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माँ की चुदाई पठन समय: 18 मिनट पढ़ा गया: 1,057 बार

विधवा मां की चुत गांड में बेटे का लंड- 3

विशाल उदयपुर

09 Apr 2021 को प्रकाशित

विधवा मां की चुत गांड में बेटे का लंड- 3
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मॅाम सन फक स्टोरी में मैंने अपनी विधवा मम्मी को शहर लाकर उनकी इच्छाएं इतनी बढ़ा दी कि वे खुद मेरे साथ सेक्स करने को तैयार हो गयी. मैंने उनकी चूत मारी और गांड भी.

दोस्तो, मैं विशाल आपको अपनी सच्ची मॉम सन फक सेक्स कहानी के इस भाग में पुनः आनंदित करने हाजिर हूँ.कहानी के दूसरे भागहॉट मॅाम की चूत चाट कर मजा लियामें अब तक आपने पढ़ लिया था कि मेरी मां ने मुझे अपनी चुत का रस पिलाना शुरू कर प्रिया था.

अब आगे मॅाम सन फक स्टोरी:

थोड़ी देर बाद मैं बिस्तर से खड़ा हो गया और एक-एक करके अपने कपड़े खोलने लगा.कुछ ही पल में मैं भी मां की तरह पूरा मादरजात नंगा था.

मां बिस्तर पर बैठी थीं.मेरा लंड लोहे की रॉड की तरह तन कर खड़ा था.बड़ा सा गुलाबी रंग का सुपारा एकदम चिकना था.

मैंने एक पाँव मां के बगल में बिस्तर पर रखा और अपना लंड हाथ से पकड़ कर मां के चेहरे से टकराने लगा.

मां ने हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को मुट्ठी में ले लिया, लंड के सुपारे को मां अपने होंठों पर फिराने लगीं.दूसरे हाथ से मां मेरे अंडकोषों को मसल रही थीं.

‘वाह क्या शानदार शाही लंड है, ऐसे लौड़े पर तो मैं वारी जाऊं … आज से तो मैं तेरे लंड की कनीज हो गई. अब और मत तड़पा … अपने इस मस्ताने लंड से जल्दी से मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझा दो. इस लंड को मेरी चूत में पूरा उतार दो मेरे साजन … मेरी योनि का अपने विशाल लंड से मन्थन करो और अपनी तड़पती मां की जवानी को खुल कर भोगो … अपने लिंग के रस से मेरी योनि को सींच दो … आओ मेरे प्यारे आओ मेरे ऊपर चढ़ जाओ और मेरी खुशी-खुशी ले लो … मैं भी तुम्हें अपनी देने के लिए बहुत आतुर हूँ!’ मां तड़प-तड़प कह रही थीं.

मैंने मां को लिटा प्रिया और उनकी गांड के नीचे एक बड़ा सा तकिया लगा प्रिया ताकि चूत उभर जाए.मैं मां की टांगों के बीच आ गया और मां की चूत के छेद पर अपने लंड का सुपारा रख प्रिया.मां की चूत पूरी लसलसी थी.

थोड़ा सा जोर लगाते ही सुपारा ‘पच’ करके अन्दर फिसल गया.अब मैं मां के ऊपर पूरा झुक गया और मां को होंठों को अपने होंठों में ले लिया.

मैं 4-5 बार तक केवल सुपारा अन्दर डालता और पूरा बाहर निकाल लेता.इसके बाद सुपारा अन्दर डालने के बाद मैंने लंड का दबाव मां की चूत में बढ़ाया.

मैं दबाव बहुत धीरे-धीरे दे रहा था.अगले 2-3 मिनट में मेरा आधा लंड मां की चूत में समा चुका था.

उधर मां के होंठ मेरे होंठों में थे.नीचे मां कसमसा रही थीं.

अब मैं मां की चूत में आधा के करीब लंड डालता और वापस निकाल लेता.

कई बार ऐसा करने से चूत अन्दर से अच्छी तरह से गीली हो गई.

इसके बाद आधा लंड डालने के बाद मैंने चूत में दबाव बनाए रखा और मेरा लंड चूत में धीरे-धीरे सरकने लगा.

