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नौकर-नौकरानी पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,085 बार

मेरा नौकर राजू और मैं-2

नीतू पाटिल

22 Dec 2012 को प्रकाशित

मेरा नौकर राजू और मैं-2
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मेरी सेक्स कहानी के पिछले भागमेरा नौकर राजू और मैं-1में आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने पति के साथ सेक्स से वंचित थी और अपने जवान नौकर के साथ चुदाई के सपने देखने लगी थी.आज होली के दिन वो अपने भाई भाबी के घर जाने वाला था तो मैंने उसे मेरी बहन सीमा के घर छोड़ देने को कहा.अब आगे:

उसने सीमा के घर के पास में ही गाड़ी खड़ी की, मैं गाड़ी से उतरी, वह पीछे से बोला- मैं आप को सात बजे लेने को आऊंगा.मैंने हा में सिर हिलाया और सीमा के घर चली गयी।

शाम के सात बजे थे, मैं राजू के फ़ोन की राह देखने लगी थी, सीमा के घर आकर कुछ अजीब ही लगा। सीमा और राकेश के बीच दूरियां बहुत बढ़ गई थी। राकेश शाम को काम के सिलसिले में बाहर चला गया था, सीमा से भी और कितनी बातें कर सकती थी। अब मुझे बोर लगने लगा था।

करीब बीस मिनट बाद राजू का फ़ोन आया, वह घर के पास आ गया था। मैंने सीमा को बाय बोला और नीचे आ गयी, वह गाड़ी में ही बैठा था। पूरी गाड़ी को रंग लगा हुआ था, राजू भी रंग से भीगा हुआ था। उसने गाड़ी का दरवाजा खोला, मैं गाड़ी में बैठ गयी और उसने गाड़ी चलानी शुरू की।

हम घर पहुँचे, सीमा ने आज फिर भांग और उसके नशे के बारे में बताया था। मन में आ रहा था राजू से मांग लूं पर फिर डर भी लग रहा था।“मेमसाब खाना लगा दूँ?” राजू ने घर पहुँचते ही पूछा।“थोड़ी देर में!” मैं उसको बोल कर सोफे पर बैठी, और भांग मांगने के बारे में सोचने लगी।

तभी राजू बाहर आया- मेमसाब दूध खराब हुई गवा, लैके आता हूं.वह बोला और जाने लगा तो मैंने उसे आवाज दी- राजू यह भांग क्या होती है?पहले तो वह थोड़ा डर गया फिर हिम्मत कर के बोला- वह नशे की पुड़िया होती है… क्यों… आप को चाही?“सोच रही हूँ आज पी कर देख लूं, बहुत सुना है उसके बारे में!” मैं हंसती हुई बोली।“अच्छा, मैं दूध लेकर आता हूं फिर देता हूं आपको बनाइके!” वह चला गया।

मैं ऊपर अपने बेडरूम में गयी, बाथरूम जाकर फ्रेश हो गयी, फिर बैडरूम में टीवी देखने लगी।थोड़ी देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुई तो मैंने दरवाजा खोला, राजू अपने हाथ में ट्रे लेकर खड़ा था।मैंने उसे अंदर बुलाया।

“ईह लीजिये मेमसाब, स्पेशल भाँगवा… हमार यू पी स्पेशल!” बोलकर उसने टेबल पर ग्लास रखा और चला गया।मैंने ग्लास हाथ में लिया, मन में आया कि पी लूं या कि नहीं पीऊँ?, यही चल रहा था मेरे मन में… पर नशे पर किसका जोर है।मैंने एक घूंट पिया। काफी अजीब स्वाद था उसका… पहले दो तीन घूंट मुँह बनाकर पिये, पर बाद में आदत हो गयी।

आधा ग्लास पिया तो मेरा सिर चकराने लगा, मैं सोच रही थी कि कैसे पीते होंगे लोग यह ड्रिंक?और एक दो घूंट पिये तो मेरा दिमाग ही सुन्न हो गया।

सामने टीवी चालू ही था, उस पर अब पुरषों के फैशन का शो चालू हो गया। एक एक आदमी अजीब अजीब ड्रेस पहनकर आने लगे। उनको देख कर मेरी चुत गीली होने लगी। उसका कारण ही ऐसा था, उनके मजबूत डोले, तेज नजर, हैंडसम चेहरा देख कर कोई भी गर्म हो जाता।

मैं वही शो देखने लगी, मेरी नसों में उत्तेजना बहने लगी। वैसे भी शरीर के बहुत से अंग सुन्न पड़ गए थे। उतने में एक मॉडल आया उसने ब्लू रंग का गाउन पहना हुआ था, और उसकी गाँठ आगे बांधी हुई थी। उसकी आँखें भूरी थी और बालों को किया हुआ कलर उसके चेहरे को सूट कर रहा था।

