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जवान लड़की पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 459 बार

चूत और लण्ड का एक ही रिश्ता- 2

गरिमा सेक्सी

27 Jan 2023 को प्रकाशित

चूत और लण्ड का एक ही रिश्ता- 2
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दोस्तो, मैं हूँ गरिमा, आपकी चहेती सेक्स स्टोरी लेखिका!

पापा के सामने पड़ने पर वे और मैं दोनों एकदम नॉर्मल रहे।हालांकि मैंने महसूस किया कि पापा चोरी से कई बार मुझे देख रहे थे, साथ ही मुझसे किसी ना किसी बहाने ज्यादा बात भी कर रहे थे।

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अब आगे पोर्न सेक्सी गर्ल कहानी:

खैर … फिर रात हुई, सबने खाना-पीना खाया और फिर रोज की तरह हम सब कमरे में आ गए।

मैं ठीक कल की तरह ही कपड़े पहनने और नाइट बल्ब जला कर बिस्तर पर आ गई.फिर उसी तरह पापा आए और थोड़ी देर चोरी से मुझे देखने के बाद बुआ को चोदने चले गए।

यह सिलसिला दो दिन तक चला.

इस बीच पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे।

मैं समझ गई कि पापा मेरे में इंटरेस्ट ले रहे थे।उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।

उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।अब मैं भी पापा के पास किसी ना किसी बहाने से जाने लगी।

मैं तो इस चक्कर में थी कि जब तक बुआ हैं तो रात में ही कुछ मामला आगे बढ़ जाएगा।मगर बुआ को अभी 4 दिन ही हुए थे कि फूफा जी का फोन आ गया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से वे जल्दी लौट आए हैं।

तो आज पापा को ऑफिस जाते समय बुआ को उनके घर छोड़ आये।

बुआ के ऐसे अचानक चले जाने से मेरा मूड एकदम खराब हो चुका था और मायूस हो गई थी कि अच्छा-खासा पापा को पटाने का प्लान चल रहा था मगर बीच में ही बुआ चली गई।

अब बुआ थी नहीं इसलिए रात में खाना भी जल्दी हो गया।रात 10 बजे तक खाना खाकर मैं ऊपर अपने कमरे में आ गई।

मेरा तो मन ही नहीं लग रहा था.मैं यही सोच रही थी कि क्या करूं।

मैंने अपने कमरे की लाइट बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई।

बुआ के जाने के बाद पापा ऊपर आएंगे नहीं तो अब नाइट बल्ब जलाने का कोई मतलब भी नहीं था।इसलिए मैं अँधेरे में ही बिस्तर पर लेटी रही।

मेरी आँखों में नींद नहीं आ रही थी.

काफ़ी देर तक करवट बदल-बदल कर सोने की कोशिश करने लगी मगर नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी।

आंख बंद कर सोने की कोशिश की तो पिछले 3-4 दिनों में मेरे साथ जो भी हुआ था, ये सब सोच कर मुझे थोड़ी उत्तेजना भी होने लगी।फिर मैं मोबाइल पोर्न मूवी देखते हुए अपनी चूत सहलाने लगी।

मूवी देखते हुए मेरी एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तो मैंने अपनी पैंटी उतार दी।अब मैं सिर्फ स्कर्ट और टी-शर्ट में थी।

जब से मैंने पापा को पटाने के बारे में सोचा था तब से मैं डैड-डॉटर वाली पॉर्न मूवी ज्यादा देखने लगी थी।तभी मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 11.45 हो गए।

मूवी देखते हुए मैं अपनी नंगी चूत भी सहलाती जा रही थी।अभी मूवी देखते हुए थोड़ी देर बीता था कि मुझे कुछ आवाज आयी।

मैंने टाइम देखा तो 12.15 बज रहे थे।तो मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और आवाज सुनने की कोशिश करने लगी।

जैसे ही मेरी निगाह दरवाजे के नीचे से गई तो परछाई से समझ गई कि कोई खड़ा है।

मैंने तुरंत हाथ से अपनी आंखों को ढक कर सोने का नाटक करने लगी।मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

मैं समझ गई थी कि मम्मी के सो जाने के बाद मेरे पापा धीरे से मुझे सोती हुई देखने आए हैं।अभी मेरी ये सोच ही रही थी कि कमरे का दरवाजा धीरे से बहुत थोड़ा सा खुला।

पापा को लगा होगा कि शायद अंदर नाइट बल्ब जल रहा होगा।मगर अंदर एकदम अंधेरा था।

कुछ देर रुकने के बाद पापा ने दो बार धीरे से मेरा नाम लेकर बुलाया- गरिमा … गरिमा!पापा शायद कन्फर्म करना चाहते हैं कि मैं जागी हूं या सो रही हूं।

जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उनको भरोसा हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ।इसके बाद उन्होंने दरवाजे को थोड़ा और खोला और धीरे से हाथ अंदर डाल कर स्विच की तरफ ले जाने लगे।

मैं पोर्न सेक्सी गर्ल हाथ से आंखों को ढके चोरी से पापा की हरकत देख रही थी।

जैसे ही पापा का हाथ स्विच की तरफ बढ़ा मैं समझ गई कि वे नाइट बल्ब जला कर मुझे देखना चाह रहे हैं।

यह सोचकर ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।सच कहूं तो मुझे पसीना आने लगा था … पर मैं चुपचाप उसी तरह लेटी रही।

पापा ने हाथ बढ़ाकर नाइट बल्ब जला दिया।उन्होंने बनियान और अंडरवियर पहना हुआ था।1 मिनट तक वे दरवाज़े से ही देखते रहे।

वहीं मेरी तरफ से कोई हरकत ना होने पर उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई थी और वे दरवाज़े से कमरे के अंदर मेरे बिस्तर के पास आ गए।

अब मैं अपने पापा के सामने लेटी थी।मेरी छोटी सी स्कर्ट मेरी जांघों को पूरा ढक नहीं पा रही थी और पापा बिस्तर के बगल खड़े होकर मेरी चिकनी नंगी जांघों को निहार रहे थे।

तभी पापा ने धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर मेरी स्कर्ट को ऊपर कर दिया।

मैंने अपनी पैंटी पहले ही उतार ली थी जिससे मेरी नंगी चूत उन के सामने थी।मेरी सांस जोर-जोर से चल रही थी।

पापा को शायद उम्मीद नहीं थी कि मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी।इसलिए उनकी आंखें एकटक मेरी चूत पर टिक गईं।

अभी मैं कुछ सोचती कि तभी अचानक पापा ने अपने दोनों हाथ से अपने अंडरवियर को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।

चड्डी नीचे खिसकते ही उनका लंड झटके से बाहर आ गया।इसके बाद वे अपने लंड को धीरे-धीरे एक हाथ से हिलाने लगे।

पापा को इस तरह अपनी चूत को देखते हुए मुठ मारते देख एक्साइटमेंट और अजीब सी फीलिंग से मेरा शरीर और चेहरा गर्म होने लगा था।

उधर पापा खिसक कर बेड के बगल आ गए और मेरी चूत के पास आकर खड़े हो गए।

मैं बेड के किनारे की तरफ ही थी इसलिए अब पापा के लंड और मेरी जांघ के बीच मुश्किल से 6 इंच की दूरी थी।

चुपचाप मैं उसी तरह लेटी रही।

मेरी तरफ से कोई हरकत ना होते देख पापा की हिम्मत बढ़ती जा रही थी और वे इतने एक्साइट हो गए थे कि पापा झुक कर अपने एक हाथ से धीरे से मेरी चूत के ऊपर मेरी झांटों को सहलाने लगे।

पापा ने जैसे ही मेरी चूत को छुआ, वैसे ही मेरी बदन में करंट सा दौड़ गया।मेरा शरीर हल्का सा हिल गया.

यह देख पापा रुक गये और जल्दी से उन्होंने अपना अंडरवियर ऊपर कर लिया।वे डर गये थे कि कहीं मेरी नींद न खुल जाए।

मगर करीब आधा मिनट तक रुककर पापा ने रुक कर चेक किया कि मैं जग तो नहीं गयी।मैं भी सांस रोके उसी तरह पड़ी रही।मुझे लगा ऐसा ना हो कि पापा घबरा कर लौट जाएं।

खैर जब पापा ने सुनिश्चित कर लिया कि मैं गहरी नींद में हूँ तो उन्होंने फिर से अपने अंडरवियर को थोड़ा नीचे खिसका कर लंड को बाहर निकाल लिया।

इस बार शायद पापा कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थे तो उन्होंने मुझे हाथ से छुआ तो नहीं लेकिन वे मेरी चूत को देखते हुए मुठ मारने लगे।

अभी मुठ मारते हुए करीब 2-3 मिनट हुए थे कि पापा के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली और अचानक उनके लंड से धार के साथ वीर्य निकल गया।

जैसे ही वीर्य निकला तो पापा ने तेजी से अपने लंड को दोनों हाथ से ढकने लगे।शायद वे नहीं चाह रहे थे कि उनका वीर्य मेरे ऊपर गिरे या कमरे में इधर-उधर गिरे।

लेकिन उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी और तेजी से झड़ जाएंगे।पापा के लंड का गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी चूत, जाँघ और चादर पर फैल गया।

