पोर्न लव फक स्टोरी में मैं अपने प्यार को पूरी तरह से पा चुकी थी उससे अपनी कुंवारी चूत की चुदाई करवा के. पर अभी भी मुझे उसके लंड की प्यास बाकी थी.
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दोस्तो, मैं चित्रांगदा सक्सेना एक बार पुनः आपकी सेवा में अपनी सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर उपस्थित हूँ.कहानी के दूसरे भागअपने प्यार से मैं पहली बार चुदीमें अब तक आपने पढ़ लिया था कि विजय ने मेरी कुंवारी चुत चोद कर फाड़ दी थी और मैं बाथरूम में अपने आपको साफ कर रही थी.
अब आगे पोर्न लव फक स्टोरी:
जैसा कि तय हुआ था, डिनर के बाद विजय काम से शहर चला गया और मैं विजय के बताए हुए रास्ते से हॉस्ट्ल … जहां विजय का घर था, पहुंच गयी.मुझे आते किसी ने नहीं देखा.
उस वक्त बारिश हो रही थी और मैं विजय का छाता लिए हुई थी, जिससे कोई मुझे देख ना सके.
इसी बीच मेरी सहेली आंचल का कॉल आया.आंचल- और चित्रा, चींटी पहाड़ चढ़ पाई कि नहीं?मैं- पहाड़ या मीनार?
आंचल- अरे तू बता न काम बना कि नहीं?मैं- दोनों चढ़ गयी. पहाड़ भी और मीनार भी!
आंचल- लेने में मजा आया?मैं- जान निकल गयी मेरी तो. इसे मजा आया कहती है?
आंचल- क्यों क्या हुआ? सब ठीक तो है? पहली बार सबको दर्द होता है. मैंने जानबूझ कर बताया नहीं था कि कहीं तू डर कर करे ही न!मैं- अरे इतना तो मुझे भी पता था. पर विजय का उम्मीद से ज्यादा है.
आंचल- कितना है?मैं- मेरी दोनों हथेलियों में भी नहीं आ रहा है और मुठ्ठी भी बंद नहीं होती. उंगली बंद नहीं हो पाती.
आंचल- मतलब जितना मैंने बताया था … उससे भी बड़ा निकला क्या?मैं- हां शायद.
आंचल- फिर तो तुझे तो बड़ा मजा आया होगा!मैं- आया तो … पर फटने से दर्द भी बहुत हुआ. अभी भी खून रिस रहा है. ऐसा मजा तू ही ले ले. घंटा भर जैसे रेल बना दी मेरे अन्दर!
आंचल- मुझे कोई समस्या नहीं लेने में!मैं- अच्छा अब रखती हूं, मुझे नहा कर तैयार होना है.आंचल- ठीक है … ऑल द बेस्ट. मजे कर.
अब मैंने नहा कर अपनी नई नाइटी पहन ली, इसे मुझे आंचल ने खरिदवायी थी.
अब तक विजय का कुछ पता नहीं था तो मैं उसका कमरा ठीक करने लगी.
फिर उस वक्त रात के दस बज रहे थे जब मुझे विजय की बाइक के आने की आवाज़ सुनाई दी.
वह एक बैग में थोड़ा सामान लाया था.मैंने घर का दरवाजा खोला, लाइट बंद थी.
विजय अन्दर आ गया. उसने किचन में सामान रख प्रिया और कमरे में आकर उसने लाइट जला दी.
मैं बाथरूम के दरवाजे के सामने खड़ी थी.उसने कमरे को देखा और कहा- तुमने क्यों किया? कल भीम (विजय को मिला हुआ अटेंडेंट) कर देता साफ. बेड की चादर भी बदल दी. एक काम करो, तुम फ्रेश हो लो तब तक मैं कुछ काम कर लूं.मैं- ठीक है.
मैं फ्रेश होकर आई.तब तक विजय ने कमरे में बेड पर गुलाब की पंखुड़ियां बिछा दीं और बचे हुए फूल मुझ पर डालने लगा.
उसने मुझसे कहा- आज तुमने जो मेरे लिए किया, उसके लिए मैं तुम्हें थैंक्स कहना चाहता हूं.
