होम पर वापस जाएं
इंडियन बीवी की चुदाई पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 554 बार

ससुर और बहू की कामवासना और चुदाई-1

सुकान्त शर्मा

21 Oct 2019 को प्रकाशित

ससुर और बहू की कामवासना और चुदाई-1
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

“उफ्फ…अब हट भी जाइये, अब और कितना रगड़ोगे मुझे. आधा घंटा से ऊपर हो गया; मेरा तो दो बार हो भी चुका. थक गयी मैं बुरी तरह से सांस फूल गयी मेरी तो” मेरी रानी ने भुनभुनाते हुए कहा और मुझे परे धकेलने की कोशिश की.

“बस मेरी जान, होने वाला है, मेरा भी बस दो तीन मिनट और!” मैंने कहा और रानी (मेरी धर्मपत्नी) की चूत में ताबड़तोड़ धक्के लगा के जल्दी झड़ने की कोशिश करने लगा.रानी मेरे नीचे अपनी जांघें पूरी चौड़ी किये हुए पड़ी थी और उसकी अथाह गहरी चूत में मैं अपना लंड पेले जा रहा था. बेडरूम रानी की चूत से निकलती फचफच फचाफच की मीनूर ध्वनि से गूँज रहा था, उनकी चूत से जैसे रस की नप्रिया सी बह रही थी. मेरी झांटें, जांघें, बिस्तर सब के सब उसकी चूत के रस में भीग चुके थे.

“उमर हो गयी आपकी, बच्चों की शाप्रियाँ हो गयीं लेकिन आपकी आदतें आज भी वही जवानी वाली हैं जैसे कल ही शादी हुई हो अपनी. अरे अब थोड़ा धरम करम में भी मन लगाया करो!” रानी जी ने मुझे ज्ञान प्रिया.“ठीक है मेरी जान, तू भी तो पचास की होने वाली है लेकिन तेरी ये मस्त चूत अभी भी वैसी ही जवान छोरी की तरह है जैसी तीस साल पहले थी” मैंने बीवी को मक्खन लगाया और उनकी चूत में फुर्ती से धक्के मारने लगा.

“सैय्याँ जी, अब रहने भी दो ये मक्खन बाजी. मैं पहचानती हूं आपको अच्छे से. बस इसी टाइम मेरी तारीफ़ करते हो आप, मतलब निकल जाय फिर पहचानते नहीं.”“मेरी जान, तू ही तो मेरी अर्धांगिनी है. अरे तेरे सहारे ही तो मैं ये भव सागर पार उतरूंगा ना!” मैं अपनी बीवी को चूमते हुए कहा.“हूंम्मम्म, अच्छा सुनो एक मिनट ध्यान से; मैं वो तो बताना भूल ही गयी; अभी दोपहर में अदिति का फोन आया था आप उससे बात कर लेना कल सवेरे!”

“अदिति बहूरानी का फोन? किसलिए बात करना है?” मैंने कहा. अदिति बहूरानी का नाम सुनते ही मेरा लंड अचानक ही फूल कर कुप्पा हो गया. मैंने रानी के दोनों बूब्स पकड़ के लंड को बाहर तक खींच के एक पावरफुल शॉट उसकी चूत में मार प्रिया जैसे कि मैं अदिति बहूरानी को चोदता था.“हाय राम मार डाला रे!” रानी ने मुझे कसके अपनी बाहों में समेट लिया और अपनी टाँगे मेरी कमर में कस दीं. मेरे लंड ने भी लावा उगलना शुरू कर प्रिया उधर रानी की चूत तीसरी बार झड़ने लगी.

हम दोनों पति-पत्नी कुछ देर यूं ही एक दूजे की बांहों में पड़े अपनी अपनी साँसें काबू करते रहे. उनकी चूत रह रह के मेरे लंड को निचोड़ रही थी और फिर वो सिकुड़ गयी और मेरे लंड को बाहर धकेल प्रिया.पास पड़ी नेपकिन से रानी ने मेरा लंड अच्छे से पौंछ प्रिया और फिर अपनी चूत में घुसा कर उसे साफ़ करने लगी.

“हां, अब बता, अदिति क्या कह रही थी?” मैंने पूछा.“अरे वो उसके चचेरे भाई की शादी है न दिल्ली में. उसमें आपको जाना है उसी की बारे में बात करनी है उसे!”“ठीक है, मैं कल बात कर लूंगा बहूरानी से” मैंने कहा और सोने की कोशिश करने लगा.

