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Group Sex Story • पठन समय: 16 मिनट • पढ़ा गया: 1,066 बार

मेरी कुंवारी चूत को किरायेदारों ने चोदा-2

गायत्री मेघवाल

29 Apr 2022 को प्रकाशित

मेरी कुंवारी चूत को किरायेदारों ने चोदा-2
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अब तक आपने इस सेक्स कहानी के पहले भागमेरी कुंवारी चूत को किरायेदारों ने चोदा-1में पढ़ा कि मेरे किराएदार दो जवान लड़के थे, जिन्होंने मुझे चोदने के लिए राजी कर लिया था. मुझे भी उन दोनों से चुदने की बड़ी लालसा थी. उन दोनों ने मुझे नंगी करके खूब गर्म किया और मुझे चोदने के समय मुझसे दूर हो गए.

अब आगे..

मैं चुदास की आग से तड़फ रही थी, एक लाचार चुदैल सी उनकी ओर देखने लगी. मैं इस वक्त अपनी चरम उत्तेजना पर थी.

मैंने बोला- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है … प्लीज अपना लंड जल्दी से अन्दर डाल दो.वे दोनों हंसने लगे और बोले- इतनी आसानी से नहीं चोदेंगे तुझे … तूने हमें बहुत तड़पाया है. अब हम तुझे तड़पाएंगे.मैंने बहुत बोला- प्लीज, मत सताओ.फिर राज बोला- अच्छा बोल … मैं रंडी हूं और जब हम बोलेंगे, तब तू हमसे चुदवाने आ जाओगी.मैंने बोला- हां मैं रंडी हूं और जब आप बोलोगे, तब आपसे चुदूंगी.

फिर उन दोनों ने टॉस किया. जीतने के बाद कमलेश मेरे ऊपर चढ़ गया और राज मेरे पीछे से लग गया.उसने बोला- पहले मेरे लंड को चूस कर खड़ा कर दे.

मैंने ऐसा ही किया और थोड़ी ही देर में उसका लंड एकदम ठोस हो गया. उसने मुझे लेटाया और लंड मेरी चुत पर सैट कर प्रिया.

पीछे से राज ने मेरे हाथ पकड़ लिए और कमलेश ने एक धक्का दे मारा, लेकिन लंड फिसल गया. उसने एक बार फिर से कोशिश की और एक जोरदार झटका मारा. इस बार उसका सुपारा मेरी चुत में चला गया.मेरे मुँह से दर्द भारी आवाज़ निकल गई और मेरी आंखों से आंसू आने लगे. मैं चिल्लाने लगी- आह मर गई … प्लीज़ निकालो इसे … मैं नहीं सह पा रही हूं … मुझे बहुत दर्द हो रहा है.

राजा बोला- साली अभी तो रंडी की तरह गिड़गिड़ा रही थी … अब सह मादरचोद.मैंने बोला- रात को कर लेना … अभी इसे निकालो प्लीज.

लेकिन मेरी कौन सुनने वाला था. कमलेश ने एक और झटका मारा और उसका आधा लंड मेरी चुत में चला गया.

मैं दर्द से लगातार चिल्ला रही थी और रो भी रही थी. उसने देर ना करते हुए एक और झटका मारा. उसका पूरा लंड मेरी चुत में चला गया. मेरी आंखें फ़ैल गईं और मैं बेहोश हो गई.

दो मिनट बाद मुझे होश आया. कमलेश लंड मेरी चुत में पेल कर बैठा हुआ था. खून से पूरी चादर रंग गई थी.

राज बोला- बधाई हो … तुम औरत बन गई हो.

कमलेश धीरे धीरे लंड आगे पीछे करने में लगा था. मुझे हल्का हल्का दर्द हो था, लेकिन अब ये दर्द मीठे दर्द में बदल गया था.

मैं हल्की हल्की मादक सिसकारियां लेने लगी थी उम्म्ह… अहह… हय… याह… हौले हौले मुझे मजा आने लगा और मैं अह अह की आवाजें निकालने लगी.