मैं विजय के करीब गयी.उसने मुझे कंधे से पकड़ लिया और फिर उसने सिंदूर मेरी मांग में भर प्रिया.
मैं तो स्तब्ध खड़ी रह गयी.
उसने कहा- यह मैं इसलिए कर रहा हूं, जिससे मेरे और तुम्हारे बीच में जो हुआ … वह नाजायज ना रहे. और अब हम एक दूसरे से पूरी तरह से खुल जाएं … और तुम शर्माओ नहीं या कोई संकोच न करो.ऐसा कह कर विजय अपने होंठों से मेरे होंठ चूमने शुरू कर दिए.मेरे होंठ अपने आप खुल गए और मैं भी उसका साथ देने लगी.
मैंने झुक कर विजय के पैर छुए, यह जताने के लिए मैं इस रिश्ते से खुश हूं … वह किसी खुद को दोषी न समझे.
तभी मुझे विजय का पजामा में तंबू बना हुआ दिखा.यह विजय का लंड था जो फिर से अकड़ गया था.
मैंने उसे पकड़ लिया- इसे बड़ी जल्दी है … और तुम अन्दर कुछ पहनते क्यों नहीं या इसकी नुमाइश करनी है. इतनी सारी अंडरवियर हैं, फिर भी नहीं पहनते हो?
विजय- अरे यार … यहां नमी बहुत रहती है … तो जांघ के किनारों में नमी रहती है. इसलिए पजामा कुर्ता पहनता हूं. अंडरवियर से साइड्स कट जाती हैं न इसलिए रात में पाउडर डाल कर ऐसे ही सो जाता था. और भी सामान है … निकालो.
मैं बैग से सामान निकालने लगी.तो मेरा हाथ किसी ठंडी चीज़ से टकराया.निकाला तो बियर की दो केन थीं.
मैंने विजय की तरफ देखा.उसने आंख मार दी.
विजय- कल संडे है, तो बस मैं और तुम साथ में मजे करेंगे.
मैं बैग से एक पैकेट निकालती हुई बोली- इसकी क्या जरूरत थी?विजय- चिट्स यह सेफ़्टी के लिए है.
मैं- कैसी सेफ्टी? तुमको मुझ पर विश्वास नहीं है ना?विजय- चिट्स यार कंडोम इसलिए है कि तुम प्रेग्नेंट न हो जाओ.
मैं- अभी नहीं होऊंगी, सेफ टाइम है. पीरियड्स दो दिन पहले ही खत्म हुए हैं.विजय- तो बताना था ना!
मैं- तुम भी तो हक से पूछ सकते थे. अब क्या बातों में ही लगे रहना है?यह कहते हुए मैंने विजय का लिंग मुँह में भर लिया.विजय की टीस निकल गई.
मैं- क्या हुआ?विजय- खुद देखो.
मैं विजय का लंड निकाल कर देखने लगी, वह कई जगहों से छिला और कट गया था?“इसे क्या हुआ?”विजय- तुम्हारी चूत ने इसका यह हाल किया है!
मैं- अच्छा, तो अब नहीं कर पाओगे?विजय- ऐसा मैंने कब कहा? अभी तो तुम्हारी चूत को इस हरकत की सज़ा मिलेगी.मैं- तो दो ना सज़ा!
विजय- सज़ा नहीं, इनाम मिलेगा इसे सारी रात!यह कहते हुए विजय ने मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया और गोदी में उठा कर फूलों की सेज पर लिटा प्रिया.
मैं कसमसा गयी.
अब विजय ने धीरे से मेरी नाइटी निकाल फेंकी.मैं पूरी नग्न अवस्था में लेटी रही. वह मुझे सर से पांव तक चूमने लगा और बारी बारी से मेरे अंगों को चूसने लगा.अब वह मेरे दाहिने स्तन पर आकर रुक गया और निप्पल को जीभ से छेड़ने लगा.
फिर वह उठ कर बैग के पास गया और उसमें से कुछ निकाल कर मेरे पास आकर ऊपर लेट गया.उसने वह चीज निकाली, जो असल में शहद की शीशी थी.
