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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 947 बार

माँ, बुआ और चाची का जंगल में गैंगबैंग-5(Maa, bua aur chachi ka jungle mein gangbang-5)

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20 Sep 2016 को प्रकाशित

माँ, बुआ और चाची का जंगल में गैंगबैंग-5(Maa, bua aur chachi ka jungle mein gangbang-5)
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पिछला भाग पढ़े:-माँ, बुआ और चाची का जंगल में गैंगबैंग-4

तो जैसा आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा कि कैसे मैंने मेरी बुआ के साथ मिल कर प्लान बनाया। उसी से ये कहानी शुरू हो जाती है।

मैं और बुआ अपने टेंट में चले जाते हैं। वहां पर अहमद, वसीम और पंकज अपना सारा सामान रख रहे थे और निकलने की तैयारी कर रहे थे। मेरी मम्मी और चाची भी पैकिंग ही कर रही थी। हम सब अभी पंकज के घर उसके मम्मी के जन्मदिन पर जाने वाले थे। मेरे दिमाग में अब बस उसकी मां को चोदने के विचार चल रहे थे। मैं सोच रहा था कि वो दिखती कैसी होगी और उसके मम्मे और गांड कितने बड़े होंगे।

हम लोग कार में बैठ कर निकल जाते हैं। कार मैं ड्राइव कर रहा था। मेरे बाजू में मम्मी बैठी थी जो रास्ते में बार-बार मेरा लंड मसल रही थी। पीछे वाली सीट में बीच में चाची बैठी थी और उनके बाजू में अहमद और वसीम थे। जबकि आखिरी दो सीटों में मेरी बुआ और पंकज बैठे थे।

पंकज बुआ के मम्मे दबा रहा था और अहमद और वसीम मेरी चाची की गांड के साथ खेल रहे थे और उनकी गांड दबा रहे थे। जब हम पंकज के घर के करीब आए, तो हम सब फिर सामान्य व्यवहार करने लगे।

अहमद और वसीम दोनों ने अपनी-अपनी अम्मियों को भी बुला लिया था। अब मेरे पास एक अच्छा मौका था चुदाई के इस खेल को शुरू करने का। जब हम पंकज के घर में घुस गए, तब मैंने पंकज की मां संगीता को देखा। वो बहुत खूबसूरत थी। हल्की मोटी थी। उनकी गांड भी काफी बड़ी थी और उनके स्तन का तो अब क्या ही कहना, वो तो एक-दम लटक रहे थे। वो काफ़ी गोरी और लम्बी थी। अब मैं उनको देख के पागल हो चुका हूं।

संगीता आंटी ने पंकज से हमारे बारे में पूछा तो उसने बताया कि हम सब उसके अच्छे दोस्त थे। उन्होंने मेरी मम्मी बुआ और चाची से बातें शुरू की, और सब में बहुत कम समय में ही दोस्ती हो गई। उनके जन्मदिन में अभी भी समय था, ये बात पंकज भूल गया था। उसको अपनी मम्मी का जन्मदिन याद ही नहीं था। आंटी ने तब तक हमें उनके घर में रहने के लिए कहा था।

ये मेरे लिए काफी अजीब था, क्योंकि अब अकसर संगीता आंटी के साथ कोई ना कोई तो बात करता रहता था। मैं उनसे अकेले में बात नहीं कर पा रहा था, इस वजह से अब मुझे इस चीज पर गुस्सा आ रहा था। पर एक दिन मुझे मौका मिल ही गया।

उस दिन सब घर के बाहर चले गए। उस दिन मैं और आंटी अकेले थे। घर पर बाकी सब लोग बाहर गए थे, पर मैं और आंटी घर पर ही रुक गए थे। मेरी मम्मी, बुआ और चाची ने मुझे रुकने के लिए कहा था। वो लोग पंकज वसीम और अहमद से चुदाई करवाने के लिए बाहर गए थे। पर संगीता आंटी को शक ना हो इसलिए मुझे छोड़ गए ताकि घर पर सब संभाल सकूं।

संगीता आंटी: बेटा आज तुम खाने में क्या पसंद करोगे?

मैंने बहुत धीरे से कहा: आपकी चूत।

पर उन्हें ये बात नहीं सुनी, क्योंकि मैंने बहुत धीरे कहा था।

संगीता आंटी: क्या कहा बेटा तुमने?

