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Group Sex Story पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,107 बार

मेले के बहाने चुदाई की मस्ती- 1

सारिका कंवल

15 May 2025 को प्रकाशित

मेले के बहाने चुदाई की मस्ती- 1
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Xxx सेक्सी हिंदी कहानी में हम दो सहेलियों ने अपने एक कॉमन यार से रात भर चुदाई का प्रोग्राम बनाकर उसे घर में घुसा लिया था. मैंने अपनी सहेली को लंड चूसने को कहा.

दोस्तो, मैं सारिका कंवल आपको फिर से सेक्स कहानी का मजा देने के लिए हाजिर हूँ.मेरी पिछली कहानीखेतों के बीच में मेरी सहेली मेरे सामने चुदीमें अब तक आपने पढ़ा था कि मैं अपनी सहेली सुषमा के साथ मेरे में घूमने जाने का प्लान बना रही थी.

अब आगे Xxx सेक्सी हिंदी कहानी:

शाम 6 बजते बजते सभी नए कपड़े वगैरह पहन तैयार होने लगे. मेरे भईया भाभी साथ जाने वाले थे. मेरा भतीजा अपने दोस्तों के साथ.भाभी को मैंने बता प्रिया कि मेले के समय रात भर मैं सुषमा के यहां ही रहूंगी.

शाम 7 बजते बजते सब मेले के लिए निकल गए.

मैं, भईया भाभी और भतीजी, सुषमा के घर होते हुए उसको साथ ले लिया और मेले में पहुंच गए.

चारों तरफ शोर शराबा था, गजब की रौनक थी वहां.रात क्या होने वाला है हम उससे अज्ञात थे.

बस हम सब मेले का लुत्फ़ उठाने में व्यस्त हो गए.घूमते हुए हम सब अलग अलग हो गए.

मेरे भईया भाभी और भतीजी एक दुकान के पास रूके.उन्होंने हमें बोला कि आगे बढ़ जाओ क्योंकि वो लोग मंदिर जाने वाले थे.

वहीं सुषमा का भाई और उसकी पत्नी वहीं से मंदिर चले गए.मंदिर में रात भर भजन कीर्तन होता है तो अधिकांश लोग सुबह तक वहीं रह जाते हैं.

मैं और सुषमा घूमती हुई खाते पीते इधर उधर होती रही.समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला.

हम फिर मंदिर चले गई, वहां भजन सुनने लगी.

देखते देखते 11 बज गए और रमेश का फ़ोन आ गया.

सुषमा ने मुझसे पूछा कि कहीं वो कोई दवाई तो नहीं खाता. कल से पीछे पड़ा है.मैंने कहा- मुझे पता नहीं.

फिर उसने मुझसे कहा कि चलना है तो चलो.मेरा भी मेले से मन भर से गया था तो मैंने भी कहा- चलो.

साढ़े ग्यारह बजे हम मेले से बाहर निकल आई.सुषमा ने रमेश को फ़ोन कर प्रिया कि मौका देख कर पीछे के दरवाजे से आ जाए.हम दोनों सुषमा के घर चल पड़े.

मेले के बाहर पूरा गांव सुनसान लग रहा था. थोड़ी देर में हम घर पहुंच गई.

सुषमा ने आगे का दरवाजा बंद कर प्रिया क्योंकि आज रात कोई आने वाला नहीं था. सुषमा का कमरा पीछे ही था घर के बगल में स्नानागार था.

मैं अपने साथ अपनी मैक्सी लेकर आई थी. कमरे में जाते ही मैं अपने कपड़े बदलने लगी. साड़ी बलाउज और पेटीकोट उतार कर केवल ब्रा और पैंटी में थी और मैक्सी पहनने की तैयारी में थी.कि सुषमा बोली- क्या फायदा कपड़े पहन कर … अभी चोदने आ ही रहा. वो उतावला नंगा तो करेगा ही तुझे!मैं- वो बाद की बात है, वैसे तू कहां रहेगी? इसी कमरे में या दूसरे कमरे में?

