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माँ की चुदाई पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 964 बार

विधवा मां की चुत गांड में बेटे का लंड- 2

विशाल उदयपुर

08 Apr 2021 को प्रकाशित

विधवा मां की चुत गांड में बेटे का लंड- 2
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Xxx मॅाम पुसी ओरल कहानी में मैं अपनी विधवा मम्मी को खुश रखने के लिए उनकी वासना जगाने का प्रयास भी कर रहा था ताकि वे सेक्स करने के लिए खुद ही पहल करें.

हैलो फ्रेंड्स, मैं विशाल आप सभी का अपनी मॉम सन कहानी के इस भाग में पुनः स्वागत करता हूँ.

अब आगे Xxx मॅाम पुसी ओरल कहानी:

दूसरे दिन स्टोर से आकर मैं अपनी मां के साथ खाने की टेबल पर आ गया.हम मां-बेटों ने एक साथ चुहलबाजी करते-करते डिनर लिया.

आज कुछ गर्मी थी.

डिनर के बाद मां नहाने के लिए बाथरूम में चली गईं.मैं मेरे रूम में बेड पर बैठा टीवी पर कोई प्रोग्राम देखने में लग गया.

मेरा रूम बड़ा साइज का है जहां टीवी, सीडी प्लेयर, सोफा और अटैच बाथ सब कुछ है.मैं टीवी प्रोग्राम में खोया हुआ था कि मां की आवाज से कि ‘क्या चल रहा है’ से मेरा ध्यान मां की तरफ गया.

एक बार ध्यान गया कि मैं मां की तरफ देखते ही रह गया.मां बहुत ही सुंदर गुलाबी साड़ी में थीं, जिसे उन्होंने अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा ही नीचे बांध रखा था.चेहरे पर कॉस्मेटिक्स, कपड़ों में सेंट और सब से बढ़ कर माथे पर मैचिंग प्यारी सी बिंप्रिया भी थी.

‘क्या घूर-घूर कर देख रहा है? जब बेटा मेरा इतना ध्यान रखता है, मेरी छोटी सी छोटी खुशी के लिए मरा जाता है तो मैं क्या मेरे प्यारे बेटे की इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकती. अब देखो ठीक से तुम्हारे लिए सुहागन भी बन गई!’ मां ने बेड के पास खड़े-खड़े हंसते हुए कहा.

मैं भी खड़ा हो गया और मां को जोर से अपनी बांहों में भर लिया.उनके ठोस दूध मेरे सीने में धंस कर मेरे लंड को उकसाने लगे थे.

फिर मैं बेड पर बैठ गया और मां को उनकी पीठ की तरफ से खींच कर अपनी बांहों में भींच लिया.मैं उनके मादक जिस्म को अपने सीने से लगा कर महक का मजा लेने लगा.

मुझे आज पक्का विश्वास हो गया था कि मेरी मां सजधज के अपने बेटे से चुदने के लिए आई हैं.लेकिन यह करने की मुझे जल्दी नहीं थी.

यह करने से पहले मैं उन्हें बिल्कुल खोल लेना चाहता था और पूरी बेशर्म बना देना चाहता था.

मैंने कहा- लो मां, कल मैंने कहा और आज तुम मेरी सुहागन बन गईं!‘तेरी सुहागन … क्या मतलब? मां ने मेरी आंखों में आंखें डाल कर कहा.

‘मेरा मतलब इस रूप में तुम और तो किसी के सामने जाने से रहीं, तो केवल मेरी और एक्सक्लूसिवली मेरी सुहागन हुई कि नहीं … और बड़ी बात यह है कि इस प्रकार सुहागन की तरह रहने से तुम्हारे मन में विधवा वाली नेगेटिव भावना नहीं रहेगी. जीवन की हर वह खुशी, मौज-मस्ती जो तुम पिछले 15 साल से नहीं ले सकी थीं, अब यहां बहुत ही एंजॉय करते-करते ले सकोगी. इस सबमें जितनी सोच सकारात्मक और खुली हुई होगी, मजा भी उतना ही ज्यादा आता है.’ मैंने मां को इशारों-इशारों में कह प्रिया कि अब सारी लाज-शर्म छोड़ दो और अपने सगे बेटे के साथ खुल के रंगरेलियां मनाओ.