प्रिय मित्रो, कहानी आगे बढ़ाने से पहले कुछ बातें मेरी पिछली कहानीबहूरानी की चूत की प्यासकी.इस कहानी में आपने पढ़ा था कि मेरे बेटे को दस दिन की ट्रेनिंग पर बाहर जाना था और बहूरानी को अकेली न रहना पड़े इसलिए मुझे उसके पास दस दिनों के लिए जाना पड़ा था. उन दस दिनों में हम ससुर बहू ने क्या क्या गुल खिलाये कैसी कैसी चुदाई हुई, वो सब आप पिछली कहानी में पढ़ चुके हैं. उस बात को डेढ़ साल से कुछ ऊपर ही हो चुका है.

इन डेढ़ सालों में मैंने अपनी बहूरानी को देखा नहीं है और न ही कभी फोन पर बातें कीं और न ही कोई वीडियो चैट की; वैसे बहूरानी का फोन तो लगभग रोज ही आता है लेकिन अपनी सास के पास. लेकिन मुझसे कोई बात नहीं होती; बस सास बहू आपस में ही बतियाती रहतीं हैं.

अब मेरे बेटे का ट्रान्सफर बंगलौर हो गया है, कंपनी की तरफ से फ़्लैट भी मिला है तो बेटा बहू बंगलौर में ही रहते हैं अब.

एक बात और… अभी हफ्ते भर पहले अदिति बहूरानी के चाचा जी हमारे यहां आये थे उनके इकलौते बेटे की शादी का निमंत्रण देने के लिए. वे लोग दिल्ली में रहते हैं लड़की भी वहीँ की है तो शादी में किसी न किसी को दिल्ली तो जाना ही था. इस बारे में मैंने अपने बेटे से बात की तो उसने मना कर प्रिया कि उसे छुट्टी नहीं मिल रही. अब ऐसी स्थिति में मुझे ही जाना था शादी में.हालांकि अब शादी ब्याह में जाना मुझे अखरने लगा है लेकिन जब कोई खुद आ के निमंत्रण दे के जाए और रिश्ता भी ख़ास हो तो फिर जाना जरूरी हो ही जाता है.

इन्ही सब बातों को सोचते सोचते नींद ने कब मुझे घेर लिया पता ही न चला.

अगले दिन कोई साढ़े ग्यारह बजे श्रीमती जी ने मुझे फिर याद दिलाया कि अदिति से बात करनी है.“ठीक है तू अपने फोन से बात करा दे मेरी!” मैंने कहा.

रानी ने नंबर डायल करके फोन मुझे प्रिया और खुद किचन में चली गयी लंच की तैयारी के लिए. मैं फोन कान से लगाये चेयर पर बैठा था, घंटी जा रही थी. कोई आधे मिनट बाद अदिति ने फोन लिया.“हेलो मम्मी जी, नमस्ते!” अदिति की सुरीली आवाज मेरे कानों में गूंजी.मैं डेढ़ साल बाद इस आवाज को सुन रहा था.

“हेल्लो मम्मी जी??” उधर से फिर वो बोली.“हां, अदिति बेटा, मैं हूं. रानी तो किचन में है खाना बना रही है.” मैं बोला.“पापाजी नमस्ते, कैसे हैं आप?”“आशीर्वाद, मैं बिल्कुल ठीक हूं अदिति बेटा, तू कैसी है?”“मैं भी ठीक से हूं पापा जी!”

“बेटा, रानी कह रही थी कि तुझे मुझसे कोई बात करनी है?” मैंने कहा.“हां, पापाजी, वो मेरे भाई की शादी है न दिल्ली में. उसी के बारे में बात करनी थी.”“बोलो बेटा क्या बात है?”“पापाजी मैं भी चलूंगी शादी में… एक ही तो भाई है मेरा!”“ठीक है बेटा, तू फ्लाइट से दिल्ली आ जाना, मैं यहाँ से ट्रेन से पहुंच जाऊँगा.” मैंने कहा.

“नहीं पापा जी, आप पहले बंगलौर आओ. फिर हम दोनों साथ ट्रेन से ही दिल्ली चलेंगे.”“यह क्या कह रही है तू बहू? मुझे ट्रेन से बंगलौर आने में पच्चीस छब्बीस घंटे लगेंगे और फिर हम दोनों बंगलौर से दिल्ली जायेंगे ट्रेन से. तुझे पता है बंगलौर से दिल्ली जाने में कम से कम पैंतीस छत्तीस घंटे लगते हैं सुपरफास्ट ट्रेन से? बेटा तू तो वैसे ही फूल सी नाजुक है ट्रेन के सफ़र में तेरी हालत खराब हो जायेगी और मैं भी थक जाऊंगा” मैंने बहू को समझाया.

