वर्जिन ब्राइड सेक्स कहानी में एक स्वछन्द मनमौजी लड़की का रिश्ता हुआ तो एक बार ऐसा मौका आया कि वे दोनों शादी से पहले सेक्स करने की कगार पर थे. लेकिन लड़के ने कंट्रोल किया.
दोस्तो, आज की कहानी रीमा की है।रीमा बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत तेज और सुंदर थी।
पैसे वाले घर में जन्म लिया, तो बचपन से ही इंग्लिश कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ी।पढ़ाई में अच्छी रही, तो क्लास 6 के बाद पिता ने उसे देहरादून पढ़ने भेज प्रिया।वहां उसने खेलकूद में भी नाम कमाया। बैडमिंटन की स्टेट लेवल की खिलाड़ी रही।
इसके बाद मिरांडा हाउस से ग्रेजुएट होकर निकली, फिर एमबीए किया।अब घरवाले लड़का देखने लगे।
इतने साल हॉस्टल में रहकर उसका व्यक्तित्व तो निखरा ही, वो खुराफाती भी पूरी हो गई।बहुत उन्मुक्त व्यवहार और खुली सोच थी उसकी!
उसने घरवालों से साफ कह प्रिया, “लड़का सुंदर, अच्छा-खासा कमाने वाला और खुली सोच का चाहिए! और लड़का देख वो लोग लें, पर फाइनल मैं ही करूंगी!”
रीमा खुद मखमली काया की मालकिन थी और स्पोर्ट्स से जुड़े रहने से उसका जिस्म कसा और मजबूत था।लंबाई भी उसकी औसत लड़कियों से ज्यादा थी।
पिता जानते थे कि लड़की हाथ से निकल चुकी है; जितनी जल्दी नकेल पड़ जाए, उनके परिवार की इज्जत इसी में है।रीमा 28 पार कर चुकी थी।
उन्होंने दिन-रात एक करके सैकड़ों रिश्तों में से चार-पांच छांटे और रीमा को भेजे।रीमा किसी विदेशी कंपनी में जॉब करती थी और गुरुग्राम में अकेले फ्लैट लेकर रहती थी।
रीमा ने सभी लड़कों से वीडियो चैट करके खुलकर हर विषय पर बात की।हर विषय मतलब उनकी अपनी पत्नी से अपेक्षाएं, पहनने-ओढ़ने पर प्रतिबंध, अकेले अलग रहने की शर्त, बच्चा अभी दो-तीन साल न करने की बात और सबसे आश्चर्यजनक विषय था सेक्स के प्रति उनकी सोच।उसकी बातचीत में तीन लड़के तो पलटकर ही नहीं आए।रीमा ने उन्हें ऐसा दिखाया कि वो बहुत पुरानी सोच के हैं।
अब बचे दो लड़के—सुनील और समीर।दोनों के जॉब भी अच्छे थे और उनकी सोच भी रीमा से मिलती थी।
रीमा ने उन्हें दिल्ली में अलग-अलग तारीखों पर मिलने बुलाया।
मुलाकातों में उसकी अत्याधुनिक सोच और कपड़ों के आगे सुनील तो टें बोल गया।उसकी हिम्मत ही नहीं हुई कि इस लड़की को अपने मां-बाप से मिलाए।
पर समीर समझदार निकला।उसने पहले तो रीमा को यह एहसास कराया कि वो उससे बहुत प्रभावित है।फिर धीरे से समझाया, “अगर हमारी शादी होती है, तो जब हम अपने फ्लैट में हों, तब तुम कुछ भी पहनो या न पहनो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता! पर मां-बाउजी के सामने तो संस्कारी कपड़े पहनने ही होंगे!”रीमा ने कुछ सुना या नहीं, पर ‘न पहनो’ पर वो मुस्कुराई और समीर से आधुनिकता और सेक्स पर बात शुरू की।
यहीं समीर ने रीमा का दिल जीत लिया।उसने कहा, “मैं कोई शर्त तय नहीं करूंगा! बस ये वादा करूंगा कि मैं तुम्हें हर हाल में खुश रखूंगा!”