‘यहां आने के बाद तुमने तो मेरी पूरी सोच ही बदल दी. गांव के उस माहौल में मैं कई बार सोचती थी कि मेरे जीवन में भी कभी कुछ ऐशो-आराम लिखा है या नहीं!’ जब मां ने मेरे सीने में मुँह छुपाते हुए कहा, तो मैंने इस उन्मुक्त बहती गंगा में डुबकी लगाने का फैसला कर लिया.

अपने एक हाथ से मां की ठुड्डी ऊपर उठाते हुए और दूसरे हाथ की उंगलियां मां के होंठों पर फेरते हुए मैंने कहा- जब मेरी सुहागन बन गई हो तो इन होंठों का लाइसेंस तो अब मुझे मिल गया है न!!मां ने मेरी ओर देखते हुए मुस्करा कर आंखें बंद कर लीं.

और मैंने अपना मुँह नीचे करते हुए मां के यौवन से भरे मदभरे गुलाबी होंठों को अपने होंठों में ले लिया.वासना में मस्त होकर मैं अपनी मस्त जवान मम्मी के होंठों का रसपान करने लगा.

रसपान करते-करते एक हाथ मां के दायें पुष्ट स्तन पर रख प्रिया और उसे हल्के-हल्के से दबाने लगा.

‘मम्मी अब तुम मेरी सुहागन हो, सुहागन का मतलब जिसका सुहाग हो … अब बताओ तुम्हारा सुहाग कौन हुआ?’ मैंने मम्मी की चूची कसके दबाते हुए कहा.

‘तुम हुए … और कौन हुआ और सुहाग होने का पूरा अधिकार जमा तो रहे हो. मैंने मन तो सदा से ही तुमको प्रिया हुआ था … धन की कोई बात ही नहीं; जो मेरा था वह सदा ही तुम्हारा था … जो तन बचा था, वह मुझे अपनी सुहागन बना कर भोग ही रहे हो. इतने से मन नहीं भरा तो और कुछ भी चाहिए क्या?’मां ने शरारत भरे अंदाज में यह कहा तो मैं मुस्कुरा प्रिया.

‘अभी पूरा कहां भोग रहा हूँ. अभी तो तुम्हारी लूँगा. समझ रही हो न … मैं क्या लूँगा?’

अब मैं तो बेशर्मी पर उतर आया था, पर देखना चाहता था कि मां इस बेशर्मी में कहां तक साथ निभाती हैं.

‘सब समझती हूँ … तुम मेरी दोनों टांगों के बीच वाली फूली फूली, लाल फांक वाली, काले-काले घने बालों से ढकी चीज के लोभी हो!’

मां की यह बात सुन कर एक बार तो मैं हक्का-बक्का रह गया कि यह तो शेर पर पूरी सवा शेर निकलीं.पर मन ही मन बहुत खुश था.

मैंने सोचा भी नहीं था कि सब कुछ इतनी जल्दी इतने मनचाहे ढंग से हो जाएगा.मैं आनन्द के सातवें आसमान पर था.

‘लोभी तो उसी का हूँ, पर उसे लूँगा. लेने का मतलब समझ रही हो न?’

मैंने कहा, तो वे खुल कर कहने लगीं- तुम मेरी उस चीज के बीचों-बीच बने छेद में अपनी दोनों टांगों के बीच में लटके मूसल जैसे डंडे को घुसाओगे!मां ने इस अंदाज में कहते हुए नहले पर दहला जैसा मारा.

‘हाय मेरी मीनू रानी, उसे डंडा नहीं लंड बोलो … पूरा साढ़े आठ इंच लम्बा और चार इंच मोटा है … एकदम सिंगापुरी केले जैसा … एक बार देखोगी तो मस्त हो जाओगी!’