मैं: आंटी मैंने कहा जो भी आपकी पसंद है खाने में, वो।

संगीता आंटी: अच्छा! मुझे तो कुछ और ही सुनाई दिया।

ऐसा कह कर वो किचन में अपना काम करने लगी। मैं भी उनके पीछे-पीछे किचन में आ गया था। मैं आ जाता हूं, वो वहां पर खाना बना रही थी और मैं पीछे से उनको देख रहा था। वो सब्जी लेने के लिए झुकती हैं और तब तक मैं बेशरम बन कर उनकी गांड को ही देख रहा था। उन्होंने मुझे ऐसा करते हुए देख लिया था।

संगीता: बेटा तुम्हें शर्म नहीं आती? मैं तुम्हारी मां की उमर की हूं और तुम मुझे गंदी नज़रों से देख रहे हो। रुको अभी तुम्हारी मम्मी को शिकायत करती हूं।

मैं: नहीं आंटी, उसकी कोई जरूरी नहीं है।

संगीता: क्यूं नहीं हैं? तुम मुझे बुरी नज़र से देख रहे हो। मैं ये बात पंकज को भी बताऊंगी। बस रुको तुम अभी।

आंटी अपना फोन उठाती हैं और पंकज को कॉल लगाने लगती हैं। पर मैं उन्हें रोक लेता हूं ये कह कर-

मैं: आंटी मगर इसका कोई भी फायदा नहीं है। वो पक्का इस समय मेरी मम्मी बुआ और चाची की चुदाई कर रहा होगा।

संगीता: ये कहते हुए तुम्हें शर्म नहीं आ रही? तुम इतना गिर गये हो कि अपनी मां के बारे में ऐसा कह रहे हो?

मैं: आंटी मैं सच कह रहा हूं। आप रुकिए मैं अभी आपको सबूत दिखाती हूं।

मैं अपनी मम्मी को फोन लगा देता हूं। वो मेरा फोन उठा लेती हैं।

मां: आह.. बोल बेटा क्या हुआ? तूने वहा पर संगीता को उलझा कर रखा है ना? उसे कुछ पता तो नहीं है ना बेटा?

मैं: हां मम्मी मैंने सब संभाल लिया है। अभी आप क्या कर रही हो?

मां: अभी मैं पंकज का लंड अपनी चूत में ले रही हूं और वो मेरे मम्मों से खेल रहा है।ये सुन कर संगीता आंटी शॉक हो जाती हैं और उनका मुंह खुला का खुला रह गया।

मैं: ठीक है मम्मी, आप मजे से सेक्स करो। मैं आपको बाद में कॉल करता हूं।

मां: आह.. उफ़.. ठीक है बेटा।

मैं कॉल कट कर देता हूं और आंटी के पास जाकर खड़ा हो जाता हूं। उनकी तेज सांसें सुन पा रहा था।

संगीता: पर ये गलत है। मैं शादी-शुदा और पतिव्रता औरत हूं। मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं कर सकती।

मैं: आंटी आपका बेटा भी तो वहां मजे कर रहा है मेरी शादी-शुदा मम्मी के साथ। तो फिर आप क्यों नहीं? आप भी तो मम्मी के दोस्त हैं?

संगीता: मैं वेसी नहीं हूं।

मैं: अच्छा, चलो अभी देख लेते हैं |

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मैं जाकर आंटी को किस्स करने लगता हूं। शुरू में वो मुझे हल्का धक्का दे रही थी, पर बाद में वो भी मुझे किस्स करने लगती है। फिर एक लंबे किस्स के बाद वो बोलती है-

संगीता: बेटा ये बहुत ज्यादा गलत है। तुम मेरे बेटे की उमर के हो। हमें ये नहीं करना चाहिए।

मैं अपनी पैंट उतार देता हूं और वो मेरे लंड को घूरने लगती है।

संगीता: देखो ये बहुत ज्यादा हो रहा है प्रतीक बेटा। ऐसा मत करो, अपनी पैंट ऊपर करो।

मैं: फिर मैं मेरे पापा को बताऊंगा।

संगीता: क्या?

