होम पर वापस जाएं
इंडियन बीवी की चुदाई पठन समय: 22 मिनट पढ़ा गया: 1,008 बार

संतान के लिए परपुरुष सहवास -2

टी पी एल

24 Nov 2013 को प्रकाशित

संतान के लिए परपुरुष सहवास -2
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

कहानी का पिछला भाग :संतान के लिए परपुरुष सहवास -1

मैंने सुनीता कहा- सुनीता, उस पर-पुरुष को तुम जानती हो और इस पृथ्वी पर तुम्हीं एक इंसान हो जो उसे मेरे साथ सहवास करने के लिए सहमत कर सकती हो। तुम मेरे लिए भगवान हो और मेरी सहायता का आश्वासन देकर तुम मेरे सभी बिगड़े काम बना सकती हो। तुम्हारे द्वारा किया गया यह काम मेरे जीवन को ख़ुशी और उल्लास से भर देगा।

मेरी बात पर झल्लाते हुए सुनीता बोली- मुझे तुम्हारी कोई भी बात समझ नहीं आ रही, तुम सीधा सीधा यह बताओ कि तुम मुझसे क्या सहायता चाहती हो और वह पर-पुरुष कौन है?तब मैंने सीधी बात करते हुए कहा- सुनीता, मैं तुमसे यानि कि अपनी छोटी बहन से अपने कुछ विशेष दिनों में तुम्हारे पति के कुछ समय के लिए भीख मांगती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे उन विशेष दिनों में मुझे कुछ समय के लिए अपने पति के साथ सोने की अनुमति दे दो और उन्हें मेरे साथ सहवास करने के लिए राज़ी भी करो।

मेरी बात सुन कर सुनीता तिलमिला उठी और गुस्से से ना जाने मुझे क्या क्या कहती हुई और पैर पटकती हुई अपने घर चली गई।उसके बाद दो दिन तक हम दोनों में कोई मुलाकात नहीं हुई और हम दोनों ने एक सरे की शक्ल भी नहीं देखी।

तीसरे दिन सुबह जब मैं अपने पति को विदा करने के लिए बालकनी में खड़ी थी तब सुनीता भी अपने पति को विदा करने बाहर आई।दोनों पतियों के जाने के बाद जब मैं मुड़ कर अन्दर जाने लगी तब सुनीता ने मुझे पुकारा- अमृता, क्या तुम अभी इसी समय कुछ देर के लिए मेरे घर आ सकती हो, मुझे तुमसे कुछ आवश्यक बात करनी है।

मैंने ‘अच्छा’ कहा और उसी तरह घर बंद करके उसके घर चली गई।सुनीता जो अपने घर के दरवाज़े पर मेरा इंतज़ार कर रही थी ने मुझे गले लगा कर मेरा स्वागत किया और फिर खींच कर घर के अंदर अपने बेडरूम में ले गई।

कमरे में पहुँचते ही उसने एक बार फिर मुझे गले से लगाया और कहा- अमृता, मुझे उस दिन के लिए क्षमा कर देना। पता नहीं मुझे क्या हो गया था जो मैंने तुम्हें इतना बुरा भला कह प्रिया था।

मैंने कहा- क्षमा मांगने की कोई बात नहीं, ऐसा कई बार हो जाता है। मैं तो उस बात को भूल ही चुकी हूँ और अच्छा होगा की तुम भी उस दिन को भुला दो।मेरी बात सुन कर सुनीता बोली- उस दिन तुम्हें बुरा भला कहने के बाद मुझे बहुत बुरा लगा और मैं उस रात भर सोई ही नहीं। सुबह तडके जब संजीव जी की नींद खुली और मुझे जागते हुए देखा तब उनके पूछने पर मैंने उन्हें पूरी बात बता दी।

उसकी बात सुनते ही मैने चौंक कर पूछा- क्या..! क्या तुमने हमारे बीच हुई पूरी बात अपने पति को बता दी?सुनीता ने बड़े भोलेपन से कह प्रिया- हाँ, मैंने तुम्हारे और मेरे बीच हुई सभी बातें बता दी। मैं अपने पति से कुछ भी नहीं छुपाती इसलिए उनके पूछने पर मैं अपने को रोक नहीं सकी।