गाउन स्लीवलेस था इसलिए उसके हाथ के मसल्स साफ साफ दिख रहे थे। उसने स्टेज के आगे आकर अपने आगे की गांठ खोल दी तो उसका गाउन दोनों तरफ खुल गया, सामने का नजारा देखने लायक था।उसने अंदर सिर्फ एक अंडरवियर पहना था, वो भी बिल्कुल छोटा। उसका अंडर वियर का जालीदार कपड़ा सिर्फ उसके लंड को ढक रहा था। उसका मस्क्युलर बदन किसी को भी अपनी तरफ खींच सकता था। उसके शरीर पर बिल्कुल भी बाल नहीं थे और उसका गोरा चमकीला बदन मानो जैसे कि वह कामदेव ही हो।

वह सामने ही खड़ा हो कर अपना अंगूठा अपने अंडरवियर के इलास्टिक में डालने लगा, मुझे लगा कि अब वह अपनी अंडरविअर भी उतार देगा। मेरे हाथ अपने आप मेरी चुत पर आ गए। मैं अपनी चुत को भींच कर टीवी देखने लगी।

उसने हल्के से अपना अंगूठा इलास्टिक में घुमाया, फिर अपना भार दायें पैर से बायें पैर पर ले आया और मुस्कुरा कर पीछे मुड़ा। पीछे मुड़ कर वापस जाने लगा पर उसने अपना गाउन उतार दिया।“अमेजिंग, एकदम सही!” मेरे मुंह से निकला।

उसके अंडर वियर को पीछे से सिर्फ एक धागा था वह भी सजे कूल्हों की दरार में घुसा हुआ था। उसके नितम्ब बिल्कुल नग्न थे, पीछे से भी उसका शरीर मस्कुलर था। धीरे धीरे चलते हुए वह स्टेज के पीछे चला गया।

वह चला गया लेकिन मेरी चुत में आग लगा कर गया। मेरी चुत अब पानी पानी हो गयी थी और मेरी पैंटी भी गीली हो गयी थी, मैं होश खो बैठी थी। टीवी पर एक एक कर कर मॉडल्स आ कर अपनी अंडर गारमेंट्स दिखाकर जा रहा था, पर उनका बदन मुझे पागल कर रहा था।

“मेमसाब, अब खाना लगा दूँ.” राजू बोला।“हाँ लगा दो!” मैं टल्ली होने लगी थी।

राजू नीचे गया और नीचे से प्लेट लगाने की आवाजें आयी। मैंने ग्लास मुँह पर लगा कर बची हुई सारी भांग पी ली और बेड पर से उठने लगी।मेरी पूरी पैंटी गीली हो गयी थी। मैंने बेड का सहारा लेते हुए गीली पैंटी को पैर से उतार दिया और बेड का सहारा ले कर चलने लगी। पर सब मुश्किल लग रहा था, लग रहा था कि पैर हवा में ही रुक रहे हैं।

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मैं मुश्किल से एक दो कदम आगे बढ़ी फिर वही बेड पर बैठ कर राजू को आवाज दी।राजू दौड़ता हुआ ऊपर आ गया- जी मेमसाब?“राजूssss आज खाना यही लगाओ… मुझे चलना न…” नशे की वजह से मुझे चलना नहीं हो रहा यह भी बता नहीं सकती थी।और मैं वही बेड पर गिर गई।

थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा के राजू मुझे बेड पर सुलाने की कोशिश कर रहा था, मैं उसको देख कर मुस्कुराई। वह बहुत सावधानी लेकर मुझे सुलाने की कोशिश कर रहा था, मेरे खुले बदन को और खास अंगों को स्पर्श ना हो इसकी कोशिश कर रहा था।

मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसको अपने ऊपर खींचा, अचानक हुई इस घटना से वह संभल नहीं पाया और मेरे शरीर पर गिर गया।

पर अगले ही पल उसने खुद को संभाला और मेरे ऊपर से उठ गया। वह मुझसे दूर जाते हुए बोला- मेमसाब तनिक ठीक से सो… तकिया उधर है!वह बोल रहा था… पर मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, मैं बस उसको देख कर मुस्कुरा रही थी। वह कुछ बोलता जा रहा था और मैं सिर्फ मुस्कुरा रही थी।

वह और पीछे हुआ और अचानक नीचे गिर गया। मैंने देखा यो वह मेरी गीली पैंटी पर फिसल कर गिर गया था।उसने मेरी पैंटी को उठाकर अपने हाथों में पकड़ी।