खैर, समीर और रीमा की शादी तय हो गई।समीर बंगलोर में जॉब करता था।उसके पेरेंट्स करनाल में रहते थे और रीमा के पेरेंट्स मेरठ में।सब अलग-अलग।
अब हर शनिवार समीर दिल्ली आ जाता।रीमा और समीर दो दिन खूब मस्ती करते।शनिवार की रात को समीर वापस चला जाता।सिवाय सेक्स के, दोनों ने फुल-ऑन मस्ती की।
समीर हल्का-फुल्का ड्रिंक लेता था, तो रीमा भी इससे पीछे नहीं थी।बस रीमा ने उससे यही शर्त रखी, “जो भी हो, बात खुलकर कहना! छिपाना कुछ नहीं!”
अब उनकी शादी को केवल 20 दिन रह गए।समीर आखिरी बार दिल्ली आया।रीमा और वो दिनभर घूमे।
रात को एक पब में मस्ती करके निकलते वक्त लेट हो गए।रात के 12 बज रहे थे।अब या तो समीर रीमा को छोड़ने गुरुग्राम जाता या रीमा समीर के पास रुकती।
घर वालों को तो फोन पर रीमा ने झूठ बोल प्रिया, “मैं गुरुग्राम आ गई हूँ!”
समीर तय नहीं कर पा रहा था कि वो क्या करे।किसी को पता चल जाता कि रीमा उसके साथ शादी से पहले रुकी है, तो उसके मां-बाउजी बहुत नाराज होते और इससे रीमा के चरित्र पर भी निशान लग जाता।आखिर यह तय किया कि समीर के होटल में ही रीमा अलग रूम में ठहरे।
रात को 1 बजे रीमा अपने रूम में सोने की तैयारी में थी कि मोबाइल पर समीर का फोन आ गया, “नींद नहीं आ रही! चलो कॉफी शॉप में कॉफी पीते हैं!”रीमा बोली, “मैंने अपना टॉप धोकर डाल प्रिया है, कुछ लग गया था! तो बाहर तो नहीं जा सकते! तुम मेरे रूम में आ जाओ! मैं बाथरोब पहन लेती हूँ!”
समीर ने कॉफी का ऑर्डर प्रिया और रीमा के रूम में आ गया।
रीमा को इन कपड़ों में नींद नहीं आ रही थी तो वो तो बिलकुल नंगी ही लेटी थी।
अब जब समीर के आने का हुआ, तो उसने केवल बाथरोब लपेट लिया, ये सोचकर कि समीर तो आधे घंटे में चला ही जाएगा।
समीर तो शॉर्ट्स और टी-शर्ट में था।रीमा बाथरोब लपेटकर बैठी थी।कैसे भी कर लो, बाथरोब से बदन तो झांक ही रहा था।कॉफी पीते-पीते समीर उसे घूर रहा था।
रीमा को अटपटा-सा लगा, तो एक-दो बार उसने समीर को प्यार से झिड़का भी।समीर ने जवाब दे प्रिया, “अपनी होने वाली बीवी को ही तो देख रहा हूँ! किसी और को थोड़े ही न!”
बात ठीक ही थी।रीमा ने उठकर लाइट बहुत धीमी कर दी।
समीर तो एक हाथ आगे निकला, चिहुंक कर बोला, “वाह! लगता है मूड बन गया है तुम्हारा!”रीमा बोली, “मुझे नींद आ रही है! अब जाओ तुम!”
समीर कॉफी खत्म करके उठा।जाते-जाते उसने रीमा से कहा, “एक किस दे दो! फिर चला जाऊंगा!”रीमा बोली, “कल सुबह दूंगी! अभी तुम जाओ!”
रीमा से भी अब जिस्म की मांग बर्दाश्त नहीं हो रही थी।उसे लग रहा था कि समीर अब और रुका, तो फिर वो हो ही जाएगा जो बीस दिन बाद होना है।
समीर डोर तक गया।पीछे-पीछे रीमा आई डोर बंद करने के लिए।समीर अचानक पलटा और लिपट लिया रीमा को अपने से!अब रीमा भी होश खो बैठी।
दोनों के होंठ मिल गए।
इस आपाधापी में रीमा का बाथरोब, जो केवल एक डोरी से ही रुका हुआ था, वो खुल गया।
रीमा ने बहुत संभाला, पर समीर ने उसके मम्मों पर मुंह लगा ही प्रिया।रीमा बहुत कसमसाई और उसने समीर को रोकना चाहा, पर खुद उसका दिल काबू में नहीं था।वो भी सूखी बेल-जैसी लिपट गई समीर से!
