पति पत्नी सेक्स कहानी दो चचेरी बहनों में से एक की शादी के बाद उसके पति के साथ की है. पति पत्नी का दुबई जाने का हुआ तो वे अपने साथ कुंवारी बहन को भी ले गए.
दोस्तो, आपने मेरी पिछली कहानीबेकाबू हवस का अंज़ामको पसंद किया, यह आपसे मिलते मेल्स से झलकती है.
जैसा मैंने पहले भी कहा कि मेरी कहानियां महज कोरी कल्पना नहीं हैं बल्कि मेरे किसी न किसी पाठक की जीवन यात्रा का एक पड़ाव है.इसीलिए इन कहानियों के पात्र आपको अपने आस-पड़ोस में ही होने का एहसास करायेंगे.
आज की पति पत्नी सेक्स कहानी माधुरी की है.माधुरी और रेखा दो चचेरी बहनें हैं. एक ही घर में पढ़ी-बढ़ी और बहनों से ज्यादा सहेलियों की तरह रहीं.
रेखा पढ़ाई लिखाई में बहुत तेज तो माधुरी एक अल्हड़, मस्त, बला की खूबसूरत और चंचल.
रेखा पढ़ाई में जो ठान ले उसे हासिल करके ही रहती है और माधुरी का दिल जिस चीज पर आ जाये, वो ऐसे बानक बना देती है कि वो चीज उसके पास खिंची चली आये.
दोनों बहनों में आपस में बहुत प्यार था, एक दूसरी पर जान छिड़कती थीं.
रेखा बहुत प्रयास करती कि माधुरी भी पढ़ाई में अव्वल आये!पर माधुरी तो थी बहती हवा का तेज झोंका … ऐसा झोंका जिसमें वो सबको उड़ा ले जाए!चाहे वो रेखा ही क्यों न हो.
कुल मिला कर रेखा की संगत में माधुरी ठीक ठाक नंबरों से पास तो होती गयी पर माधुरी की संगत ने रेखा को भी खुराफाती बना दिया.पर रेखा खुलती सिर्फ माधुरी के साथ ही थी!
पूरी मस्ती करती दोनों.चाहे बिस्तर हो या शावर, वहां खुराफातों की शुरूआत तो माधुरी करती पर फिर रेखा भी उसका भरपूर साथ देती.
उनकी खुराफातें इतनी बढ़ी हुई थीं कि एक बार तो सहेलियों के साथ गोवा ट्रिप में दोनों ने थाई मसाज का आनन्द भी लिया था.बस सेक्स के अलावा जवानी का पूरा मज़ा दोनों ने लूटा था.
दोनों का जिस्म गदराया हुआ और गोरा चिट्टा था.
वक्त आया विदाई का तो माधुरी की शादी पहले हुई एक हीरे के व्यापारी मनीष के साथ!महीने में एक सप्ताह के लिए मनीष दुबई जरूर जाता था.
मनीष माधुरी की चढ़ती-सुलगती जवानी और अल्हड़पन का कायल था.शादी के बाद तो माधुरी और रेखा की दूरी बढ़ गयी क्योंकि माधुरी को सिवाय चुदाई के अलावा और कोई काम ही नहीं था.
शुरू के कुछ महीने तो जब जब मनीष दुबई जाता, माधुरी साथ जाती.पर अब वो भी उकता गयी थी क्योंकि मनीष उसे दिन में तो समय दे नहीं पाता था और फिर सेक्स रोमांच उन्होंने सारे कर लिए थे.
इसी बीच रेखा की शादी तो एक सरकारी अधिकारी अनुज के साथ तय हुई.अनुज एक सरकारी कम्पनी में अधिकारी था. खासी मोटी तनख्वाह और कोई पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं.वह नोएडा में अकेला रहता था, परिवार-जन लखनऊ में ही थे.
मनीष का अबकी बार जब दुबई का प्रोग्राम बना तो माधुरी रेखा को भी साथ ले गयी.