राज ने मेरे हाथ छोड़ दिए और अपना लंड मेरे मुँह में डाल प्रिया. अब मैं दो छेद से चुद रही थी.

कमलेश ने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी. मुझे मजा आने लगा और मैं कमर उठा कर साथ देने लगी. कमलेश बोला- तू तो पक्की रंडी बनेगी.मैं अब हंसने लगी थी.

कमलेश जोर जोर से चोदने लगा- ले मादरचोदी रंडी ले … ले छिनाल लंड ले …उसने चुदाई की स्पीड और तेज कर दी.

इधर राज ने लंड मेरे गले में उतार प्रिया मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी. दोनों ओर से मेरी बराबर ठुकाई होने लगी. कोई दस मिनट बाद कमलेश जोर के झटके मारने लगा.

उसने बोला- मैं झड़ने वाला हूँ.मैंने बोला- प्लीज मेरी चुत में मत छोड़ना.

उसने लंड जल्दी से निकाला और मेरे मुँह की ओर आ गया. उसने लंड मेरे मुँह में घुसेड़ा ही था कि उसका माल निकल गया. उसने आधा वीर्य मुँह के अन्दर छोड़ प्रिया और आधा मेरे मुँह के ऊपर छोड़ प्रिया. अब मेरा पूरा मुँह वीर्य से भरा था. अन्दर का वीर्य मैंने पूरा पी लिया.

वो बोला- मुँह वाले को भी चाट.

मैं कुतिया के जैसे अपनी जीभ से मुँह पर लगा माल चाटने लगी. जहां तक मेरी जुबान गई, मैंने रस चाट लिया. बाकी का मुँह पर ही लगा रहा.

इतने में राज मेरे सामने आ गया और अपना लंड चुत पर टिकाने लगा. मैं कुछ बोलती, इससे पहले कमलेश ने लंड मुँह में डाल प्रिया. मैं उसका बेजान लंड चूसने लगी. राज ने लंड मेरी चुत पर सैट किया.

मैंने बोला- धीरे करना.वो बोला- चुप साली रंडी.

उसने लंड झटके से मेरी चुत में घुसा प्रिया. मेरे मुँह से निकली चीख कमलेश के लंड में समा गई.

अब राज लंड आगे पीछे करने लगा. मुझे भी मज़ा आने लगा. उसने चुदाई की गति बढ़ा दी. इधर कमलेश का लंड फिर से कड़क हो गया था.

अब राज जोर जोर से मुझे चोदने लगा- ले रंडी ले … गायत्री रंडी …मैं कमर उछाल उछाल कर उसका साथ देने लगी और जोर जोर से चिल्लाने लगी- अहह … चोदो मुझे जोर से … बना लो अपनी रंडी.

मैं कमलेश का लंड जोर से आगे पीछे करने लगी. राज की स्पीड और बढ़ गई. करीब बीस मिनट की कड़क चुदाई के बाद वो झड़ने वाला था. उसने बोला- अन्दर ही उतार दूँ या मुँह में लेगी?मैंने कमलेश का लंड मुँह से बाहर निकालते हुए बोला- प्लीज अन्दर नहीं.उसने बोला- पहले बोल … तू रंडी है सबकी.मैंने बोला- हां, मैं सबकी रंडी हूं.

उसने लंड बाहर निकाल कर मेरे मुँह पर फेशियल के जैसे छोड़ प्रिया. मेरा मुँह पूरा वीर्य से भर गया था. वो जोर जोर से सांसें ले रहा था.

इतने में कमलेश मेरे सामने आया. मैंने पीछे हटते हुए बोला- प्लीज़ … मैं अब नहीं कर पाऊंगी, रहम करो प्लीज़.वो बोला- ये उफान पर आ गया है … इसका क्या करूं?मैंने बोला- मैं चूस लेती हूं.ये सुन कर राज हंस कर बोला- तू तो एक बार में ही पक्की रांड बन गई है.मैं शर्मा गई.