सुषमा- यहीं रहूंगी. घर में कोई नहीं, सारा गांव सुनसान सा लग रहा. मुझे डर लगेगा अकेले!मैं- इतनी देर तक जगी रहेगी, सोएगी कहां?

सुषमा- अरे इसी बिस्तर पर और कहां, जब चोदेगा तो या वो तेरे ऊपर होगा या तू उसके ऊपर … बाकी जगह तो खाली रहेगी बिस्तर पर … और वैसे भी इसके ऊपर बहुत जगह है.मैं- और हमें देख तेरा मन हो गया, तो क्या करेगी?

सुषमा- मुझे भी चोदने को कहूंगी उसको … ही ही ही ही.मैं- कल से 4 बार कर चुका है, इतनी ताकत होगी उसमें?सुषमा- नहीं होगी तो कल से अपने हाथ से काम चलेगा. वो मैं तो नहीं देने वाली उसको. ही ही ही ही.

मैं कपड़े बदल बिस्तर पर लेट गयी और सुषमा भी नंगी होकर इधर उधर टहलने लगी.

मैंने उससे पूछा- नंगी होकर क्या कर रही है?सुषमा- अरे थोड़ा हवा लगने दे. पसीने से बैचैनी लग रही थी.

रात 12 बज चुके थे, मुझे अब नींद आने लगी थी.मैंने कहा- अब मैं चली सोने.

सुषमा भी मैक्सी पहन बिस्तर पर लेट गयी और बोली- शायद वो नहीं आएगा.हम सोने की कोशिश करने लगी.

इतने में वो बोली- चल पेशाब कर के आयें.

तभी रमेश का फ़ोन आया. उसने कहा कि वो पीछे दरवाजे के पास खड़ा है.

हम निकल गए और दरवाजा खोल कर उसे अन्दर बुला लिया.सुषमा बोली- रूक, मैं पेशाब कर लेती हूं.

वो वहीं नाली के ऊपर मैक्सी उठा बैठ गयी, जिससे स्नानागार का पानी बाहर जाता था.खुद का होने के बाद बोली- तुम लोग भी कर लो क्यों बार बार बाहर आना जाना करोगे. कहीं किसी घर के छत पर कोई होगा तो देख सकता है.

वैसे कोई ऐसी संभावना नहीं थी कि कोई अपने छत पर हो, पर फिर भी सुषमा की बात सही थी.

रमेश ने वहीं अपने पैंट की जिप खोली और शुरू हो गया.

मैं भी एक तरफ होकर अपनी मैक्सी उठायी, पैंटी घुटनों तक सरका कर नाली के ऊपर बैठ गयी.

सुषमा बोली- चुदवाने से पहले पेशाब कर ही लेना चाहिए. बाद में बहुत देर तक नहीं निकलती.रमेश- हां और चोदने के बाद बहुत जोर से पेशाब भी लगता है, पर निकलता नहीं.

सुषमा- पेशाब कर लेने से ज्यादा देर तक चोद भी सकते हो.रमेश अपना लिंग पैंट के अन्दर डालते हुए- हां सही कहा.

मेरा भी हो चुका था, मैं भी उठ कर पैंटी पहन चलने को तैयार हो गयी.हमने कमरे में आते ही दरवाजा बंद कर प्रिया.

सुषमा- तेल वगैरह की जरूरत तो नहीं पड़ेगी? पड़ेगी तो बोल दो. सरसों का तेल ला देती हूं.रमेश- नहीं उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी फुर्सत से चोदना है, गीली हो जाएगी और कम पड़ेगा तो थूक लगा लेंगे.

सुषमा- ये तो थूक से बढ़िया कुछ नहीं चिकनाई के लिए!रमेश- थोड़ा मुँह में लेकर चूस लो न … मेरे लंड पर थूक ही थूक लग जाएगा.सुषमा- सारिका है ना चूसेगी वो, मैंने तो दिन में प्रिया न चोदने!

मैं- सुषमा, तूने कभी लंड नहीं चूसा क्या?सुषमा- नहीं.

रमेश- तो तेरा पति कैसे चोदता है, तुम लोग चुम्माचाटी वगैरह नहीं करते क्या?सुषमा- नहीं, वो सब नहीं करते हम!