मां का शरीर नीचे से अकड़ता जा रहा था.अब मां के होंठ छोड़ कर मेरे हाथ उनकी चूचियों को गूँध रहे थे.जड़ तक अन्दर तक लंड घुसेड़ने में बिल्कुल थोड़ा सा बाकी रहा, तो मैंने मां की चूत में लंड के हल्के धक्के देने प्रारंभ कर दिए.

मां हाय-हाय करने लगीं.

मेरा लंड मां की चूत में जड़ तक अन्दर-बाहर होने लगा था.धीरे-धीरे मैं धक्कों की स्पीड बढ़ाता गया. लंड ‘फच्च-फच्च’ करता चूत से अन्दर-बाहर हो रहा था.

अब मां ने दोनों हाथ मेरी कमर में जकड़ दिए और धक्कों में मेरा साथ देने लग गईं.मां की हाय-हाय, कामुक सिसकारियों में बदल गईं.

उनकी आंखें मीठे मजे से मुँद गईं और वे मुझसे चुदाई का स्वर्गिक आनन्द ले रही थीं.

मैं मां को बेतहाशा चोदे जा रहा था.

अब एक चौथाई के करीब लंड को चूत से बाहर निकालता और एक करारा शॉट लगा कर जड़ तक वापस पेल देता.

मैंने पूछा- मां कैसा लग रहा है?‘अरे मत पूछ यार … आज जैसा आनन्द तो मुझे जीवन में आज तक नहीं मिला तुम बहुत ही प्यार से चोद रहे हो … मुझे दर्द महसूस तक नहीं होने प्रिया और अपना साढ़े दस इंच का हलब्बी लौड़ा पूरा का पूरा मेरी चूत में उतार प्रिया.’

मां ने जैसे ही यह कहा, तो मैं पूरे जोश में आ गया और जोर-जोर से हुमच-हुमच कर लंड पेलने लगा.मां भी नीचे से अपनी गांड उठाती हुई मेरे लौड़े के धक्कों का जवाब दे रही थीं.

करीब दस मिनट तक यह चुदाई चली थी कि मां ने मुझे बुरी तरह से जकड़ लिया.उनकी आंखें लाल हो गईं और वे हांफने लगीं.

मां का शरीर एक बार ऐंठा और वे ढीली पड़ने लगीं.तभी मेरे लंड से भी जोर का ज्वालामुखी फट पड़ा.

लंड से पिघला हुआ लावा मां की चूत में बहने लगा.धीरे-धीरे मां के साथ मैं भी शीतल पड़ता गया.

कुछ देर बाद मां उठीं.सोफे से उन्होंने अपने सारे कपड़े लिए और नंगी ही अपने कमरे में चली गईं.

कुछ देर बाद मैं भी उठा, बाथरूम में जा हाथ-मुँह धोया और नाइट ड्रेस पहन कर सो गया.

आज बहुत अच्छी नींद आई.

सोने के बाद एक बार नींद लगी तो सुबह ही खुली.

ऑफिस जाते वक्त मां ने नाश्ता प्रिया, पर वे रोज की तरह बिल्कुल सामान्य थीं.

शाम को ठीक समय पर मैं घर पर आ गया.रोज की ही तरह हमने डिनर लिया.

आज मां फिर नहाने चली गईं.जब मां मेरे रूम में आईं तो आज वे सेक्सी नाइटी में थीं.

‘लगता है बड़ी बेसब्री से इंतजार हो रहा है?’ मां ने अपनी स्वाभाविक हंसी से पूछा.

‘जिस इंतजार का फल मीठा हो उस इंतजार में भी मजा है … पर मां आज तो तुम कयामत ढा रही हो. क्या इरादा लेकर आई हैं सरकार!’ मैंने पास खड़ी मां का हाथ पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ खींचते हुए कहा.

‘कल तो मैं इतनी बेचैन हो गई कि तुम्हें ठीक से देख ही नहीं सकी लेकिन आज अपने लाल की पूरी जवानी अच्छी तरह देखूँगी. चलो उठो और अपने सारे कपड़े उतारो!’ मां ने आदेश देते हुए कहा.

मैं आज्ञाकारी बालक की तरह बिस्तर से उठा और एक-एक कर सारे कपड़े उतार मां के सामने पूरा नंगा हो गया.मां बेड पर बैठ गई थीं.मेरा लंड तन गया था, जिसे मां ने हाथ में ले लिया और मुठियाने लगीं.

