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भाभी की चुदाई • पठन समय: 10 मिनट • पढ़ा गया: 914 बार

मुझे ब्लैकमेल करके पूरी रात चूत चुदवाई-2

विचित्र कुमार

12 Feb 2026 को प्रकाशित

मुझे ब्लैकमेल करके पूरी रात चूत चुदवाई-2
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अब तक आपने पढ़ा..मेरी मुलाक़ात वंदना नाम की एक पैसे वाली महिला से हुई और उसी से दोस्ती के चक्कर में मुझे उसकी धमकी भी सुननी पड़ी।अब आगे..

मैंने जॉगिंग पर जाना शुरू कर प्रिया। उस दिन कुछ देर बाद वो भी जॉगिंग करने आई तो मैंने उसे देखा तो मैं छुप गया.. क्योंकि मुझे लगा वो मुझे देखेगी तो भाग जाएगी। इसीलिए मैं छुप रहा था.. पर मैंने देखा वो इधर-उधर कुछ खोज रही थी।

अब मैं सोच में पड़ गया कि यह किसे ढूँढ रही है।

मैंने एक-दो राउंड लगाए होंगे कि उसने अपना मोबाइल निकाला और किसी को कॉल किया।अभी मैं सोच ही रहा था कि किसे फ़ोन कर रही है.. तभी मेरा मोबाइल बजा।यह क्या… वंदना का फोन था।

मतलब मुझे समझ में आया कि वो मुझे ही ढूँढ रही थी।

अब मैं और डर गया कि आज तो गए यार.. ये तो मुझे पक्का मार खिलवाएगी।

मेरे हाथ-पैर काँपने लगे.. पर फिर भी मैंने हिम्मत करके फोन उठाया तो वो गर्म होकर सीधे बोली- कहाँ है तू?मैंने कहा- क्यों क्या हुआ?वो बोली- अब मुझे तेरे से एक काम है।मैंने डर के मारे कहा- मैं तो शहर से बाहर हूँ।वो बोली- ठीक है.. चल.. पर आते ही मुझे कॉल करना।मैंने कहा- ओके..

मैं वहाँ से भागा.. क्योंकि मेरी तो फटी पड़ी थी देख लिया तो ये वंदना क्या करेगी मेरा.. साली किस जन्म का बदला ले रही है.. पता नहीं साली क्या करने वाली थी।मेरा भेजा फ्राई हो रहा था कि क्या मालूम के करने वाली है यार… मेरी तो बहुत बुरी हालत हो गई थी, कुछ सूझ ही नहीं रहा था।

ऐसे ही पूरा दिन निकल गया और करीब रात के 8 बजे फिर से वंदना का फ़ोन आया।फोन उठते ही उसने पूछा- कहाँ है तू?मैं बोला- अभी बाहर ही हूँ।तभी मेरे एक दोस्त ने बोला- क्यों झूठ बोल रहा है बे?

वंदना ने मेरे दोस्त की आवाज सुन ली और बोली- देख अभी के अभी वो सेम कॉफ़ी शॉप पर आ जा.. जहाँ हम लास्ट टाइम मिले थे.. वरना पुलिस को ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा तुझ तक पहुँचने में.. समझ गया?

अब मैं डरते-डरते शॉप पर पहुँचा.. वो एकदम गर्म दिमाग़ किए हुए बैठी थी, मेरे सामने देख कर घूर कर बोली- बैठ!मैं बोला- नहीं मेम.. मैं यहाँ नहीं बैठ सकता.. कहाँ मैं और कहाँ आप?उसने थोड़ी आँखें बड़ी करके बोला- बैठ..!

मैं एकदम से डर गया और बैठ गया।

‘ध्यान से सुन.. देख तुझे मेरा एक काम करना पड़ेगा..’मैंने कहा- कैसा काम?वंदना बोली- ये तुझे जानने की ज़रूरत नहीं है.. बस तुझे तो सिर्फ़ करना है और हाँ.. मुझसे कोई किसी भी तरह की उम्मीद मत रखना कि मैं ऐसी-वैसी नहीं हूँ.. समझे?मैंने मुंडी हिला कर ‘हाँ’ बोला।

वो बोली- देख मेरी एक सहेली है कविता.. शादीशुदा है.. और उसका पति का ज़्यादा समय आउट ऑफ कंट्री ही रहता है। कविता को तुझसे कुछ काम है। बोल करेगा?