समीर ने उसे गोद में उठाया, तो बाथरोब तो एक ओर लटक गया।
रीमा का मखमली जिस्म अब समीर की बाहों में था।रीमा अपनी बाहों का घेरा बनाकर समीर की गर्दन से लटकी हुई थी।दोनों के होंठ मिले थे।
समीर रीमा को बेड पर ले आया।
रीमा का हाथ उसकी शॉर्ट्स पर गया, तो वहां तंबू बना हुआ था।
रीमा ने एक झटके में समीर के लंड को बाहर निकाल प्रिया।कुछ देर रगड़ने के बाद रीमा ने उसे चूम लिया।
समीर भी उसकी मखमली चूत को सहला रहा था।
उसकी उंगलियां पानी बहाती चूत को ऊपर से रगड़ रही थीं।दोनों के जिस्म एक-दूसरे में समाने को बेताब थे।
सेक्स है कुदरत का वरदान- 6
बस यहीं समीर ने समझदारी दिखाई और रीमा के दिल में हमेशा के लिए एक अमिट छाप छोड़ दी।उसने रीमा को चूमा और फिर खड़ा हो गया।
समीर ने कहा, “मुझे मालूम है कि इस समय अपने जज्बातों को काबू करना कितना कठिन है! पर मैं नहीं चाहता कि हम लोग जिंदगी भर इस अपराधबोध से ग्रसित हों कि हमने शादी से पहले सेक्स किया! मुझे मालूम है कि तुम्हारा कौमार्य सुरक्षित है। इसे सुरक्षित रहने दो अपनी सुहागरात के लिए!”
कहकर बिना जवाब का इंतजार किए समीर डोर तक गया और पलटकर एक फ्लाइंग किस रीमा को प्रिया और बाहर चला गया।
अब रीमा और समीर रोज बात करते और रीमा बार-बार समीर की उस रात के लिए तारीफ करती।
शादी खूब धूमधाम से हुई।
शादी के बाद सुहागरात के लिए समीर के पिता ने एक पांच सितारा होटल में दो रातों के लिए एक स्वीट बुक कर प्रिया।
विदाई के बाद तो दिनभर दोनों घर पर ही रहे।
अब शादियों में कोई ज्यादा रुकता नहीं।मेहमान भी सब शाम तक चले गए।
समीर और रीमा भी रात का डिनर लेकर होटल के लिए निकल लिए।समीर के पिता ने दरियादिली दिखाते हुए उन्हें दो दिन होटल में ही रुकने की इजाजत दे दी।
समीर रीमा का हाथ थामे होटल के स्वीट में दाखिल हुआ।रूम सुहागरात के हिसाब से सजा था।
डोर लॉक होते ही रीमा समीर से लिपट गई।समीर ने उसे गोद में उठा लिया और चूमते हुए आहिस्ता से बेड पर लिटा प्रिया।
रीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुंह दिखाई दो!”समीर बोला, “अब तो सब कुछ देख चुका हूँ! किस बात की मुंह दिखाई!”
फिर हंसते हुए समीर ने जेब से एक ब्रेसलेट निकाला और रीमा को पहना प्रिया।ब्रेसलेट बहुत सुंदर था।
रीमा ने समीर को एक लंबा फ्रेंच किस देकर थैंक्स बोला।समीर बोला, “चेंज कर लो! फिर बैठकर बात करेंगे!”
रीमा बोली, “चेंज क्या करना? अब मैं तो थक गई! जो करना है, तुम्हीं करो!”समीर ने उसे गुदगुदाकर हंसते हुए उठा ही प्रिया।रीमा ने अपना सूटकेस खोला और उसमें से एक झीनी-सी नाइटी निकाली।
समीर बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर एक साटन का कुरता और लुंगी पहनकर आ गया।रीमा ने अपना मेकअप किट लिया और बाथरूम में घुसकर लॉक कर लिया।
समीर बोला, “लॉक क्यों कर रही हो?”रीमा हंसते हुए बोली, “शर्म आती है, इसलिए!”