मैं- कैसे करते हो, निकाला घुसाया धक्का मारा … बस खत्म?सुषमा- हां वैसा ही.

रमेश बिस्तर पर लेटते हुए- थोड़ा बताओ कैसे चोदता है तुम्हारा पति?

सुषमा बिस्तर पर रमेश के बगल में बैठती हुई- कैसे क्या … जैसे सब चोदते हैं, वैसे ही चोदता है. तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे तुम अलग तरीके से चोदते हो?मैं सुषमा के बगल में लेट कर बोली- अरे मतलब शुरुआत कैसे करते हो, अंत कैसे करते हो, वो सब खुल कर बताओ न … पति तुम्हें क्या कहता है, जब उसका मन होता है … या तुम क्या कहती हो जब मन होता है?

सुषमा लंबी सांस खींचती हुई बोली- देख मेरी तो शायद कभी वो सुने … हां इशारा कभी कभी कर देती हूं. कभी उसका मन हुआ तो करेगा वरना भाव ही नहीं देता. बाकी अगर उसका मन हुआ तो कह देता है कि आज थोड़ा देर से सोएंगे. मैं समझ जाती हूँ.

रमेश- अच्छा तो शुरू कैसे करते हो?सुषमा- मैं अपनी मैक्सी उठा कर लेट जाती हूँ. वो मेरी टांगें फैला कर अपना लंड मेरी चूत में घुसाता है और धक्का मार मार कर चोदने लगता है.

मैं- क्या तुम लोग उससे पहले कुछ नहीं करते?सुषमा- क्या करेंगे?रमेश- अरे मतलब चुम्मा चाटी, एक दूसरे के शरीर से खेलना वगैरह, एक दूसरे को तैयार कैसे करते हो. क्या वो तुम्हारी सूखी चूत में अपना लंड पेल देता है?

सुषमा- उसे चुम्मा लिए तो कई साल हो गए हैं … और तैयार तो ज्यादातर वो पहले से होकर आता है. कभी कभी हुआ तो मैं हाथ से हिला हिला के खड़ा कर देती हूं. बस वो चोदते हुए मेरी चूचियों को दबाता या चूसता है.मैं- तुम गीली भी नहीं होती और वो चोदना शुरू कर देता है … तुम्हें दर्द नहीं होता?

सुषमा- दर्द होता है … पर एक औरत को बर्दाश्त करना पड़ता है. चोदते चोदते चूत में पानी आ ही जाता है, तब मजा आने लगता है. वैसे भी एक औरत को चुदाई में हमेशा दर्द होता ही है. चाहे कोई भी चोदे … चाहे 2 मिनट के लिए या एक घंटा के लिए. चाहे 5 इंच का लंड हो या 9 इंच का.

मैं- तू बिल्कुल गंवार है. दर्द होता है एक औरत को … ये मैं जानती हूं. पर एक वो दर्द होता है, जिसे औरत पसंद करती है. उसे मजा आता है. एक वो दर्द जिसे तुझ जैसी औरत बर्दाश्त करती है. इसका मतलब तुझे मजा लेना नहीं आता.

सुषमा- शहर में रहकर तुम खुद को अलग समझती हो. भूल मत, तेरा पति भी वैसा ही है!मैं- पति वैसा है तो क्या मुझे हक नहीं मजा लेने का?

रमेश- बिल्कुल सही, औरत को भी मजा आना चाहिए.सुषमा- मजा आता है मुझे भी … बस शुरू में दर्द होता है. वो भी चूत में पानी नहीं होने की वजह से.

मैं- ऐसा भी हो सकता है कि औरत को शुरू से अंत तक मजा आए, दर्द हो … मगर उस दर्द में भी मजा आए.सुषमा- हम्म्म … लगता है तुम दोनों साथ में बहुत मजे करते हो!

रमेश- मजा तो किया है और तुम चाहोगी तो तुम्हें भी देंगे. देखना चाहेगी कैसे?

सुषमा मुस्कुराई तो उसे रमेश ने एक किनारे होने को कहा और मेरे पास आ गया.मुझे तो सब पता ही था, बस उसका साथ देना था.

उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मैंने भी उसे पकड़ लिया.हमने करवट ले कर एक दूसरे को पकड़े हुए चूमना शुरू कर प्रिया.

थोड़ी देर होंठों को चूमा, फिर होंठों को बारी-बारी से चूसने लगे.होंठों को चूसते-चूसते अब हम जुबान को चूसने लगे.

धीरे धीरे हम दोनों ही गर्म होने लगे और रमेश मुझे चूमने के साथ साथ मेरे स्तनों, चूतड़ों, जांघों को दबाने सहलाने लगा.हम करीब 10 मिनट तक चूमते ही रहे और सुषमा बगल में बैठ कर हमें देखती रही.

अब रमेश ने मुझे उठा कर बिठा प्रिया और मेरी मैक्सी निकाल दी.मैं अब ब्रा और पैंटी में आ गयी.

रमेश मेरे गाल, गले को चूमता हुआ मेरे स्तनों की ओर बढ़ने लगा.उसने मेरे स्तनों को ब्रा के ऊपर से चूमते हुए हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल प्रिया.

उसने ब्रा को खींच कर अलग कर प्रिया.फिर उसने मेरे बड़े बड़े दोनों स्तनों को एक एक हाथ में पकड़ा और बारी बारी से उन्हें चूसने लगा.मैं और गर्म होने लगी.

पता नहीं शायद लंबे समय के बाद किसी मर्द का यूं स्पर्श पाकर मैं अधिक उत्तेजित हो गयी थी.

रमेश जैसा चाह रहा था, वैसे मेरे स्तनों को दबाते मसलते हुए चूस रहा रहा और मैं पूरा सहयोग कर रही थी.मैंने भी अब उसे नंगा करने की सोची और एक एक कर उसके कपड़े उतार दिए.

अपनी पैंटी को मैंने खुद ही उतार प्रिया और रमेश को चित लिटा उसके ऊपर चढ़ गई.सुषमा ने हमें बिस्तर में काफी जगह दे दी थी और खुद एक कोने में जा कर बैठ गयी थी.

मैं दो दिनों से आधी अधूरी उत्तेजित होकर रहे जा रही थी. आज मेरे अन्दर काम की देवी खुद ही प्रवेश कर बैठी थी.मैंने ठान लिया था कि रमेश को आज पागल कर दूंगी.

मैं उसके ऊपर चढ़ गई, मेरा एक एक हिस्सा उसके ऊपर था, उसके हाथों को पकड़ कर मैंने सिर के पास दबा प्रिया.

मेरी दोनों टांगें उसकी दोनों टांगों के ऊपर, लिंग मेरी योनि के नीचे, पेट पर पेट छाती पर मेरी छाती थी.

अब मैंने उसे पागलों की तरह चूमना शुरू किया.उसका लिंग कड़क हो कर उठना चाह रहा था, पर मैंने उसे दबा रखा था.चूमते हुए मैंने उसे चाटना शुरू कर प्रिया. गाल, नाक, कान, सिर आदि को मैं एक एक हिस्सा करके चाटने लगी.

धीरे धीरे मैं गले तक आ गई; वहां से उसे चाटना शुरू कर प्रिया.गले से लेकर हाथ हर हिस्से को चाटती हुई मैं उंगलियों तक पहुंची, मैंने दोनों हाथों की एक एक उंगली को चूसा.

हालात ये हो गए थे कि रमेश भी अब मादक औरत की भांति कराहने लगा था.इतना मजा शायद उसे पहले कभी नहीं आया होगा और न मैंने किसी को प्रिया था.

अब हाथों के बाद मैं उसके सीने को, फिर कांख, पेट से होती हुई लिंग तक पहुंच गयी.उसे इतना मजा आ रहा था कि मैं उसके शरीर को जैसे मर्ज़ी उठाऊं या पटकूं, वो साथ दे रहा था.

लिंग को ऊपर से नीचे तक चाटा, फिर अंडों को, उसके किनारे जांघों को … और चाटती हुई मैं पैर तक पहुंच गयी.मैंने बारी बारी से उसके दोनों पांवों की उंगलियों को चूसा. फिर उसको पेट के बल पलट प्रिया.