पहले पापा ने अपने लंड को लुंगी से पौंछा, फिर मेरी जांघ और चूत पर फैल लंड के पानी को धीरे से पौंछने की कोशिश करने लगे।मगर मेरी नींद खुलने के डर से बस हल्का सा ही पौंछ कर वो तेजी से कमरे से बाहर निकले और फिर धीरे से दरवाजे को बंद कर चले गए।

कमरे से बाहर निकलते वक्त पापा ने घबराहट और जल्दबाजी में नाइट बल्ब बंद नहीं किया।मैं थोड़ी देर उसी तरह लेटी रही।

जब पापा के सीढ़ी से नीचे उतरने की आवाज सुन ली, उसके बाद मैं धीरे से उठ कर बैठी।नीचे देखा तो फर्श पर भी वीर्य फैला हुआ था।

मैंने बाथरूम में जाकर पहले अपनी जांघ और चूत पर फैले वीर्य को उंगली पर लेकर सूंघा. मुझे उसकी खुशबू अच्छी लगी.इसके बाद मैंने उस वीर्य को अपने बदन पर से साफ किया।फिर कमरे में आकर बेड की चादर उठाई और उसी चादर से फर्श को भी साफ कर रख दिया और फिर दूसरी चादर बिछाई और फिर कपड़े पहन कर सो गई।

अगले दिन सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली।मैं उठी और हाथ-मुंह धोकर गंदी वाली चादर को लेकर नीचे आ गई।

नीचे आई तो देखा कि पापा चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे।मम्मी भी उनके साथ बैठ कर चाय पी रही थी।

मेरे हाथ में चादर देख कर पापा थोड़े सकपका गए.

अभी मैं कुछ कहती, तभी मम्मी बोली- गरिमा, ये चादर क्यों लेकर आई हो?

मैंने पापा की ओर देखा तो वे अखबार पर आंख गड़ाये हुए थे मगर ध्यान मेरी तरफ ही था।

उन्हें देख कर साफ पता चल रहा था कि वे घबराए हुए हैं।

उन की हालत देख कर मुझे मन ही मन हंसी आ रही थी, फिर भी मैं संभलती हुई बोली- अरे यह गंदी हो गई थी मम्मी!इतना कह कर मैं जानबूझ कर चुप हो गई।

मैं सोच रही थी कि अब मम्मी पूछेंगी जरूर कि कैसे गंदी हो गई।

मम्मी बोलीं- अभी तो कल सुबह ही बिछाई थी इतनी जल्दी कैसे गंदी हो गई?मैंने जानबूझ कर थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा- अरे … कल सोने जा रही थी तभी गिलास का पानी गिर गया था इसलिए इसे हटा दिया था और दूसरी चादर बिछा कर सो गई थी।

दरअसल मैं पापा को ये जताना चाह रही थी कि मैं भी मम्मी से झूठ बोलकर कुछ छुपा रही हूं।मैंने पापा की ओर देखा तो वे अभी भी पेपर पर नज़र गड़ाये बैठे थे।

मेरा जवाब सुन कर वे शायद थोड़े नॉर्मल हो गए।हालांकि वे अभी भी मुझसे नज़र बचा रहे थे।

मुझे लगा कि कहीं ऐसा ना हो कि पापा ज्यादा घबरा जाएं और फिर बात आगे ही ना बढ़े और यहीं पर खत्म हो जाए।इसलिए मैंने पापा की घबराहट दूर करने के लिए खुद ही उनसे बात करने लगी और कहा- आज बड़ी देर तक चाय पी रहे हैं पापा … आपको ऑफिस नहीं जाना क्या?

और फिर मैं जाकर उनके बगल बैठ गई और चाय पीने लगी।पापा थोड़े नॉर्मल होते हुए बोले- अरे अभी 8 बजे हैं तो बज रहे हैं।

फिर मैंने और भी थोड़ी इधर-उधर की बातें कर उनकी घबराहट एकदम दूर करने की कोशिश की।उसके बाद पापा तैयार होकर ऑफिस चले गए।

मैं भी अपने कमरे में आ गयी.मेरा तो दिन ही नहीं कट रहा था।

बस सोच रही थी कि जल्दी से रात हो जाए ताकि पता चले कि आज फिर पापा आते हैं या नहीं।

दोस्तो, मेरी इस सेक्स कहानी के कई भाग हैं.पोर्न सेक्सी गर्ल कहानी आपको कैसी लग रही है, मुझे ज़रूर बताइयेगा।

पोर्न सेक्सी गर्ल कहानी का अगला भाग:चूत और लण्ड का एक ही रिश्ता- 3

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
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rajarya2001

3 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

रामू

3 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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