मैं: आपका बेटा मेरी मम्मी की चुदाई करता है।

संगीता: वो तुम्हारी अपनी पारिवारिक समस्या है। मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि मेरा बेटा तुम्हारी मां को चोदे या नहीं।

मैं: मेरे पापा पुलिस में हैं। अगर मैंने उन्हें बता दिया ना, तब आपके बेटे का करियर बर्बाद हो जाएगा।

संगीता आंटी डर जाती हैं क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि मैं क्या कहना चाह रहा था।

संगीता: ठीक है मैं तुम्हारे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हूं। पर ये बातें किसी और को कभी मत बताना।

मैं: ठीक है आंटी।

संगीता: और तुम अपने पापा को भी मेरे बेटे की शिकायत नहीं करोगे। मैं नहीं चाहती कि उसका करियर खराब हो जाए।

मैं: हां आंटी, आप एक बार सेक्स तो करो पहले।

संगीता आंटी मेरे पास धीरे-धीरे चलते हुए आती हैं। वो बहुत ज्यादा ही धीरे चल रही थी। मुझे ये देखकर गुस्सा आ रहा था। क्योंकि अब मैं उनको चोदने के मूड में था।

मैं: अगर आप ऐसे धीरे-धीरे चलोगी तो मुझे पापा को बताना पड़ेगा, आपके बेटे के काले कारनामों के बारे में।

ये सुनते ही संगीता आंटी तेजी से मेरे पास आती हैं और मेरे लंड पर हाथ रख देती हैं।

मैं: आंटी आपके शरीर के ज़रा दर्शन तो करवाओ।

आंटी मुझे देखती हैं और गुस्से में देखती हैं। वो शरमाते हुए धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार देती हैं और अब वो मेरे सामने बस पीली ब्रा और पैंटी में थी। मैं अपने हाथ उनकी कमर पर रख कर उन्हें दोबारा किस्स करता हूं। वो भी मुझे किस्स कर रही थी। वो मेरा लंड हल्का-हल्का दबा रही थी।

मुझसे अब और रहा नहीं जाता और मैं उनकी पैंटी उतार कर उनकी गीली झांट से भरी हुई चूत के अंदर हाथ डाल कर उनको उंगली करने लगता हूं।

संगीता: उफ्फ्फ.. बेटा थोड़ा आराम से करो। मैं बहुत दिनों बाद चुद रही हूं।

मैं: आपके पति आपको नहीं चोदते हैं क्या?

संगीता: चोदते तो हैं पर वो मेरे साथ ज्यादा गंदी चीजें नहीं करते।

मैं: जैसे क्या?

संगीता: वो मेरी गांड नहीं चाटते। वो मेरी चूत नहीं चाटते और वो मैंने उनका लंड भी नहीं चूसा है। पर मेरा पुराना बॉयफ्रेंड ऐसा नहीं था। वो मेरे साथ सारी गंदी चीज़ करता था।

मैं: अच्छा,‌ क्या-क्या करता था आपका बॉयफ्रेंड आपके साथ?

संगीता: सब कुछ करता था बेटा। अब अगर मैं चुदवा ही रही हूं तुमसे, तो मैं चाहती हूं कि तुम भी मेरे मोटे सुंदर शरीर के साथ सब कुछ करो।

मैं नीचे झुक कर उनकी गांड चाटने लगता हूं। उनकी गांड के छेद की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। वो बहुत सेक्सी खुशबू थी। बहुत देर तक गांड चाटने के बाद मैं उनको अपना लंड चूसने के लिए बोलता हूं।

अब मैं खड़ा हो जाता हूं और वो नीचे झुक कर मेरा लंड अपने मुंह के अंदर ले लेती है। फिर अपने मुंह को जोर से ऊपर-नीचे करने लगती है। काफी देर बाद मैं अपना माल उनके मुंह के अंदर निकाल देता हूं। फिर मैं उनकी ब्रा का हॉक खुल कर उनके बड़े मम्मों को आजाद कर देता हूं। मैं उनके हल्के से भूरे निपल्स को चूसने लगता हूं, और उनका दूध पीने लगता हूं।

संगीता: तो अब असली कार्यक्रम शुरू करें क्या बेटा?

मैं: हां आंटी।

आंटी डॉगी स्टाइल में बैठ जाती हैं और मैं पीछे से उनकी गांड मारने लगता हूं। मैं उनकी गांड के छेद में अपना बड़ा लंड डाल देता हूं। तभी अचानक से घर का दरवाजा खुल जाता है और बाहर मेरी मम्मी, बुआ, चाची, पंकज, वसीम और अहमद थे। वो सब हमें देख रहे थे। आंटी अपने ऊपर कंबल डाल लेती हैं, पर अब सब ने सब कुछ देख लिया था।

अब अगले पार्ट्स में पढ़िए कि पंकज अपनी मां को चोदता है, और मैं अपनी बुआ को प्रेग्नेंट कर देता हूं।

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