“राजूsssss… तुमने भांग पिलाई… बहुत बढ़िया थी… बहुत अच्छा लगा पी कर!” मैं अब बड़बड़ाने लगी।“मेमसाब आप ठीक से सो जाइये.” वह फिर से बोला पर मुझे होश कहाँ था।

“राजू… मेरा एक और काम करोगे?” मैं नशे में बोली।“क्या मेमसाब?” उसने पूछा।“मुझे अपना मक्खन खिलाओगे ना राजू??” सुनते ही वह चौंक गया।“क… क… का” उसने पूछा वैसे ही मैं जोर जोर से हँसने लगी।“मुझे भी तुम्हारा मक्खन चाहिए जैसे तुमने सीमा को खिलाया है.” कह कर मैं छोटी बच्ची की तरह रोने लगी।

“मेमसाब आप को ज्यादा हो गयी है… आप सो जाओ… सुबह अच्छा लगेगा.” कहकर वह जाने लगा वैसे ही मैं लड़खड़ाते हुए उठी और उसका कुर्ता पकड़कर उसे रोकने की कोशिश करने लगी।पर नशे की वजह से ठीक से खड़ी नहीं हो सकी और उसका कुर्ता हाथों में पकड़े रख कर ही नीचे गिर गई।उसका पूरा कुर्ता फट गया।

वह डर कर पीछे मुड़ा, मैं उसके पैरों के पास ही घुटनों के बल गिर पड़ी थी। उसके मेरी तरफ मुड़ते ही उसका लंड मेरे मुँह के सामने आ गया।मैंने हंसते हुए उसके लंड को पकड़ा, धोती और निक्कर के अंदर छुपा उसका लंड धीरे धीरे फूलने लगा था। मैं उसके लंड को सहलाने लगी वैसे ही वह बोला- मेमसाबssss ईह का कर ही हो…उसके बोलते ही मैं और जोश में आ गयी और धीरे से उसका लंड सहलाने लगी, वह भी सिसकारियाँ लेने लगा।

उसका लंड धीरे धीरे फूलने लगा था मेरी चुत भी पानी छोड़ रही थी और मेरे गाउन को भीगो रही थी।“मेमसाब, छोड़ो मुझे!” कहकर वह अपने लंड से मेरा हाथ हटाने की कोशिश करने लगा।पर मैं उसका लंड छोड़ने को तैयार नहीं थी।

उसने एक झटका दे कर मेरा हाथ हटा दिया पर वह वहाँ से गया नहीं। उसकी भी हालत ‘चाहिए… चाहिए… नहीं…’ हो रही थी।मैं उठने की कोशिश करने लगी पर अचानक गिर पड़ी, तभी उसने मुझे संभालने की कोशिश की। उसी वक्त मेरा एक स्तन उसके हाथ के नीचे आ गया। उसके मजबूत हाथों के नीचे मेरा स्तन मसल गया था और मेरा पूरा शरीर रोमांचित हो गया।

मैंने उसे अपनी बाहों में ज़ोरों से पकड़ लिया। मैंने अपने स्तन उसकी छाती पर दबाए रखे हुए थे और नीचे से कमर हिलाते हुए मेरी चुत उसके लंड पर रगड़ रही थी।

उसका प्रतिकार अब कम हो गया था। कितना भी ईमानदार क्यों न हो वह भी एक पुरुष था, वह अपने हाथ मेरी पीठ पर ले कर आ गया। मैं भी उसको ज़ोरों से भींचते हुए मेरी चुत को उसके लंड पर घिसने लगी।अचानक ही उसने मुझे धक्का दे दिया और बेड पर गिरा दिया, फिर उसने अपना फटा हुआ कुर्ता निकाल फेंका।

उसके शरीर पर हल्के बाल थे, उसकी मजबूत छाती पर एक दो जगह काटने के निशान थे। साँवले रंग के छाती पर उसका छोटा काला ऐरोला चमक रहा था और उसके बीच में उसका निप्पल किसी मनी की तरह फूला हुआ था।वह कमर के उपर से नंगा ही मेरे पास आ कर खड़ा हो गया, उसने बदन की मादक खुशबू मेरी नाक में भर गई। मैंने उसके लंड को फिर से पकड़ कर सहला दिया और आगे झुकते हुए उसको चूमा।“सsssss” सिसकते हुए उसने अपनी कमर आगे की जैसे बिना बोले कह रहा हो कि ‘मेमसाब मेरा लंड खोल दो।’

दोस्तो, मेरी कामुकता और चुदाई कहानी कैसी लग रही है?मुझे मेल करके बतायें!मेरा मेल आई डी है support@mohakkisse.com

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मेरा नौकर राजू और मैं

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

प्रणय स्वछन्द

1 week ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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