रेखा ने बहुत मना किया कि मुझे दाल भात में मूसलचंद बना कर क्यों ले जा रही है.पर माधुरी जिद पर अड़ गयी, बोली- एक हफ्ते मनीष के साथ नहीं तेरे साथ कर लूंगी.
खैर दुबई में होटल में माधुरी की जिद के बावजूद भी रेखा ने अलग रूम लिया.इस बार काम कम था मनीष को … तो शुरू के तीन दिन तीनों जम कर घूमे और मस्ती की.
रेखा और मनीष के बीच भी कोई लिहाज पर्दा नहीं था, मनीष तो आधी घरवाली कह कहकर उसे पूरी घरवाली की तरह चूमता चिपटाता.माधुरी खूब हंसती और मनीष को और उकसाती.
रेखा अकेले में शिकायत करती- तेरा वाला तो मेरे मम्मे दबाता है, उसका बस चले तो हाथ अंदर ही डाल दे.सुनकर माधुरी कहती- एक बार मसलवा ले तो तेरे को भी तजुर्बा हो जाएगा. बाद में दिक्कत नहीं होगी. मेरे मम्मे तो पहले महीने में मनीष ने दबा दबा कर लाल कर दिए थे.
रात को माधुरी कभी मनीष के साथ सोती, कभी रात को चुदाई पूरी करवा कर रेखा के पास आ जाती और उससे चिपटा-चिपटी करती.
रेखा कहती- अभी करवा कर आ रही है, तेरा मन नहीं भरा?माधुरी उसे छेड़ती- आज रात को तीनों एक साथ करेंगे.रेखा उसे झिड़क देती.
हालाँकि उनकी चुदाई महसूस कर अब रेखा की चूत भी पानी छोड़ देती.
आखिर माधुरी ने रेखा को मना ही लिया कि आज रात को रेखा उनके साथ ही सोएगी और सोने का नाटक करेगी और उनकी लाइव चुदाई देखेगी.रेखा बोली- अगर मनीष मुझ पर चढ़ गया तो?इस पर माधुरी बोली- नहीं, तेरी पहली चुदाई तो अनुज ही करेगा, उसके बाद फिर कभी साथ साथ चुद लेंगी.
अब मनीष ने रेखा के साथ भले ही चुदाई न की हो, पर चूमने और कहीं भी छू लेने में तो अब तीनों को परहेज नहीं था.
रेखा ने हंस कर माधुरी से कहा कि कहीं माधुरी की निगाह अनुज पर तो नहीं हैं, मैं नहीं देने वाली अनुज को तुझे!माधुरी भी हंस कर बोली- चल लगी शर्त, देखना तू ही अनुज को मेरे पास लाएगी.बात हंसी की थी, आई गयी हो गयी.
रात को माधुरी ने मनीष से कहा- आज रेखा भी यहीं सोएगी. बेचारी अकेली बोर होती है. तुम ज़रा अपने पर काबू रखना. आज सेक्स नहीं करेंगे, मस्ती कुछ भी कर लेना.मनीष भुनभुनाया पर बात ये तय हुई कि हद नहीं टूटेगी पर कोई किसी बात का बुरा नहीं मानेगा.
रात को बाहर डिनर करके 11 बजे करीब तीनों होटल पहुंचे.रेखा अपने रूम में ही चली गयी तो माधुरी ने चेंज करके एक फ्रॉक डाली और गयी रेखा को बुलाने.वो उसे जिद करके अपने साथ लिवा लायी.
रेखा ने बहुत मना किया की मनीष का मूड खराब रहेगा पर माधुरी नहीं मानी, बोली- एक दिन नहीं करेंगे तो क्या हो जाएगा. जब तू सो जायेगी तब कर लेंगे. फिर कल तो जा ही रहे हैं वापिस.जब रेखा ने नाईट सूट डालना चाहा तो माधुरी ने उसे भी जबरदस्ती फ्रॉक ही पहना दी और ले आई साथ में!
उसे इस ड्रेस में देखकर मनीष ने सीटी मारी और आगे बढ़कर रेखा को गले लगा लिया.मनीष बोला- यार, क्यों न अनुज के लिए दूसरी लड़की ढूंढ लें और तुम मुझ से ही शादी कर लो.
