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Hindi Chudai Kahani • पठन समय: 12 मिनट • पढ़ा गया: 1,030 बार

पड़ोसन बनी दुल्हन-48

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10 May 2026 को प्रकाशित

पड़ोसन बनी दुल्हन-48
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जेठजी भी यह समझते थे की उनको एक औरत के बदन की जरुरत थी वैसे ही माया को भी पुरुष से चुदाई करवाना आवश्यक था। जब से उसके पति का देहांत हो गया था उसकी भी जवानी बेकार जा रही थी और उसके बदन की भूख अतृप्त थी। पति के देहांत के बाद माया ने किसी भी पुरुष की और नजर उठा कर देखा नहीं। पर माया ने जेठजी के किये हुए एहसानों को सच्चे दिल से याद रखा और मौक़ा मिलने पर अपने आप को समर्पण करने में एक मिनट का वक्त भी नहीं लिया।

जरूर माया के बदन में भी अंगड़ाइयां उठती होंगीं, जरूर रात को सोते हुए माया भी अपनी चूत में उंगली डाल कर अपने आपको अपनी ही उँगलियों से चोदने की कोशिश करती होगी। चुदाई के लिए प्यासी औरतों के लिए यह एक आम प्रतिक्रया है। जेठजी को संतोष हुआ की वह जब माया को चोदेंगे तो वह खुद के लण्ड की भूख ही नहीं शमन करेंगे, वह माया की चूत की प्यास भी बुझाएंगे।

माया काफी गरम हो रही थी और जेठजी का लण्ड भी माया की चूत से मिलने के लिए बहुत ज्यादा बेताब था। जेठजी माया को अपनी दो टांगों के बिच रख कर माया के बदन पर उसे चोदने के लिए तैयार हो गए। जेठजी ने माया की चूत की पंखुड़ियों अपने लण्ड से रगड़ कर खोला।

जेठजी के लण्ड के चूत से स्पर्श करने पर माया के पुरे बदन में सिहरन फ़ैल गयी। साथ में उसका मन भी आतंकित हो उठा। जेठजी का लण्ड इतना माँसल, लंबा और सख्त था की माया उसको अपनी चूत में लेने की और बाद में उसके अंदर बाहर होने के कारण उसकी चूत की त्वचा पर जो खिंचाव होगा और उसके कारण उसको जो दर्द होगा उसकी कल्पना मात्र से माया को चक्कर आने लगे।

पर यह भी सत्य था की माया को उस लण्ड को ना सिर्फ अपनी चूत में लेना था बल्कि उसकी चूत को अब सालों साल तक उस लण्ड से चुदना है। इसमें माया को कोई संशय या कोई हिचकिचाहट नहीं थी। उ

से सिर्फ चिंता थी तो यही की उसकी चूत कैसे और कितनी जल्दी जेठजी के उस महाकाय लण्ड को अंदर ले सके और उससे चुदवाने में सक्षम हो सके। इस लिए हालांकि जेठजी से माया की चुदाई जरूर माया के लिए दर्द और आतंक का विषय थी पर फिर भी माया को कुछ भी सह कर जेठजी से चुदवाना है इसका कोई विकल्प ही नहीं था।

माया ने एक गहरी साँस ले कर अपने आपको जेठजी के विशालकाय लण्ड को अपनी चूत के मुख्यद्वार पर होते हुए चूत की नाली में दाखिल होने से जो मशक्कत उसे करनी होगी उसके लिए वह तैयार हो पाए और जो दर्द उसे सहना पडेगा उसे ख़ुशी ख़ुशी झेलने की क्षमता उसे मिले उस के लिए भगवान से प्रार्थना की और अपने होंठों को भींच कर वह जेठजी के लण्ड का उसकी चूत में घुसने के क्षण का इंतजार करने लगी।

जेठजी माया की चिंता समझ सकते थे। उन्होंने अपनी उँगलियों से माया की चूत की पंखुड़ियों को अलग कर माया की चूत के गुलाबी चिकने छिद्र को देखा था।

दिखने में जरूर वह छिद्र छोटा सा ही था, पर जेठजी जानते थे की स्त्री की चूत की नाली में गजब की लचक और फैलने की क्षमता होती है। वक्त आने पर वह अपने नाप से कई गुना फ़ैल सकती है। इसी चूत के द्वार से बड़े बड़े तगड़े और मोटे लण्ड औरत को चोदते हैं और इसी चूत के छोटे से छिद्र में से ही एक चूत के नाप से कई गुना बड़ा नवजात शिशु जन्म लेता है। हालांकि दोनों स्थिति में औरत के शरीर को काफी सेहन करना पड़ता है।