अब मैंने टांगों के पिछले हिस्से से उसे फिर से चाटना शुरू किया. फिर जांघों को, चूतड़ों को, चूतड़ों को फैला कर उसकी घाट को चाटती हुई मैं ऊपर बढ़ी.ऊपर कमर, फिर पीठ, गर्दन तक चटाती हुई अपनी योनि उसके चूतड़ों पर रगड़ने लगी.

उसकी कामुक सिसकारियां सुन कर मुझे और जोश आ रहा था.तभी रमेश कराहते हुए बोला- इस्स … कसम से सारिका … ऐसा मजा जीवन में पहली बार मिल रहा है. ऐसा लग रहा है कि आज तुम बिना लंड को छुए ही पानी निकाल दोगी.

मैं- अभी तो शुरूआत है, आगे आगे देखो, कितना मजा आने वाला है.इतना कहकर मैं उसके ऊपर से उठी और उसकी कमर पकड़ उसको उठा कर कुत्ते की तरह झुका प्रिया.

मैंने उससे कहा- अपना सिर नीचे रखो, गांड ऊपर उठाओ और टांगें फैलाओ.

मेरी बात सुनते हुए उसने वैसा ही किया. इधर सुषमा भी उत्सुकता से भर गई और कोने से उठ कर रमेश के बगल में आ गयी.वो बोली- इसका लौड़ा तो अभी से फांय फांय कर रहा है … क्या करने जा रही है तू? ये तो चोदने से पहले ही तुझे झाड़ देगा.

मैं- तुझे असली मजा लेना सिखा रही हूं.

ये कह कर मैंने रमेश की चूतड़ों में दोनों हाथों से थपकी मारी और चूतड़ों की घाटी में अपनी जुबान फिराई.

सुषमा देख कर दंग थी कि मैंने उसके गुदाद्वार पर जुबान चलाई.पर वो कुछ बोली नहीं बल्कि उसे देख कर लगा कि अब वो भी उत्तेजित हो रही है.

मैंने फिर पीछे से रमेश के झूलते अंडों को चाटा और जुबान को अंडों के ऊपर से फिराती हुई रमेश की गुदाद्वार से होते हुए पीठ तक लायी.रमेश मस्ती से कराहता हुए चादर को हाथों में समेटने लगा.

मैंने अब एक हाथ नीचे किया और उसके लिंग को पकड़ हिलाते हुए उसके अंडों को तो कभी उसके गुदाद्वार को चाटने लगी.रमेश पागलों की तरह छटपटाने लगा.

मैं कई बार कभी झुक कर उसके लिंग को चूसती, तो कभी अंडों को मुँह में भर लेती और चूसती चाटती, तो कभी उसके मल द्वार को जीभ की नोक से गुदगुदा देती.

कुछ ही पलों में रमेश सिसकते हुए बोला- बस करो सारिका, वरना ऐसे ही झड़ जाऊंगा.मगर मैं रूकी नहीं.

इस पर रमेश खुद ही उठ गया और झट से पलट कर उसने मेरे स्तनों को जोरों से धर दबोचा, मेरे होंठ से होंठ चिपका कर मुझे चूमने लगा.

मेरे अन्दर पता नहीं क्या चीज आ गयी थी कि आज मैंने चूमते हुए उसके मुँह में अपना थूक भर प्रिया.रमेश उसे पी गया और उसके बाद ऐसा लगा मानो अभी वो और चाहता हो.

मैंने फिर से मुँह का सारा लार उसके मुँह में भर प्रिया. अब चूमते हुए हम मुँह से मुँह में लार आदान प्रदान करने लगे.

रमेश एक हाथ से मेरा एक स्तन दबा रहा था, दूसरे हाथ से मेरी योनि को सहलाने लगा था.मैं भी उसके लिंग को पकड़ हिलाये जा रही थी.

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मेले के बहाने चुदाई की मस्ती

कुल भाग: 6
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11 मिनट 1,232

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सोनिया लव

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

जोगी पंजाबी

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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