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पहली बार चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 796 बार

माँ-बेटी को चोदने की इच्छा-32

राहुल तारा

12 Jul 2023 को प्रकाशित

माँ-बेटी को चोदने की इच्छा-32
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तो वो चहक कर बोली- ठीक है.. चलो अब जल्दी से अपना ल..लण्ड मेरे मुँह में डालो और अपना मुँह मेरी च..चूत पर लगाओ.. अब मुझसे और इंतज़ार नहीं हो सकता..

लण्ड-चूत कहने में वो कुछ हिचक रही थी.. बेचारी.. सच में उसको कुछ नहीं मालूम था कि कैसे क्या करना है..। उसे तो बस इतना ही मालूम था कि लण्ड चूत में जाता है जिससे माल निकलता है.. और लण्ड का माल चूत में भर जाता है.. जिससे बच्चा हो जाता है बस..।ये सब उसने मुझे बाद में बताया था..

अब आगे..

खैर.. मैंने उसे बिस्तर पर सही से लिटाया और हम 69 अवस्था में लेट गए। यह देख कर उसके दिमाग की बत्ती जल उठी और रूचि खुश होते हुए बोली- यार वाकयी में तुम स्मार्ट के साथ-साथ होशियार भी हो.. क्या जुगाड़ निकाला है..

मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी।

उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर प्रिया.. जिससे उसके मुँह से ‘अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह… आआआ..’ की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।

अब मुझे एहसास हो गया कि रूचि को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।

मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।

जिससे उत्तेजित होकर रूचि ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए ‘ओह.. शिइ… इइइइ.. शीईईई..’ की सीत्कार के साथ ‘अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..’ करने लगी।

तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी ‘आह्ह्ह्ह ह्ह..’ छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली- यार.. लग रही है ये.. क्या कर प्रिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है..

तो मैंने मन में सोचा शायद इसने अपनी चूत में ऊँगली भी नहीं डाली है.. इसलिए इसे ऐसा लग रहा होगा।

मैंने बोला- जान बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।

फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक का ढेर लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. जुबान से ही अपने थूक को उसके छेद के अन्दर ठेलने लगा.. जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।

‘अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ… शहअह…’ की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।

दोस्तो, सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्तिया के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने फिर से उसकी चूत में उंगली डाल दी।

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इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।

उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब रूचि झड़ने वाली है.. यही सही मौका है दूसरी उंगली भी अन्दर कर दो.. ताकि छेद भी थोड़ा और फ़ैल जाए।इस अवस्था में इसे दर्द भी महसूस नहीं होगा.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।अब रूचि के मुँह से भी ‘गु.. गगगग गु.. आह्ह..’ की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।

मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी.. जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी ‘अह्ह ह्ह्ह्ह..’ की चीख निकल गई।

सच कहूँ दोस्तो, हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।आज भी हम आपस में जब मिलते हैं तो इस बात को याद करते ही एक्साइटेड हो जाते हैं मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।

खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए ‘अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..’ के साथ ही झड़ गई। उसका यह पहला अनुभव था.. जो कि शायद 10 से 15 मिनट तक ही चल पाया था।

मेरा अभी बाकी था.. पर मैंने वहीं रुक जाना बेहतर समझा.. क्योंकि ये उसके जीवन का पहला सुखद अनुभव था.. जो कि उसके शरीर की शिथिलता बयान कर रही थी।मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का माल था।

उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।

जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह ‘अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..’ के साथ चहकते हुए स्वर में बोली- विकास.. यू आर अमेज़िंग.. सच यार.. मुझे तो तूने फुल टाइट कर प्रिया.. यार लव यू और ये क्या तुम्हें लगता है.. ज्यादा मज़ा नहीं आया क्योंकि तुम पहले की ही तरह नार्मल दिख रहे हो.. जबकि मैं पसीने-पसीने हो गई।

तो मैं बोला- जान तुम्हारा डिस्चार्ज हो गया है और मेरा अभी नहीं हुआ है और असली मज़ा डिस्चार्ज होने के बाद ही आता है।

उसने झट से बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर बोली- अच्छा.. तुम पहले की तरह मेरे जैसे बिस्तर पर बैठो और मैं जमीन पर बैठ कर तुम्हारी तरह करती हूँ।

मैं तुरंत ही बैठ गया और वो उठी और मेरे सामने अपने घुटनों के बल जमीन पर बैठकर मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।

हय.. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा आपके अधीन हो कर.. आपकी गुलामी करे.. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से ‘उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..’ की आवाजें आने लगीं।इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।अब आप लोग सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है.. पहली बार में बिना किसी विरोध के कोई कैसे माल अन्दर ले सकता है?तो मैं आपको बता दूँ कि जैसे मैंने किया था.. वैसा ही उसने किया.. क्योंकि उसे कुछ मालूम ही नहीं था।तो अब आगे क्या हुआ.. जानने के लिए अगली कड़ी का इंतज़ार करें।तो कैसी लग रही है मेरी कहानी.. अपने सुझाव देने के लिए मेरे मेल आईडी पर संपर्क कीजिएगा और इसी आईडी के माध्यम से आप मुझसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।

मेरी चुदाई की अभीप्सा की ये मदमस्त कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

माँ-बेटी को चोदने की इच्छा

कुल भाग: 36
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 16
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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