जेठजी ने अपना लण्ड बार बार माया की चूत की सतह पर रगड़ कर चिकना किया। माया ने भी अपनी लार उसके ऊपर चुपड़ कर उसे काफी स्निग्ध बनाया था। जेठजी ने अपने लण्ड को अपने हाथ में पकड़ कर उसके बड़े टोपे को माया की चूत के खुले हुए छिद्र में एक हल्का सा धक्का मार कर थोड़ा सा अंदर डाला।

जेठजी ने माया का चेहरा देखा। माया अपनी आँखें मूँद कर उस घडी के उन्माद को महसूस कर रही थी या फिर जेठजी के इतने तगड़े लण्ड के माया की चूत में घुसने से जो दर्द उसे सहना पडेगा उसके लिए वह अपने आपको मानसिक रूप से तैयार कर रही थी, यह कहना मुश्किल था।

जैसे ही जेठजी का लण्ड माया की चूत में दाखिल हुआ, माया के पुरे बदन में एक गजब की सिहरन फ़ैल गयी। माया को उतना ज्यादा दर्द महसूस नहीं हुआ। पर जेठजी ने भी अपने लण्ड का सिर्फ टोपा ही माया की चूत में घुसेड़ा था। अगला धक्का माया की चूत में जेठजी के लण्ड को और अंदर दाखिल करने के लिए लगाना होगा और वह सहन करने के लिए माया को तैयार होना था।

जेठजी अपने लण्ड को और घुसेड़ने के लिए झिझक रहे थे तब माया ने जेठजी से कहा, “अब आप ज्यादा मत सोचिये। अगर आपके लण्ड के घुसने से मेरी चूत फट भी गयी और मैं मर भी गयी तो मैं उसके लिए तैयार हूँ, पर आप रुकिए मत। मैं जानती हूँ की ऐसा कुछ भी नहीं होगा। हाँ दर्द जरूर होगा। काफी दर्द होगा।

मैं उस दर्द को आपका प्रसाद समझ कर हँस कर झेल लुंगी। पर अब मुझसे आपसे चुदाई करवाने के लिए और इंतजार नहीं होता। चुदाई के इंतजार का दर्द चुदाई से हो रहे दर्द से कहीं ज्यादा है। अब रुकिए मत, प्लीज, बस खुल कर चोदिये मुझे।”

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जेठजी जानते थे की उन्हें माया को चोदने के लिए अपना महाकाय लण्ड माया की छोटी सी चूत में घुसाना तो पडेगा ही। और माया को दर्द भी सहना ही पडेगा। जेठजी ने एक और हल्का सा धक्का मार कर अपना लण्ड माया की चूत में थोड़ा और अंदर घुसाया। माया लण्ड के घुसने से सिकारियाँ भरने लगी।

उसके मुंह से दबी हुई “आह…. ओह…. ” निकलने लगी। जेठजी को लगा की आगे तो बढ़ना ही पडेगा, यह सोच कर जब उन्होंने अपनी कमर से एक थोड़ा और तेज धक्का मार कर अपना लण्ड माया की चिकनी चूत में घुसाया तो माया जोर से चीख पड़ी। उसके मुंह से बरबस निकल पड़ा, “मर गयी रे….. ओजी…… थोड़ा धीरे से डालो। मैं वादा करती हूँ की मैं ज़िंदा रहूंगी तो आप से चुदवाती रहूंगी। अगर मैं मर ही गयी तो आपसे और कैसे चुदवाउंगी? मेरी चूत फट रही है रे!”

फिर माया को ध्यान आया की जेठजी ने उसकी चीख और कराहट सुन कर चुदाई रोक दी और अपना लण्ड माया की चूत से बाहर निकाल दिया। माया को जरूर जेठजी के लण्ड बाहर निकालने से कुछ राहत महसूस हुई पर माया की चूत में जेठजी के महाकाय लण्ड घुसने से जो दर्द भरी उत्तेजना महसूस हो रही थी वह गायब भी हो गयी।

माया ने जेठजी की और देखा, कुछ कमजोरी से ही सही पर वह मुस्कुरायी और बोली, “आप रुक क्यों गए? मैं तो चीखती चिल्लाती रहूंगी। मुझे आपके इस तगड़े लण्ड घुसने से असह्य दर्द जरूर हो रहा है। पर यह तो होना ही था। पर उस दर्द के साथ साथ मुझे आप से अद्भुत दर्द के आवरण में लिपटी हुई प्यार भरी रोमांचक जो उत्तेजना मिल रही थी वह मत छीनो मुझ से।