आंटी अब चुद भी जाओ ना-3
बोतल खोल कर उसने मेरे निप्पल पर शहद टपका प्रिया और पूरे स्तन को मुँह में भर कर चूसने लगा.
मेरे तो तन बदन में जैसे तरंगें मचल उठीं.मैं अपने हाथ बेड पर मारने लगी.
उसने आधे घंटे में मेरे इस दूध को भी खींच डाला, मैं प्यार से उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी.
अब उसने दोनों चूचों को अपने हाथों में भरा और मसलना शुरू कर प्रिया.मुझे पोर्न लव में मजा आने लगा और मैंने अपने पैर फैला दिए.
अब विजय ने मेरे स्तन छोड़ दिए और मेरे बगल में लेट गया.मैं उसकी तरफ देखने लगी तो उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और होंठों को चूसने लगा.
मेरी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और बूंद बूंद पानी टपक कर विजय के पेड़ू पर गिर रहा था.उसने मेरी चूत को छुआ और उंगली से घिस प्रिया.
फिर बोला- तुम्हारी चूत तैयार हो गयी है, अब तुम शुरू हो जाओ. मैं नीचे से मजे लूंगा.यह सुनकर मैं थोड़ा ऊपर उठी, ताकि विजय का लंड अन्दर ले सकूं.
लंड एकदम तना हुआ, नसें एकदम फूली हुई थीं तो मेरे तो पसीने छूटने लगे.फिर भी वासना से वशीभूत होकर मैंने लंड को थामा और चूत उस पर रख दी और धीरे धीरे अन्दर लेने लगी.
अभी सुपारा ही अन्दर गया था कि मैं ‘आह मम्मी रे मर गयी’ करके उठने को हुई.तभी विजय ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे नीचे घसीट लिया.
एक झटके में पूरा लंड मेरे अन्दर समा गया.पोर्न लव फक से मेरी तो जान ही निकल गयी.
मुझे लग रहा था कि किसी ने कोई गर्म गर्म सरिया मेरे अन्दर पेट तक डाल प्रिया हो.मेरी चूत बुरी तरह से फट गई थी और विजय के लंड से खून की धार रिस कर आ गयी.विजय चौंकते हुए मुझे देखने लगा.
मैं उस पर बैठी हुई थी तो विजय ने धक्के लगाने का इशारा किया.तब मैं उसके लंड पर हिलने लगी पर दर्द के कारण मजा नहीं आ रहा था.
तो विजय ने मेरे चूतड़ पकड़ कर मुझे ऊपर नीचे करना शुरू कर प्रिया.
अब तो इतना मजा आया कि मैं विजय पर लेट गयी और अपना एक स्तन उसके मुँह में दे प्रिया.वह मेरे दूध को चूसने लगा और मैं आह ह्म्म उफ उफ करने लगी.
तभी मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ प्रिया और मैं विजय पर निढाल हो गयी.विजय नीचे से धक्के लगाता रहा, मैं पसीने से तर उस पर यूं ही पड़ी पड़ी चुदवाती रही.
उसका सीना मुझे किसी सेज से कम नहीं लग रहा था, जिस पर मैं उसकी धड़कन साफ साफ सुन रही थी.करीब पंद्रह मिनट तक चुदवाने के बाद मैं विजय के बगल में लेट गयी और मैंने उसी की तरफ करवट ले ली.
वह मुझे ही देख रहा था. मैंने उसको बेतहाशा चूमना शुरू कर प्रिया.
उसने कहा- अभी मेरा हुआ नहीं है!
मैंने अपनी बांहें फैला कर उसको इशारा किया कि तो अब कर लो.
यह इशारा पाते ही विजय ने उठ कर पोजीशन ले ली.वह मेरी फट चुकी चूत को देख रहा था, जिसमें से खून और कामरस दोनों रिस रहे थे.
उसने मेरी नाइटी से चूत को पौंछा, फिर चूत पर भी शहद लगा प्रिया और चूत की दोनों फांकों को एक साथ मुँह में भर कर चूसने लगा, साथ ही दांत से दबाने लगा.
