होम पर वापस जाएं
बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 750 बार

चूत और लण्ड का एक ही रिश्ता- 4

गरिमा सेक्सी

04 Feb 2023 को प्रकाशित

चूत और लण्ड का एक ही रिश्ता- 4
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

पापा बेटी सेक्स कहानी में एक लड़की को चुदाई की लत लग गयी थी. अपने भाई और सहेली के बाप से चुदने के बाद वह अपने पापा की वासना को अपने प्रति भड़काने में सफल हो गयी थी.

कहानी के तीसरे भागपापा ने जवान बेटी की चूत सूँघीमें आपने पढ़ा कि आधी रात में पापा नेमेरे कमरे में आकर मेरी नंगी चूत की खुशबू ली और उसे देख कर मुठ मार कर अपना पानी मेरे जिस्म पर गिराया.

यह कहानी सुनें.

अब आगे पापा बेटी सेक्स कहानी:

नानी और मामा के आने की बात सुनकर मेरा मूड थोड़ा ख़राब हो गया था क्योंकि जब भी मामा और नानी आते थे तो मम्मी और नानी बेडरूम में पापा नीचे लॉबी में दीवान पर और मामा सोनू के कमरे में ऊपर सोते थे।

मुझे लग रहा था कि जब तक नानी और मामा रहेंगे तब तक रात वाला प्लान नहीं हो पाएगा.क्योंकि अभी तो मम्मी के सो जाने के बाद पापा रात में ऊपर आ जाते थे.मगर अब ऊपर मामा सोएंगे तो पापा डर से नहीं आएंगे क्योंकि मामा अक्सर रात में पानी पीने या बाथरूम जाने के लिए ज़रूर उठते हैं।

करीब 3 बजे पापा, नानी और मां को लेकर घर आ गए।थोड़ी देर चाय वगैरह पीने के बाद फिर पापा, माँ और नानी डॉक्टर के यहाँ चले गए दिखाने।

शाम को करीब 6 बजे वे लोग लौटे तो बताया कि डॉक्टर ने दवा दी है और एक हफ्ते बाद फिर बुलाया है. कोई घबराने वाली बात नहीं है।

फिर मामा तुरंत वापस जाने के लिए तैयार हो गए बोले कि 8 बजे वाली ट्रेन पकड़ कर वे वापस चले जाएंगे।नानी को यहीं रुकना था.एक हफ़्ते बाद वे वापस आकर डॉक्टर को दिखा का नानी को वापस ले जायेंगे।

मामा के जाने के बाद मम्मी तुरंत खाने की तैयारी में लग गई क्योंकि नानी ज्यादा देर से नहीं खाती थी।

रात में हम सभी साथ खाना खा रहे थे.तभी पापा ने मम्मी से कहा- ऐसा है, अम्मा जी और तुम यहां नीचे सो जाना. मैं ऊपर सोनू वाले कमरे में सो जाऊंगा।मम्मी बोलीं- ठीक है।

मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, मैं तो समझ रही थी कि पापा ऊपर सोने के लिए प्लान क्यों कर रहे हैं।

रात 9.30 बजे तक हम सबने खाना खा लिया।फिर मैं मम्मी के साथ रसोई में काम करने लगी।

पापा टीवी देखने लगे और नानी कमरे में चली गई।

करीब 10 बजे पापा ऊपर जाते हुए मम्मी से बोले- मैं सोने जा रहा हूं।और फिर मुझसे बोले- बेटा ऊपर आना तो मेरे लिए पानी लेती आना।मैंने कहा- ठीक है पापा!

और फिर पापा सोने चले गए।

मैं थोड़ी देर रसोई का काम खत्म कर नानी के पास कमरे में आ गई और उनसे बात करने लगी।थोड़ी देर में मम्मी भी कमरे में आ गई।

फिर हम तीनों बैठ कर बात करने लगी।

करीब 11 बजे मैं मम्मी से बोलीं- मैं सोने जा रही हूं अब!मम्मी बोलीं- अपने पापा के लिए पानी लेती जाना!