मैं कोई मरने वाली नहीं हूँ। मुझे सालों तक जीना है और आप से चुदवाते रहना है। फिर भी अगर मुझे कुछ शारीरिक घाव जैसा महसूस हुआ तो आप यकीन कीजिये की मैं आपके लण्ड को धक्के मार कर मेरी चूत से बहार निकालने से नहीं कतराऊंगी। मुझे अब जीने का ठोस कारण आज आपने दिया है। मैं ज़िंदा रहूंगी और आपके जीवन को खुशहाल बनाते हुए आप का पूरा साथ जीवनभर निभाती हुई आपसे चुदवाती रहूंगी।”

जब जेठजी ने यह सूना तो उनके पूरा बदन रोमांच से अभिभूत हो गया। स्त्री में भगवान ने कितना प्यार, बलिदान और समर्पण का भाव कूट कूट कर भरा है वह उन्हें महसूस हुआ। जेठजी ने अपने लण्ड को एक और ज्यादा बड़ा धक्का मार कर जब माया की चूत में घुसेड़ा तो फिर से माया चीख उठी।

पर इस बार माया जेठजी को रोकने के लिए नहीं बल्कि उन्हें पूरा लण्ड चूत में घुसेड़ कर उसे अच्छी तरह चोदने के लिए आह्वान कर रही थी। माया चीख रही थी, “अजी चोदो जी मुझे। अब सिर्फ धक्के मत मारो, मेरीअच्छी तरह से चुदाई करो। मैं चीखती चिल्लाती रहूंगी। यही तो नारी जीवन का एक अनोखा पारितोषिक है की उसे तगड़ी चुदाई से हो रहे दर्द में भी अद्भुत, अनोखा, रोमांचपूर्ण, उत्तेजक सुख मिलता है।”

यह सुन कर जेठजी का लण्ड और सख्त हो गया। जब चुदाई कर रहे एक मर्द को अपनी साथीदार औरत से ऐसी जोशभरी सकारात्मक प्रतिक्रया मिलती है तो उसका लण्ड और भी जोशीला हो जाता है। जेठजी के लण्ड को अब रोकना नामुमकिन था। जेठजी ने एक आखिरी जोरदार धक्का मारा और उनका करीब आधा लण्ड माया की चूत में घुस गया तो माया की चूत पूरी भर गयी।

जेठजी का आधा लण्ड बेचारा माया की चूत में दाखिल ही नहीं हो पाया। पर माया के मुंह से चीख के बजाये गहरी गहरी आहें और कामुक सिकारियाँ अब थमने का नाम नहीं ले रही थी। पुरे कमरे में माया की, “हाय राम…. ओह……. आह…… हाय…… चोदो मुझे …….. और चोदो…….. मत रुको…….” यह और ऐसी कई कामुक शब्दों से भरी कराहटें और सिकारियाँ सुन कर जेठजी और जोर से चोदने लगते और उसके साथ साथ माया की कराहटें और भी बढ़ जातीं।

धीरे धीरे माया का चुदाई के कारण हो रहे दर्द की जगह जेठजी के लण्ड के घर्षण हो रहे उन्मादक रोमांच ने ले ली। माया के पति ने उनके दाम्पत्य जीवन दरम्यान माया की काफी चुदाई की थी। पर जेठजी की एक ही चुदाई उत्तेजना और रोमांच के पटल पर माया के पति की दो बरसों की चुदाई के ऊपर भी भारी पड़ रही थी।

माया ने कभी सोचा ही नहीं था की किसी औरत की इस तरह चुदाई हो भी सकती है जिस के कारण वह चुदाई इस कदर एक अजीब से रोमांच और उत्तेजना से इतना अद्भुत सुख दे सकती है।

जैसे जैसे जेठजी माया को चोदते रहे वैसे वैसे माया भी उस चुदाई से उत्पन्न सुख और आनंद का उन्माद का आस्वादन करती रही। जेठजी कभी माया के ऊपर चढ़े हुए अपने लण्ड को ऊपर से सीधे माया की चूत में घुसाते हुए उसे चोदते तो कभी माया के बदन को टेढ़ा घुमा कर माया की एक टांग अपनी जाँघों के बिच में रख कर अपना लण्ड माया की साइड में से घुसा कर उसे चोदते।

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