इससे मेरी तो हालत खराब होने लगी, मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगीं- ओ मां ऊंम्म्म ह्फ आउ आह आआह!
मेरी ये आवाजें लगातार निकल रही थीं.उसके निरंतर चूसने से मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर प्रिया था, जिसे विजय पूरा पी गया.
अब उसने चेक किया कि अन्दर चिकनाई ठीक है.तब भी उसने अपने लंड पर नारियल का तेल लगाया और मेरे मुँह को चूमता हुआ अपना लंड मेरी चूत पर घिसने लगा.मैंने अपने दोनों हाथ उसके कंधों पर रख दिए और मैं लता की तरह उससे लिपट गयी.
मेरे मुँह को अपने मुँह में भर कर उसने एक ज़ोरदार झटका प्रिया, उसका लंड एक बार में ही मेरी चूत को रगड़ता हुआ अन्दर तक जा घुसा.मैंने आंख खोल कर देखा तो उसका लंड अभी दो इंच बाहर ही दिख रहा था.
मैंने नीचे से दबाव बनाया तो थोड़ा सा और अन्दर घुसा, पर अब मेरी चूत जैसे फटने सी लगी थी.विजय ने उतना लंड ही अन्दर बाहर करना शुरू कर प्रिया और मैं आनन्द के सागर में बह चली.
विजय ने अब तेज धक्के लगाते हुए मेरे स्तन पीने शुरू कर दिए.वह बारी बारी से जब उनको खींचता तो मुझे बड़ा मज़ा आता था.
मैं अपने प्यार से जबरदस्त चुदाई का मज़ा ले रही थी और मन ही मन ऐश्वर्या (विजय की वह गर्लफ्रेंड को याद कर रही थी, जिसने विजय को निराश किया था) और आंचल (मेरी सहेली) जिसने मुझे इसके लिए तैयार किया, उन दोनों का शुक्रिया कर रही थी.उन दोनों की वजह से ही मुझे ऐसी जबरदस्त चुदाई नसीब हुई.
विजय मुझे लगातार बहुत देर तक चोदता रहा, फिर मेरे अन्दर ही स्खलित हो गया.मेरी चूत फिर से उसके वीर्य से भर गई.
इस वक्त रात के दो बज गए थे, लम्बी चुदाई के बाद विजय भी थक कर सोने लगा था.मैं उसके सीने पर अपने स्तनों को दबा कर सो गई.
नीचे से विजय का लंड मेरे पीछे छू रहा था.मैं विजय को चूमते हुए पता नहीं कब सो गई.
विजय ने मुझे रात में तीन बार और चोदा, फिर आखिरी राउंड उसने सुबह नौ बजे लगाया.
मैं विजय के यहां लगभग दस दिन रुकी और बिना नागा किए हमने बहुत चुदाई की. एक दिन में कम से कम पांच बार पोर्न लव फक तो होता ही था.
विजय ने रविवार को नहाते हुए मेरी गांड भी मार ली थी.वह सेक्स कहानी बाद में लिखूँगी.
मैं जब लौटकर आई तो एक पूर्ण औरत बन चुकी थी, इतनी सारी चुदाई के बाद मेरे स्तन बड़े हो गए थे और रस से भर गए थे.मेरी गांड बाहर निकल आयी थी और फिगर पूरा ही बदल गया था.
मैं जब भी अपनों से अलग होती तो हल्का सा सिंदूर भी लगाने लगी थी.
इतनी चुदाई और बाद मैं होटल में भी विजय से चुदते रहने के कारण जल्द ही मेरा गर्भ भी ठहर गया था.
मेरी चुदाई की कहानी सुनकर मेरी सहेली आंचल भी विजय के साथ सेक्स करना चाहने लगी.
मैंने उसकी सैटिंग विजय के साथ करवा दी क्योंकि वह शादीशुदा थी तो मुझे विजय को खोने का डर नहीं था.
उसके चुदने की कहानी को मैं बाद में बताऊंगी.विजय अब नोएडा में रहता है … अभी हमारी शादी नहीं हो पायी है.
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