मैं ‘ठीक है’ बोल कर कमरे से निकल कर रसोई में पानी लेने चली गई।

पानी लेकर मैं जैसे ही सीढ़ी के पास आई तो ऊपर मैंने पापा को तेजी से पीछे हटते हुए देखा।हालांकि पापा नहीं जान पाये कि मैंने उन्हें देख लिया है।

मुझे लगा कि शायद वे पानी के लिए बुलाने आ रहे होंगे मगर मुझे पानी लेके आती देखकर वापस चले गये होंगे।

मैं ऊपर आयी तो देखा कि लॉबी की लाइट बंद थी और पापा के कमरे का दरवाजा भी बंद था।

तब मैं सोचने लगी कि अभी तो पापा यहीं खड़े थे मगर मुझे देखने के बावजूद कमरे में जाकर दरवाजा क्यों बंद कर लिया है।मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पापा ने ऐसा क्यों किया है।

मगर दिमाग में ये भी चल रहा था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पापा कुछ प्लान बनाकर बैठे हों।मेरा दिल धड़कने लगा.

मैं दरवाजे के पास गई और धीरे से डोर हैंडल घुमा कर दरवाजे को थोड़ा सा खोला तो देखा कि कमरे में नाइट बल्ब जल रहा है और पापा बिस्तर पर सो रहे हैं।

तब मैं दरवाजा पूरा खोल कर अंदर आ गई और धीरे से 2 बार पापा को आवाज दी.मगर वे जगे नहीं।

मैं समझ गई कि पापा जगे हैं मगर सोने का नाटक कर रहे हैं।

मगर मैं अभी भी समझ नहीं पा रही थी कि वे आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं।

फिर मैं उनके बिस्तर के पास गई, बगल की टेबल पर पानी का गिलास रख दिया और उनकी तरफ देखा तो वे उसी तरह आंख बंद कर पीठ के बल लेटे हुए थे।

उन्हें अपने एक हाथ को अपने माथे पर इस तरह रखना था कि उनकी आंख छुप गई थी।वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे गहरी नींद में हैं।

अचानक मेरी निगाह नीचे उनकी कमर की तरफ गईं तो मेरा दिल धक्क से रह गया।

दरअसल पापा लुंगी पहन कर सो रहे थे और उनकी लुंगी आगे से खुल कर अगल-बगल हटी थी और उसमें से उनका लंड आधा बाहर निकला हुआ था।

पापा ने अंडरवियर भी नहीं पहना था.अब मैं सारा माजरा समझ गई।

पापा वही कर रहे थे जो मैं रात में उनके साथ करती थी।

थोड़ी देर तक मैं ऐसी ही खड़ी रही।मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं।

एक तरीके से पापा मुझे अपना लंड देखने का खुला निमंत्रण दे रहे थे।मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

मैं अभी सोच ही रही थी कि क्या करूं.तभी नीचे से मम्मी ने मुझे आवाज देकर बुलाया।

मैं तेजी से कमरे से निकली और दरवाजा बंद कर नीचे आ गई।

नीचे मम्मी ने मुझे डॉक्टर की पर्ची देते हुए कहा- देखो इसमें सोने से पहले कौन सी दवा नानी को देनी है।मैंने जो दवा खानी थी, निकाल कर नानी को दे दी।

जब नानी ने दवा खा ली तो मम्मी बोलीं- लाइट और दरवाजा बंद करती हुई जाना!

यह भी पढ़ें (Recommended)

Papa ke sath Goa vacation-2

फिर मैंने कमरे की लाइट बंद की और बाहर आकर दरवाजा बंद कर दिया और ऊपर आ गई।

ऊपर आकर मैंने एक बार पापा के कमरे की ओर देखा और सोचने लगी कि क्या करूं … फिर से पापा के कमरे में जाऊं या नहीं।

फिर दिमाग में आया कि कहीं आज मौका छूट गया तो दोबारा ये मौका मिले ना मिले!और फिर जब लोहा गर्म हो, तभी हथौड़ा मारना चाहिए.यह सोच कर मैंने पापा के कमरे में दोबारा जाने का निश्चय किया।मैं समझ रही थी कि पापा भी सिर्फ इंतजार ही कर रहे होंगे।