वो अपना लंड मेरे मुँह के पास लाया और बेड के किनारे पर टांगें लटका कर बैठ गया. उसने अपने पैर नीचे फैला दिए और बोला- चल रंडी … नीचे बैठ कर लंड चूस.

अब मैं नीचे बैठ कर किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह लंड चूसने लगी. कोई 5 मिनट में ही वो झड़ गया और सारा माल मेरे मुँह में छोड़ प्रिया. वीर्य अब मुझे जूस की तरह लगने लगा था. मैंने एक बूंद भी बाहर नहीं जाने दी और सब चट कर गई. मेरा थका कर बुरा हाल था. वे दोनों भी थक गए थे.

हम तीनों ऐसे ही नंगे सो गए. तीन घण्टे बाद मेरी आँख खुली, तो मैंने देखा कि वे दोनों मेरे सोए पड़े हैं. मैं उठी और महसूस किया कि मेरा पूरा मुँह और चेहरा वीर्य से सना है और सूख गया है.मैं नहाने चली गई.

मुझे बहुत भूख लगी थी, तो मैंने खाना बनाया और फिर उन दोनों को उठाया.उठते ही दोनों ने मुझे एक एक लिप किस किया.

मैं बोली- चलो खाना खा लो.राज बोला- यस … हमारी बेबी ने बनाया तो खाना ही पड़ेगा.उन्होंने बोला- दो ही थाली लगाना. तुम हम दोनों की थाली में से ही खा लेना.मैंने ओके बोला और खाना लगाया.

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राज ने बोला- खाना हम दोनों खिलाएंगे, वैसे खाना पड़ेगा.

मैंने हां बोल प्रिया. वे एक एक करके खाना अपने मुँह में लेते और फिर किस करते हुए मुझे खिला देते. शुरूआत में मुझे थोड़ा अजीब लगा, पर बाद में मज़ा आने लगा.

फिर वे दोनों जाने लगे और बोले- रात को ऊपर आ जाना.मैंने न जाने क्यों एक ही बार में हां बोल दी.

उन दोनों के चले जाने के बाद मैं फिर से लेट गई. पूरे दिन मेरे दिमाग में यही सब चलता रहा. फिर रात को मैं नहायी और अच्छे से तैयार होकर मेकअप किया. फिर ब्रा पैंटी पहन कर ऊपर से बस एक चादर ओढ़ ली … क्योंकि वैसे भी सब खुलने थे.मैंने अपने आपको आईने में देखा, तो मैं एकदम हीरोइन लग रही थी.

मैं भाई के सोने के बाद ऊपर गई और उनके कमरे का गेट बजा प्रिया. कमलेश ने गेट खोला और मुझे अन्दर लेकर गेट लगा लिया. जैसे ही मैं अन्दर गई तो मेरी आंखें फटी रह गईं. वहां उन दोनों के अलावा दो लोग और थे.

वे दोनों और कोई नहीं, हमारे घर के पास चाय का ठेला लगाते थे, वो थे. वे हर वक्त मुझे घूरते रहते थे. मैं उन्हें देखकर गेट की ओर भागने लगी, तो राज ने मेरे से दो गुनी स्पीड से आकर मुझे पकड़ लिया और बेड पर धक्का दे प्रिया.

वो बोला- ये ये दोनों भी तुझे चोदना चाहते हैं.मैंने बोला- मैं क्या सरकारी दुकान हूं.इस पर सब हंसने लगे.

कमलेश बोला- चोदेंगे तो हम सब … वरना कोई नहीं चोदेगा. अब तेरे ऊपर है कि तू तेरी हवस मिटाने के लिए ये करती है कि नहीं.राज बोला- तुझे बहुत मज़ा आएगा … इसका हमारा वादा है. अब तू जाने तेरा काम जाने.