समीर ने एक ड्रिंक बना लिया और कमरे की रौशनी बहुत धीमी कर दी।रीमा भी हल्का-सा मेकअप करके आ गई।
उसने अपनी काजल नहीं उतारी थी, तो छम-छम की आवाज करती वो मुस्कुराती हुई बेड पर आकर सीधे समीर के आगोश में समा गई।दोनों के होंठ मिल गए।
समीर ने उसे भी एक सिप प्रिया।रीमा बोली, “आज इसकी क्या जरूरत? आज तो मेरा नशा ही बहुत है तुम्हें दीवाना करने के लिए!”
कहकर रीमा ने एक बड़ा घूंट लेकर समीर के मुंह से मुंह लगाकर उसे पिला प्रिया।
समीर ने पेग बेड के साइड में रख प्रिया और खुद रीमा से लिपट गया।
दोनों के बीच कुछ संकोच तो था ही नहीं।वर्जिन ब्राइड सेक्स के लिए रीमा ज्यादा उतावली थी।
उसने अपनी ड्रेस से बाहर आते मम्मों को समीर के मुंह से लगा प्रिया।
समीर जालीदार ड्रेस के ऊपर से ही उन्हें चूसने लगा।
रीमा ने उसकी लुंगी के अंदर हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया और नाटक करती हुई बोली, “यार, तुमने कोई दवाई खाई है जो इतना मोटा हो गया? अभी कुछ दिन पहले तो ऐसा नहीं था!”समीर बोला, “उस दिन डिफेंडिंग मोड में था! आज अटैकिंग मोड में है! आज बसंती की इज्जत लूटनी है!”
रीमा ये सुनकर हंसते हुए चढ़ गई उसके ऊपर और बोली, “अब देखते हैं कौन किसकी इज्जत लूटता है!”बस फिर तो धकापेल शुरू हो गई।जल्दी ही दोनों के कपड़े उतर गए।
समीर ने रीमा के मम्मे लपक लिए अपने मुंह में और रीमा उसका लंड मसल रही थी।
समीर ने अपना एक हाथ नीचे किया, तो उसकी उंगलियां रीमा की मखमली फांकों से जा टकराईं।समीर को वहां गीलेपन के साथ चिपचिपापन भी महसूस हुआ।
रीमा ने उसके बाल पकड़कर उसका सिर नीचे करना चाहा, मानो कह रही हो, “तुम मेरी चूत चूसो!”
समीर नीचे हुआ और उसने अपनी जीभ रीमा की चूत की फांकों के अंदर कर दी।जीभ घुसाते ही उसे मीठेपन का एहसास हुआ।रीमा ने शायद शहद लगाया हुआ था।रीमा ने अपनी टांगें और फैला दीं ताकि समीर अच्छे से चूस सके।
जल्दी ही रीमा की कामुक आहें निकलनी शुरू हो गईं।वो समीर के बाल खींच रही थी।
समीर ने सिर उठाया, तो रीमा बोली, “मुझे भी चूसना है!”
समीर उठा और रीमा को अपना लंड देने से पहले साइड में रखे शराब के पेग में अपना लंड डुबो लिया।
अब दोनों 69 हो गए।रीमा के मुंह में अब समीर का लंड था।उसे व्हिस्की का स्वाद आ रहा था।
रीमा ने लंड को चूसने की ट्रेनिंग किसी पोर्न साइट से देखी होगी।
समीर की तो हालत खराब हो गई।वो कसमसाता हुआ बोला, “छोड़ दो! वरना मैं तुम्हारे मुंह में छूट जाऊंगा!”
रीमा नहीं मानी और उसका लंड लॉलीपॉप की तरह चूसती रही।अब समीर ने अपनी जीभ तो बाहर निकाली और पहले एक, फिर दो उंगलियों से रीमा की चूत के अंदर तेजी से मालिश शुरू की।
अब रीमा की भी आग भड़क उठी।उसकी समीर के लंड पर पकड़ धीमी होती गई और वो मछली की तरह तड़पने लगी।
आखिर उसने समीर से कह ही प्रिया, “अब मेरे अंदर आ जाओ!”
कहानी लम्बी है.वर्जिन ब्राइड सेक्स कहानी पर अपनी राय मुझे बताते रहेंsupport@mohakkisse.com
वर्जिन ब्राइड सेक्स कहानी का अगला भाग:बिन्दास उन्मुक्त जीवन की चाहत- 2