तब मैं पापा के कमरे के पास चली गई और धीरे से दरवाजा हकले से खटखटाया और करीब 15 सेकेण्ड तक रुकी रही।मैंने ऐसा जानबूझकर किया ताकि पापा भी अन्दर तैयार हो जाएँ।

फिर धीरे से मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि पापा उसी तरह सो रहे हैं।

मेरी नज़र उनके लंड पर गई तो देखा कि इस बार वे लुंगी से करीब-करीब पूरा बाहर आ गया था और उसमें हल्का सा तनाव भी था।मैं कमरे के अंदर आ गई और दरवाजा धीरे से बंद कर दिया और फिर धीरे से पापा को आवाज दी- पापा … पापा!

पापा बिना कुछ बोले लेटे रहे.वे यह जताना चाह रहे थे कि वे बेहद गहरी नींद में हैं।

मैं बेड के पास गई और थोड़ी देर खड़ी रही।

मेरी नज़र कभी पापा के लंड पर तो कभी उनके मुँह की तरफ जा रही थी।मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं और कैसे करूं।

फिर मैंने हाथ बढ़ाकर पापा के घुटनों के पास रखा और धीरे से हिलाए एक बार फिर उन्हें जगाने की कोशिश की और आवाज दी- पापा … पापा!मगर पापा कुछ नहीं बोले और उसी तरह लेटे रहे।

जब पापा कुछ नहीं बोले तो मैं बिस्तर के ठीक बगल में उनके लंड के पास जाकर घुटनों के बल बैठ गयी।

अब पापा का लंड ठीक मेरे चेहरे के सामने था।मेरी निगाह पापा के लंड पर थी जिसमें अब तनाव बढ़ रहा था।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और सांस धौंकनी की तरह चल रही थी।हालांकि इतनी देर में मेरी उत्तेजना और हिम्मत दोनों बढ़ गई थी।

मैंने एक हाथ से पापा के लंड को धीरे से पकड़ा।जैसा ही मैंने लंड को पकड़ा, लंड हल्के से झटके के साथ और टाइट हो गया।

थोड़ी देर इसी तरह लंड को पकड़े रहने के बाद मैंने लंड को पूरा मुट्ठी में भर लिया और धीरे-धीरे लंड को हिलाने लगी।

अब तक पापा का लंड एकदम गर्म और पत्थर की तरह हो चुका था।मेरा मन कर रहा था कि लंड को मुँह में भरकर चूस लूँ।

मुझसे अब बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था।मैंने लंड को हिलाना बंद कर दिय और उसकी त्वचा को पूरा नीचे खींच दिया।

नाइट बल्ब की रोशनी में लंड का मोटा सा गुलाबी सुपारा फूल कर चमक रहा था, जिसे देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया।

मैं झुकी और जीभ निकल कर लंड के सुपारे को हल्का सा चाट लिया।मैंने जैसे ही शरीर से पापा के लंड को चाटा मेरे शरीर में हल्की सी झुरझुरी दौड़ गई.वहीं पापा के शरीर में हल्का झटका लगा।

ऐसा लग रहा था कि शायद पापा को भी उम्मीद नहीं थी कि मैं उनके लंड को चाटूंगी भी!

दो-तीन बार लंड के सुपारे को जीभ से आइसक्रीम की तरह चाटने के बाद मेरी हिम्मत और एक्साइटमेंट दोनों बढ़ गयी थी।

वैसे भी पापा और मैं दोनों एक दूसरे से खेल रहे थे, ये पापा और हम दोनों जान रहे थे।इस वजह से अंदर का डर खत्म हो गया था।

करीब 20-25 सेकेण्ड तक पापा के लण्ड को आइसक्रीम की तरह चाटने के बाद थूक से चिकने हो चुके उनके सुपारे को पूरा मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।शायद पापा के लंड से थोड़ा-थोड़ा पानी निकल रहा था क्योंकि लंड चूसते हुए मुझे हल्का-हल्का नमकीन का स्वाद भी आ रहा था।

मेरी तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई थी।मैं अब तेजी से मुंह को आगे पीछे कर लंड चूस रही थी.