फिर मैंने सोचा कि सेक्स तो बहुत चढ़ा हुआ है … क्या करूं. फिर मैंने सोचा कि जब दो ने चोद लिया, दो और चोद लेंगे तो कौन सा घिस जाऊंगी. उस समय मेरे ऊपर कामवासना हावी थी.मैंने कहा- किसी को पता नहीं चलना चाहिए.वो सब हंसने लगे- हम क्यों बोलेंगे सबको.

उन दो का नाम दिनेश और रघु था. दोनों की उम्र तीस के ऊपर थी. वे बहुत मोटे थे और लंबे भी. मैं उन सबके बीच एक रंडी की तरह लग रही थी.

राज बोला- आज तो क्या मस्त माल लग रही है यार … पूरा मेकअप करके आयी है.रघु बोला- यार कैसे पटाई तुम दोनों ने इसे. सच में बड़ा कांटा माल है ये तो. साली जब से बड़ी हुई है, तब से जीना खराब कर रखा इसने … आज पूरी कसर निकालूंगा.

ये सब सुन कर मुझे शर्म आने लगी.फिर कमलेश बोला- शरमा क्यों रही है … अभी सबका लंड गांड उठा उठा कर लेगी.

इतने में दिनेश ने मेरा चादर एक बार में खींच कर गिरा प्रिया. मुझे सिर्फ ब्रा पैंटी में देख कर वो दोनों चौंक गए और बोले- साली रंडी पूरी बनकर आयी है और हमें नखरे दिखा रही है.

फिर वो सब मेरे ऊपर टूट पड़े और मेरे दोनों बचे कपड़े भी खोल कर फेंक दिए.

दो ने मेरे चूचे पकड़े, एक ने चुत और एक ने होंठ पर कब्जा जमाया. फिर सब अपना अपना काम करने लगे. अब मैं सातवें आसमान पर थी. एक तरफ मेरी चुत चट रही थी और दूसरी ओर चूचे.

मेरे मुँह से आवाजें निकलने लगीं, किस करने वाले ने अपना लंड मेरे मुँह में दे दे प्रिया. मैं बड़े मजे से उसके लंड को चूसने लगी. अब मेरी हालत ऐसी थी कि अगर वे सब मुझे बिना चोदे छोड़ देते, तो मैं चौराहे पर नंगी ही चुदाने चली जाती.

कोई पांच मिनट यही सब चलता रहा. मैं अपने आपे में नहीं थी, मेरे मुँह से निकल गया- अब तो चोद दो मुझे प्लीज़ …यह सुन कर सब हंसने लगे और बोले- अभी तुझे बहुत तड़पना है.मैं बोली- ऐसा मत करो … चोद दो मुझे … मुझसे नहीं सहा जा रहा है.

ये सुन कर वे सब मेरे से दूर चले गए और बोले- थोड़ा रुक.फिर बोले- बोल तू हम सबकी रंडी है, बोल तू हम सबकी रखैल बनेगी.मैंने कहा- हां मैं आप सबकी रंडी हूं और रखैल भी हूँ.उनमें से एक बोला- अब कुतिया के जैसे आकर हम सबके लंड चूस.

मैंने ऐसा ही किया और एक एक करके सबके कपड़े खोलकर लंड चूसे.

अब मैं बोली- अब तो प्लीज चोद दो.

फिर वही चाय वाले रघु ने अपना लंड मेरी चुत पर टिकाया और एक ही झटके में अन्दर पेल प्रिया. मैं चिल्ला उठी और रोने भी लगी. तभी उसने लंड पीछे किया और फिर से सैट किया. अब मुझे दर्द की परवाह नहीं थी, बस हवस की थी.