सुनीता की बात सुन कर मन ही मन मुझे थोड़ी ख़ुशी हुई की उसने बात आगे बढाने के लिए रास्ता खोल प्रिया था लेकिन झूठ-मूठ का गुस्सा दिखाते हुए मैं बोली- तुम भी पागल हो, क्या ऐसी आपस की बाते भी अपने पति से साझा करते है?उसने तुरंत उत्तर प्रिया- अमृता, तुमने ही तो कहा था की मैं अपने पति को तुम्हारे साथ सहवास करने के लिए सहमत करू। अगर मैं उनसे बात करके उनको सब कुछ नहीं बताउंगी तो उन्हें राज़ी कैसे करुँगी?

सुनीता की बात सुन कर मैंने कहा- तो फिर बताओ तुमने अपने पति से मेरे बारे में क्या बातें करी?मेरे प्रश्न के उत्तर में उसने कहा- मैंने अपने पति को तुम्हारे बारे में सब कुछ बताया और तुम्हारे सबसे बड़े दर्द से उनको अवगत कराया। जब उन्होंने हॉस्पिटल में जा कर इलाज कराने की बात करी तब मैंने उनको उसके बारे में भी विस्तार से बताया। अंत में जब मैंने तुम्हारे पर-पुरुष सहवास के सुझाव के बारे में उनको बताया तो वह भी मेरी तरह झल्ला उठे और मेरे ऊपर ही बरस पड़े।

फिर सुनीता बिना रुके बोली- उसके बाद मेरे पति ने दो दिन तक मुझसे कोई बात नहीं करी और मेरे साथ संसर्ग भी नहीं किया। बीती रात जब मैंने उनके साथ ज़बरदस्ती संसर्ग किया तब उसके पश्चात ही उन्होंने तुम्हारे बारे में आगे कुछ बात करी। उन्होंने तुम्हारी सास और पति के रूढ़ीवादी विचारों का उत्तर देने के तुम्हारे पर-पुरुष सहवास वाले सुझाव को सही बताया।

मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हारे पति में मेरे साथ सहवास करने का मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है?मेरी बात के उत्तर में सुनीता ने कहा- नहीं, अभी नहीं, पहले तो मैंने उन्हें सिर्फ तुम्हारे सुझाव के बारे में ही बताया था। जब उन्होंने तुम्हारे द्वारा सुझाये गए पर-पुरुष के बारे में पूछा तब उन्हें तुम्हारा प्रस्ताव बताया था।

मैंने जिज्ञासावश पुछा- सुनीता, मेरा प्रस्ताव सुन कर तुम्हारे पति ने क्या कहा?”सुनीता बोली- अमृता, तुम्हारा प्रस्ताव सुन कर मेरे पति कुछ देर के लिए तो बिल्कुल चुप हो गए थे लेकिन बाद में उन्होंने मुझसे ही पूछ लिया कि क्या मैं उन्हें तुम्हारे साथ सहवास करने की अनुमति दे दूंगी।

मैंने उत्सुक होते हुए झट से पूछा- सुनीता तुमने अपने पति से क्या कहा? मुझे मालूम है कि किसी भी स्त्री के लिए उसके पति का किसी पर-स्त्री से सम्बन्ध सहन करना बहुत कठिन होता है। लेकिन मुझे तुम पर असीम विश्वास है कि तुमने अपनी सहमति अवश्य ही दे दी होगी।

मेरी बात सुन कर सुनीता बोली- अमृता, तुमने सही कहा है कि किसी भी स्त्री के लिए ऐसा निर्णय लेना बहुत कठिन होता है लेकिन मैंने तुम्हारे हालात को ध्यान में रखते हुए अपने मन पर भारी सा पत्थर रख प्रिया और अपने पति को सिर्फ तुम्हारे साथ ही सहवास पर कोई आपति नहीं करने की बात कह दी।

उसकी बात सुन कर मैंने उसे आगोश में ले कर बोली- सुनीता, तुम सच में मेरी छोटी बहन से भी बढ़ कर हो। तुमने यह सहमति दे कर मुझ पर एक बहुत बड़ा एहसान किया है जिसे मैं पूरे जीवन भर तुम्हारी गुलामी करके भी नहीं उतार सकती।