“पापाजी, मैंने ये सब पहले ही सोच रखा है. पहले आप यहां आओ तो सही फिर साथ चलेंगे.” बहूरानी ने जैसे जिद की.“ये क्या जिद है बेटा, तू फ्लाइट से आजा मैं यहां से ट्रेन से आ जाता हूं; इसमें क्या प्रॉब्लम है?”“पापा जी, हम दोनों साथ में और छत्तीस घंटे का सफ़र… जरा फिर से सोचो तो सही आप?”“हां हां, पता है छत्तीस घंटे लगते हैं ट्रेन में इसमें सोचना क्या. ट्रेन की खटर पटर में पूरी दो रातें और एक पूरा दिन निकालना किसी सजा से कम नहीं होगा. अदिति बेटा तेरे बदन की पोर पोर दुखने लगेगी और बुरी तरह थक जायेगी तू और मेरी तो कमर ही अकड़ जायेगी उठते बैठते. इसलिए बेकार की जिद मत कर और तू प्लेन से ही चली जा दिल्ली; मैं यहां से ट्रेन से आ ही जाऊंगा.”

“पापाजी, वही तो मैं चाहती हूं कि मैं थक जाऊं आपके साथ इन छत्तीस घंटों में और आप अच्छे से थका देना मुझे जिससे मेरे बदन की पोर पोर दुखने लगे, मेरे अंग अंग में मीठा मीठा दर्द होने लगे!” बहूरानी जी बेहद मीठी आवाज में बोली.“क्या क्या क्या… मैं समझा नहीं बेटा?” मैंने कहा.

लेकिन बहूरानी की बातों का अर्थ समझ कर मेरे दिमाग की बत्ती झक्क से जल उठी.

“पापा जी, आप भी ना कितने भोले हो… आप जरा गहराई से सोचो तो सही. मेरा मतलब है हम दोनों राजधानी एक्सप्रेस के ऐ सी फर्स्ट क्लास के प्राइवेट कूपे में जिसमें सिर्फ दो ही बर्थ होती हैं और जिसे हम भीतर से लॉक कर सकते हैं… फिर हम चाहे जो भी करें… कोई हमें डिस्टर्ब करने वाला नहीं; वो भी पूरी दो रातें और एक पूरा दिन तक लगातार. फुल स्पीड से दौड़ती राजधानीएक्सप्रेस में वो सब बेफिक्र हो कर करना कितना मजेदार और नया अनुभव होगा न और आपकी कमर जब ऊपर नीचे होती रहेगी तो अकड़ेगी कैसे पापा? ऐसे सोचो न पापा जी. वैसे भी हमें मिले हुए डेढ़ साल से ऊपर ही हो गया. मेरा तो बहुत मन कर रहा है आपसे मिलने को!”

“अच्छा अच्छा… अब समझा. तू जीनियस है अदिति बेटा और मैं कितना बुद्धू हूं.” मैंने कहा और खुद को जोर से चिकोटी काट के सजा दी कि यह बात मुझे पहले क्यों नहीं सूझी कि बहूरानी मुझे ट्रेन से ही चलने के लिए क्यों जोर दे रही है.

“तो ठीक है पापा जी, मैं बंगलौर-निजामुद्दीन राजधानी में ऐ सी फर्स्ट क्लास का दो बर्थ वाला कूपा रिज़र्व करवा लेती हूं आप छह तारीख को यहाँ आ जाना. हम लोग अगले दिन सात तारीख को दिल्ली चलेंगे. शादी तो दस दिसम्बर की है न!”“अदिति बेटा, कोई ऐसी ट्रेन देख न जिसमें छप्पन घंटे लगते हों दिल्ली पहुँचने में!” मैंने कहा.

“अब रहने दो पापाजी, अभी तो आप बात समझ ही नहीं रहे थे; अब मन में लड्डू फूट रहे हैं आपके. अब तो मैं फ्लाइट से ही जाऊँगी दिल्ली और आप आते रहना पैसेंजर ट्रेन से!” बहूरानी खनकती हंसी हंसते हुए बोली.“अरे रे रे… अदिति बेटा, ऐसा जुल्म मत करना अपने पापा पे… तू तो मेरी एकलौती प्यारी प्यारी बहूरानी है न!”“हम्म!” उधर से बहूरानी की आवाज आई.

