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कोई मिल गया पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 703 बार

मैडम एक्स और मैं-3

इमरान ओवैश

23 Aug 2020 को प्रकाशित

मैडम एक्स और मैं-3
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कहानी का पिछला भाग:मैडम एक्स और मैं-2

जोरदार चुदाई के बाद हमें कब, कैसे नींद आ गई, हमें एहसास तक न हुआ।

अगली सुबह मैं देर से उठा।मैडम नहीं दिखीं तो उन्हें ढूंढता मैं रसोई तक पहुँच गया, जहाँ मैडम नाश्ता बनाने में लगी थीं।उन्होंने इस वक़्त एक ढीली, लम्बी टी-शर्ट पहन रखी थी जिसके नीचे उन्होंने और कुछ नहीं पहना हुआ था।

मैं फर्श पर उकड़ूँ बैठ गया और मैंने उनकी टी-शर्ट ऊपर उठा दी दोनो हाथों से उनके नितम्बों को पकड़ कर बुरी तरह चाटने लगा।मुझे पता था कि उनके हाथ अब रुक गये होंगे।

दोनों मुलायम चूतड़ों को चाटते हुए मैंने अपनी एक उंगली उनके छेद में अंदर सरका दी और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा।

अचानक हुए इस हमले से उनका सम्भलना मुश्किल हो गया और वह हौले हौले सिसकारने लगीं।

एकदम से चूत ने पानी देना शुरु किया तो मैं खड़ा होकर अपने सुबह सुबह पेशाब से भरे लकड़ी की तरह कठोर हुए लंड को थोड़ा थूक से गीला करके उनके नीचे लगाया तो उसने चूत से बही चिकनाई की वजह से खुद रास्ता बना लिया और मैं उनके चूचों को पकड़ कर जानवरों की तरह उन्हें चोदने लगा।

लंड के कठोर धक्कों से अभिभूत होकर उनकी टांगें खुद ही सुविधाजनक ढंग से फैलती चली गईं और उनके साथ मुझे भी अपनी टांगें फैला कर कुछ नीचे होना पड़ा।

इस वक़्त कोई ऐसी उत्तेजना तो मुझे थी नहीं कि जल्दी झड़ जाता, सो इतने धक्के लगाये कि मैडम जी का ही पानी छूट गया और तब मैंने बिन झड़े ही लंड बाहर निकाल लिया।

इतनी चुदाई के बाद अब मैं खुद पर इतना तो नियंत्रण पा ही चुका था कि खुद को स्खलित होने से रोक सकूं।

इसके बाद मैं बाथरूम में रोज़मर्रा के कामों से निपटने घुस गया और वे आराम से नाश्ता बनाने में लग गईं।

मैं नहा धो कर जब वापस हुआ तो वे नाश्ता लगा चुकी थीं…

हमने भरपेट नाश्ता किया और फिर मैं अखबार पढ़ने लग गया और मैडम जी घर के दूसरे कामों में लग गईं।

मैं फ्री हुआ तो मैडम जी कुछ ऐसी तस्वीरों के साथ हाजिर हुईं जिनमें शरीर पर अलग अलग चित्र बने हुए थे और उनके साथ दो मेंहदी के कोन थे।

“सुनो, तुम इस तरह मेरे जिस्म को सजा सकते हो?” उन्होंने तस्वीरें दिखाते हुए पूछा।“हाँ हाँ… क्यों नहीं !”

उन्होंने अपनी टी-शर्ट उतार फेंकने में देरी नहीं की और मैं कोन सम्भाल के उनके नग्न गोरे और बेहद चिकने शरीर पर मेहंदी से डिज़ाइन बनाने लग गया।

पहले उनकी पीठ पर एक तिरछा चित्र उकेरा, फिर एक ऐसी बेल ली जो दोनो कांधों से ऐसे नीचे उतरती थी जैसे कोई नेकलेस पहने हुए हों।

इसके बाद उनकी नाभि को केन्द्र बना के उसके आसपास ऐसे डिज़ाइन बनाईं कि नाभि खूबसूरत से ज्यादा सेक्सी लगने लगी।