यह कह कर मैंने मां के होंठों को वापस मुँह में ले लिया और मां के मुँह में अपनी लम्बी जीभ डाल दी.इस बार हम दोनों का यह चुम्बन काफी लम्बा चला.

‘जिसका 4-5 इंच का होता है, उसे नूनी बोलते हैं … जिसका 6 इंच का होता है उसे लंड बोलते हैं … पर तुम्हारा तो 8.5 इंच लंबा है; उसे लंड नहीं हलब्बी लौड़ा बोलते हैं. मैं अब उसे झेल पाऊंगी भी या नहीं … पूरे 15 साल से अधिक हो गए … मेरी चूत में एक तिनका भी नहीं गया है. मेरी चूत एकदम संकरी हो गई है मेरे राजा … मुझे चोदोगे तो कुंवारी लड़की जैसा मजा मिलेगा!’मां पूरी बेशर्मी के साथ हंस कर बोलीं.

मैंने भी मजे लेते हुए कहा- जैसा मेरा लम्बा तगड़ा शरीर है और लौड़ा है, उसे झेलना हल्की फुल्की लड़की के बस की बात नहीं है. इसलिए मेरी लड़कियों में ज्यादा दिलचस्पी भी नहीं है. मुझे तो मेरे जैसे ही लम्बी, तगड़ी, मस्त और बेबाक खेली-खाई हुई औरत चाहिए. मां तुम ठीक मेरा ही प्रतिबिंब हो … बिल्कुल मेरे जैसे गठीली, मजे लेने की शौकीन, खुल कर बात करने वाली हो किसी नई लड़की को चोद दूँ तो लेने के देने पड़ जाएंगे; साली की एक बार में ही फट कर भोसड़ा बन जाएगी. मुझे तो ठीक तुम जैसी ही मादक रसभरी औरत चाहिए थी!

‘तो तुम मेरी 15 साल से बचा कर रखी चूत का भोसड़ा बना देगा … न बाबा न … मुझे तुमसे नहीं चुदवाना!’ मां ने इठलाते हुए कहा.‘अरे मम्मी जैसा तुम्हारा लम्बा चौड़ा शरीर है, उसी अनुपात में तुम्हारी चूत भी तो बड़ी और फैली सी होगी. फिर तुम तो मेरी जान हो, तुम्हारी चूत को मैं बहुत प्यार से लूँगा … चिंता मत करो मेरी मीनू डार्लिंग, खूब प्यार से तुम्हें मजे ले-ले कर धीरे-धीरे चोदूँगा!’ मैंने मां की जवानी के चटखारे लेते हुए कहा.

‘हाय; ऐसी खुली-खुली बातें मैंने आज से पहले न तो कभी सुनी … और न ही कभी कहीं … तुम्हारी सुहागन बन कर मुझे तो मेरे मन की मुराद मिल गई. ऐसी बातें करने में तो काम पिपासा शांत करने से भी ज्यादा मजा आता है!’ मां ने कहा.

‘मैं जानता था कि तुम्हें असली खुशी मैं तुम्हारा सुहाग यानि कि तुम्हारा पति, सैंया, साजन, बालम बन कर ही दे सकता था. आज से लोगों के सामने तो हम मां-बेटे रहेंगे और रात में खुल कर रंगरेलियां मनाएंगे. जवानी के नए-नए खेल खेलेंगे … क्यों मेरी रानी तैयार हो न मेरे से खुल कर मजे लेने के लिए! कहीं कोई डर तो मन में नहीं है न!’ मैंने खुला आमंत्रण प्रिया.

‘नहीं रे … कहीं कोई डर नहीं, लाइन बिल्कुल क्लियर है. तुम्हारे पैदा होने के कई बरसों बाद तक दूसरा गर्भ नहीं ठहरा तो मैंने चेक अप करवाया था. तब लेडी डॉक्टर ने बताया था कि अब भविष्य में मैं कभी मां नहीं बन सकती, पर मेरे सेक्स जीवन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. मैं सेक्स का आनन्द स्वाभाविक रूप से उठा सकती हूँ!’