रेखा बोली- हाँ यार, मन तो मेरा भी तुम्हारे साथ ही है, पर क्या करूं, बिचारी माधुरी का ख्याल आ जाता है. या तो इसे भेज दें अनुज के पास?तीनों हंस पड़े.
मनीष ने हार्ड बियर की तीन केन खोल लीं.इनमें अल्कोहल की मात्रा खासी ज्यादा होती है तो नशा हो ही जाता है.
तीनों बेड पर बैठ कर हँसी ठट्ठा करने लगे.
मनीष बार बार रेखा की जांघों पर हाथ फिराता तो रेखा भी उसे हंस कर झिड़क देती- अब तुम्हारे पास पूरी घर वाली है तो आधी घर वाली पर नीयत क्यों खराब कर रहे हो?तो मनीष बोला- आज उसे आधी और तुम्हें पूरी बना लेता हूँ.
रेखा ने लम्बी जबान निकाल कर उसे चिढ़ा दिया.
गप्पों में रात का एक बज गया.बियर का सुरूर छा गया था.
रेखा बोली- मैं तो सो रही हूँ!कहकर वो बेड के एक और करवट बदल कर लेट गयी.
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माधुरी ने लाईट धीमी की और मनीष की बाँहों में आ गयी.मनीष ने उससे होंठ से होंठ मिला लिए.दोनों एक दूसरे में समाने को चिपट गए.
माधुरी को रेखा का ख्याल था तो उसने मनीष से कहा- अब बस, अब सो जाओ. वर्ना रेखा भी नहीं सो पाएगी.
रेखा सोयी तो नहीं थी, उसने कहा- नहीं, तुम पहले निबट लो, मैं इसीलिए मना कर रही थी कि तुम लोगों को डिस्टर्ब होगा.
माधुरी हँसती हुई रेखा से चिपट गयी- नाराज मत हो, आज मैं तेरे साथ ही सोऊंगी. मनीष अपने हाथ से काम चलाएगा.
माधुरी ने रेखा के होंठ से होंठ भिड़ा लिए.रेखा कसमसाई तो माधुरी ने उसे झिड़क दिया- आज हम ऐसे ही सोएंगी जैसे अपने कमरे में सोती थी, मनीष सिर्फ देखेगा.
तो रेखा ने उसे धकेल दिया- चल कमीनी, तू तो जन्मजात बेशर्म है.
अब माधुरी रेखा की पीठ से उससे चिपटा कर लेट गयी.माधुरी ने अपनी गोरी चिकनी टांगें रेखा की टांगों के ऊपर रखकर ऊपर नीचे करना शुरू किया.
जब रेखा ने कसमसाना शुरू किया तो माधुरी ने अपने हाथों से रेखा के मम्मे दबोच लिए.
कमरे में अब अन्धेरा था.
रेखा ने भी हथियार डाल दिए.माधुरी उसे चूमती चाटती रही और अपने हाथों से कभी रेखा के निप्पल सहलाती, कभी फ्रॉक ऊपर करके उसकी चूत की फांकों को मसल देती.
मनीष इनकी हरकतें महसूस करते हुए गर्म हो गया उसने अपने बरमूडा के अंदर हाथ डाल कर लंड को पुचकारना सहलाना शुरू किया.
थोड़ी देर बाद रेखा ने माधुरी से फुसफुसा कर कहा- बहुत हो गया, अब सोने दे.रेखा को नशा हो रहा था, वह सोने की कोशिश करने लगी.
थोड़ी देर बाद रेखा की आँख खुली तो उसे ऐसा लगा कि उसके और माधुरी के बीच मनीष का हाथ है.
उसने दिमाग पर जोर लगाया तो उसे पति पत्नी सेक्स का अहसास हुआ कि मनीष माधुरी के मम्मे मसल रहा है और माधुरी के हाथों में शायद उसका लंड है.मनीष ने माधुरी के कान को चूमा तो माधुरी ने अपना सर घुमाकर उसे चूम लिया और फुसफुसा कर बोली- आज ज्यादा बदमाशी नहीं, चुपचाप सो जाओ.