फिर उन्हें आदमकद शीशे के सामने खड़ा करके, जहाँ वो गर्दन घुमा कर अपने चूतड़ों को देख सकें, मैंने उनके चूतड़ों पर दो ऐसे विशाल लिंग उकेरे जो कि उनकी गांड के छेद की ओर तने हुए थे, उनके अंडकोष भी कपिल किये और तत्पश्चात उनके सामने, उनकी प्यारी सी चूत के ऊपर… ऊपर से नीचे आते दो ऐसे पंजे डिज़ाइन किये जो लगता था कि बस नीचे बढ़ के उनक़ी बन्द योनि को खोलने जा रहे हों।

काम पूरा हो गया तो वह इसी नग्न अवस्था में मेहन्दी सूखने तक घर की साफ़ सफाई और फिर खाना बनाने में लग गईं और मैं उन्हीं के डेस्कटॉप पर नैट से जूझने लगा।

इसी तरह दोपहर हो गई… मेहंदी सूख गई तो उन्होंने कॉटन की ढीली ढाली नाईटी पहन ली थी और काम निपटा कर मेरे सामने आ खड़ी हुईं।

“चलो अब मेहंदी छुड़ाने क वक़्त हो गया।” और मेरा हाथ पकड़ कर वे मुझे बाथरूम में ले आईं।

उन्होंने पहले अपनी नाईटी उतार के हैंगर पर टांगी और फिर मेरी चड्डी भी नीचे पहुंचा दी।

फिर शॉवर चालू करके मुझे उसके नीचे खींच लिया और मैं उनका इशारा समझ कर उन्हें चूमने-रगड़ने लगा और मेरे हाथ स्वयमेव  उनके पूरे जिस्म पर ऐसे फिरने लगे कि पानी से गीली हुई मेहन्दी मेरे हाथों की रगड़ से छूटने लगी।

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फिर जब सारी मेहंदी छूट गई तो वह मेरे होठों को बेकली से ऐसे चूसने लगीं जैसे खा ही जायेंगी और मैं भी उनके मुँह में जीभ डाल कर किलोलें करने लगा।

साथ ही मेरे हाथ उनके भीगे हुए पिस्तानों का ऐसा मानमर्दन कर रहे थे कि उनकी घुण्डियाँ जोश में आकर टन्ना गईं थीं।

मैडम का जोश बढ़ता गया और वह मेरे होठों को छोड़ कर मेरे गर्दन, कंधें, और सीने को चूमने लगीं, साथ ही वह मेरी छोटी छोटी किलोनियों को भी अपनी जीभ से चुभलाने लगीं, मेरे शरीर में सनसनाहट बढ़ने लगी।

मैडम नीचे होती मेरी नाभि तक पहुँची और अपनी जीभ की नोक से उसमें छेड़छाड़ करने लगीं।

इससे मेरे पप्पू में हलचल होने लगी और वह सर उठा कर ऊपर देखने लगा किन्तु उसे ज्यादा देर मैडम जी के मुंह की गीली गर्माहट से महरुम न रहना पड़ा और जल्दी ही मैडम ने उसे अपने मुँह में दबोच लिया और किसी ब्लू फ़िल्म की तरह उसे एकदम सधे हुए अंदाज़ में ऐसे चूसने लगीं कि मेरे दिमाग में फुलझड़ियाँ छूटने लगी।

जब मुझे लगा कि बस काफी हो गया तो मैंने मैडम का चेहरा थाम कर उन्हें अपने लंड से दूर कर प्रिया और खुद भी नीचे बैठ कर शॉवर के पानी में भीगते हुए ही उनके पूरे जिस्म को कुत्ते की तरह चाटने लगा।

उनकी गर्दन, कंधे, होंठ, चूचियाँ, घुन्डियाँ, पेट और पेड़ू के बाद अंत में जब उनकी योनिद्वार पर पहुँचा तो खरबूजे की महक वाले रस ने मेरि नसिका और जीभ का स्वागत किया।

मैं पहले उनके भगांकुर को जुबान की नोक से छेड़ते रहा, फिर साइड की कलिकाओं को होंठों में दबा दबा कर ज़ोर शोर से खींचने लगा और मैडम पानी की बूंदों में मस्त शरीर को मादक लहरें देतीं मीठी मीठी सिसकारियाँ के साथ मचलने लगीं।