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मां ने गर्भ न ठहरने की बात बता कर मेरी सारी दुविधा दूर कर दी और लंड लेने का निमंत्रण स्वीकार करते हुए कह प्रिया कि मुझे खुल कर भोगो और चोदो मेरे राजा!

मैं बेड पर से खड़ा हो गया और मां को भी हाथ पकड़ कर मेरे सामने खड़ा कर लिया.मैंने मां को आगोश में ले लिया.

मां की खड़ी चूचियां मेरे सीने में चुभने लगीं.उनके तपते होंठों पर मैंने अपने होंठ रख दिए.

मां के अमृत भरे होंठों का रसपान करते-करते मैंने पीछे दोनों हथेलियां मां के उभरे विशाल नितंबों पर जमा दीं.मां के गुंदाज चूतड़ों को मसलते हुए मैं मां की पेल्विस को अपने पेल्विस पर दबाने लगा.

‘अब इस सौंदर्य की प्रतिमा को अपने हाथों से धीरे-धीरे नंगी करूँगा!’ चुम्बन के बाद मां की ठुड्डी को ऊपर उठाते मैंने कहा … और मां की साड़ी का पल्लू सीने से हटा कर उंगलियों में समेटने लगा.मां भी हंसते-हंसते घूम कर अपनी साड़ी खुलवाने में सहायता करने लगीं.

साड़ी खुलने के बाद मैंने मां की पीठ मेरी ओर कर ली और मां के ब्लाउज के हुक खोलने लगा.अब मां के पेटीकोट यानि कि साया की बारी थी.

मैंने डोरी खींच दी और गांठ खुल गई.पेटीकोट को फैला लिया और धीरे-धीरे मां के माथे के ऊपर से मां के शरीर से पेटीकोट अलग कर प्रिया.

अब मां उसी मॉडर्न हल्के गुलाबी रंग की पैंटी और ब्रा में थीं, जो कल एक सप्लायर दे गया था.

खासे लम्बे और छरहरे शरीर की मलिका श्रीमती मीनूलिका देवी यानि कि मेरी पूज्या माताजी पैंटी और ब्रा में खड़ी मंद-मंद मुस्करा रही थीं.विशाल जांघों और पीछे उभरे हुए नितंबों से पैंटी पूरी सटी हुई थी.

मां की फूली चूत का उभार स्पष्ट नजर आ रहा था. सीने पर दो बड़े कलश बड़े ही तरीके से रखे हुए थे.मैंने ब्रा के ऊपर से मां के भरे-भरे चूचों को हल्के से सहलाया और ब्रा के स्ट्रैप खोल कर ब्रा को भी शरीर से अलग कर दी.

वाह … मां के उरोज बिल्कुल आम के शेप में थे.उनके मम्मों के गुलाबी चूचुक तने हुए और काफी बड़े थे.

‘हाय मम्मी तुम्हारे अंगूर के दाने तो बड़े मस्त हैं!’यह कह कर मैंने मुँह नीचे कर दायें चूचुक को अपने मुँह में भर लिया और उसको चुभलाने लगा.

तभी मां मेरे सर के पीछे हाथ रख कर मेरे सर को अपनी चूची पर दबाने लगीं तथा दूसरे हाथ से अपनी चूची मेरे मुँह में ठूँसने लगीं.

मुझे मां का यह खुलापन और अदा बहुत ही पसंद आई.

कुछ देर चूची चूसने के बाद मैं बेड पर बैठ गया और मां की पैंटी में उंगलियां डालने लगा.

मैंने सर ऊपर उठाते हुए मां की आंखों में देखा.मां ने आंखों के इशारे से हामी भर दी.

मैंने वैसे ही मां की आंखों में देखते-देखते पैंटी नीचे सरका दी और मां की टांगों से निकाल कर सोफे पर उछाल दी.अब मां मेरे सामने मादरजात नंगी खड़ी थीं.