‘इतना प्यारा कैंडी सा लंड और रसगुल्ले सा सुपारा … इसे आज जी भर कर चूसूँगी. मैंने आज तक किसी मर्द का लंड नहीं चूसा, लेकिन अर्चनाओं में किसी मोटे और तगड़े लंड को पक्की लंडखोर की तरह चूसा करती थी. आज वैसा ही लंड मेरे सामने है … विशाल डार्लिंग अपने विशाल लंड को अपनी मां के मुँह में दे दो!’

यह कह कर मां ने मुझे बेड पर ले लिया और खुद चित लेट गईं.मैंने मां के कंधों के दोनों ओर घुटने जमा लिए और मां के मुँह में अपना लंड दे प्रिया.

मां होंठ गोल करके मुँह से लंड को बाहर-भीतर करती हुई गीला करने लगीं.वे जी-जान से कोशिश करतीं और जितना ज्यादा हो सके, अपने मुँह के अन्दर लेने लगीं.

पूरी कोशिश के बाद भी मां 6 इंच के करीब ही लंड मुँह में ले पाईं.मां काफी देर तक मेरे लंड को चूसती रहीं, सुपारे पर जीभ फिराती रहीं.

उन्होंने दो तीन बार मेरे आँडों को भी मुँह में भरने की कोशिश की.

‘तेरे इस मस्त लंड ने तो मुझे पक्की लंडखोर बना प्रिया. देखो तो इस उम्र में मुझे यह क्या हो गया?’ मां ने कहा.

‘मां तेरे जैसे जवान, हसीन और शौकीन औरत को इस उम्र में आकर जब ऐसा चसका लगता है न … तो उस औरत के यार की तो लॉटरी खुल जाती है. उस औरत के साथ मजा लेने में जो सुख है न … उसका वर्णन नहीं किया जा सकता … बड़ी नमकीन औरत है तू!’

मैंने बहुत ही कामुक अंदाज में होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा.

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‘जब तेरे जैसा यार मिल जाए तो वह बेचारी औरत और कर भी क्या सकती है?’यह कह कर मां ने शरारत से मेरी गांड में उंगली घुसेड़ दी.

मैं चिहुंक पड़ा लेकिन खुश भी बहुत हो गया कि चलो मां की गांड मारने की राह आसान हो गई.

‘चल मेरी मीनू जान अब अपनी मालपुए सी चूत भी तो मुझे चटा दे!’मेरी बात सुन कर मां उठीं और नाइटी की डोर खोल दी.

नाइटी नीचे जमीन पर गिर पड़ी और मेरे सामने मेरी मां पूरी नंगी थीं; उन्होंने नाइटी के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था.

मैं बेड पर लेट गया और मां को मेरे चेहरे पर घोड़ीनुमा बना लिया.मां का मुँह मेरे पैरों की ओर था.

मां की रसदार चूत का फाटक ठीक मेरे मुँह के ऊपर था और मां का विशाल हौदे सा पिछवाड़ा मेरी आंखों के सामने था.

बिल्कुल गोल शेप में बने नितंबों की दरार के बीचों-बीच मां की गांड का बड़ा सा गुलाबी छेद साफ दिख रहा था.छेद ज्यादा सिकुड़ा नहीं होकर खुला सा था.

मैंने मां की चूत अपने मुँह पर दबा ली और मां की चूत में जीभ को अन्दर तक घुसा-घुसा कर मस्त होकर चाटने लगा.

मां की चूत लसलसा रस छोड़ रही थी.मैंने मां की चूत से जीभ निकाल कर दो उंगलियां उसमें डाल दीं, जिससे चूत के गाढ़े रस से उंगलियां सराबोर हो गईं.

अब वापस मां की चूत पर मुँह लगा प्रिया और उंगलियों में लगा रस मां के गांड के छेद पर मलने लगा.

इधर मां के मुँह के सामने मेरा लंड तनतना रहा था, जिसे मां चूसने लगीं.यानि कि हम दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चूसा-चूसी करने लगे.

इधर मैंने उंगलियों में लगा सारा रस मां की गांड पर चुपड़ प्रिया और मां की गांड का छेद चिकना हो गया.