उन्होंने मेरे सर को अपनी चूत पर दबा प्रिया और मैंने अपनी दो उंगलियों को उनकी चूत की गहराई में उतार प्रिया और जीभ की करामात दिखाते उंगलियों से बुर का चोदन करने लगा।

जल्दी ही उनकी ऐंठन से मुझे उनके चरमोत्कर्ष का अंदाजा होने लगा और मैंने उंगलियाँ निकाल कर उनकी समूची बूर में ऐसे मुँह और जीभ घुसा कर चाटने लगा जैसे ख़ा ही जाऊँगा और एक महक वाले रस क़ी बाढ़ मैंने अपने मुँह पर झेली, लेकिन साथ ही उन्होंने लग्भग चीखते हुए मेरे मुँह पर लिसलिसे पेशाब की तेज़ धार मारी, जिससे मैं थोड़ा पीछे हट गया।

“जल्दी – जल्दी, ऐसे ही फ़क करो मुझे… कम आन…” वो चिल्लाईं।

मैं उठ खड़ा हुआ और उन्हें भी उठा लिया। अगले पल में वो कमोड पर एक पाँव रख कर ऐसे झुक गईं कि पीछे से उनकी चूत उभर आई जिसमें मैंने अपना लंड आराम से अन्दर घुसा प्रिया और उनके नर्म कूल्हों को मुट्ठियों में दबा कर धक्के लगाने लगा, पन्द्रह-सोलह धक्कों के बाद उन्होंने हाथ पीछे करके मुझे धकेला और ज़ोर से मूत की छछार मारीं। फिर मैं लंड डाल कर उसी अवस्था में चोदने लगा।

थोड़े धक्कों के बाद उन्होंने मुझे धकेला ही नहीं बल्कि मुझे नीचे करके एकदम से मेरे मुँह पर धार मारी और छोटी सी धार के पूरा होते ही फिर मुझे बाथरूम के टाइल वाले फर्श पर चूतड़ों के बल बिठाया और मेरे ऊपर ऐसे बैठीं कि चूत लंड पर फ़िट हो गई और वो उछल उछल कर धक्के लेने लगीं और कुछ धक्कों के बाद एकदम से ऊपर होकर मेरे मुंह की ओर ही फिर एक छोटी धार मारी।

धार मारने के बाद फिर उसी तरह चुदने लगीं।

और कुछ धक्कों के बाद फिर एक अपेक्षाकृत और छोटी धार मार के लेट गईं और आपने पाँव आपने हाथों से समेट लिये और चूतड़ों को इतना उठा प्रिया कि पीछे का छेद सामने आ सकता और उनके इशारे पर मैंने अपना लंड उसी छेद में ठूंस प्रिया और खुद पंजों के बल बैठ कर धक्के लगाने लगा, कुछ धक्कों के बाद उनकी चूत से छोटी होती धार निकल पड़ती और फिर वो लगभग चीखने लगीं।

“और ज़ोर से – और ज़ोर से।”

मैं भी उनकी ऊपर उठी जांघों पर पंजे गड़ा कर ज़ोऱ ज़ोर से धक्के लगाने लगा और वो उत्तेज़ना के चरम पर पहुँचती ज़ोर ज़ोर से चिल्लाती रहीं और मुझे बकअप करती रहीं और जब मेरे लंड ने पानी छोड़ने क संकेत प्रिया तभी उनका भी पानी छूट पड़ा और वो एकदम से ज़ोर की कराह के साथ ढीली पड़ गईं।

मैं उन्हीं के जिस्म पर पसर गया और उन्होंने मुझे दबोच लिया। हम इसी तरह अपनी अन्तिम उर्जा एक दूसरे के शरीर में खपाने लगे।

इस स्नान-सम्भोग के पूर्ण होने के उपरान्त हमने कायदे से स्नान किया और बाहर आ गये।

काफी थकान हो चुकी थी, सो कुछ पल के आराम के बाद हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी का अगला भाग:मैडम एक्स और मैं-4

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मैडम एक्स और मैं

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अजय चौधरी

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

अलंकृता शर्मा

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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