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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 727 बार

पड़ोसन बनी दुल्हन-39

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10 Apr 2026 को प्रकाशित

पड़ोसन बनी दुल्हन-39
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मैंने सुषमा से इशारा कर साले साहब से प्यार करने को संकेत दिया। मैंने कहा, “मैं तो तुम्हारे साथ ही हूँ। पर साले साहब चले जाएंगे। साले साहब बेचारे तरस रहे हैं तुम्हारे प्यार के लिए।”

सुषमा ने मेरी आँखों में आँखें डालकर का, “राज साहब, मेरे जहन में इतना प्यार है की मेरे पति को मिला कर तुम तीनों मर्दों को मैं प्यार की कोई कमी नहीं महसूस होने दूंगी। तुम देखते जाओ।”

सुषमा ने फिर झुक कर साले साहब को अपनी और खिंचा और उनका लण्ड अपने मुंह के पास लिया। कुछ देर तक सुषमा साले साहब के लण्ड का गोरा गोरा टोपा चाटती रही और फिर अपनी जीभ लम्बी कर सुषमा पुरे लण्ड को प्यार से चाटने लगी। संजू सुषमा का इस तरह प्यार से लण्ड चाटने पर ख़ुशी से अभिभूत हो कर आँखें बंद कर वह पलों को अपने दिल में जैसे संजो रहा हो ऐसे चेहरे पर भाव लिए उन लम्हों को एन्जॉय करता रहा।

लण्ड चूसते हुए सुषमा ने नजरें उठा कर मेरी और देखा। उसे लगा की कहीं मुझे उसके कारण कोई जलन तो नहीं हो रही? मैं बड़े प्यार भरी नज़रों से सुषमा को देखता रहा। सुषमा को तसल्ली हो गयी की मैं बिलकुल सुषमा के साले साहब के लण्ड चूसने से नाराज नहीं हूँ। तब सुषमा ने साले साहब के लण्ड को जोश से चूसना शुरू किया।

साले साहब का लण्ड काफी तना हुआ सख्त और लंबा था जिसे सुषमा ने पूरा मुंह में भर लिया। साले साहब का लण्ड चूसते हुए सुषमा के गाल फूल जाते थे। फिर कभी धीरे धीरे तो कभी कुछ ज्यादा फुर्ती से सुषमा उसे अंदर बाहर करते हुए चुस्ती और चाटती रही।

साले साहब सुषमा के इस कार्यकलाप से पलंग पर काफी मचल रहे थे। कुछ देर चूसने के बाद सुषमा ने उसे मुंह से निकाला और उस पर लगी चिकनी लार के साथ वह साले साहब के लण्ड को अपनी एक हाथ की हथेली में पकड़ उसे हथेली के अंदर बाहर करती हुई हिलाती रही।

सुषमा ने अपना मुंह फिर मेरे लण्ड की और घुमाया। मेरी और नजर कर सुषमा ने मेरे लण्ड का टोपा अपने मुंह में लिया और उसे बड़े प्यार से चाटने लगी। सुषमा की जीभ इतनी प्यारी और संवेदनशील थी की उसकी जीभ के मेरे लण्ड को छूते ही मेरा लण्ड फुंफकारने लगा।

मेरे लण्ड की धमनियों में मेरा वीर्य दौड़ने लगा। सुषमा की जीभ के मेरे लण्ड के चूसने मात्र से ही मेरा पूरा बदन सख्त हो गया। मुझे दर लगा की कहीं मैं सुषमा के मुंह में ही अपना वीर्य छोड़ ना दूँ। सुषमा अपना सिर इतनी दक्षता और कलाकारी से हिला कर मेरे लण्ड से अपना मुंह चुदवा रही थी की मैं भी अनायास ही अपना पेंडू हिला कर सुषमा के मुंह की गति के अनुसार मेरे लण्ड को सुषमा के मुंह के अंदर बाहर करने लगा।

वाकई में सुषमा लण्ड चूसने की कला में माहिर हो चुकी थी। पर मैं सुषमा से लण्ड चुसवाने के कारण उत्तेजना के मारे सिकारियाँ और आहटें भरता रहता था।

मेरा लण्ड चूसते हुए भी सुषमा के हाथ से साले साहब के लण्ड को भी बढ़िया से सहलवाने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा था। सुषमा मेरा लण्ड चूसते हुए भी साले साहब के लण्ड को हिलाने में कोई कसर छोड़ नहीं रही थी। साले साहब भी सुषमा के लण्ड हिलाने से काफी उत्तेजित दिख रहे थे। उनके मुंह से आह….. ओह….. की आवाजें निकल रहीं थीं और वह वह पलंग पर लेटे हुए उत्तेजना के मारे मचल रहे थे।

जब सुषमा मेरे लण्ड चूसने से फारिग हुई तब साले साहब ने पूछा, “सुषमा, तुमने कहा था आज की पूरी रात हम संगीतमय वातावरण में प्यार भरी चुदाई करेंगे। तो सबसे पहले तो कुछ संगीत हो जाए।”

सुषमा ने यह सुन कर कुछ मुंह बिगाड़ते हुए कहा, “संजू, देखो अब हम छः एक दूसरे के हमदम और राज़दार बने हैं। मैं मेरे पति सेठी साहब, राज और टीना और तुम और अंजू।

अब हम छह के बिच में कोई गोपनीय राज़ नहीं होने चाहिए। पर तुमने हम सब के लिए एक बड़े राज़ का भंडाफोड़ नहीं किया और यह बात मुझे खाये जा रही है। तुम्हें अंजू ने बच्चा कैसे दिया?