फिर मैं सुनीता के पांव पकड़ कर उन्हें चूमने लगी और जब उसने मना किया तब मैंने कहा- मेरा तो मन कर रहा है कि मैं रोज़ सुबह उठ कर सबसे पहले इन्हें अपने हाथों से धोकर उस पानी को पीऊँ और तुम इसे चूमने को भी मना कर रही हो। अच्छा, यह तो बताओ कि तुम्हारी अनुमति मिलने के बाद तुम्हारे पति ने क्या कहा?

सुनीता बोली- मेरी बात सुन कर मेरे पति ने कहा कि वह अपना निर्णय देने से पहले एक बार तुमसे बात करना चाहते हैं इसलिए क्या तुम उनसे बात करने के लिए आज रात को हमारे घर आ सकती हो?सुनीता की बात सुन कर मैं कुछ विस्मित हो कर बोली- उन्हें मुझसे क्या बात करनी है? मेरी ओर से भेजा गया प्रस्ताव ही मेरी सहमति के लिए काफी है। फिर रात में तो मेरे पति भी घर पर होंगे और उनके बिना तुम्हारे घर आना मेरे लिए असम्भव होगा।

मेरी बात सुन कर सुनीता बोली- अमृता, मुझे नहीं मालूम कि मेरे पति तुमसे क्या बात करना चाहते हैं। यह तो उनसे मिलने के बाद ही तुम्हें पता चलेगा। जब उन्हें तुम्हारे साथ सहवास करना है तब तो उनका पूरा हक बनता है तुमसे अकेले में उस बारे में बात करने का। हो सकता है कि वह उस क्रिया से पहले अपना और तुम्हारे संकोच दूर करना चाहते हों!

तभी सुनीता के कमरे की खिड़की में से मुझे मेरे पति घर को ओर आते हुए दिखाई दिए तो मैं चिंतित सी भाग कर उनसे पहले घर पहुँच गई।जब उनसे जल्दी घर आने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि कम्पनी में एक नई मशीन आई थी जिसे स्थापन और चालू करने के लिए उन्हें अगले तीन सप्ताह के लिए रात की पारी में जाना पड़ेगा।

मैंने जल्दी से कुछ खिला पिला कर कर सोने प्रिया और वापिस सुनीता के घर जाकर उसे बता प्रिया कि मैं उस रात को दस बजे के बाद ही आ पाऊँगी।उसके बाद कुछ देर सुनीता के साथ बैठ कर इधर-उधर की बातें करने के बाद मैं अपने घर वापिस आ गई।

रात को साढ़े नौ बजे पति के जाने के बाद जब मैं दस बजे सुनीता के घर पहुंची तब उसके पति संजीव ने दरवाज़ा खोला और मुझे देखते ही कहा- आओ अमृता, अंदर आ जाओ। हम तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे थे।फिर बैठक में रखे बड़े सोफे पर मुझे बैठने के लिए कह कर वह मेरे पास ही बैठते हुए जोर से बोले- सुनीता, अमृता भी आ गई है, उसके लिए भी कॉफ़ी लेती आना।

थोड़ी देर बाद सुनीता कॉफ़ी ले कर बैठक में आई और उसने संजीव और मुझे कॉफ़ी दे कर अपना कप लेकर संजीव के दूसरे ओर बैठ गई।संजीव ने कॉफी का एक घूंट भरते हुए कहा- सुनीता, क्या तुम एक बार फिर से अमृता का प्रस्ताव बताओगी।सुनीता ने एक बार फिर मेरी दुविधा, सुझाव और प्रस्ताव का विवरण विस्तार से बोल प्रिया जिसे सुनने के बाद संजीव ने मेरे पास सरकते हुए कहा- अमृता, क्या सुनीता ने जो कहा है वह सच है और तुम अपने प्रस्ताव पर अभी भी अडिग हो?