पर मनीष नहीं माना और माधुरी से चिपटा चिपटी करता ही रहा.
रेखा को फच फच की आवाज आई तो उसने ध्यान से कान लगाए और तिरछी निगाहों से देखा तो अहसास हुआ कि माधुरी ने अपनी एक टांग उठा कर मनीष की टांग पर रख रखी थी और मनीष ने अपनी उंगली माधुरी की चूत में घुसा रखी थी.चूत ही मालिश होकर फच फच का शोर कर रही थी.
माधुरी भी मनीष का साथ देते हुए उसे चूम रही थी.
मनीष फुसफुसाया- जानू, एक बार रेखा के मम्मे छुवा दो.रेखा सिहर गई.
माधुरी बोली- नहीं, उससे दूर रहो. अगले महीने उसकी शादी है. तुम्हारा भरोसा नहीं, मम्मे मसल मसल कर उसे गर्म कर दो फिर चढ़ जाओ उसके ऊपर.
ये सब सुन सुनकर रेखा की चूत भी पानी छोड़ गयी.उसका मन किया कि वह मनीष का हाथ पकड़ कर अपनी चूत में घुसा ले कि ले राजा तू भी अपने अरमान पूरे कर ले.
पर रेखा ने अपने को काबू किया कि नहीं अनुज की अमानत अनुज को ही दूँगी.
माधुरी वापिस रेखा से चिपट कर लेट गयी.
थोड़ी देर में फिर मनीष का हाथ उसके मम्मे मसलने लगा.माधुरी बोली- तुम मानोगे या नहीं.मनीष फुसफुसा कर बोला- केवल एक बार रेखा के निप्पल छुवा दे, फिर सो जाऊंगा, कसम से!
माधुरी ने एक आह भरी और धीरे से अपना हाथ रेखा के ऊपर रखते हुए उसके मम्मों पर रख दिया.रेखा चुप पड़ी रही.
अब माधुरी ने अहिस्ता से रेखा की फ्रॉक के ऊपर के बटन खोले और रेखा के मम्मे पकड़ लिए.रेखा कसमसाई और बोली- क्या कर रही है?माधुरी बोली- कोई पहली बार थोड़े ही कर रही हूँ, चुपचाप सो जा!
थोड़ी देर के बाद माधुरी हिली और अपना हाथ हटाया और अब रेखा के मम्मों पर एक मरदाना हाथ था.रेखा सहम गयी.वह समझ गयी कि यह मनीष का हाथ है.
वह कुछ सोच पाती, इतने में मनीष ने उसकी गोलाइयों को सहलाते हुए सीधे उसके निप्पलस को गोल गोल सहलाना शुरू किया.
रेखा के निप्पल कड़क हो चले थे.उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो करे क्या.
मनीष बारी बारी से उसके दोनों मम्मे सहला रहा था.
माधुरी बीच से हट गयी थी और मनीष उससे चिपटा हुआ था.
रेखा का हाथ पीछे हुआ तो उसका हाथ मनीष के ताने हुए लंड से टकरा गया.उसे करंट सा लगा. कोई मरदाना लंड पहली बार वह छू रही थी तो घबराहट और शर्म के बावजूद भी रेखा ने मनीष के लंड को अपने हाथों में जकड़ लिया.
अब मनीष ने उसके कान के पीछे चूमते हुए उसका चेहरा घुमाया और उसके होंठों को चूम लिया.शायद मनीष का मन उसकी चूत में उंगली करने का भी था क्योंकि उसने रेखा की फ्रॉक उठाने की कोशिश की तो माधुरी उठ बैठी और मनीष से बोली- अब तुम्हारा काम पूरा हुआ, या तो चुपचाप सो जाओ या हम दूसरे कमरे में जा रही हैं.
मनीष गुडनाईट बोलते हुए करवट बदल कर लेट गया.
अब तीनों सोने की कोशिश में लग गए.
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