“ठीक है बहूरानी. ट्रेन में तो मैंने भी कभी चुदाई नहीं की पहले. अब तेरी खैर नहीं. राजधानी से भी तेज स्पीड से चोदूँगा तुझे पूरी दो रातों तक; तेरी तंग चूत का भोसड़ा न बन जाए तो कहना!” मैंने कहा.उधर से बहूरानी की खनकती हंसी सुनाई दी और उसने फोन काट प्रिया.

मैंने फोन को चूमा और किचिन में जा के रानी को दे प्रिया और उसे अपना बंगलौर और दिल्ली जाने का प्रोग्राम बता प्रिया.

तो मित्रो, जिस दिन बहूरानी से ये सब बातें हुयीं, उस दिन पिछले साल नवम्बर की 20 तारीख थी और अगले महीने दिसम्बर की तीन तारीख को मुझे बंगलौर रवाना होना था ताकि मैं छह की सुबह बैंगलोर पहुंच सकूं; फिर अगले दिन सात को दिल्ली के लिए निकलना था वहां से. मतलब मेरे पास बारह तेरह दिन ही शेष थे. यह मेरा फर्स्ट चांस था कि मुझे किसी राजधानी एक्सप्रेस के ऐ सी फर्स्ट क्लास में, वो भी दो बर्थ वाले कूपे में ट्रेवल करने का अवसर मिल रहा था. सुन रखा था कि ऐ सी फर्स्ट क्लास का किराया हवाई जहाज जितना ही होता है..

खैर जो भी हो, मुझे कोई ख़ास तैयारी तो करनी थी नहीं, बस यह पता था कि दिसम्बर में दिल्ली में भयंकर सर्दी होती है तो उसी के हिसाब से मैंने अपने सूट टाई वगैरह सब ड्राई क्लीन करवा के रख लिए.हां, मेरी बहूरानी को बिना झांटों वाला चिकना लंड पसन्द है ताकि वो उसे आराम से चूस चाट सके; अब ये काम तो मैं जाने के दिन ही करने वाला था.

मेरी बीवी रानी को झांटों वाला लंड ज्यादा पसन्द है क्योंकि वो कभी इसे मुंह में नहीं लेती बस चुदवाते टाइम उसे अपनी कमर उठा उठा के अपनी चूत का दाना मेरी झांटों से रगड़ने में बहुत मज़ा आता है और वो ऐसे करते हुए अच्छे से झड़ जाती है.सास बहू की पसन्द हमेशा अलग अलग ही होती है न; इन चूत वालियों माया ही निराली है; किसी को कुछ तो किसी को कुछ और ही पसन्द आता है.

इस तरह हमारा प्रोग्राम सेट हो गया और मैं छह दिसम्बर की सुबह बैंगलोर जा पहुंचा. स्टेशन पर मेरा बेटा अपनी गाड़ी से मुझे रिसीव करने आया हुआ था; स्टेशन से घर पहुँचने में कोई पैंतीस चालीस मिनट लगे. मैं गाड़ी से उतर गया और बेटा गाड़ी को पार्क करने लगा.

ससुर बहू की कामवासना, प्रेम और चुदाई की कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

योगा से योनि तक-3
इंडियन बीवी की चुदाई

योगा से योनि तक-3

कहानी का पहला भाग :योगा से योनि तक-1कहानी का दूसरा भाग :योगा से योनि तक-2मेरी कहानी में अभी तक आपने पढ़ा कि मैंने गोवा में अपनी बीवी को योगा टीचर से चूत की चुदाई कराते देखा.अब आगे:

12 मिनट 308
मेरी सनसनी भरी कामुक बस यात्रा- 2
इंडियन बीवी की चुदाई

मेरी सनसनी भरी कामुक बस यात्रा- 2

Xxx हस्बैंड सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैंने अपने पति से चुदाई का मजा लेने बस से जोधपुर गयी पर रास्ते में एक अनजान युवक से चुद गयी. उसका वीर्य चूत में लिए मैं पति से चूत चटवाने लगी.

14 मिनट 458
मज़े मज़े में चुदक्कड़ बन गई मैं
इंडियन बीवी की चुदाई

मज़े मज़े में चुदक्कड़ बन गई मैं

नमस्ते दोस्तो, मैं जाह्नवी एक बार फिर से अपनी एक नई xxx हिंदी स्टोरी लेकर आई हूँ.आप सबने मेरी पिछली कहानियों को बहुत पसंद करा, मैं आप सबका दिल से धन्यवाद करती हूँ! और जो दोस्त मेरी कहानी पहली बार पढ़ रहे हैं, वे मेरीपिछली xxx हिंदी स्टोरीजरूर पढ़ें ...

17 मिनट 997

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रवि कुमार साहू

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

सोनिया रानी

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।