मैंने संजीव की आँखों में आँखें डालते हुए कहा- हाँ, सुनीता ने जो भी कहा है वह सत्य है और मैं अभी भी अपने प्रस्ताव पर अडिग हूँ।इसके अलावा मेरे पास और कोई अन्य विकल्प भी नहीं है।मेरी बात सुन कर संजीव बोला- मुझे विश्वास है कि अपनी दुविधा को सुलझाने के लिए अवश्य ही सोच समझ कर यह प्रस्ताव प्रिया होगा। मैं तो सिर्फ यह जानना चाहता हूँ कि तुमने हमें ही यह प्रस्ताव क्यों प्रिया और किसी को क्यों नहीं प्रिया?

मैं संजीव से ऐसे ही प्रश्न के लिए तैयार थी, इसलिए तुरंत बोली- ऐसे प्रस्ताव मेरे जीवन को नर्क बना सकते हैं इसलिए यह हर किसी को नहीं प्रिया जाता है। मेरे लिए आप दोनों बहुत बुद्धिमान एवं विश्वसनीय इंसान हो इसीलिए मैंने यह प्रस्ताव आपके समक्ष रखा है। अगर आपको मेरा प्रस्ताव ठीक नहीं लग रहा है तो आप इसे अभी इसी समय अस्वीकार कर दीजिये। मैं और प्रतीक्षा नहीं कर सकती क्योंकि मैंने अपने जीवन में आने वाले असीमित दुखों को झेलने के लिए तैयारी भी करनी है।

संजीव ने मेरे बहुत करीब आते हुए पूछा- अमृता, क्या हमारे द्वारा तुम्हारा प्रस्ताव अस्वीकार करने के बाद तुम यह प्रस्ताव किसी और के पास नहीं ले कर जाओगी? क्या तुम्हें हम पर विश्वास है कि हम तुम्हारी इस बात को किसी और के साथ साझा नहीं करेंगे?मैंने खड़े होते हुए कहा- नहीं, कदापि नहीं। मैंने यह प्रस्ताव सिर्फ आपके लिए ही सोचा था और किसी के लिए नहीं। मुझे सुनीता पर अपने से अधिक विश्वास है कि वह मेरी यह बात आपके अलावा किसी ओर से साझा नहीं करेगी और आप सुनीता की अनुमति के बिना इस बात पर कोई चर्चा भी नहीं करेंगे।

संजीव ने खड़े होकर मेरे कन्धों पर हाथ रखते हुए मुझे बैठने को कहा और सुनीता से पूछा- सुनीता, तुम क्या कहती हो इस प्रस्ताव के बारे में? हमें इसे क्या करना चाहिए – स्वीकार या अस्वीकार?इस अचानक पूछे गए प्रश्न से सुनीता सकते में आ गई लेकिन फिर अपने को सम्भालते हुए कहा- जैसा आप ठीक समझे। मुझे आपके द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं होगी।

फिर मेरी ओर मुख करते हुए संजीव बोला- अमृता, मैंने तुम्हारी दुविधा और उसके संदर्भ में ही तुम्हारे प्रस्ताव पर बहुत सोचा है और उसे स्वीकार करने के लिए मेरी कुछ शर्तें हैं, मैं तुम्हें वह शर्तें अभी बता देता हूँ और तुम उन पर अच्छे से विचार करके अपना पक्ष बता देना।

यह भी पढ़ें (Recommended)

मीनूर प्रेम मिलन-3

उसके बाद संजीव ने पहली शर्त बताई- अगर सहवास के दौरान सुनीता पर कमरे में आने जाने की कोई पाबंधी नहीं होगी तभी वह मेरे साथ सहवास करना स्वीकार करेगा।

दूसरी शर्त बताई- सहवास सिर्फ रात में दस बजे के बाद और सुबह पांच बजे से पहले ही होगा और पांच बजे मुझे अपने घर चले जाना अनिवार्य होगा।

तीसरी शर्त बताई- इस सहवास से मुझे गर्भ ठहरे तो ठीक है और अगर गर्भ नहीं ठहरेगा तो भी इसके लिए संजीव को कदापि उत्तरदाई नहीं समझा जाएगा।

चौथी शर्त बाताई- इस सहवास के दौरान मुझे या संजीव में से किसी को भी अगर कोई असुविधा या क्षति होगी उसके लिए वह खुद ही उतरदाई होगा।

