड़े बोबे मेरी टाँगों को लगा रही थीं.. आज काफी समय बाद माँ ने मेरे लण्ड को हाथ में लिया था।

अब मैं माँ की मालिश से मदहोश हो रहा था। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरे मुँह से ‘अअहह..आह.. आह्ह.. अ..अहहा.. हा..’ की आवाजें आ रही थीं।

अचानक माँ ने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया.. मैंने झट से आँखें खोलीं।मैं- आह्ह.. ये क्या कर रही हो।माँ हँसते हुए बोलीं- नई तरह की मालिश.. क्योंकि बेटा अब तू बड़ा हो गया है न.. और वैसे भी कल रात में तेरी भाभी ने काफी जोरों से मालिश की थी। तेरी और तेरी भाभी की आवाजें कल रात को जब में पानी पीने उठी थी.. तब सुनी थी।

मैं- क्या सच में माँ.. अच्छा हुआ तुमने कल हमारी चुदाई की आवाज सुन ली.. तो फिर अब तुम भी भाभी के जैसी मालिश के लिए तैयार हो या नहीं?माँ- मैं तो सालों से इसी दिन का इन्तजार कर रही हूँ बेटा।

माँ के ऐसे कहते ही मैंने माँ को खड़ा किया और चूमने लगा।माँ के होंठ क्या मस्त नरम और मादक थे.. हर चुम्बन पर माँ के होंठों से रस टपक रहा था। मैं अब चूमते हुए माँ के बोबे दबाने लगा.. माँ के बड़े बोबे मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे। बोबे मस्त मुलायम और नरम थे.. दबाने में बहुत मजा आ रहा था।

कुछ ही देर बाद मैं नीचे बैठ कर माँ की कच्छी हटा कर मां की चूत चाटने लगा था। उनकी मस्त बिना बालों की चिकनी बुर.. जो पानी छोड़ रही थी.. मस्त मादक गंध के साथ बहुत पानी छोड़ रही थी।

माँ अब मादक सीत्कार निकाल रही थीं ‘म्मम्म.. ऊऊऊ ऊऊह उम्म म्म.. आआअ.. ह्ह्ह्ह्ह.. ईईई ईईई.. चाट बेटा.. चाट.. बहुत सताया है इस बुर ने.. आज पूरी चूत का पानी खाली कर दे.. चाट जोर से चाट.. आआअ.. उम्म्म्म.. ईई..’

अब मैंने चाटना बंद किया और वहीं खड़े होकर माँ की एक टांग ऊपर करके अपना लण्ड माँ की चूत पर सैट किया और धीरे से लण्ड डालने लगा।

माँ की बुर अब भी काफी टाइट थी.. क्योंकि माँ ने पिताजी के मरने के बाद लोकलाज के चलते किसी से चुदाई नहीं करवाई थी।

मैंने एक झटका तेज मारा और लण्ड आधा अन्दर डाल प्रिया। माँ दर्द से कराहते हुए बोलीं- ओह्ह रवि मार डालेगा क्या.. आराम से चोद न..मैंने सुनी अनसुनी कर दी और एक और झटका मार प्रिया। अब मेरा पूरा लण्ड माँ की चूत में था।

माँ और जोर से चिल्लाईं। अब मैं माँ के होंठ चूमने लगा और जब तक माँ का दर्द कम नहीं हुआ.. तब तक चूमता रहा और बोबे दबाते रहा।अब माँ ने खुद एक झटका नीचे से मारा.. और मैं समझ गया कि अब माँ झटके लेने को तैयार हैं।मैंने झटके लगाना चालू किया.. अब माँ मेरे झटकों का मजा ले रही थीं।माँ बोलीं- फाड़ दे रवि.. आज मेरी बुर को.. फाड़ दे.. चोद दे अपनी माँ को.. और जोर से चोद..

हमारी चुदाई लम्बी चली.. मैंने मेरा सारा पानी माँ की प्यासी चूत में डाल प्रिया।मैं हाँफते हुए माँ से अलग हुआ.. तो देखा कि भाभी बाथरूम के दरवाजे पर खड़ी होकर अपनी चूत साड़ी के ऊपर से मसल रही थीं और हमारी चुदाई देख रही थीं।

माँ.. मैं और भाभी एक-दूसरे को देख कर हँसने लगे।अब मैं रोज मेरी माँ और भाभी को पेलता हूँ और कभी-कभी हगने जाने पर गाँव की बुरें भी चोद लेता हूँ।

तो मित्रो, कैसी लगी मेरी काल्पनिक कहानी.. मेल करके जरूर बताएं। अब मेरी सारी गर्म भाभियाँ.. आंटियां और लड़कियां जल्द उंगली डालना खत्म करें और मुझे चूत खोल कर ईमेल करें।support@mohakkisse.com

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माँ और भाभी के साथ चूत चुदाई का खेल

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Hi doston, zyada samay na gawate hue seedhe story pe aata hu. Ye is kahani ka teesra hissa hai. Ab tak maine maa ko gawaar se modern banane ke chakkar mein chod diya tha. Maa video jaise lund lena, choosna sab seekh gayi thi.

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