मैं सोच में पड़ गया कि क्या बोलूं.. कहीं ‘हाँ’ बोली और कहीं फंस गया तो? और ‘ना’ बोलूं.. तो वंदना ने मुझे फंसा प्रिया तो.. साला इधर कुंआ.. उधर खाई.. करूँ तो क्या करूँ?

मुझे लगा ‘हाँ’ बोलने में ही मेरी भलाई थी.. क्योंकि मुझे लगा ‘हाँ’ बोलकर थोड़ा वक़्त मिल जाएगा।अब मैंने ‘हाँ’ बोल प्रिया।

उसने मेरे गाल पर हाथ फेरकर बोला- गुड ब्वॉय..वो मुस्कुराने लगी और थोड़ी देर बाद वो बोली- अब चलती हूँ।

हम दोनों वहाँ से निकल गए और मैं रूम पर आ गया।

मैं सोच रहा था कि अब ये कविता कौन होगी.. कैसी होगी.. और उसे मुझसे क्या काम होगा?क्योंकि वंदना तो सती-सावित्री बन रही थी.. तो मुझे लगा उसकी फ़्रेंड उसके जैसी ही होगी।

ऐसे ही दूसरा पूरा दिन निकल गया और शाम के 6 बजे कविता का फ़ोन आया, पर इस बार एक अंजान नंबर था।मैंने पूछा- कौन?वो बोली- मैं कविता.. वंदना की फ़्रेंड..मैंने कहा- ओह.. हाँ बोलिए?कविता बोली- फ़ोन पर नहीं।मैंने पूछा- तो फिर कहाँ बताएँगी?वो बोली- एक एड्रेस लिखो।

और उसने मुझे एड्रेस प्रिया और मैं फ़ोन काट कर सीधा बाइक पर उस एड्रेस पर पहुँच गया जो कविता ने बताया था।पर ये क्या.. ये तो एक बहुत ही बड़ा बंगला था.. मैं देखता रह गया और गेट की ओर चल पड़ा।

तभी मेरी नज़र सिक्यूरिटी वाले पर पड़ी.. तो वो बोला- क्या काम है?मैंने बोला- मेरा नाम मीत है।क्योंकि कविता ने बोला था कि गेट पर अपना नाम बताना.. बाकी सब मैं संभाल लूँगी।

वो चौकीदार बोला- जी सर.. आप अन्दर जा सकते हो।मैं अन्दर चला गया।

जब अन्दर पहुँचा तो अन्दर से क्या बंगला था यार.. बस पूछो ही मत!

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तभी एक अंधेरे कोने में से आवाज़ आई- क्या देख रहे हो?मैंने कहा- कुछ नहीं..

अंधेरे में कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था कि कैसी है कविता.. पर फिर भी मैं अपनी बारीक नज़र दौड़ाए जा रहा था।तभी कविता बोली- चलो अब ऊपर वाले कमरे में जाओ.. मैं आती हूँ।

मैं चलने लगा तो वो बोली- फर्स्ट रूम में चल कर बैठो।मैं उस कमरे में पहुँच गया।

ये क्या.. ये तो बेडरूम था… मैं अब और दुविधा में पड़ गया कि अब क्या होने वाला है।तभी अँधेरा हो गया तो मुझे लगा लाइट चली गई है.. पर ये तो कविता ने बंद की थी।

अँधेरे में किसी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से मेरे कान में बोली- हाय हैंडसम..

मैं एकदम से चकित रह गया कि ये क्या यार.. ये तो अच्छा काम करने बुलाया है। क्या बात है यार.. तो अब मैं खुश था.. पर अभी भी मन में सवाल था कि कविता कैसी होगी?