पांचवी शर्त बताई- यह सहवास एक समय-बध कार्यक्रम के अनुसार केवल मुझे गर्भ ठहरने तक ही जारी रहेगा तथा उसके बाद हम दोनों में से कोई भी ऐसी क्रिया के लिए फिर कभी नहीं कहेगा।

इसके बाद संजीव ने कहा- इन पांच शर्तों के बारे में अच्छे से सोच कर हमें बता देना, फिर आगे बात करेंगे।मैंने तुरंत ही उत्तर प्रिया- इनके बारे में सोचना क्या, यह तो सभी मुझे स्वीकार्य हैं। लेकिन मुझे आप दोनों से एक वचन चाहिए किआप इस सहवास के बारे में सभी बातों को जीवन भर अपने तक ही सीमित रखेंगे और किसी से भी साझा नहीं करेंगे।दूसरी बात यह है कि इस सहवास से होने वाली संतान पर सिर्फ मेरा ही अधिकार होगा और आप दोनों उस पर कभी भी कोई दावा नहीं करेंगे।

मेरी बात सुन कर संजीव ने सुनीता की तरफ देखा और उसके सर हिलाने पर कहा- अमृता, तुम्हारी दोनों बातें बिल्कुल न्यायसंगत हैं और हम दोनों को स्वीकार्य है।इसके बाद सुनीता उठ कर बोली- चलो, सब बातें तय हो गई हैं तो अब एक एक कप कॉफ़ी और हो जाए।

मेरे और संजीव के हाँ कह देने पर जब सुनीता रसोई में चली गई तब संजीव मुझसे बोला- अमृता, मैं एक बात तो तुमसे कहना भूल ही गया था। देखो अब हम दोनों कुछ दिनों के बाद तुम्हें गर्भवती करने के लिए यौन संसर्ग करेंगे इसलिए मैं चाहूँगा कि तुम मेरे लिंग को अच्छे से देख-परख लो। अगर तुम्हें लगे कि वह तुम्हें स्वीकार्य नहीं है तो साफ़ साफ़ बता देना हम इस सहवास का कार्यक्रम अभी रद्द कर देंगे।

संजीव की बात सुन कर मुझे भी जिस लिंग से संसर्ग करना है उसे देखने की लालसा जाग उठी तब मैंने उसे लिंग दिखाने के लिए हाँ कह दी।

मेरी ओर से हाँ सुन कर संजीव ने खड़े हो अपना पजामा नीचे किया और अपने लिंग को मेरे सन्मुख पेश कर प्रिया।उसके तने हुए लिंग देख कर एक बार तो मैं चौंक गई क्योंकि उसका लिंग लगभग सात से साढ़े सात इंच लम्बा था और ढाई इंच मोटा था तथा उसका लिंग-मुंड तो तीन इंच मोटा था।

मेरे पति का लिंग लम्बाई में तो सात इंच का है लेकिन लिंग-मुंड सहित उसकी मोटाई सिर्फ दो इंच ही है।इतने में रसोई से सुनीता के आने की आहट सुन कर संजीव ने अपने पजामे को झट से ऊँचा कर के लिंग को अन्दर किया और सोफे पर बैठ गया।

सुनीता ने हम दोनों को कॉफ़ी दी और फिर संजीव से चिपक कर बैठती हुई बोली- अमृता, अब तो थोड़ा मुस्करा दो और अपने चेहरे से चिंता की सुमनएं हटा लो। संजीव ने तुम्हारी समस्या को तुम्हारी इच्छा अनुसार हल कर प्रिया है अब यह तो बता दो कि सहवास कब करना है?