वह मुझे जोर जोर से चोदने लगा. मैं भी बोली- अह अह … आह्हह … चोदो जोर से … रंडी बना दो … अह रखैल बना लो.वो बोला- ले रंडी ले …

इतने में कोई और मेरे पीछे लंड लाया और मेरी गांड पर लंड टिका प्रिया. मैं कुछ बोल पाती कि इससे पहले एक झटके में उसने आधा लंड पेल प्रिया.मैं चिल्लाने लगी, मुझे दर्द हो रहा था- आह मर गई … प्लीज छोड़ो.इतने में उस कमीन ने एक और झटका दे मारा और उसका पूरा लंड मेरी गांड में चला गया.

मैं रोने लगी, लेकिन एक तरफ हवस थी.फिर थोड़ी ही देर में, मैं दर्द भूल गई और मुझे मज़ा आने लगा. अब मैं पूरे जोश से चुद रही थी. एक तरफ गांड की मालिश और एक तरफ चुत चुदाई. अब तो मैं कमर उठा उठा कर दोनों ओर से चुदाने लगी थी.

मैं मस्ती में बोल रही थी- आह चोदो … फाड़ दो … अपनी रंडी को चोद दो.वे भी गालियां दे रहे थे- मादरचोदी रंडी … ले … लंड ले.

तभी बाकी के दोनों ने मुझे लंड मुँह में दे दिए. मैं बारी बारी से उन दोनों का लंड चूसती रही. मैं न जाने कितनी बार झड़ गई थी.

कोई 20 मिनट की मस्त चुदाई के बाद वो दोनों झड़ने वाले थे. उन्होंने जोर से मुझे पकड़ा और अन्दर ही अपना पानी छोड़ प्रिया.वे बोले- गोली खा लेना.

इतने में दो और लंड चूत के लिए रेडी थे. ऐसे ही उन चारों ने पूरी रात में मेरी हालत खराब कर दी. एक एक ने मुझे तीन तीन बार चोदा. कुल बारह बार चुदने से मेरी हालत खराब हो गई थी. मुझसे चला भी नहीं जा रहा था.

राज और कमलेश ने मुझे उठाया और मुझे नीचे मेरे कमरे में बेड पर लिटा कर आए.

सुबह मेरे भाई ने मुझे उठाया, तो मेरी जरा सी भी हिम्मत नहीं थी. मैंने उससे बोला- मुझे तेज बुखार है, तू आज स्कूल मत जा.वो स्कूल नहीं गया. मैंने उसे भी सोने को बोला. दस बजे मेरी नींद खुली, तो मैं रात की सब बातें याद करने लगी.

तभी मेरा दिमाग खराब हुआ, मुझे याद आया कि सबने वीर्य मेरी चुत में ही छोड़ा था. मैं जल्दी से उठी. मेरे से चला भी नहीं जा रहा था. मैं पास के मेडिकल स्टोर पर गई और प्रेगनेंसी रोकने की गोली मांगी.

वो मेडिकल वाला हंसने लगा और बोला- आज तो चाल ही बदल गई है. हमें भी मौका दो ना.मैं कुछ नहीं बोली और गोली लेकर आ गई.

उसके बाद उन चारों को जब भी मौका मिलता, तब मुझे खूब चोदते. एक एक करके वे चोदुओं की संख्या बढ़ाते गए. मुझे भी नए नए लंड लेने की आदत हो गई थी. इस तरह से मेरे किराएदारों ने मुझे पूरे मोहल्ले की रंडी बना प्रिया.

उसके बाद मुझे अभी तक पूरे मोहल्ले के मिल कर 7 लोगों ने चोदा है. उनमें वो मेडिकल स्टोर वाला भी शामिल है. अब हालत ये है कि लंड के बिना मैं दो दिन से ज्यादा नहीं रह सकती.

दोस्तो, ये थी मेरी चुदाई की कहानी. मैं पूरी चुदक्कड़ बन गई हूँ. आप सबको मेरी ये कहानी कैसी लगी, प्लीज मुझे मेल करके बताएं.मेरी मेल आईडी है support@mohakkisse.com

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मेरी कुंवारी चूत को किरायेदारों ने चोदा

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी
भ

भोगी राज

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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