अब मैंने अपनी इंडेक्स फिंगर मां की गांड में पेलनी शुरू कर दी.मां की गांड बहुत ही कसी हुई थी. एक उंगली भी आसानी से अन्दर नहीं जा रही थी.

चूत चाटते-चाटते मेरे मुँह में काफी थूक इकट्ठा हो गया था, जिसे एक हथेली पर लेकर मां की गांड पर अच्छे से मल प्रिया.

इस बार कुछ जोर लगा कर गांड में उंगली घुसाई तो आधी उंगली अन्दर चली गई.

अब मैं धीरे-धीरे उंगली भीतर-बाहर करने लगा.कुछ देर में छेद ढीला हो गया और पूरी उंगली भीतर-बाहर होने लगी.

मैं मां को जरा भी दर्द महसूस नहीं होने देना चाहता था क्योंकि डर यह था कि कहीं वे अपनी गांड देने से मना न कर दें.

‘मां तुम्हारी गांड तो बड़ी मस्त है, लगता है इसको मरवाने की भी पूरी शौकीन हो. देखो कितने आराम से तुम्हारी गांड में अपनी उंगली को अन्दर बाहर कर रहा हूँ!’मैंने आखिर पूछ ही लिया.

‘नहीं रे तेरा बाप मेरी चूत की प्यास तो ठीक से बुझा नहीं पाता था … भला वह मेरी गांड क्या मारता. हां कभी-कभी मैं ही अपनी गांड में उंगली कर लिया करती थी.’ मां बोलीं.‘तो इसका मतलब अभी तक तुम्हारी गांड कुंवारी है मां … यू आर ग्रेट तुम्हारी चूत का तो उद्घाटन नहीं कर सका, पर अब तुम्हारी कुंवारी गांड का उद्घाटन तो मैं जरूर करूँगा!’ मैंने मां की गांड में उंगली से खोदते हुए कहा.

‘अरे यह क्या कह रहा है तू … तेरा घोड़े जैसा हलब्बी लौड़ा कल बड़ी मुश्किल से चूत में ले पाई, भला यह गांड में कैसे जाएगा. यह तो मेरी गांड को फाड़ कर रख देगा. नहीं बाबा मुझे नहीं मरवानी तुमसे अपनी गांड!’ मां ने पुरजोर विरोध किया.

‘मां कल कितने प्यार से मैंने तुम्हारी चूत ली थी न … थोड़ा भी दर्द महसूस होने प्रिया था क्या? मैं उससे भी ज्यादा संभाल कर और प्यार से तेरी गांड मारूंगा. तेरी जैसे सेक्सी और भरी पूरी औरत की पूरी नंगी करके गांड भी नहीं मारी, तो फिर क्या मजा … तेरी जैसे मस्त गांड वाली औरत अपने प्यारे को जब मस्त होकर गांड का मजा देती है न … तो उसका यार बाग-बाग हो जाता है. उसका प्यार उस औरत के प्रति सैकड़ों गुणा बढ़ जाता है.’

जब मैंने मां की गांड पर हाथ फेरते हुए यह सब कहा, तो मां ने कुछ नहीं कहा.

उनके मौन को सहमति मानते हुए मैं उठा और अपनी अल्मारी से एक फॉरेन ब्रांड वाले कंडोम का पैकेट ले आया.साथ ही बहुत ही चिकनी वैसलीन का जार भी ले आया.

पैकेट से कंडोम निकाल कर मैंने लंड पर चढ़ा लिया.मां को बेड पर घोड़ी बना प्रिया और मां की गांड पर उंगली में ढेर सारी वैसलीन लेकर चुपड़ दी.

दो तीन बार मां की गांड में उंगली घुमा कर गांड को अन्दर से पूरी चिकनी कर दी.फिर मैंने अपना लंड अच्छे से चुपड़ लिया.

आखिर एक तगड़ी गाय पर जैसे सांड चढ़ता है, वैसे ही मैं भी अपनी मां पर चढ़ गया.मेरा सुपाड़ा बहुत ही फूला हुआ था, जिसका मुंड मां की गांड में नहीं जा रहा था.

नीचे मां भी कसमसा रही थीं.मैंने थोड़ी सी वैसलीन मां की गांड और मेरे लंड पर और चुपड़ी.अब मां से कहा कि वह बाहर की ओर जोर लगाए.