मैंने अपने चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कराहट लाते हुए कहा- कल मेरी लाल झंडी का आखरी दिन है|, उसके आठ दिनों के बाद से मेरी अण्डोत्सर्ग अवधि शुरू हो जायेगी। इसलिए हमें आठवें दिन से सहवास तो शुरू करना पड़ेगा और वह अगले आठ दिनो तक हर रोज़ चलेगा। लेकिन अगर आप दोनों की अनुमति मिल जाए तो मैं चाहूंगी कि मैं आपके साथ सातवें दिन से ही संसर्ग शुरू करके अगले दस दिन तक करती रहूँ।

संजीव ने पूछा- अमृता, तुम दो दिन अधिक सहवास क्यों करना चाहती हो?मैंने उत्तर प्रिया- संजीव जी, मैं कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती हूँ इसलिए दो दिन अधिक सहवास कर के यह सुनिश्चित करना चाहती हूँ कि मैं इसी सहवास में गर्भवती अवश्य हो जाऊँ।

मेरी बात सुन कर सुनीता बोली- अमृता, उन दिनों में तुम रोहित जी से क्या कह कर यहाँ आओगी?उसकी बात सुन कर मैं बोली- मैं आप दोनों को यह बताना तो भूल गई थी कि इश्वर की कृपा में से मेरी वह समस्या भी हल हो गई है। भाग्यवश कंपनी में एक नई मशीन को स्थापित करने से लेकर चलाने तक की प्रक्रिया के लिए रोहित को लगभग अगले एक माह तक रात्रि की पारी में जाना पड़ेगा। मैंने उसे कह प्रिया है कि अगर रात को मुझे अकेले सोने में भय लगेगा तो मैं सुनीता के पास सोने चली जाऊँगी या फिर उसको अपने पास बुला लूंगी।

उसके बाद जब मैं घर जाने के लिए खड़ी हुई तब सुनीता बोली- संजीव, जैसे की अब सभी बाते तय हो गई हैं इसलिए अब आप दोनों को गोपनीयता की शपथ ग्रहण कर लेनी चाहिए।सुनीता की बात सुन कर मैंने तुरंत कहा- हम दोनों को नहीं बल्कि हम तीनों को यह शपथ ग्रहण करनी चाहिए।

तब संजीव बोला- सुनीता, मेरे ख्याल से अमृता सही कह रही है तुम्हें भी हमारे साथ शपथ ग्रहण करनी चाहिए। लेकिन हमारे घर में भागवत नीता तो है नहीं फिर हम किस वस्तु पर हाथ रख कर शपथ ग्रहण करेंगे?सुनीता बोली- क्यों न हम पूर्ण नग्न होकर एक दूसरे के गुप्तांगों पर हाथ रख कर यह शपथ ग्रहण करें?सुनीता की बात सुन कर संजीव ने कहा- मैं तो सुनीता के सुझाव से सहमत हूँ और मैं तो अपने कपड़े उतारना शुरू करता हूँ।

इतना कह कर संजीव ने अपना कुर्ता उतार कर सोफे पर फ़ेंक प्रिया और सुनीता एवं मुझसे से बोला- तुम दोनों अब किसकी प्रतीक्षा कर रही हो जल्दी से अपने कपड़े उतारना शुरू कर दो।संजीव की बात सुन कर सुनीता ने मुस्कुराते हुए अपनी नाइटी सिर के ऊपर करके उतारी और सोफे पर फ़ेंक दी।क्योंकि सुनीता ने नाइटी के नीचे कुछ भी नहीं पहना था इसलिए उसे उतारते ही पूर्ण नग्न हो गई थी।

तब संजीव ने मेरी और देख कर कहा- अमृता, क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकता हूँ?मैंने तुरंत नहीं कहते हुए अपनी नाइटी ऊँची की और सिर के ऊपर से उतार कर सोफे पर रख दी।क्योंकि मैंने लाल झंडी के कारण नाइटी के नीचे पैंटी पहनी हुई थी इसलिए मैं अर्ध नग्न ही हो पाई थी।

तब सुनीता ने हँसते कहा- मैं तो पूर्ण नग्न हूँ और तुम दोनों ने एक एक वस्त्र पहना हुआ है इसलिए अब तुम दोनों एक साथ ही अपने वस्त्र उतारो। मैं तीन तक गिनती हूँ और देखती हूँ की कौन पहले नग्न होता है।”और फिर बिना रुके सुनीता बोली- रेडी, एक… दो…. और तीन….