अब जैसे ही कविता ने मेरे गालों को छुआ.. तो मैंने हाथ पकड़कर बोला- देखो मैं आपको ज़रूर खुश कर दूँगा.. पर पहले मुझे आपको देखना है।उसने कहा- जो हुकुम मेरे आका।

यह कह कर उसने लाइट जला दी.. पर ये क्या ये तो करीब 28 साल की औरत थी। मीडियम शरीर 38-30-38 का फिगर और थोड़ी सी गोरी। उसने एक हल्के गुलाबी रंग की नाइटी पहन रखी.. पर मस्त माल लग रही थी।

अब मैंने उससे पूछा- आप पैसे वाले लोग हो.. सुखी हो.. और शरीर से भी लग रहा है कि आप एकदम ओके हो.. तो फिर मैं क्यों?

‘ओह माय गॉड.. क्या लंड है तेरा यार.. आज तो मज़ा आ जाएगा..’ यह कहकर उसने मेरे पैन्ट की ज़िप खोल दी और लंड को बाहर निकाल लिया।उसने नीचे बैठकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’अब मैं भी खुश था कि पक्की खिलाड़ी मिली है। मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने कविता को उठाया और नाइटी की लेस खींच दी। ये क्या वो तो केवल वन पीस में ही थी यार.. कविता ने अन्दर ब्रा और कच्छी भी नहीं पहनी थी।

फिर क्या था वो तो एकदम नंगी हो चुकी थी। अब मेरी बारी थी तो मैं उसके सीने से लग गया और सीधे उसके मम्मों को दबाने लगा, फिर चूचों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

कविता भी धीरे-धीरे गर्म हो रही थी, मैंने उसे एक किस किया और कसकर अपनी बांहों में भर लिया।

अभी मैं उसके कूल्हों पर हाथ फेर ही रहा था कि कविता ने फिर से मेरे लंड को पकड़ लिया और फिर से खेलने लगी।

फिर क्या था मैंने उसे एक धक्का लगाया और वो गिरी सीधे बिस्तर पर। मैंने उसे मौका नहीं प्रिया और उसकी चूत पर मुँह रखकर चूसने लगा.. तो वो पागल होने लगी।

बोली- ओह मीत.. बस करो अब मत तड़पाओ.. और जल्दी से चोद डालो मुझे.. मीत प्लीज़..

मैं उठा और उठकर अपना लंड उसकी चूत के मुख पर रख प्रिया, एक ही धक्के में मैंने अपना पूरा लौड़ा उसकी चूत में घुसा प्रिया। उसकी एक कराह निकली और मैं उसकी चूत को ज़ोर-ज़ोर से धपाधप चोदने लगा।

अब तो कविता पागल हो चुकी थी और बोल रही थी- ओह मीत.. बहुत ही बढ़िया लंड है तेरा.. जोर से चोद मेरी जान।

काफी देर तक चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया.. पर कविता का तो ख़तम ही नहीं हो रहा था। मैं अब थोड़ा परेशान हो गया कि अब क्या करूँ।

मैं तो पास में पड़ा सोच ही रहा था कि कविता बोली- तुम अपने रूम पर बताकर तो आए हो ना?मैंने कहा- क्या बता कर आना था?वो बोली- यही कि अब तुम सुबह में आ पाओगे।मैंने कहा- नहीं, मैंने ये नहीं कहा है।

अब वो भी गर्म हो गई और बोली- अबे चूतिये.. तेरा लौड़ा झड़ गया.. अब मेरा क्या होगा..? चल अब तुझे मेरा काम ख़त्म करना पड़ेगा।

कविता ने मुझे ज़बरदस्ती पूरी रात रोके रखा और 4 बार चुदाई करवाई। उस पक्की चुदक्कड़ ने मुझे रात भर में निचोड़ लिया था। मैं तो सुबह में ठीक से चल भी नहीं पा रहा था।

ये मेरे साथ क्या हुआ था.. मेरे साथ किस तरह का बदला लिया गया था मुझे किस तरह की सजा दी गई थी। मैं समझ ही नहीं पा रहा था।

आप ही कहिए कि ये सब कैसा लगा.. ये मेरा समर्पण था या मजा था या सजा मिली थी। मुझे बताइएगा ज़रूर.. आपके कमेंट्स का इंतजार रहेगा।support@mohakkisse.com

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