इस बार उन्होंने साथ प्रिया तो मेरा सुपाड़ा गांड के फूल को फैलाते हुए अन्दर समा गया.मां दर्द से छटपटाने लगीं.

मैंने लंड बाहर निकाल लिया और मां का छेद देखने लगा.उनकी गांड का छेद रुपए का आकार का खुला हुआ साफ दिख रहा था जिसमें मैंने उंगली में कुछ ज्यादा सी वैसलीन लेकर भर दी और मां पर फिर से चढ़ बैठा.

अब मैं कुछ बार केवल सुपाड़ा अन्दर डालता और पूरा लंड वापस बाहर निकाल लेता.

इससे मां सहज हो गईं और उसके बाद मैं सुपाड़ा अन्दर डाल कर गांड पर लंड का दबाव बढ़ाने लगा.मां जैसे ही बाहर को जोर लगातीं, लंड धीरे-धीरे मां की गांड में कुछ सरक जाता.

मां की गांड बहुत ही कसी थी.फिर मैंने लंड पूरा निकाल लिया और मां की गांड और मेरे लंड को फिर वैसलीन से चुपड़ कर वापस से मां पर चढ़ गया.इस बार धीरे-धीरे मैंने लंड मां की गांड में पूरा उतार प्रिया.

‘हाय मां तेरी गांड तो अठरह साल की कुँवारी लौंडिया की चूत जैसी कसी हुई है … देखो कितने प्यार से मैंने पूरा लौड़ा तुम्हारी गांड में पेल प्रिया. बताओ तुम्हें दर्द हुआ?’ मैं मां की लटकती चूची को दबाते हुए बोला.तो वे कुछ नहीं बोलीं.

अब मैं मां की गांड से आधा के करीब लंड बाहर कर धीरे-धीरे फिर भीतर सरकाने लगा था.मैंने उनके दूध को मसलते हुए पुनः पूछा तो वे बोलने लगीं- पहली बार जब अन्दर गया था, तो एक बार को तो मेरी जान ही निकल गई थी लेकिन अब जब जब अन्दर जाता है तो एक सुरसुरी सी होती है.

मां ने मेरे चूची दबाते हाथ को पकड़ अपनी चूत पर रखते हुए कहा- अब मजे से मेरी गांड का मजा ले!

यह सुनकर मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.नीचे से मां भी गांड उछालने लगी थीं.

मैं समझ गया कि मां पूरी मस्ती में आ गई हैं. वे पहली बार गांड मरवाने का मजा लूट रही हैं.अगले 5 मिनट तक मैंने मां की गांड खूब कस कस के मारी.

गांड से मेरा लौड़ा निकाल लिया, कंडोम निकाल साइड में रख प्रिया और डॉगी स्टाइल में मां के ऊपर चढ़ कर उनकी चूत में एक ही शॉट में पूरा लंड पेल प्रिया.मैं मां को बेतहाशा चोदने लगा.

मां गांड पीछे को ठेलती हुई चुत चुदवा रही थीं.थोड़ी देर मां मानो मेरे लंड पर अपनी गांड पटकने लगीं.

तभी मेरे लंड से वीर्य का फव्वारा मां की चूत में छूट पड़ा.मॅाम सन फक के बाद हम दोनों शिथिल पड़ गए.

थोड़ी देर बाद कल की तरह मां अपनी नाइटी उठा कर अपने रूम में चली गईं.दूसरे दिन मेरे स्टोर जाते समय मां बिल्कुल सामान्य थीं.

अब तो यह हमारा रूटीन हो गया.मां मेरे रूम में आतीं, हम बहुत शरारती, कामुकता भरी बातें करते. एक दूसरे के जवान अंगों का मजा लेते.नए-नए तरीकों से संभोग करते.

काम खत्म होते ही मां सदा अपने कमरे में ही जा कर सो जातीं.

रात में मेरे कमरे में रहने के अलावा हम बिल्कुल सामान्य मां-बेटों की तरह रहते.

दोस्तो, मां बेटे की चुदाई की कहानी में अभी मैं विराम ले रहा हूँ.मॅाम सन फक स्टोरी पर आपके खत मिलने के बाद मैं आगे की सेक्स कहानी लिखने की सोचूँगा.आपका मित्र विशाल

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

विधवा मां की चुत गांड में बेटे का लंड

कुल भाग: 3
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