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जवान लड़की पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 1,253 बार

तुझ को भुला ना पाऊँगा -3

डॉ. दलबीर सिंह

01 Sep 2023 को प्रकाशित

तुझ को भुला ना पाऊँगा -3
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एक दिन वो जब मायके आई तो अपने घर उसे 2-3 दिन रुकना था तो वो हमारे घर आ गई जब मेरी माँ रसोई में गई तो उसने बड़े शिकयती लहजे में कहा- मैंने कहा था ना कि मुझे भगा कर ले चलो, पर तुम माने नहीं। अब मुझे अपनी शक्ल भी नहीं दिखाते मेरा कसूर तो बता दो, क्या मांगती हूँ तुमसे, सिर्फ़ यही ना कि तुम्हारा चेहरा देख लूँ?

उसकी यह बात सुन कर मैं शर्मिंदा सा हो गया और सिर झुका कर कहा- नहीं, ऐसी बात नहीं है, तुम अब किसी और की हो चुकी हो, और मैं तुम्हारे जीवन में अब कोई दुख नहीं…पर उसने मेरी बात काटते हुए कहा- मेरा मन पहले भी तुम्हारा था, अब भी तुम्हारा है। यह शादी मैंने मज़बूरी में करी है, वो सामाजिक तौर पर मेरा मलिक है पर मानसिक तौर पर नहीं!‘और इसके ज़िम्मेदार तुम हो अमर!’ वो एक पल रुक कर बोली।

‘मैं अगले महीने यहाँ रहने आ रही हूँ 2 महीने के लिए!’इतनी देर में मेरी माँ चाय बना कर ले आई तो वो चुप हो गई। चाय पीकर जब जाने लगी तो बोली- शाम को घर आना!मैंने हाँ मे सिर हिलाया और गहरी सोच में पड़ गया।

शाम को मैं करीब 4:30 बजे उनके घर पहुँचा तो वो भाभी के घर बैठी थी, भाभी से बोली- भाभी, आप चाय बना लो और ज़रा आराम से बनाना टाइम लगा कर!भाभी को सारी बात का पता तो था ही, वो उठीं और मुस्कुरा कर चली गईं।

भाभी के जाते ही वो उठ कर मेरे पास आ गई और मेरे चेहरे को अपने दोनो हाथों में पकड़ कर बोली- अमर, मेरी जान तुम नहीं जानते कि मेरे जीवन में तुम्हारी क्या जगह है? पर यह याद रखना कि मैं मर तो सकती हूँ पर तुम्हें नहीं भुला सकती और मैं जानती हूँ कि इस बात का तुम्हें भी पता है।

मैं कुछ देर तक उसके मुँह की तरफ देखता रहा और फिर मैंने बैठे बैठे ही अपनी बाहों में भर लिया और उसके कंधे पर सिर रख कर रोने लगा और वो मेरे कंधे पर सिर रख रोने लगी, अपनी दोनों बाहें मेरे गिर्द लपेट दीं, काफ़ी देर तक हम दोनों कुछ नहीं बोले और रोते रहे|

फिर एक झटके से मुझसे वो अलग हो गई और बोली- सुनो, जो मैं कहने जा रही हूँ, उसे गौर से सुनो!मैं प्रश्नवाचक निगाहों से उसकी ओर देखने लगा तो वो पुनः बोली- तुम्हें याद है, एक रात तुम मेरे पास रहे थे और मैंने उस रात तुम्हें कुछ भी नहीं करने प्रिया था?मैंने सिर्फ़ सिर हिलाया तो वो बोली- मैं अगले महीने यहाँ रहने आ रही हूँ, और वो भी पूरे 2 महीने के लिए, और तुम्हारी वो तमन्ना मैं उस वक्त पूरी करूँगी।

मैंने उसकी बात का विरोध करने के लिए मुँह खोला लेकिन उसने मेरे मुँह पर हाथ रख प्रिया और बोली- तुम मत बोलो, बस मेरी सुनो, और जिस दिन मैं तुम्हें बुलाऊंगी, तुम्हें आना पड़ेगा, यह तुम्हें उस मोहब्बत की कसम है जो कि तुमने मुझे करी थी, हाँ अगर तुम मेरे सिर पर हाथ रख कर यह कह दो कि तुमने मुझसे प्यार नहीं किया था तो मैं तुम्हें नहीं कहूँगी आने के लिए!

इतना बोल कर वो चुप हो गई और मेरी आँखों में आँखें डाल कर देखने लगी, उसके इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था और मैंने खुद को शर्मिंदा सा महसूस करा और सिर झुकाकर बोला- ठीक है, मैं हारा!मेरा यह जवाब सुनकर वो सिर्फ़ मुस्कुराई और कुछ भी नहीं बोली।

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थोड़ी देर बाद भाभी जी चाय बना कर ले आई, हम तीनों ने साथ साथ चाय पी और थोड़ी देर के बाद मैं अपने मेडिकल स्टोर पर चला गया।

इस बीच मे मेरे से बड़े वाले भाई और पापा जी वापस दिल्ली चले आए थे, मैं और माँ वहीं रह रहे थे, बड़े भाई साहब वहीं निरंजन अंकल के घर पर ही रह रहे थे।

वो महीना गुज़र कर नया महीना कब आ गया, पता भी ना चला। बस इन दिनों मैं कुछ उदास रहता था और मैंने कुछ ग़ज़लें लिखनी शुरू कर दी थीं।

एक दिन सुबह भाई साहब ने मुझे कहा- तुझे तेरी भाभी बुला रही थी, एक बार घर चले जाना!मैंने कहा- जी भा… जी!

दोपहर को मैं भाई साहब के घर गया तो भाभी जी ने कहा- आज तेरे भाई साहब बाहर जा रहे हैं और तुझे रात इस घर में सोना है।मैंने कहा- जी, भरजाई जी!

यह कह कर मैं वहाँ से निकल आया और घर आकर माँ से कहा- आज भाअजी बाहर जा रहे हैं तो आज रात भाअजी के घर सोने जाऊँगा।तो मम्मी बोली- ठीक है, टाइम से चले जाना!इसके बाद मैं वापस अपनी दुकान पर चला गया।

शाम को मैं घर से 8 बजे के करीब निकला और 10 मिनट में भाई साहब के घर पहुँच गया। मेरे पहुँचने तक खाना तैयार था, मैंने खाना खाया और कुछ देर टी वी देखने के बाद मैंने कहा- भरजाई जी, मुझे कहाँ सोना है?तो भाभी जी ने कहा- तुम इस कमरे में सो जाओ और मैं बच्चों के साथ दूसरे कमरे में सोऊँगी!मैंने कहा- ठीक है।

करीब आधे घंटे में बच्चे सो गये और भाभी जी उनको दूसरे कमरे में लिटा आई और मुझसे बोली- सोने से पहले टी वी बंद कर देना! मैंने कहा- जी अच्छा!और उनके दूसरे कमरे मे जाने के बाद 10-12 मिनट के बाद ही टी वी बंद कर दी और लेट गया।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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तुझ को भुला ना पाऊँगा

कुल भाग: 5
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

प्रीतम

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

शालू

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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