मैंने मां के चेहरे से आंखें हटा कर उनकी कचौड़ी सी फूली चूत पर केंद्रित कर दीं.मेरी मां की चूत बहुत ही फूली हुई और घने काले बालों से भरी थी.

मां की झांट के बाल घुँघराले और लम्बे थे. मां ने शायद ही कभी अपनी झांटों की सफाई की हो.मां की जांघें बहुत ही चौड़ी और दूधिया रंगत लिए थीं.

मैंने मां की चिकनी संगमरमरी जांघ पर हाथ रख प्रिया और हल्के-हल्के से उस पर फिसलाने लगा.तभी मां ने टांगें थोड़ी चौड़ी कर दीं और मेरी आंखों के सामने मां की चूत का लाल दरवाजा खुल कर बिजली सा कौंध गया.

‘कैसी लगी, मेरी चीज पसंद आई?’ मां ने हंसते हुए पूछा.‘हजूर इसे हमारी सेवा में पेश तो कीजिए; फिर पसंद-नापसंद भी बताएंगे!’

यह कह कर मैं बिस्तर पर लेट गया.मां मेरा मतलब समझ गईं और बिस्तर पर आ गईं.

मां ने मेरी छाती के दोनों ओर अपने घुटने टेक लिए और घुटनों को जितना फैला सकती थीं, फैला लिए.मैंने भी अपने घुटने मोड़ लिए और पीछे मां के पीठ टिकाने के लिए उनका सपोर्ट बना प्रिया.

मां ने उन पर अपनी पीठ टिका दी और चूत मेरी ओर आगे सरकाते हुए अपने दोनों हाथों से जितना चिड़ोर सकती थीं उतनी चिड़ोर दीं.चिड़ोर मतलब चौड़ा सकती थीं.

अब मां की चूत का लाल छेद पूरा फैला हुआ मुझे आमंत्रण दे रहा था.मां की चूत से विदेशी सेंट की मीठी खुशबू आ रही थी.

‘लीजिए सरकार आपकी सेवा में मेरा सबसे खास और प्राइवेट अंग पेश है, इसका लुत्फ उठाइए सरकार!’मां ने खनकती और थरथराती आवाज में कहा, तो मैं पागल हो उठा.

मैंने अपने दोनों होंठ लगभग मां की खुली चूत के छेद में ठूँस दिए.मां के लसलसे छेद में मैंने 2-3 बार अपने होंठ घुमाए और फिर जीभ निकाल कर मां की चूत की अंदरूनी दीवारों पर फिराने लगा.

मां की चूत का अंदरूनी भाग लसलसा और हल्का नमकीन था.

चूत की नेचुरल खुशबू विदेशी सेंट से मिली हुई बहुत ही मादक थी.

मैं मां की चूत पर मुँह दबा कर चूत को बेतहाशा चाटे जा रहा था.मेरी जीभ की नोक किसी कड़ी गुठलीनुमा चीज से टकरा रही थी.

जब भी मैं उस पर जीभ फिराता, मां के शरीर में कंपन अनुभव होता.

तभी मां ने उठ कर ठीक मेरे चेहरे पर आसन जमा लिया और जोर-जोर से मेरे चेहरे पर अपनी चूत दबाने लगीं.

मैंने मां के फूले चूतड़ों पर अपनी मुट्ठियां कस लीं और चूत में गहराई तक जीभ घुसा कर न/शीली चूत का स्वाद लेने लगा.

दोस्तो मुझे उम्मीद है कि आपके लौड़े टनटनाने लगे होंगे और चुत वालियों की चुत रिसने लगी होगी.मेरी इस Xxx मॅाम पुसी ओरल कहानी का अगला भाग और भी रसीला होने वाला है.प्लीज अपने कमेंट्स जरूर भेजें.

Xxx मॅाम पुसी ओरल कहानी का अगला भाग:विधवा मां की चुत गांड में बेटे का लंड- 3

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विधवा मां की चुत गांड में बेटे का लंड

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