यह तुमने राज़ ही रखा है अभी तक। मैं एक खुले दिल की इंसान हूँ। मैं प्यार के लिए अपना बदन तो क्या अपनी जान तक दे सकती हूँ। मैं आप सब से भी यही उम्मीद करती हूँ की हम सब अपने समाज में अपने अपने अलग अलग किरदार बेशक निभाते हुए भी एक दूसरे से कोई भी गोपनीय राज़ नहीं रखेंगे। मैं आज तुम दोनों से बड़े ही प्यार से चुदवाउंगी पर तुम्हें यह राज़ आज उजागर करना ही पड़ेगा।”

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जब साले साहब ने सुषमा से यह सूना तो वह गंभीर हो गए। उन्होंने पहले मेरी और और फिर सुषमा की और देख कर अपने दोनों हाथ जोड़कर कहा, “जीजू, मेरी आप दोनों से करबद्ध प्रार्थना है की आप दोनों मुझे यह राज़ उजागर करने के लिए मजबूर ना करें।

देखिये मेरे इस राज़ में हमारे संबंधों के बड़े ही नाजुक तानेबाने उलझे हुए हैं। गर हमारे निजी संबंधों के ताने बाने उलझे नहीं होते, तो मुझे यह राज़ उजागर करने में कोई आपत्ति नहीं होती।

देखिये जीजू, टीना आपकी पत्नी और मेरी बहन है। मेरे इस राज़ के उजागर होने से मुझे पता नहीं उस पर क्या गुजरेगी। मेरे इस राज़ में टीना की भावनाएं भी शामिल है, जो इस राज़ के उजागर होने से आहत हो सकतीं हैं। इस राज़ के बारे में टीना को कुछ भी नहीं मालुम। कई बार ‘बंधी मुट्ठी लाखकी और खुली तो प्यारे ख़ाक की’ जो कहावत है वह बड़ी ही सही और कारगर साबित होती है। कई बार राज़ को राज़ रखना ही अक्लमंदी होती है।”

मैंने साले साहब का हाथ थाम कर कहा, “साले साहब, टीना बेशक आपकी बहन है, पर आपने उसे इतने सालों में शायद ठीक से पहचाना नहीं। मैं उसके पति और अत्यंत निजी राज़दार होने के नाते यह दावे के साथ छाती ठोक कर कह सकता हूँ की उसे भी गोपनीय से गोपनीय राज़ निभाना आता है। वरना आजकल के जमाने में क्या कोई भी पत्नी सुषमा को टीना ने जिस तरह का वचन दिया है, दे सकती है क्या?

टीना सेठी साहब से चुदवाने के लिए तैयार हुई है उसमें उसके अपने सुःख की इच्छा कम और सुषमा और सेठी साहब के सुख की चिंता कुटकुट कर भरी हुई है। अगर टीना सारे समाज में हमारी बदनामी हो सकती है इस बात की ज्यादा परवाह ना करते हुए सेठी साहब से इस तरह अपने ही मायके में चुदवा रही है और सुषमा और सेठी साहब के साथ हमारे संबंधों के नाजुक तानेबाने को समझने, निभाने और उन्हें सुलझाने में सक्षम दिखती है तो टीना अपने मायके के नाजुक तानोंबानों को भी समझने, निभाने और सुलझाने में सक्षम होगी इसमें मुझे कोई शंका नहीं है।”

साले साहब ने मेरी बात बड़ी ही गंभीरता से सुनी। उनके चेहरे पर से गंभीरता के भाव फिर भी जा नहीं पाए थे।

उन्होंने सुषमा की और देखा और बोले, “सुषमा, ठीक है, मैं भी मानता हूँ की हम सब के बिच में कोई गंभीर गोपनीय राज़ नहीं होने चाहियें। चुदाई के छोटेमोटे राज़ हम एक दूसरे को ना भी बताएं तो चलता है। पर ऐसे राज़ जो निजी संबंधों की नाजुकता को आहत कर सकते हैं हमें गोपनीय नहीं रखने चाहिए।

मैं आपसे वादा करता हूँ की आज रात का सबेरा होने से पहले मैं आपको मेरे उस अति गोपनीय राज का राजदार जरूर बनाऊंगा। पर सुषमा की एम.एम.ऍफ़. चुदाई का कार्यक्रम संपन्न होने के बाद। मैं नहीं चाहता की मेरे इस राज़ की गंभीरता का हमारी प्यार भरी चुदाई की रात पर कोई नकारात्मक असर पड़े।”

सुषमा यह सुनकर उठ खड़ी हुई और उसने अपने मोबाइल से ब्लूटूथ के साथ एक बहुत मधुर सी धुन बजानी शुरू की। यह हलके फुल्के शास्त्रीय संगीत पर आधारित धुन थी जिसकी लय पर सुषमा के पाँव थिरकने लगे। मैंने वैसे भी सुषमा को नाचते हुए नहीं देखा था। सुषमा ने एक पारदर्शी ओढ़नी अपने नंगे बदन पर डालदी। उस ओढ़नी के डालने से सुषमा के बदन की नग्न कामुकता का रूप कम होने के बजाये और निखर उठा।

लगभग नंगी सुषमा को संगीत की धुन पर इस तरह लयबद्ध तरीके से थिरकते देखना कोई भाग्य शाली के नसीब में ही होता होगा। पता नहीं सेठी साहब ने भी खूबसूरत सुषमा को इतनी कलालारी से इस तरह नग्न नाचते हुए शायद ही देखा हो।

मेरे साले साहब भी कितने भाग्यशाली थे की इतनी खूबसूरत सख्सियत जो इतना सुन्दर नृत्य कर सकती है, उसका सदृश्य लाइव परफॉरमेंस देखने का उन्हें मौक़ा मिला था।

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