अभी लंड चूसते हुए 2 मिनट हाय हुए कि पापा हल्का-हल्का अपनी कमर को हिलाने लगे।मैं समझ गई कि वे झड़ने वाले हैं.इसलिए मैं और तेज-तेज उनके लंड को हाथ से हिलाते हुए चूसने लगी।

तभी पापा का शरीर एकदम अकड़ गया और वे तेजी से अपने कमर को हिलाने लगे और मेरे मुंह में झड़ गए।

उनके लंड से तेज धार निकली और सीधा मेरे गले में चली गयी, जिसे मैं गटक गई।

उसके बाद पापा ने हल्का-हल्का झटका लेते हुए अपने लंड का पूरा पानी मेरे मुंह में निकाल दिया।

लंड के गाढ़े नमकीन पानी से मेरा मुंह पूरा भर गया.थोड़ा पानी मेरे मुंह से निकल कर बाहर मेरे हाथ और लंड पर भी फ़ैल गया.बाकी जो मुंह में बचा था, वो सारा नमकीन पानी बिना लंड को मुंह से निकले, एक ही झटके में पी गई।

पूरा पानी निकल जाने के बाद भी मेरे लंड को मुंह में लेकर कुछ देर चूसती रही।

उसके बाद मैंने लंड को मुंह से निकाला और पापा की लुंगी पर ही अपने हाथ का साफ किया और उनके लंड को भी हल्का सा पौंछ कर साफ कर दिया।

फिर मैं धीरे से खड़ी हुई और दरवाजा खोल कर बाहर आ गई और वापस बंद कर अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बंद कर सीधा बिस्तर पर लेट गई।

मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं अभी-अभी अपने पापा का लंड चूस कर आई हूँ।मेरे मुँह में अभी भी लंड के पानी का थोड़ा नमकीन स्वाद था.

अभी तक मैंने ये सब पापा बेटी सेक्स मूवी देखी थी और मैं आज खुद ही अपने पापा का लंड चूस के आ रही थी … ऐसा लग रहा था जैसा मेरा कोई सपना देख रही हूं।

वैसे मुझे लग रहा था कि शायद पहली बार मैंने पापा का लंड चूसा था इसलिए एक्साइटमेंट में पापा जल्दी झड़ गए थे।

वहीं मेरी चूत पूरी तरह पनिया गई थी.मैं पापा के लंड को चूसने के बारे में मुझे याद कर अपनी चूत को सहलाने लगी.मेरा मन कर रहा था कि एक बार फिर वापस कमरे में जाऊं और लंड को दोबारा मुंह में लेकर चूसते हुए अपनी चूत सहलाऊं।

यहीं सोचते-सोचते मैं उत्तेजित होने लगी और तेजी से हाथ से अपनी चूत रगड़ने लगी.और फिर मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया।

चूत का पानी निकलने के बाद मैं आंख बंद कर लेट गयी और मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।

दोस्तो, मेरी पापा बेटी सेक्स कहानी आप को कैसी लग रही है, आप मुझे ज़रूर बतायें।

पापा बेटी सेक्स कहानी का अगला भाग:चूत और लण्ड का एक ही रिश्ता- 5

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Papa ke sath Goa vacation-2
बाप बेटी की चुदाई

Papa ke sath Goa vacation-2

Pichla bhaag padhe:-Papa ke sath Goa vacation-1

9 मिनट 817
पापा ने अपनी सगी बेटी को चोद दिया
बाप बेटी की चुदाई

पापा ने अपनी सगी बेटी को चोद दिया

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम सीमा है और मैं 19 साल की हूँ. यह कोई मनघड़न्त कहानी नहीं, एक रियल सेक्स स्टोरी है, जो आज से दो महीने पहले घटी थी.

8 मिनट 575
Family stories – Dance Afreen dance
बाप बेटी की चुदाई

Family stories – Dance Afreen dance

Afreen (karib 20-21 ki hogi), height 5 feet 6 inch, rang doodh jesa gora, kamar patli. Lekin gand barabar nikli hue hue. Boobs bilkul cup ki shape mei aur thode dhile dhaale. Padhai mei to thik thaak thi. Lekin dance kerne ka bada hi shok tha.. (a...

9 मिनट 803

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।