किसी पर-पुरुष के सामने निर्वस्त्र होते हुए मुझे पहले तो कुछ संकोच हुआ लेकिन फिर मैंने अपने मन को समझाया कि कुछ दिनों के बाद संसर्ग के लिए तो संजीव के सन्मुख पूर्ण नग्न होना ही पड़ेगा।

पूर्ण नग्न होने के बाद सुनीता ने अपना एक हाथ संजीव के लिंग पर रख प्रिया और दूसरा हाथ मेरे एक स्तन पर रखा।फिर संजीव ने अपना एक हाथ सुनीता योनि पर रख प्रिया और फिर मुझे अपने पास बुला कर अपना दूसरा हाथ मेरे दूसरे स्तन पर रख प्रिया।

इसके बाद मैंने अपना एक हाथ सुनीता के दूसरे स्तन पर रख कर उन दोनों की ओर देखा तो सुनीता बोली- अब क्या देख रही हो? देर मत करो और जल्दी से मेरे हाथ में पकड़े हुए संजीव के लिंग के लिंग-मुंड को पकड़ लो।जैसा सुनीता ने कहा, मैंने वैसा ही किया तब सुनीता ने शपथ बोली और संजीव और मैंने उसके पीछे पीछे दोहरा दी।

शपथ ग्रहण होते ही सुनीता ने मेरे स्तन से हाथ हटा कर नीचे बैठ गई और संजीव के लिंग-मुंड से मेरा हाथ हटते ही उसे अपने मुँह में छुपा लिया।संजीव का लिंग सुनीता के मुँह में जाते ही उसने सुनीता के स्तन से अपना हाथ हटा कर मेरे दोनों स्तनों को पकड़ कर मसल प्रिया।मैं दर्द से कहराते हुए अपने को उससे छुड़ाते हुए जल्दी से अपनी पैंटी और नाइटी उठा कर दूर हो गई और उन्हें पहनने लगी।

मुझे ऐसा करते देख कर सुनीता और संजीव भी अलग हो गए और अपने अपने वस्त्र पहन लिए तथा मुझे विदा करने के लिए अपने घर के दरवाज़े तक आये।

अपने घर जा कर देखा तो घड़ी पर बारह बज चुके थे इसलिए मैं बिस्तर पर सोने के लिए में लेट गई।क्योंकि मेरी समस्या हल हो चुकी थी और मन शांत था इसलिए पता ही नहीं चला कि मुझे कब नींद आ गई।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी का तीसरा भाग :संतान के लिए परपुरुष सहवास -3

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

संतान के लिए परपुरुष सहवास

कुल भाग: 3
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

पति पत्नी और औलाद का सुख
इंडियन बीवी की चुदाई

पति पत्नी और औलाद का सुख

मेरा नाम कोमल है और मेरी उम्र 30 साल है। मैं एक कंपनी में बहुत अच्छी नौकरी करती हूँ। मेरे पिता कुछ समय पहले तक इसी कंपनी में महाप्रबंधक थे जिसकी वजह से मुझे नौकरी ढूंढने में कोई परेशानी नहीं हुई।अब वो सेवा निवृत्‍त हो चुके हैं। मगर उनकी वजह से मुझ...

26 मिनट 562
मीनूर प्रेम मिलन-3
इंडियन बीवी की चुदाई

मीनूर प्रेम मिलन-3

मैं घूम कर फिर से उनके सीने से लग गई और उनके गले में बाहें डाल कर उनके होंठों पर एक चुम्बन ले लिया। जैसे किसी शरारती बच्चे को किसी भूल के लिए क्षमा कर प्रिया जाये तो उसका हौसला और बढ़ जाता है प्रेम ने भी मेरे होंठों, गालों और उरोजों की घाटी में चुम्ब...

15 मिनट 700
बीवी की चुदाई नकली पुलिस वालों से
इंडियन बीवी की चुदाई

बीवी की चुदाई नकली पुलिस वालों से

दोस्तो, मैं अपनी बीवी की चुदाई की कहानी आपको बताना चाहता हूँ. कहानी शुरू करने से पहले से मैं आपको बता दूँ कि मेरी बीवी काफी सुन्दर है और एक मॉडल जैसी लगती है. उसकी इसी खूबसूरती ने उसको दो लौड़ों के साथ चुदवा प्रिया.

17 मिनट 1,075

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

दीपक 2

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।